गर्भावस्था में देखभाल – खान पान से लेकर यात्रा तक.

गर्भावस्था में देखभाल कहें या फिर गर्भस्थ महिला की देखभाल या फिर प्रेगनेंसी केयर भी कह सकते हैं | भारत में ही नहीं अपितु दुनिया में किसी भी महिला के लिए गर्भधारण करना एक बेहद सुखद एवं अनूठा अनुभव होता है, इसलिए अधिकतर महिलाएं इस दौरान प्रसन्नचित रहती हैं, लेकिन चूँकि महिला के गर्भ में एक प्राणी और पल रहा होता है इसलिए ऐसे में गर्भावस्था में देखभाल अर्थात गर्भवती महिला की उचित देखभाल अत्यंत ही महत्वपूर्ण हो जाती है | उचित देखभाल के अभाव में यह सुखद अनुभव बहुत बार दु:ख का कारण भी बन सकता है । भारतवर्ष की यदि हम बात करें तो उचित जानकारी के अभाव के कारण कहें, गर्भस्थ महिला की उचित देखभाल न होने के कारण कहें या देश में चल रही चिकित्सकीय प्रणाली के कारण कहें कारण जो भी हो सच्चाई यह है की विकसित देशों की तुलना में भारतवर्ष में मातृ मृत्यु-दर एवं शिशु मृत्यु-दर बहुत अधिक है | किसी भी देश के नागरिकों के स्वास्थ्य की स्थिति जानने के लिए उस देश का मातृ मृत्यु-दर का आंकड़ा एक आईने अर्थात दर्पण के रूप में कार्य करता है । क्योंकि मातृ मृत्यु-दर के कम होने का अर्थ है कि उस देश के नागरिकों के स्वास्थ्य की उचित देखभाल हो रही है । इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से गर्भावस्था में देखभाल यानिकी प्रेगनेंसी में महिला का कैसे उचित ध्यान रखा जा सकता है के बारे में जानेंगे |

गर्भावस्था में देखभाल

गर्भावस्था में देखभाल के लिए डॉक्टर को बताने योग्य बातें.

यद्यपि गर्भावस्था हो या फिर सामान्य स्थिति किसी भी स्थिति में डॉक्टर से कोई भी बात छिपानी नहीं चाहिए जिसका असर आपके ईलाज पर पड़ सकता हो | लेकिन गर्भावस्था में देखभाल के लिए निम्न बातों को डॉक्टर से अवश्य शेयर करें |

  • यदि गर्भस्थ महिला पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त है तो उसे यह डॉक्टर को अवश्य बताना चाहिए |
  • गर्भधारण के पहले से यदि किसी दवा का सेवन कर रही हैं तो उसे डॉक्टर से इस बारे में अवश्य सलाह लेनी चाहिए की क्या वह यह दवाई गर्भधारण की अवस्था में भी ले सकती है |
  • यदि महिला को पिछली गर्भावस्था में कोई जटिलता का अनुभव हुआ हो |
  • महिला के परिवार में कोई मंद बुद्धि, अन्य विकृति या किसी को कोई जन्मजात बीमारी हो |
  • यदि महिला का गर्भ ईलाज कराने के बाद ठहरा हो |

गर्भावस्था में देखभाल के लिए डॉक्टर से कब मिलें

गर्भावस्था में देखभाल के लिए सामान्यत: पहले 30 सप्ताह में डॉक्टर द्वारा प्रतिमाह देखा जाता है, उसके बाद प्रति 2 सप्ताह पर और आखिरी माह में प्रति सप्ताह देखा जाता है । यदि कोई Complications अर्थात जटिलता होती है तो गर्भावस्था में देखभाल के लिए पहले भी डॉक्टर बुला सकते हैं । पूर्ण रूप से सामान्य स्थिति में भी कम-से-कम तीन से पाँच बार गर्भ के दौरान चिकित्सक से मिल लेना चाहिए । पहली बार जब गर्भ का पता चले, उसके बाद 2-3 महीनों पर । कभी भी बुखार हो, चक्कर आए शरीर फूल जाए, आँखों के आगे धुंधलापन हो या आँखें चौंधियाने लगें, खून का रिसाव हो, पतला पानी गिरने लगे, पेट में रुक-रुककर दर्द आने का अहसास हो या बच्चे की चाल कम लगे तो डॉक्टर की तुरंत सलाह लेना जरुरी है ।

गर्भावस्था में देखभाल के लिए गर्भस्थ महिला का खान पान :

