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आयोडीन के स्रोत

आयोडीन क्या है इसके कार्य स्रोत एवं कमी के लक्षण

अच्छे स्वास्थ्य के लिये पहचाने गए खनिजों में सबसे पहले आयोडीन था । इसे भी सबसे महत्त्वपूर्ण माना जाता है । प्राचीनकाल से गोयटर या गलगंड के बारे में जाना जाता है । मध्यकाल में Iodine की खोज से अनेक शताब्दियों पहले चिकित्सक गोयटर का इलाज जले हुये स्पोंज से करते थे, यह पदार्थ आयोडीन में समृद्ध था । यह एक ऐसा विशिष्ट उदाहरण है जिससे हमारे पूर्वजों की प्रभावशीलता तथा पूर्व चिकित्सकों की कुशाग्रता का पता चलता है । लगभग सभी देशों में ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जहां भूमि तथा पानी में Iodine की कमी है । केवल एक देश जापान है जो इस बीमारी से लगभग मुक्त है तथा इसका कारण उनके भोजन में सीवीड या शैवाल (seaweed) की अधिकता का होना है । विख्यात पोषकविज्ञानी मैक क्लेंडन के अनुसार सीवीड में किसी और भोजन की तुलना में एक हजार गुना अधिक आयोडीन होता है । इसका प्रयोग जापानी भोजन में अनेक पीढ़ियों से किया जाता रहा है तथा इसका कोई नकारात्मक प्रभाव सामने नहीं आया है  ।

आयोडीन  की खोज कब हुई 

आयोडीन को जले हुये सीवीड से बी. कुर्टायस ने 1811 में खोजा तथा 1819 में फाइफ द्वारा इसे सबसे पहले अलग किया गया । 1896 में ई बौमेन ने पाया कि अन्य ऊतकों की तुलना में थायरायड ग्रन्थि आयोडीन में समृद्ध होती है । 1917 में डा. मेरिन तथा ओ. पी. किंबाल ने अमेरिकी स्कूल के छात्रों पर विस्तृत अध्ययन किया तथा अंतिमरूप से प्रमाणित किया कि साधारण गोयटर की रोकथाम में तथा इसके इलाज में आयोडीन महत्त्वपूर्ण है ।

आयोडीन क्या है (What is Iodine in Hindi):

आयोडीन भूरे-काले रंग का होता है । जब इसे गरम किया जाता है तो इसमें से गहरे वायलेट या बैंजनी रंग का क्षारीय धुआं निकलता है । मानव शरीर में यह थायरोक्सिन का आवश्यक अवयव बनता है, इसका मुख्य हारमोन थायरायड ग्रन्थि द्वारा उत्पादित होता है । कुछ चीज़ों जैसे पत्तागोभी, गोभी तथा मूली के अधिक खाने से आयोडीन की कमी हो सकती है । इन चीज़ों में एक पदार्थ होता है जो भोजन में उपस्थित आयोडीन के साथ प्रतिक्रिया करता है तथा इसे अवशोषण के लिये अनुपयुक्त बना देता है । आहार सम्बन्धी आयोडीन पेट-आंत मार्ग से रक्त में अवशोषित होता है । ऐसा अनुमान किया जाता है कि किसी वयस्क व्यक्ति के शरीर में उपस्थित  Iodine की मात्रा लगभग 25 मि.ग्रा. होती है  । इसमें से अधिकांश थायरायड ग्रन्थि में थायरोग्लोबुलिन के रूप में भंडारित होता है जो प्रोटीन तथा Iodine का एक यौगिक होता है । इसमें से लगभग 30 प्रतिशत थायरायड ग्रन्थि द्वारा थायरायड हारमोन  के संश्लेषण, थायरोक्सिन के लिये लिया जाता है तथा शेष गुरदों द्वारा निष्कासित कर दिया जाता है । प्रोटेलाइटिक इंज़ाइम (अर्थात ऐसे इंज़ाइम जो पाचन में प्रोटीन को विभाजित करते हैं) इस मिश्रण को विभाजित करते हैं तथा थायरोक्सिन तथा ट्रिआयडोथायरोनिन कम मात्रा में रक्त-संचार में उत्सर्जित होते हैं । जब थायरायड हारमोन की मात्रा सीरम में कम हो जाती है तो पित्तकोश थायरायड को उत्तेजित करने वाले एक हारमोन को छोड़ता है जिसके कारण थायरायड फिर से सक्रिय हो जाता है जिससे थायरायड ग्रन्थि की वृद्धि हो जाती है, जिसे साधारणतया गोयटर या गलगंड कहा जाता है ।

