गर्भावस्था में व्यायाम Exercise in pregnancy in Hindi

गर्भावस्था में व्यायाम का बहुत महत्त्व होता है, क्योंकि यह गर्भावस्था की अनेक परेशानियों को दूर करने के साथ-साथ सामान्य प्रसव के लिए भी लाभदायक होता है । इसलिए हर गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान व्यायाम अवश्य करना चाहिए | लेकिन इससे पहले यह जान लेना भी जरुरी है की गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करने के क्या क्या फायदे हो सकते हैं |

गर्भावस्था में व्यायाम

गर्भावस्था में व्यायाम के फायदे (Benefits of Exercise in Pregnancy):

गर्भावस्था में व्यायाम करने के फायदों की बात करें तो इस दौरान व्यायाम करने के  निम्नलिखित मुख्य लाभ हैं

  • दोनों पैरों को व्यायाम द्वारा गर्भ के समय के अतिरिक्त वजन को सँभालने योग्य बनाना ।
  • श्रोणि एवं पैरों की मांसपेशियों में मजबूती के साथ-साथ लचीलापन लाना, जो सामान्य प्रसव के लिए सहायक है ।
  • बाँहों की मांसपेशियों में मजबूती लाना, ताकि नवजात शिशु को ठीक से सँभाल सके ।
  • गर्भावस्था में व्यायाम के माध्यम से मन को प्रफुल्लित रखा जा सकता है |
  • व्यायाम करके नींद अच्छी आती है ।
  • गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करने से प्रसव में आसानी एवं दर्द सहने की क्षमता में वृद्धि होती है ।
  • गर्भावस्था में व्यायाम मोटापा रोकने में सहायक होता है ।
  • बच्चे का उपयुक्त वजन ।
  • व्यायाम करने से शरीर चुस्त और तंदुरुस्त रहता है ।
  • व्यायाम हड्डियों को स्वस्थ बनाता है ।
  • गर्भावस्था में व्यायाम करने से मांसपेशियों का समुचित विकास होता है ।
  • व्यायाम करने से उच्च रक्तचाप मधुमेह जैसी कई बीमारियों से बचाव होता है ।
  • बीमारी प्रतिरोधक शक्ति में वृद्धि होती है ।
  • शरीर में स्फूर्ति एवं ताजगी में वृद्धि होती है ।
  • गर्भावस्था के दौरान होने वाले पीठ दर्द और कमर दर्द में कमी होती है ।
  • कब्जियत में कमी ।
  • गर्भावस्था में व्यायाम से प्रसव के पश्चात् शीघ्रता से पहले जैसे आकार और वजन वापस आने में सहायता मिलती है ।

गर्भावस्था में व्यायाम प्रतिदिन करें, शुरू में 5 से 10 मिनट रोज, फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाते हुए प्रतिदिन 30 मिनट या इससे अधिक समय तक नियमित और रोजाना करें । गर्भावस्था में व्यायाम करते समय यह ध्यान रहे कि थकावट न हो और साँस न फूले । ऐसे व्यायाम न करें, जिसमें गिरने का या पेट में चोट लगने का खतरा हो । तेज टहलना, तैराकी, साइकिल चलाना, नृत्य जैसे व्यायाम लाभदायक हैं । स्कूबा डाइविंग (Scuba diving) जैसी तैराकी वर्जित है । माँ को सामान्यतः कुछ सावधानियों की आवश्यकता होती है । सोकर उठते समय धीरे-धीरे उठे । साँस रोकनेवाले व्यायाम न करें । व्यायाम के पहले मल-मूत्र का त्याग कर लें । व्यायाम के समय ढीले सूती कपड़े पहने और पानी अधिक पिएँ । बीमार हों तो व्यायाम बंद रखें। यदि पहले से माँ कुछ व्यायाम कर रही है, तो गर्भधारण के बाद उन्हें रोकने की जरूरत नहीं है, पर गर्भधारण के बाद नए-नए और थकानेवाले व्यायाम शुरू नहीं करने चाहिए ।

गर्भावस्था में व्यायाम कब नहीं करना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान निम्नलिखित अवस्थाओं में व्यायाम वर्जित है |

  • यदि महिला को हृदय से सम्बन्धी कोई रोग हो ।
  • फेफड़े में कमजोरी हो तो तब भी व्यायाम नहीं करना चाहिए ।
  • बच्चेदानी का मुँह खुला हुआ हो तो महिला को व्यायाम नहीं करना चाहिए ।
  • योनि से खून या पानी का रिसाव होने की स्थिति में भी व्यायाम नहीं करना चाहिए ।
  • अपरा गर्भाशय के निचले हिस्से में निरोपित (Placenta previa) ।
  • समय पूर्व प्रसव की संभावना होंने पर भी गर्भावस्था में व्यायाम नहीं करने चाहिए ।
  • अधिक रक्तचाप हो या खून की कमी होने पर भी व्यायाम वर्जित है ।
  • अधिक कमजोर भ्रूण होने पर भी व्यायाम से बचना चाहिए ।

