खुजली कारण लक्षण एवं घरेलू उपचार

खुजली की यदि हम बात करें तो यह एक त्वचा रोग है जिसके होने से प्रभावित व्यक्ति परेशान निराश एवं चिडचिडा हो जाता है यद्यपि शरीर में इसके होने के कई कारण होते हैं जिनका वर्णन हम निम्वत करेंगे लेकिन चूँकि खुजली नामक इस रोग से व्यक्ति बेहद चिडचिडा हो सकता है इसलिए इसे दूर करना बेहद जरुरी होता है आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से खुजली के कारण लक्षण एवं घरेलू उपचारों एवं कुछ आयुर्वेदिक दवाइयों के बारे में भी जानने की कोशिश करेंगे ताकि प्रभावित व्यक्ति इस बीमारी से तुरंत निजात पाने में सक्षम हो सके |

खुजली कारण लक्षण एवं घरेलू उपचार

खुजली के कारण:

कहा यह जाता है की खुजली नामक यह रोग एकेरस स्केबीयाई से होने वाला यह एक छूत का रोग है, अर्थात एकेरस स्केबीयाई  इसके होने का प्रमुख कारण है | कहा यह जाता है की यह रोग एक दूसरे के वस्त्र प्रयोग करने, और एक ही बिस्तर पर सोने से भी एक दूसरे में फैलता जाता है यहाँ तक की इससे प्रभावित व्यक्ति के तौलिये से शरीर पोछने पर भी यह रोग हो सकता है | प्राय: ऐसा देखा गया है की शरीर के जिस भाग में त्वचा मृदु और पतली हो, वहां बीमारी वाले जीवाणु आसानी से प्रवेश कर जाते हैं । कलाई के आगे वाले भाग पर, बगलों, जांघों, अंडकोष, शिश्न व अंगुलियों के बीच में इस रोग का कृमि आसानी से प्रवेश कर जाता है इसलिए इन्ही भागों में इस तरह की यह बीमारी अधिक होती है ।

खुजली के लक्षण:

इस रोग के मुख्य लक्षण कुछ इस प्रकार से हैं |

  • प्रभावित स्थान पर शुरू-शुरू में खुजली होती है ।
  • इसका स्थान सर्वप्रथम हाथों में अंगुलियों के बीच में तथा हाथों के पीछे हो सकता है ।
  • प्रभावित स्थान को खुजलाने पर बाद में दानें जैसे बन सकते हैं ।
  • एक साथ रहने वाले कई व्यक्तियों में यदि इसके लक्षण हैं, तो इसका मतलब है की उन्हें खुजली नामक रोग ने ही जकड़ रखा है |

खुजली के घरेलू उपचार:

इस रोग से छुटकारा पाने के लिए या इसका घरेलू उपचार करने के लिए निम्न घरेलू नुस्खे अपनाये जा सकते हैं |

  • नीम के पानी से नहा कर, पोंछकर 5-10 प्रतिशत वाले शुद्ध गंधक के मिश्रण का लेप शरीर पर करें ।
  • इस रोग का घरेलू उपचार करने के लिए कपड़े भी गर्म पानी में उबालकर धोएं व तेज धूप में सुखाएं ।
  • शुद्ध गंधक को 8 गुना कड़वे तेल में मिलाकर भी प्रभावित क्षेत्र में लगा सकते हैं ।

खुजली के लिए आयुर्वेदिक दवाइयां:

महामरिच्यादि तेल स्थानिक प्रयोग हेतु व शुद्ध गन्धक अथवा ब्राह्मी वटी खाने के लिए प्रयोग करें।

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About Author:

Post Graduate from Delhi University, certified Dietitian & Nutritionists. She also hold a diploma in Naturopathy.

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