गर्भावस्था में ऑतों की गति बेहद कम हो जाती है तथा खाना अधिक देर तक पेट में रह जाता है, इसलिए समबन्धित महिला का पेट भरा-भरा महसूस हो सकता है ।पेट भरा भरा महसूस होने के कारण महिला को भूख कम लग सकती है । इसलिए गर्भावस्था में देखभाल के लिए अपने स्वाद के अनुसार पौष्टिक और हलका भोजन लें, जो आसानी से पच जाए । गर्भावस्था के दौरान गर्भस्थ महिला को प्रतिदिन 300 से अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है । इसको प्राप्त करने के लिए महिला को चाहिए की वह खान पान सम्बन्धी निम्नलिखित टिप्स का अनुसरण अवश्य करे ताकि वह खुद या उसके परिवार वाले गर्भावस्था में देखभाल करने में सफल हो सकें |

  • प्रेगनेंसी में सुबह के समय भूखे पेट देर तक नहीं रहना चाहिए ।
  • गर्भवती महिला के भोजन में विलंब नहीं होना चाहिए ।
  • गर्भावस्था में देखभाल के लिए भोजन के अतिरिक्त बीच-बीच में कुछ नाश्ता, फल, दूध इत्यादि का सेवन अवश्य करना चाहिए ।
  • गर्भवती महिला को भोजन के पश्चात् थोड़ी देर लेटकर आराम करना चाहिए ।
  • तरल पदार्थों का अधिक सेवन करना चाहिए ।
  • गर्भवती महिला को 2 से 3 लीटर पानी अवश्य पीना चाहिए ।
  • अचार, चटनी, पापड़ इत्यादि तेज नमक वाले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए या फिर बेहद कम करना चाहिए |
  • गर्भधारण के शुरुआती दिनों में कई महिलाओं का जी मिचलाता है या उलटी होती है । ऐसी महिलाओं की गर्भावस्था में देखभाल के लिए कुछ सूखी चीजें, जैसे-बिस्कुट, रोटी इत्यादि का सेवन कराना चाहिए इनका सेवन धीरे-धीरे करने से यह कम हो सकता है । इसके अलावा कुछ महिलाओं को अदरक दाँतों के बीच रखने से भी लाभ मिलता है । यदि मिचली या उलटी अधिक हो तो दवा लेनी पड़ सकती है । अधिकांश महिलाओं की यह समस्या 3 महीने में अपने आप ठीक हो जाती है । अत्यधिक उलटी से स्वास्थ्य बिगड़ने पर पानी चढ़ाने की आवश्यकता भी पड़ सकती है ।
  • गर्भावस्था में देखभाल के लिए आहार संपूर्ण होने पर भी फोलिक एसिड (vitamin) ऊपर से लेना पड़ता है । यह Folic acid या फोलेट गोली की तरह उपलब्ध होती है, जिसे गर्भ के पहले तीन माह प्रतिदिन अवश्य लेना चाहिए । वैसे तो गर्भ ठहरने के तीन महीने पहले से ही Folic acid लेना शुरू कर देना चाहिए। इसके सेवन से भ्रूण के तंत्रिका तंतु एवं अन्य अवयवों में भी अपरूपता की संभावना काफी कम हो जाती है । इसके अलावा, रक्त निर्माण में भी यह सहायक होती है ।
  • भारतवर्ष में गर्भस्थ महिलाओं में उनके खून में हीमोग्लोबिन की कमी अर्थात एनीमिया नामक बीमारी काफी देखी जाती है । इसलिए इस समस्या से बचने के लिए लौह (Iron) की गोलियाँ तीसरे महीने के बाद नियमित तौर पर लेनी चाहिए । शरीर में होने वाली कैल्सियम और विटामिन-डी की कमी भी गोलियों से पूरी की जा सकती है । गर्भावस्था में देखभाल के लिए आयोडीन-युक्त नमक लेना बेहद जरुरी होता है |
  • गर्भावस्था में शराब एवं कॉफ़ी का सेवन नहीं करना चाहिए | इसके अलावा धूम्रपान से भी भ्रूण और गर्भ पर प्रतिकूल असर पड़ता है ।
  • गर्भावस्था में कोई भी दवा या गोली बिना डॉक्टरी सलाह के न लें ।
  • इस दौरान बाजार या होटल के खाने से बचना चाहिए, वह भी खासतौर पर फास्ट फूड से ।
  • इस दौरान चटपटा खाने को मन करता है लेकिन सड़क पर बिकनेवाले चाट-पकौड़े न लें ।
  • सलाद इत्यादि को अच्छी तरह धोने के बाद ही खान पण के उपयोग में लायें |
  • गर्भावस्था के खान पान में पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें ।
  • हाथ धोने के पश्चात् ही भोजन करने की आदत डालें |

