खसरा के लक्षण कारण उपचार (Measles in Hindi)

खसरा बीमारी अर्थात Measles की यदि हम बात करें तो यह एक संक्रामक बीमारी है इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण रुबैला नामक एक वायरस होता है | खसरा नामक यह बीमारी सर्दियों व वर्षा ऋतु में अधिकतर स्कूल जाने वाले बच्चों को होती है | ‘Rubeola Virus’ द्वारा उत्पन्न खसरा नामक यह रोग एक संक्रामक रोग है । इसमें रोगी को छींके आने के साथ-साथ आँख-नाक से पानी बहने के साथ साथ तेज बुखार भी आता है | मुहँ की श्लेष्मिक झिल्ली पर ‘कोपलिक धब्बे’ पड़ जाते हैं । रोगी के माथे से शुरू होकर सम्पूर्ण शरीर पर लाल-लाल रंग के  दाने से निकल आते  हैं । खसरे का टीका बच्चे को 9 महीने की उम्र में लगता है इस बीमारी से अपने बच्चों को बचाने के लिए यह टीका जरुर लगाना चाहिए | इस संक्रमण का समयकाल 10-14 दिनों का हो सकता है | और इस रोग की खासियत भी यही है की यह जीवन में केवल एक बार ही होता है | सात महीने से कम उम्र के बच्चों को यह रोग होने का खतरा नहीं रहता है |

खसरा कारण लक्षण उपचार

खसरा के कारण (Cause of Measles in Hindi)

  • जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की खसरा नामक यह रोग अधिकतर बच्चों में रुबेला नामक वायरस से फैलता है ।
  • यह वायरस मरीज के खांसने से, दाने की पपड़ी से, छींक व थूक द्वारा हवा से दूसरों में फैलता है ।

खसरा के लक्षण (Symptoms of Measles in Hindi:

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खसरा नामक इस बीमारी के कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं |

  • शुरूआती दौर में रोगी को जुकाम, छींके, नाक बहने, खांसी, और बुखार होता है ।
  • बुखार अर्थात ज्वर इस रोग का पहला लक्षण है ।
  • आँखों में जलन व रोशनी से परेशानी हो सकती है तथा आँख से पानी बहता रहता है ।
  • इस रोग में दस्त लगना भी एक सामान्य सी बात है ।
  • दूसरे-तीसरे दिन रोगी के शरीर के विभिन्न भागों में लाल-लाल दाने निकलने लगते हैं |
  • दाने के दो दिन पहले मुख की श्लेष्मा झिल्ली पर ‘कोपलिक धब्बे” दिखाई दे सकते हैं,
  • यह छोटे, लाल अनियमित होते हैं जिनके बीच में नीला-सफेद केन्द्र सा होता है। यह ज्यादातर गुच्छों में गाल के अन्दर मोलर दांत व मसूड़ों के किनारे पर होते हैं। यह धीरे-धीरे संख्या में तब तक बढ़ते रहते हैं जब की लाल दाने न निकले ।
  • उसके बाद यह स्वत: ही कम हो जाते हैं, बुखार आने के करीब तीन चार दिन बाद दाने निकलना शुरू होते हैं ।
  • इस प्रकार के यह दाने सबसे पहले कान के पीछे, चेहरे पर, माथे पर, गर्दन पर और उसके बाद दो से तीन दिन के अन्दर ही पूरे शरीर में, हाथ-पैरों तक फैल जाते हैं ।
  • दाने शुरू-शुरू में गुलाबी लाल अलग-अलग होते हैं फिर बढ़कर मिल जाने से त्वचा पर बड़े-बड़े चकते से बन जाते हैं ।
  • एक सप्ताह होते-होते दाने सूखने लग जाते हैं और ठीक उसी क्रम में जिस क्रम में ये होते हैं दानों से उत्पादित पपड़ी सूखकर गिरने लगती है, ।
  • इस रोग के होने के बाद केवल हल्का कत्थई धब्बा शेष रह जाता है जो कुछ समय बाद समाप्त हो जाता है। खसरा जीवन में एक ही बार होता है जिससे जीवन भर के लिए शरीर में प्रतिरक्षा के पदार्थ (एण्टीबाडीज) बन जाती है और उसके बाद खसरे के वायरस का प्रभाव नहीं होता ।
  • सात महीने से कम उम्र के बच्चों में प्राकृतिक तौर पर मां से मिली ‘एण्टीबाडी’ बच्चे के शरीर को बचाती है इसलिए उन्हें खसरा नहीं होता ।

खसरा रोग के परिणाम (Consequence of Measles in Hindi):

अक्सर देखा गया है की खसरा नामक यह रोग 10-14 दिनों के अन्दर स्वत: हो ठीक हो जाता है लेकिन यह रोग शरीर के रोग प्रतिरोधक प्रणाली को कमजोर कर देता है जिससे अन्य रोगों का शरीर पर कब्ज़ा करने के अवसर बढ़ जाते हैं | ऐसे में रोगी को निम्न बीमारिया होने की संभावना रहती है |

  • मध्यकर्ण शोथ (ओटाइटिस मिडिया) इसमें कान बहने लगता है।
  • ब्रोंकोन्यूमोनिया।
  • श्वासनलीशोथ (ब्रोंकाईटिस)
  • लेरिंजाईटिस, जो ज्यादातर दाने निकलने के बाद ठीक हो जाता है।
  • मायोकार्डइटिस ।
  • पेट दर्द व पेरिटोनाइटिस ।
  • मस्तिष्क सुषम्नाशोथ (एनकेफेलोमाईलाइटिस)
  • विम्बाणु अल्पता (परप्यूरा, श्रोम्बोसाइटोपीनिया) । ‘
  • दस्त होना, मस्तिष्क में सूजन आना।

खसरा का ईलाज (Treatment of Measles in Hindi):

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की खसरा नामक यह रोग अपने आप ठीक होने वाला रोग है लेकिन इसके बावजूद यह बीमारी होने पर कुछ सावधानियां बरतनी आवश्यक होती हैं ताकि यहह रोग जल्दी से ठीक हो सके | इसके अलावा इस रोग से बचाव भी किया जा सकता है इस रोग से बच्चों को बचाने के लिए उन्हें 9 माह की उम्र में खसरे का टीका अवश्य लगाना चाहिए | यह रोग जल्दी ठीक हो इसके लिए निम्नलिखित सावधानियां अपनाई जा सकती हैं |

  • रोगी बच्चे को हवादार खुले कमरे में दूसरे बच्चों से दूर रखें ।
  • आँख, नाक, गले की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए ।
  • साथ में बैक्टीरियल इंफेक्शन हो जाने पर चिकित्सक की सलाह पर उचित एण्टीबायोटिक्स दी जा सकती हैं ।
  • बुखार उतारने के लिए टेबलेट या सिरप क्रोसिन का उपयोग चिकित्सक की सलाह पर 4-6 घंटे के अंतराल पर किया जा सकता है ।
  • सूखी खांसी के लिए विक्स, हाल्स आदि की गोली चूसने को दी जा सकती हैं ।
  • रोगी बच्चे को नमक के पानी के गरारे करवाने चाहिए ।
  • कान में दर्द होने पर डॉक्टर से परामर्श करके टायोटायसिन ईयर ड्राप्स की 3-4 बूंदे प्रत्येक कान में डाली जा सकती हैं ।
  • खसरा नामक इस बीमारी में रोगी को खाने में हल्का खाना दे, और पानी की भाप दे जिससे खांसी में आराम मिलेगा ।

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