आयोडीन के शरीर में कार्य

Iodine का मुख्य भंडार थायरायड ग्रन्थि में होता है । इस ग्रन्थि द्वारा उत्सर्जित थायरोक्सिन में आयोडीन होता है । यह Iodine सेवन किए गए भोजन से प्राप्त होता है । थायरोक्सिन, जो थायरायड हारमोन होता है, मूल पाचन तथा ऊतकों के आक्सीजन उपभोग को नियंत्रित करता है । यह शुगर के प्रयोग को नियंत्रित करता है । यह ऊर्जा के उत्पादन तथा शरीर के वज़न को नियंत्रित कर उचित वद्धि और विकास देता है । थायरोक्सिन हृदय दर तथा मूत्रीय कैल्शियम उत्सर्जन की वृद्धि करता है । बुद्धि को तीक्ष्ण बनाता है तथा स्वस्थ बालों, नाखूनों, त्वचा तथा दांतों की देखभाल करता है ।

आयोडीन के स्रोत

आयोडीन के स्रोत

भोजन में आयोडीन का सर्वश्रेष्ठ स्रोत आयोडाइज्ड नमक होता है । समुद्री भोजन तथा पालक में आयोडीन की उचित मात्रा होती है ।

आयोडीन की कमी के लक्षण:

जिन बच्चों के भोजन में आयोडीन की कमी होती है उनमें क्रेटिनिज्म (cretinism) हो जाता है । क्रेटिन (cretin) अर्थात एक ऐसा नाटा बच्चा जिसका शारीरिक और मानसिक विकास धीमा हुआ है, उसमें बढ़ी हुई थायरायड ग्रन्थि तथा दोषयुक्त वाणी होती है तथा उसकी चाल ढीली-ढाली होती है । उसकी त्वचा रूखी तथा बाल कम होते हैं । सामान्यतः ऐसे बच्चे के नाखून कोमल, दांत गंदे होते हैं तथा उसे रक्ताल्पता हो सकती है । वयस्क व्यक्तियों में, मायक्सेइडीमा का कारण Iodine की न्यूनता हो सकती है, जिसके कारण थायरायड हारमोन के उत्पादन में कमी हो सकती है | इस बीमारी के प्रमुख लक्षण इस प्रकार से है |

  • पाचन की धीमी दर हो जाती है |
  • त्वचा की स्थूलता
  • बालों का टूटना तथा शारीरिक और मानसिक आलस्य ।
  • ऐसे व्यक्तियों में बढ़ी हुई थायरायड ग्रन्थियां भी होती हैं ।
  • भोजन में Iodine की कमी के कारण रक्ताल्पता, थकान, आलस्य, लैंगिक गतिविधि में अरुचि, धीमी नाड़ी दर, कम रक्तचाप तथा मोटापे की ओर झुकाव होता है ।
  • इसकी अधिक कमी से उच्च रक्त कोलेस्ट्रोल तथा हृदय रोग हो सकते हैं । जीवन के लिये Iodine इतना महत्त्वपूर्ण है कि इस मूल्यवान तत्व के केवल साढ़े तीन कण ही बुद्धिमानी तथा मूर्खता के बीच स्थित होते हैं !
  • थायरायड ग्रन्थि थायरोक्सिन हारमोन का निर्माण जैविक आयोडीन से ही कर सकती है जिसका सेवन मुख द्वारा किया गया हो ।

आयोडीन के स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे:

आयोडीन की छोटी खुराके उन क्षेत्रों में गोयटर की रोकथाम के लिये बहुत मूल्यवान होती हैं जहां यह स्थानिक हो । यह आरंभिक चरणों में इलाज के लिये महत्त्वपूर्ण है । हाइपरथायरोयडिज्म (hyperthyroidism) के उन रोगियों में इसकी बड़ी खुराकों का महत्त्व अस्थायी होता है जिनको आपरेशन के लिये तैयार किया जा रहा हो ।

सावधानियां : प्राकृतिक आयोडीन से कोई ज्ञात विषाक्तता नहीं होती । ऊन दवाई के रूप में Iodine तब हानिकारक हो सकता है जब इसका निर्धारण गलत हो ।

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