गर्भावस्था में गर्भस्थ महिला का वजन:

पूरे गर्भ के दौरान आपका वजन करीब 12 किलो तक बढ़ सकता है । वजन में बहुत कम वृद्धि या अचानक बहुत अधिक वृद्धि खतरनाक हो सकती है । शुरू के तीन महीनों में उलटी के कारण वजन एक-दो किलो ही बढ़ पाता है, पर उसके बाद प्रति सप्ताह करीब 1 पौंड की वृद्धि होती है । वजन का अचानक बहुत बढ़ जाना ठीक नहीं है । यदि ऐसा हो तो गर्भावस्था में देखभाल के लिए अपने डॉक्टर से अवश्य मिलें । गर्भावस्था में वजन घटाने की कोशिश बिलकुल नहीं करनी चाहिए । प्रसव के बाद दो-तीन महीने के अंदर ही वजन घटकर प्रसव पूर्व वजन के समकक्ष हो जाता है ।

गर्भावस्था में देखभाल के लिए व्यायाम (Exercise in Pregnancy in Hindi):

हालांकि गर्भवती महिला इस असमंजस में रहती हैं की उन्हें इस दौरान कोई व्यायाम करना चाहिए की नहीं, सच तो यह है की गर्भावस्था में देखभाल के लिए गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से प्रतिदिन 30 मिनट या अधिक समय तक मध्यम श्रेणी (Moderate) के व्यायाम करने चाहिए । व्यायाम के समय ध्यान रहे कि थकावट न हो तथा साँस न फूले । यदि माँ गर्भ-धारण के पहले से ही कुछ व्यायाम कर रही है तो गर्भ धारण के बाद उन्हें रोकने की जररत नहीं होती है | लेकिन इतना ध्यान रखा जाना बेहद जरुरी है की गर्भवती महिला नए नए थकने वाले व्यायाम बिलकुल न करे | गर्भावस्था में देखभाल के लिए व्यायाम करते समय पानी अधिक पीना चाहिए ताकि शरीर का तापमान न बढे | गर्भवती महिला को प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए शुरू में 5 से 10 मिनट रोज, फिर धीरे-धीरे समय बढाया जा सकता है । व्यायाम करते वक्त ढीले, सूती कपड़े पहनें और पानी अधिक पीएँ बीमार होने पर व्यायाम बंद रखा जा सकता है ।

गर्भावस्था में यात्रा (Travel in Pregnancy in Hindi)

गर्भावस्था में देक्भाल की बात आती है तो खानपान, व्यायाम इत्यादि के साथ यह भी सवाल अंतर्मन में आता है की गर्भवती महिला के लिए यात्रा करना उसके स्वास्थ्य की दृष्टी से कैसा होगा? यद्यपि यह जरुरी नहीं है की गर्भवती महिला सिर्फ अपने घर पर ही रहे क्योंकि कामकाजी महिलाओं के घर्भ्वती होने पर यह संभव नहीं है इसके अलावा महिलाएं गर्भावस्था में भी सैर सपाटे पर जाना पसंद करती हैं ताकि इस अवस्था में वे अपना कुछ तनाव कम कर सकें, परदेस में रहनेवाले प्रसव के लिए अपने घर आना पसंद करते हैं । कहने का आशय यह है की गर्भावस्था में भी यात्रा करने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं इसलिए कारण कोई भी हो, लेकिन गर्भावस्था में देखभाल के लिए यात्रा के समय कुछ सावधानियाँ बरतनी अत्यंत आवश्यक होती हैं |

  • यात्रा पर निकलते वक्त या बाहर निकलते वक्त ऊँची एड़ी के सैंडल या चप्पल बिलकुल न पहनें क्योंकि इनसे गिरने का डर रहता है ।
  • यात्रा के दौरान बहुत भीड़-भाड़वाले स्थान से बचें ।
  • यदि गाड़ी से सफर करना है तो बड़ी गाड़ी में झटके कम लगते हैं ।
  • यदि कार में आगे की सीट पर बैठे तो सीट बेल्ट जरूर बाँधे । सीट बेल्ट इस तरह बाँधे कि बेल्ट पेट के नीचे ज्यादा हो और ऊपरी पेटी दोनों स्तनों के बीच से गुजरे ।

गर्भावस्था में हवाई यात्रा (Air Travel in Pregnancy Hindi):

