आँतों की टी. बी. के लक्षण, जांच एवं ईलाज – intestinal tb in hindi

आँतों की टी. बी. पर बात करने से पहले यह समझ लेना जरुरी है की जब भी टी. बी. अर्थात tuberculosis की बात आती है इसका नाम सुनते ही सामने जनमानस के मन में जो तस्वीर उभरती है वह छाती की टी. बी. के रोगी की तस्वीर (जिसमें की दुबला एवं कुपोषण से शिकार व्यक्ति, खांसता रहता है और बुखार से एवं भूख न लगने जैसी समस्याओं से ग्रसित रहता है) सामने आती है | आँतों में भी आँतों की टी. बी. हो सकती है इस तथ्य से अक्सर लोग अंजाने ही रहते हैं | यहाँ तक की यह भी देखने में आया है स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े व्यक्तियों में भी आँतों की टी. बी. नामक इस रोग के बारे में जानकारी का अभाव पाया गया है | इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से इस बीमारी के लक्षण, बचाव, ईलाज इत्यादि के बारे में जानने की कोशिश करेंगे |

आँतों की टी. बी. Intestinal tb

आँतों की टी. बी. के लक्षण (Symptoms of Intestinal TB in Hindi):

आँतों की टी. बी. के कुछ महत्वपूर्ण लक्षण निम्नवत हैं लेकिन ऐसा भी जरुरी नहीं है की जिस व्यक्ति, महिला इत्यादि में ये लक्षण हों उन्हें आँतों की टी. बी. ही है इसकी पुष्टि तो चिकित्सक द्वारा जांच के पश्चात् ही होगी क्योंकि ऐसे लक्षण पेट के अन्य रोगों की वजह से भी हो सकते हैं |

  • बार बार दस्त अर्थात पेचिश की शिकायत रहना |
  • कब्ज जो ठीक ही नहीं होती हो अर्थात पुरानी कब्ज भी आँतों की टी. बी. का एक कारण हो सकती है |
  • कभी दस्त तो कभी कब्ज एक दुसरे के आगे पीछे होते रहना |
  • शौच में कभी कभार खून या मवाद आना |
  • पेट में दर्द होना एवं अफारा उलटी इत्यादि होना |
  • यह बीमारी यदि ज्यादा बढ़ गई हो तो पेट में एक हवा का गोला एक क्षेत्र से दुसरे क्षेत्र की ओर स्थान्तरित होता हुआ महसूस हो सकता है |
  • कुछ रोगियों में पेट में फुलावट अर्थात पेट की झिल्ली में पानी भरने के से लक्षण महसूस हो सकते हैं |
  • इसके अलावा आंत की टी. बी. से ग्रसित कुछ रोगियों में पेट के दाहिने हिस्से की तरफ गाँठ या रसौली भी महसूस हो सकती है |
  • शौच में अत्यधिक बदबू, वजन कम होना भूख कम लगना इत्यादि भी आंत की टी. बी. के लक्षण हो सकते हैं |

Myth and Facts about Intestinal TB (भ्रांतियाँ एवं तथ्य):

Myth: टी. बी. तो फेफड़े में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक खांसी के माध्यम से फैलती है तो आंत में यह किस तरह से जा सकती है ? ऐसा तो संभव ही नहीं है |

Fact: तथ्य कहता है की ऐसा संभव है आँतों की टी. बी. किसी भी व्यक्ति को छाती की टी. बी. के साथ भी हो सकती है आंत की टी. बी. के लिए जीवाणु खाने की नली से ही शरीर में प्रवेश करते हैं | इस प्रकार के यह जीवाणु tuberculosis के दूसरे रोगियों से या बिना उबला हुआ दूध पीने से भी शरीर के अन्दर प्रविष्ट हो सकते हैं |

Myth: टी. बी. तो एक खानदानी बीमारी होती है |

Fact: नहीं टी. बी. किसी भी प्रकार की हो यह एक खानदानी बीमारी बिलकुल नहीं है सच्चाई तो यह है की यह किसी भी व्यक्ति को कभी भी उस हवा में सांस लेने से हो सकती है जिस हवा में tuberculosis के जीवाणु उपलब्ध हों | या किसी टी. बी. से ग्रसित व्यक्ति द्वारा खांसते हुए टी. बी. के जीवाणु किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रविष्ट हो सकते हैं |

Myth: आंत की टी. बी. की बीमारी छुआछूत से फैलती है |

Fact: यदि रोगी सिर्फ आंत की टी. बी. का रोगी है तो ऐसा संभव नहीं है हाँ यदि रोगी को छाती की टी. बी. भी साथ में है तो ऐसा हो सकता है |

Myth: दूध देने वाले पशुओं का कच्चा दूध अर्थात बिना गरम किया हुआ दूध गरम किये गए दूध के मुकाबले ज्यादा पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक होता है |

Fact: नहीं यह सत्य नहीं है दूध को उबालने से उसमे मौजूद पौष्टिक तत्व नष्ट नहीं होते बल्कि बल्कि बीमारी पैदा करने वाले जीवाणु नष्ट हो जाते हैं | इसलिए दूध हमेशा उबालकर ही पीना चाहिए ताकि यदि किसी पशु को टी. बी. या अन्य बीमारी है तो उसके जीवाणु इंसानों तक नहीं पहुंचे |

Myth: आंतों की टी. बी. यानिकी पेट की टी. बी. पूर्ण रूप से ठीक नहीं होती है |

Fact: नहीं यह बिलकुल सत्य नहीं है कुशल चिकित्सक की देखरेख में पूरा ईलाज कराने पर यह पूर्ण रूप से ठीक होने वाली बीमारी है |

Precautions for Intestinal TB (आँतों की टी.बी. से बचाव):

