अदरक के फायदे एवं नुकसान – Ginger Benefits in Hindi.

अदरक के फायदे पर बात करने पर हमारे सामने जो सबसे पहली तस्वीर अदरक की उभरती है वह होती है भोजन को स्वादिष्ट एवं पाचन युक्त बनाने वाले पदार्थ के तौर पर | कहने का आशय यह है की अदरक का उपयोग भोजन को स्वादिष्ट व पाचन युक्त बनाने के लिए उपयोग  किया जाता है | और इसका उपयोग सामान्य तौर पर हर घर में किया जाता है | अदरक का उत्पादन देश के लगभग हर राज्य में किया जाता है लेकिन अधिकांश रूप से इसका उत्पादन केरल राज्य में किया जाता है | अदरक धरती के अन्दर उगने वाला एक खाद्य पदार्थ है जिसके सूखे हुए स्वरूप को सोंठ भी कहा जाता है | अदरक को अदरक बनाये रखने के लिए गीली मिटटी में दबाया जा सकता है अर्थात जितनी देर यह मिटटी के अन्दर रहेगा या ताजा बना रहता है, जिसको अधिकंध तौर पर सब्जी एवं सर्दियों में चाय में भी अधिकांश रूप से उपयोग में लाया जाता है | अदरक के फायदे में सिर्फ इसके सब्जी एवं चाय के उपयोग ही सामिलित नहीं है अपितु इसमें अनेक औषधीय गुण भी विद्यमान रहते हैं जिनका वर्णन हम निम्नवत करेंगे |

अदरक के फायदे

अदरक के फायदे औषधीय गुण:

अदरक के फायदे जानने से पहले यह जान लें की अदरक में अनेकों औषधीय गुण विद्यमान रहते हैं इस तथ्य से शायद सभी लोग पर्सिचित होंगे लेकिन अदरक को आयुर्वेद में महा औषधि के नाम से जाना जाता है यह बात शायद बहुत कम लोगों को पता होगी | अदरक के फायदे में निम्नलिखित औषधीय गुण सम्मिलित हैं |

  • अदरक के फायदे में पहला फायदा यह है की यह यह गर्म, तीक्ष्ण, भारी पाक में मधुर एवं भूख बढ़ाने वाला होता है |
  • यह पाचक, चरपरा , रुचिकारक होता है |
  • अदरक त्रिदोष नाशक यानिकी वात, पित्त एवं कफ का नाश करने वाला होता है |
  • अदरक नामक इस औषधियुक्त हर्ब में 80% भाग जल होता है |
  • अदरक के फायदे में अगला फायदा यह है की यह डायबिटीज टाइप 2 के खतरे को काफी हद तक कम करने में सहायक होता है |
  • यह उल्टियों को रोकने में भी मददगार साबित होता है |
  • इसके सेवन से महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से भी मुक्ति मिलती है |
  • अदरक के फायदे में अगला फायदा यह है की इसका सेवन सिरदर्द एवं गठिया में आराम दिलाता है |

अदरक के नुकसान:

यद्यपि अदरक में बहुत सारे औषधीय गुण विद्यमान होते हैं इस तथ्य से हम विदित हो चुके हैं लेकिन कुछ परिस्थितयों में इसके नुकसान भी हो सकते हैं | अदरक के फायदे के बारे में हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं और साथ में हमने यह भी बताया है की इसकी प्रकृति गर्म एवं तीक्ष्ण होती है इसलिए निम्न परिस्थितियों में इसका सेवन नुकसानदेह हो सकता है |

  • ऐसे व्यक्ति जिन्हें गर्मियों में भोजन न पचता हो उन्हें अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए |
  • कुष्ठ रोग में अदरक का सेवन निषेध है |
  • पीलिया में अदरक का सेवन काफी नुकसानदेह हो सकता है |
  • रक्तपित्त, घाव, ज्वर में भी अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए |
  • शरीर से रक्तस्राव, मूत्रकच्छ, एवं जलन जैसी बीमारियों में भी इसका उपयोग निषेध है |
  • गर्मी के मौसम में अदरक के सेवन से हमेशा बचें |
  • हालांकि उल्टी होने पर इसे घरेलू उपचार के तौर पर उपयोग में लाया जा सकता है लेकिन खून की उल्टी होने पर भी इसका उपयोग नुकसानदेह है |

विभिन्न बीमारियों में अदरक के फायदे एवं उपयोग की विधि:

विभिन्न बीमरियों में अदरक के फायदे कुछ इस प्रकार से हैं |

  • इन्फ्लुएंजा, खांसी, जुकाम सिरदर्द और वात श्लेष्मा ज्वर से निजात पाने के लिए अदरक के फायदे लेने हेतु तीन ग्राम सोंठ,  लगभग सात तुलसी के पत्ते, सात दाने कालीमिर्च, ले लेते हैं उसके बाद इसे 250 ग्राम पानी में पका लेते हैं और इसमें स्वादानुसार चीनी भी मिला लेते हैं अब इसे छानकर गरमागरम पीने से इन्फ्लुएंजा, खांसी, जुकाम सिरदर्द इत्यादि दूर हो जाता है | यहाँ पर अदरक सोंठ के रूप में उपयोग में लायी जा रही है |
  • भूख की कमी की समस्या में अदरक के फायदे लेने के लिए अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को नींबू के रस में भिगोकर इसमें सेंधानमक मिलाया जा सकता है और इसका भोजन करने से पहले नियमित रूप से सेवन किया जा सकता है |
  • पेशाब करते समय मूत्राशय में होने वाली जलन से निजात पाने में अदरक के फयदे लेने के लिए सोंठ, कटेली की जड़, बला मूल, गोखरू इत्यादि की दो-दो ग्राम मात्रा ली जाती है और इसमें 10 ग्राम गुड़ मिला दिया जाता है फिर इसे 250 ग्राम दूध में उबाल लिया जाता है और इस दूध को सुबह शाम पीने से मुत्र्शय में होने वाली जलन दूर हो जाती है |
  • पेट के रोग से ग्रसित व्यक्ति को अदरक के फायदे लेने के लिए सोंठ, हरीतकी, बहेड़ा, आंवला इत्यादि को बराबर भाग में लेना होता है उसके बाद इसका कलक बना लेना होता है | इसके अलावा ढाई किलोग्राम गाय का घी एवं तिल का तेल, ढाई किलोग्राम दही का पानी, इन सबको मिलाकर घी का पाक करना होता है और उसे छान लिया जाता है | इस क्रिया से उत्पादित घी का सुबह शाम सेवन करने से पेट के रोगों की समाप्ति होती है |

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