खून की कमी Anemia कारण, लक्षण एवं ईलाज.

Anemia अर्थात खून की कमी की यदि हम बात करें तो यह अक्सर तब हो जाती है जब खून में आयरन की कमी हो जाती है और इस आयरन की कमी की वजह से उसी रक्त में लाल रक्त कणिकाओं अर्थात हिमोग्लोबिन की भी कमी हो जाती है | Anemia यानिकी शरीर में खून की अल्पता एक ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से अन्य बहुत सारी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है |

खून की कमी Anemia कारण, लक्षण एवं ईलाज.

एनीमिया क्या है (What is anemia in Hindi):

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की रक्त में आयरन की अल्पता रक्त में हीमोग्लोबिन को भी कम कर देती है | जिसके कारण एनीमिया यानिकी खून की कमी हो जाती है | मनुष्य शरीर में आयरन का काम रक्त में लाल रक्त कणिकाओं अर्थात हीमोग्लोबिन का निर्माण करना होता है, यही कारण है की जब शरीर में आयरन की कमी होती है तो रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है | रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण ही शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है क्योंकि हीमोग्लोबिन फेफड़ों से आक्सीजन लेकर उसे खून में संचारित करके पूरे शरीर में भेजने में सहायक होता है | जब रक्त में लाल रक्त कणिकाओं यानिकी हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है तो इस स्थिति को एनीमिया या खून की कमी कहा जाता है |

एनीमिया अर्थात खून की कमी के कारण (cause of anemia in Hindi):

बच्चों एवं वयस्कों दोनों में एनीमिया अर्थात खून की कमी के मुख्य लक्षण निम्नवत हैं |

  • यदि बच्चा समय से पहले अर्थात premature delivery की वजह से भी बच्चे में खून की कमी हो सकती है |
  • जुड़वाँ बच्चे होने पर भी बच्चों एवं माँ दोनों में खून की कमी हो सकती है |
  • ओवर नाल को अच्छी प्रकार न बाँधने पर रक्त निकल सकता है जिससे बच्चे में खून की कमी अर्थात एनीमिया हो सकता है |
  • यदि माँ को दूध न हो तो, बच्चे को गाय इत्यादि के दूध पर निर्भर रहने के कारण भी एनीमिया हो सकता है |
  • पेट के अन्दर कीड़े होने पर भी शरीर में खून की कमी हो सकती है |
  • गुदा का बाहर निकलना भी एक कारण हो सकता है ।
  • अल्सरेटिव कोलाईटिस एवं दस्त इत्यादि भी एनीमिया के कारण हो सकते हैं ।
  • चोट लगने पर जब अधिक रक्त बह जाय तो इसके कारण भी शरीर में खून की कमी हो सकती है ।

खून की कमी के लक्षण (Anemia Symptoms in Hindi):

एनीमिया नामक इस बीमारी के कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं |

  • एनीमिया से ग्रसित व्यक्ति के शरीर का रंग पीला पड़ जाता है ।
  • जिन बच्चों में खून की कमी होती है वे अन्य बच्चों की तुलना में जल्दी थक जाते हैं |
  • एनीमिया से ग्रसित व्यक्ति में संक्रामक रोग जल्दी जल्दी होने का खतरा रहता है ।
  • खून की कमी से ग्रसित कुछ रोगियों में तिल्ली का बढ़ जाना पाया जाता है ।
  • इस रोग से ग्रसित व्यक्तियों की जीभ की पैपीली समाप्त सी होने लगती है ।
  • नाखून पतले, खुरदरे व चपटे हो जाते हैं तथा उनमें लम्बी-लम्बी धारियां सी पड़ सकती हैं ।
  • एनीमिया से ग्रसित कुछ बच्चे ऐसी चीजें खाने लगते हैं जो खाने वाली न हों इनमे मिट्टी, चूना इत्यादि सम्मिलित हैं ।
  • ग्रसित व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है ।
  • खून की कमी या एनीमिया में हृदय की धड़कन तेज होने के अलावा चिडचिड़ापन भी हो सकता है ।

खून की कमी का ईलाज (Treatment of Anemia in Hindi) :

शरीर में खून की कमी है या नहीं इसके लिए रक्त जांच की जा सकती है यदि जांच में हीमोग्लोबिन का स्तर कम पाया जाता है, या बहुत सारे व्यक्तियों में ई. एस. आर. स्तर भी बढ़ा होता है तो एनीमिया अर्थात खून की कमी की पुष्टि हो सकती है | चिकित्सक द्वारा कारणों का पता लगाकर उपचार शुरू की या जा सकता है |  यदि प्रभावित व्यक्ति के पेट में कीड़ों की शिकायत हो तो उसे कृमिनाशक औषधि जैसे – Nemocid, Womiban इत्यादि चिकित्सक द्वारा दी जा सकती है |रक्त में आयरन की कमी को पूर्ण करने के लिए आयरन की टेबलेट या सिरप इत्यादि दी जा सकती हैं | इसके अलावा अवशोषण बढ़ाने के लिए चिकित्सक द्वारा विटामिन सी इत्यादि की भी खुराक दी जा सकती है | एनीमिया का यह ईलाज 7-8 सप्ताह तक चल सकता है | यदि किसी मरीज को आयरन की मात्रा लेने से जी मिचलाना, पेट दर्द, दस्त इत्यादि की शिकायत होती है तो ऐसे में चिकित्सक द्वारा आयरन की खुराक में परिवर्तन किया जा सकता है | इसके अलावा बच्चों का एनीमिया का ईलाज करते वक्त यदि बच्चे मुहं से आयरन की मात्रा देने पर न बचा पायें तो चिकित्सक द्वारा आयरन इंजेक्शन देकर इसकी पूर्ति की जा सकती है | एनीमिया अर्थात खून की कमी में शरीर को फोलिक एसिड एवं विटामिन B12 की आवश्यकता होती है इसलिए चिकित्सक द्वारा बताये गए निर्देशों के आधार पर प्रतिदिन इसकी आपूर्ति की जा सकती है | aplastic anemia में ग्रसित व्यक्ति को खून की कमी को दूर करने के लिए  खून चढ़ाने की आवश्यकता हो सकती है |

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