यद्यपि यह कहना मुश्किल है की यह क्रियाएं करने से बिलकुल भी आँतों की टी. बी. नहीं होगी क्योंकि बहुत सारे जतन के बावजूद भी यह बीमारी किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकती है | लेकिन निम्न सावधानियां अपनाकर इस बीमारी के खतरे को कम अवश्य किया जा सकता है |

  • जब भी दूध पीयें उबालकर ही पीयें कच्चे दूध का इस्तेमाल कदापि न करें |
  • अपनी बीमारी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का भरपूर प्रयत्न करें इसके लिए नियमित रूप से सैर, व्यायाम, पौष्टिक भोजन इत्यादि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं |
  • शराब, धूम्रपान एवं तेज मिर्च मसाले वाले भोजन का कम से कम उपयोग करें |
  • नियमित तौर पर अर्थात समय समय पर अपना हेल्थ चेक अप करवाते रहना चाहिए ताकि बीमारी प्रतिरोधक क्षमता कम करने वाले रोगों जैसे डायबिटीज इत्यादि के बारे में शुरूआती आवस्था में पता लग सके |
  • छाती की टी. बी. से ग्रसित रोगी से उचित दूरी बनाये रखें यदि आप ऐसे रोगी के संपर्क में हैं तो संपर्क में आने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह धो लें |
  • किसी भी व्यक्ति के साथ हुक्का, बीड़ी या सिगरेट शेयर नहीं करनी चाहिए क्योंकि tuberculosis के जीवाणु थूक द्वारा हुक्के के पाइप, बीड़ी या सिगरेट में लग सकते हैं | जो बाद में एक दूसरे से किसी दूसरे के शरीर में प्रविष्ट हो सकते हैं |

आँतों की टी. बी. के लिए जांच(Tests for Intestinal TB in Hindi):

आँतों की टी. बी. को इसके शुरूआती दौर में पहचाना जाय इसके लिए व्यक्ति को ब्लड की रूटीन जांच जैसे T.L.C., D.L.C., Hemoglobin, E.S.R., Stool Examination  इत्यादि कराने की आवश्यकता हो सकती है | इसके अलावा शौच में ब्लड इत्यादि की जांच के लिए hemoccult टेस्ट भी किया जा सकता है | इसके अलावा Mountex test एवं T.B. के लिए Elisa test इस रोग की पहचान कराने में अहम् भूमिका निभाता है | यदि पेट की झिल्ली में पानी भर गया हो तो इसकी जांच के लिए P.C.R. test की आवश्यकता हो सकती है जो टीबी के निदान में भूमिका निभा सकता है | उपर्युक्त सभी जांचे चिकित्सक द्वारा रोगी की अवस्था तथा अपने अनुभव के आधार पर जो भी आवश्यक हो करवा सकते हैं | पेट के अल्ट्रासाउंड से भी आंत की दीवारों की सूजन, बड़ी हुई Lymph Nodes, छोटी आंत तथा बड़ी आंत के क्षेत्र में सूजन, गाँठ, रसौली तथा आंत की रुकावट, आंत की गति इत्यादि का पता लगाया जा सकता है | इसके अलावा पेट के सामान्य एक्स रे से आंत के आंशिक या पूर्ण बंधे की स्थिति का पता लगाया जा सकता है | इस प्रकार का यह एक्स रे रोगी को खड़ा करके ही किया जाता है ताकि चिकित्सक को आंत के तरल पदार्थों की स्थिति पता लग सके | आंत के रंगीन एक्सरे से छोटी आंत में जख्म, रुकावट, आंत का रास्ता संकीर्ण अर्थात पतला होने इत्यादि का पता लगाया जा सकता है | इसके अलावा बड़ी आंत के शुरूआती हिस्से जिसे Caecum कहते हैं के बारे में भी रंगीन एक्सरे से जानकारी मिल सकती है |

आँतों की टी. बी. का ईलाज (Treatment of Intestinal TB in Hindi):

आँतों की टीबी का ईलाज दोनों तरीके जैसे सर्जरी एवं दवाइयों द्वारा किया जा सकता है |

दवाइयों द्वारा ईलाज :

दवाइयों द्वारा ईलाज करने के लिए चिकित्सक द्वारा रोगी को विभिन्न प्रकार की दवाइयां जैसे rifampicin, isoniazid, pyrazinamide इत्यादि निर्धारित मात्रा में दी जा सकती हैं | दवाइयों द्वारा आंत की टीबी का ईलाज लगभग 9 महीने से एक साल तक चल सकता है |

सर्जरी द्वारा ईलाज:

यदि रोगी की आंत में आंशिक या पूर्ण रूप से रुकावट हो तो इस अवस्था में इसे सर्जरी अर्थात शल्य क्रिया के माध्यम से ठीक किया जाता है | यदि आंत का व्यास पतला हो गया हो तो इसे Stricture कहा जाता है और इसे चौड़ा करने की प्रक्रिया को Strictro Plasty कहा जाता है | यदि आंत का काफी हिस्सा ख़राब हो गया हो तो छोटी आंत के आखिरी हिस्से तथा बड़ी आंत के अग्रभाग जिसे Right Hemicoletomy कहा जाता है को सर्जरी द्वारा अलग करके बाहर निकाल लिया जाता है | उसके बाद छोटी आंत को बड़ी आंत के बाकी हिस्से से शल्यक्रिया यानिकी सर्जरी के माध्यम से जोड़ दिया जाता है |
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4 thoughts on “आँतों की टी. बी. के लक्षण, जांच एवं ईलाज – intestinal tb in hindi

    1. यदि उनका उपचार जारी है तो रतिक्रिया करने में कोई हर्ज़ नहीं है | क्योंकि नियमित ईलाज के दौरान यह रोग फैलता नहीं है |

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