जब भी गर्भावस्था में देखभाल वाले विषय पर चर्चा होती है तो यह चर्चा भी जरुर होती है की क्या गर्भवती महिला हवाई यात्रा कर सकती है? और क्या एयरलाइन्स बिना किसी औपचारिकता के समबन्धित महिला को हवाई जहाज में बैठने की अनुमति देती है? इत्यादि | इसी विषय को ध्यान में रखते हुए हम बता दें की हवाई जहाज में यात्रा करना गर्भावस्था में स्वास्थ्य पर कोई विपरीत असर नहीं डालता है । यहाँ तक की गर्भावस्था के छत्तीसवें सप्ताह अर्थात आठवें महीने तक हवाई सफर सुरक्षित माना गया है । यद्यपि हवाई अड्डे में सम्बंधित महिला का एक्स-रे या सुरक्षा जाँच कराई जा सकती है, जो की स्वास्थ्य की दृष्टी से हानिकारक नहीं है । गर्भवती महिला की हवाई यात्रा के दौरान कई एयरलाइंस डॉक्टरी प्रमाण-पत्र की माँग करती हैं कि महिला को कोई जटिलता तो नहीं है । गर्भावस्था में देखभाल के लिए हवाई जहाज में बाहरी सीट बेहतर है, ताकि बीच-बीच में खड़ी हो सकें या थोड़ा चहल-कदमी कर सकें ।यात्रा के दौरान पानी अधिक पीना चाहिए । 5-6 घंटे से लंबी यात्रा में पैरों की नस में रक्त के जमने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे डी.वी.टी. (Deep Vein Thrombosis) जैसी खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो सकती है । इसलिए एक-एक घंटे के अन्तराल पर थोड़ा टहल लेना चाहिए । घुटने के नीचे चुस्त ऊँचे मोजे (Stocking) पहने जा सकते हैं । डी.वी.टी. से बचने के लिए डॉक्टर ऐस्पीरिन (Aspirin) या कोई और दवा दे सकते हैं । गाड़ी या हवाई सफर में किसी-किसी को उल्टियाँ (Motion sickness) भी आ सकती हैं इसलिए इनसे बचाव के लिए भी दवा ली जा सकती है |

  • गर्भावस्था में देखभाल के लिए यात्रा के समय स्वच्छ जल एवं स्वच्छ भोजन का विशेष ध्यान रखें ।
  • अपनी रोज लेनेवाली दवाइयाँ और आपातकालीन दवाइयाँ, जैसे-बुखार, पेट की गड़बड़ी, दर्द या चोट की दवाई भी यात्रा के दौरान रख लें |
  • अपना स्वास्थ्य पत्र अपने साथ रखें, जिसमें आपकी गर्भावस्था, ब्लड ग्रुप या अन्य विशेष सूचना उल्लेखित हो ।
  • दवाओं की सूची एवं मेडिक्लेम कार्ड भी साथ रख लेना चाहिए । अंतरराष्ट्रीय यात्रा के पहले कुछ टीके (Vaccines) आवश्यक होते हैं ।
  • विभिन्न स्थानों के अनुसार कुछ अलग बीमारी जैसे-मलेरिया, इन्फ्लुएंजा, टायफाइड इत्यादि से बचाव के लिए दवाइयों का भी प्रावधान हो सकता है |

कामकाजी महिलाओं की गर्भावस्था में देखभाल:

कामकाजी महिलाओं से हमारा आशय इसमें सिर्फ नौकरीपेशा महिलाओं से नहीं है | अपितु कई महिलाएँ घर से बाहर जाकर काम करती हैं तो अन्य घर-गृहस्थी के कामों में व्यस्त रहती हैं । गर्भावस्था में देखभाल के लिए काम कोई भी हो, शारीरिक तौर पर थकानेवाला नहीं होना चाहिए । यदि किसी प्रकार की कोई गर्भ की जटिलता न हो तो माँ अपना काम पहले की भाँति कर सकती है । लेकिन इनको करने में निम्नलिखित टिप्स का अनुसरण करना बेहद आवश्यक है |

