कोलिन के कार्य स्रोत कमी के लक्षण एवं स्वास्थ्य लाभ.

कोलिन बी समूह का एक सदस्य है । पोषण में इसके महत्त्व को  1934 में सी. एच. बेस्ट तथा एम. ई. हंट्समेन ने स्थापित किया था । उन्होंने देखा कि Choline की न्यूनता से यकृत वसायुक्त हो जाता है । भोजन तथा शरीर में Choline बड़ी मात्रा में पाया जाता है । शरीर मेथिओनीन (एमिनो एसिड), विटामिन बी12 तथ फोलिक एसिड की सहायता से कोलिन को बना सकता है ।

कोलिन क्या है

कोलिन रंगहीन, स्फटिक पदार्थ है जो पानी को तेज़ी से अवशोषित के लेता है । यह पानी तथा एल्कोहल में अधिक घुलनशील होता है । कोलिन का पतला घोल (4 प्रतिशत से कम) उष्मा द्वारा नष्ट नहीं होता । लेकिन इसके गाढ़े घोल को यदि उबाला जाये तो यह नष्ट हो जाता है । Choline पान सल्फर ड्रग, भोजन प्रक्रिया तथा एल्कोहल द्वारा भी नष्ट होता है । Choline को आंत से अवशोषित किया जाता है तथा अधिकांशतः मूत्र के माध्यम उत्सर्जित किया जाता है ।

कोलिन के शरीर में कार्य:

Choline शरीर में वसा के संचार में सहायता करता है तथा यकृत में वसा के भंडारण का प्रतिरोध करता है । यह विटामिन इनोसिटोल के साथ कार्य कर वसा तथा कोलेस्ट्रोल का उपयोग करता है । Choline उन कुछ तत्वों में से एक है जो उस तथाकथित ब्लड-ब्रेन बेरियर को बेधता है जो मस्तिष्क को साधारणतया दैनिक भोजन में होने वाले परिवर्तनों के कारण होने वाले प्रभावों से बचाता है । यह सीधा मस्तिष्क-कोशिकाओं में जाता है जहां यह एक रसायन का उत्पादन करता है जो स्मृति में सहायता करता है ।

कोलिन के स्रोत :

Choline समुद्री-खाद्य-पदार्थों में पर्याप्त मात्रा में होता है । इसके अलावा कुछ अन्य प्रमुख स्रोत निम्नलिखित है |

कोलिन के स्रोत

अनाज दालें तथा फलिया जिनमे कोलिन पाया जाता है

  • फ्रेंच बाजरा
  • मसूर
  • सूखे मटर
  • दली हुई उड़द
  • गेहूं
  • लोबिया
  • काला चना
  • दली हुई अरहर
  • मूंग

सब्जियां जिनमे कोलिन पाया जाता है

  • चुकंदर
  • सलाद पत्ते
  • गाज़र
  • शलजम
  • कददू
  • गोभी
  • पत्ता गोभी
  • आलू
  • सफ़ेद मूली

मछली तथा समुद्री भोजन जिनमे कोलिन पाया जाता है

  • हिलसा
  • फोली
  • पाबदा
  • चीतल
  • पंगास
  • कोई
  • रोहू
  • मंगरी
  • काटला
  • मोरल
  • झींगा
  • मृगल
  • बाम

इसके अलावा मूंगफली, राई, सेब, आंवले में भी कोलिन पाया जाता है |

कोलिन की कमी के लक्षण:

कोलिन की दीर्घकालिक कमी से सिहोसिस (cirrhosis) तथा यकृत में वसा का अपकर्ष, उच्च रक्तचाप तथा एथेरोस्क्ले रोसिस (atherosclerosis) हो सकता है जिसमें धमनियां सख्त हो जाती हैं ।

कोलिन के स्वास्थ्य लाभ:

शरीर में सीरम कोलिन की वृद्धि के लिये कोलिन और लेसिथीन को मुख द्वारा लेना चाहिए ।

गुरदे का शोथ (Nephritis) :