  • गर्भावस्था के दौरान आराम का विशेष ध्यान दें ।
  • गर्भावस्था में देखभाल के लिए रात्रि में 8 घंटे एवं दोपहर में 2 घंटे लेटकर विश्राम अवश्य करें ।
  • लंबे समय तक खड़े रहने तथा शारीरिक व मानसिक रूप से थकानेवाले कार्यों से समय पूर्व प्रसव और कमजोर नवजात की संभावना रहती है ।
  • बैंक व ऑफिस में कार्यरत महिलाओं को देर तक एक ही मुद्रा में कंप्यूटर के आगे बैठे रहना पड़ता है । इसलिए उन्हें हर एक-दो घंटे पर कुछ चहल-कदमी अवश्य कर लेनी चाहिए ।
  • बैठने की मुद्रा ठीक रखें और पीठ के पीछे तकिया रखा जा सकता है ।
  • समय-समय पर आँख और गरदन के व्यायाम करते रहें ।
  • कार्यालय में काम करते वक्त पैर के नीचे एक पीढ़ा या स्टूल रख सकते हैं । गर्भावस्था में देखभाल के लिए कंप्यूटर स्क्रीन या टेलीविजन का उपयोग कम-से-कम करने की कोशिश करें ।
  • गर्भावस्था में कुछ समय निकालकर लेटकर भी आराम करने की कोशिश करनी चाहिए ।
  • पाँचवें महीने के बाद बाई करवट लेटना माँ और बच्चे के लिए अधिक लाभप्रद होता है ।
  • गर्भावस्था में चित सोना (Supine) हानि पहुँचा सकता है ।
  • यदि महिला शिक्षिका है तो गर्भावस्था में देखभाल के लिए उसे देर तक खड़े होकर नहीं पढ़ाना चाहिए ।
  • यदि महिला किसी ऐसे व्यवसाय अर्थात पेशे में है, जहाँ रासायनिक पदार्थों या रेडिएशन के संपर्क में आना पड़ता है तो उन्हें गर्भावस्था में देखभाल के लिए छुट्टी ले लेनी चाहिए, क्योंकि ये भ्रूण पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं ।
  • अनेक प्रतिष्ठानों में मातृत्व अवकाश का प्रावधान है महिलाओं को गर्भावस्था में देखभाल के लिए इसका उपयोग करना चाहिए ।

गर्भावस्था में कमर दर्द (Back Pain in Pregnancy):

अक्सर देखा गया है की गर्भावस्था में 50 से 70 प्रतिशत महिलाओं को कमर दर्द यानिकी बैक पेन की शिकायत होती है । इसका मुख्य कारण लिगामेंट और मांसपेशियों पर जोर पड़ना माना गया है | लेकिन गर्भावस्था में झुकने, भारी सामान उठाने और अधिक चलने से भी कमर दर्द हो सकता है । तो आइये जानते हैं गर्भवस्था में देखभाल के लिए इस कमर दर्द से कैसे बचा जा सकता है |

  • गर्भावस्था में देखभाल के लिए झुककर काम नहीं करना चाहिए ।
  • बैठते समय पीठ के पीछे तकिए का सहारा अवश्य लगा लें ।
  • ऊँची एड़ी के जूते, सेंडिल न पहनें ।
  • पीठ के व्यायाम द्वारा मांसपेशियों को मजबूत कर सकते हैं ।
  • कभी-कभी हड्डी में कमजोरी हो सकती है, जिसमें कैल्सियम और विटामिन से फायदा होता है ।
  • अधिक तेज दर्द हो तो हड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लें, क्योंकि हो सकता है, रीढ़ या कूल्हे की हड्डी में कोई बीमारी हो ।
  • गर्भावस्था में गरम पानी की बोतल से सेंक, दर्द की गोलियाँ आराम देते हैं पर दर्द की गोलियों का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए ।

गर्भावस्था में संभोग (Sex During Pregnancy):

अक्सर गर्भावस्था में देखभाल की चर्चाओं में एक प्रश्न हमेशा चर्चा में बना रहता है की क्या गर्भावस्था में संभोग अर्थात सहवास करना सुरक्षित होता है ? कहीं इससे बच्चे को कोई नुकसान तो नहीं होता? इत्यादि इत्यादि इसका जवाब यह है की एक स्वस्थ गर्भवती महिला के लिए अपने जीवनसाथी के साथ यौन संबंध स्थापित करना बेहद स्वभाविक एवं हानिरहित होता है । लेकिन गर्भावस्था के दौरान यह क्रिया जोश में नहीं अपितु होश में रहकर करना अनिवार्य है क्योंकि जोर के धक्के गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकते हैं | इसके अलावा यदि डॉक्टर ने गर्भपात या समय पूर्व प्रसव का खतरा बताया हो या महिला की योनी से खून या पानी का रिसाव या पेट में दर्द हो रहा हो तो संभोग करने से बचना चाहिए | गर्भावस्था में देखभाल के लिए प्लासेंटा प्रीविया में भी यौन संपर्क नहीं करना चाहिए ।

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About Author:

Post Graduate from Delhi University, certified Dietitian & Nutritionists. She also hold a diploma in Naturopathy.

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