Choline को नेफ्राइटिस (गुरदों का शोथ) के इलाज में लाभदायक पाया गया है । भोजन के साथ कोलिन देने से उन बछड़ों को लाभ मिला जिनमें प्रयोगात्मक प्रक्रिया से नेफ्राइटिस का रोग पैदा किया गया था । वह बछड़े जिन्हें Choline प्राप्त नहीं हो पा रही थी, उनकी सात दिनों में रक्तस्रावी नेफ्राइटिस के कारण मृत्यु हो गयी । अन्य बछड़ों जिन्हें उसी प्रकार का भोजन दिया गया था लेकिन उन्हें 1,000 मा. ग्रा. कोलिन की खुराक भी दी गई थी, को 24 घंटों में ही लाभ मिला । प्रयोग से ज्ञात हुआ कि बछड़ों का नेफ्राइटिस मानव में पाये जाने वाले रोग के समान ही है । एक प्रयोग में, वसायुक्त यकृत वाले 102 लोगों में से 51 की पहचान Choline की कमी के लिये की गई, उनमें उच्च रक्त यूरिया तथा मूत्र में एल्बुमिन था, जिससे हल्के नेफ्राइटिस का पता चलता था । यह रोग तीव्रता से गायब हो गया जब उचित भोजन के साथ Choline भी दिया गया । लेकिन कोलिन को जब इनोसिटोल या लेसिथिन के साथ दिया तो इसे और अधिक प्रभावी पाया गया ।

यकृत की क्षति :

देखा गया है कि कोलिन की कमी से कुछ ही घंटों में वसा यकृत की कोशिकाओं में जमा हो जाता है तथा यकृत सूज जाते हैं । परिणामस्वरूप कोशिकाएं फट सकती हैं । यदि भोजन में Choline को नहीं मिलाया जाये तो यकृत-ऊतक का अधिकांश भाग दागों में प्रतिस्थापित हो जाता है, यह अवस्था मानव में होने वाली सिहोसिस के समान होती है जो पशुओं तथा मानव के लिये एक समान घातक होती है । यदि Choline को शीघ्रता से दिया जाये तो यकृत एक बार फिर स्वस्थ हो जाता है ।

उच्च रक्तचाप :

भोजन में कम Choline देने से पशुओं में बार-बार उच्च रक्तचाप हो जाता है । एक प्रयोग में, तीव्र रक्तचाप से पीड़ित 158 व्यक्तियों का जब अध्ययन किया गया तो उन्हें Choline दिया गया । यह सभी रोगी विभिन्न प्रकार की दवाईयां एक साल या अधिक समय से खा रहे थे लेकिन उनमें कोई सुधार नहीं हुआ था । सभी प्रकार की दवाईयों को कोलिन को देने से पहले रोक दिया गया । इस विटामिन को आरंभ करने के पांच से दस दिनों में उन लक्षणों में सुधार हुआ या वह गायब हो गए जो सिरदर्द, चक्कर आना, कान में शोर, नाड़ी स्पंदन, कब्ज़ आदि थे । रक्तचाप तीन सप्ताह में ही कम होने लगा तथा प्रत्येक रोगी में यह कम हुआ । औसत कमी 31 एमएम सिस्टोलिक तथा 20 एमएम डायस्टोलिक थी । एक-तिहाई रोगियों में रक्तचाप गिरकर सामान्य हो गया लेकिन सामान्य से कम नहीं हुआ । अनिद्रा, कंपकंपाना, शरीर की सूजन तथा दृष्टि अनियमितताओं में धीरे धीरे सुधार होने लगा ।

हृदय रोग :

हृदय रोगियों को क्रमशः 2,000 मा. ग्रा. और 750 मा. ग्रा. Choline तथा इनोसिटोल की खुराक देने से उनमें कोलेस्ट्रोल की कमी और रक्त में वसा की कमी हुई एवं वह स्वस्थ होने लगे । दो महीनों बाद, उनके रक्त का कोलेस्ट्रोल सामान्य हो गया तथा रक्त लेसिथिन भी बढ़ गया । जब केवल कोलिन को दिया गया तो कोलेस्ट्रोल कम हुआ ।

सावधानियां : कोलिन तथा लेसिथिन की बड़ी मात्रा मुख द्वारा लेने से तीव्र नकारात्मक प्रभाव होते हैं जिनमें डायरिया, उल्टी, लार या सलीवा बनना तथा तनाव सम्मिलित हैं ।

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