गर्भावस्था में व्यायाम के तरीके:

पहला तरीका:

अपने हाथों एवं घुटनों के ऊपर अपना वजन सँभालें । साँस बाहर छोड़ें और अपने दाएँ कंधे के दाएँ कूल्हे की ओर घुमाएँ। फिर साँस अंदर खींचें और अपनी पुरानी अवस्था में वापस आ जाएँ। फिर ऐसे ही बाईं ओर करें। ऐसा 8-10 बार करें ।

दूसरा तरीका:

गर्भावस्था में व्यायाम करने के दूसरे तरीके के अनुसार  बैठे हुए अपनी पीठ को सीधी रखें। पैर को घुटनों से मोड़ लें और अपने दोनों तलवों को सटने दें। अब मुड़े हुए पैरों में खिंचाव लाएँ और फिर छोड़ दें। ऐसा करने से श्रोणि की मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ता है, जिससे सामान्य प्रसव में सहायता मिलती है ।

तीसरा तरीका:

सीधे बैठे और अपनी दोनों बाँहों को मोड़कर पीछे ले जाएँ तथा दोनों हाथों को पीछे पीठ की तरफ सटाएँ और उसी अवस्था में आराम से साँस लें । ऐसा पाँच-छह बार करें। इस व्यायाम से फेफड़ों को फैलने में सहायता मिलती है ।

चौथा तरीका

बैठे हुए पीठ को सीधा रखें और दोनों पैरों को सामने सीधे फैलाकर रखें। बारी-बारी से दाहिने एवं बाएँ पैर में खिंचाव लाएँ और ढीला छोड़े। अब बारी-बारी से बाएँ और दाहिने घुटनों को मोड़े और फैलाएँ। ऐसा करते समय पाँव की अंगुलियों को अपनी ओर खीचें एवं एड़ी को आगे की ओर। ऐसा आठ-दस बार करें।

पांचवा तरीका :

गर्भावस्था में व्यायाम करने के पांचवे तरीके में फर्श पर लेटकर घुटनों को मोड़ें, तलवे सपाट रखें, बाँहों को शरीर से 90 डिग्री के कोण पर रखें। दोनों पैरों को साथ रखकर बाँहों व कंधों को जमीन पर सपाट रखें । अब नितंबों को दाईं ओर तब तक घुमाएँ, जब तक दायाँ घुटना जमीन छूने लगे । इसी प्रकार बाईं ओर यही क्रिया करें। धीरे-धीरे दाईं और बाईं ओर यह क्रिया 5-6 बार दोहराएँ ।

प्रसव के बाद क्या व्यायाम करें

गर्भावस्था में व्यायाम बेहद फायदेमंद तो है ही प्रसव के पश्चात् व्यायाम महिलाओं को अपनी रूप व आकृति तथा पेशियों का पहले जैसा कसाव वापस दिलाने में मदद करता है । इसके लिए प्रसव के बाद ये व्यायाम करने चाहिए |

प्रसव के बाद पहला सप्ताह

उदरीय श्वसन:

गहरी साँस खींचकर पेट को फुलाएँ, फिर धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए पेट की पेशियों में खिंचाव पैदा करें ।

बाँहें फैलाना: गर्भावस्था में व्यायाम के तरीकों के बारे में तो हम जान चुके हैं प्रसव के बाद व्यायाम करने के लिए फर्श पर पीठ के बल सीधे लेट जाएँ । पैर एक-दूसरे से थोड़ा अलग रहे । अब घुटनों को स्थिर रखते हुए भुजाओं को कंधों से दूर फर्श पर फैलाएँ ।

गरदन उठाना: फर्श पर पीठ के बल सीधे लेट जाएँ। सिर के नीचे तकिया न रखें। साँस बाहर छोड़कर सिर इस तरह उठाएँ, ताकि ठोड़ी छाती को छुए।

श्रोणि घुमाना: फर्श पर पीठ के बल घुटने मोड़कर लेट जाएँ। साँस अंदर लें। फिर साँस बाहर छोड़ते हुए कमर को फर्श पर इस तरह फैलाएँ कि कमर और फर्श के बीच खाली स्थान न रहे। कमर को फर्श पर टिकाते समय पेट और कूल्हे की पेशियों में कसाव बनाए रखें।

प्रसव के बाद दूसरा सप्ताह में व्यायाम:

पैर उठाना : फर्श पर पीठ के बल लेट जाएँ। साँस बाहर छोड़ते हुए एक पैर को धीरे धीरे 45 डिग्री के कोण जितना उठाएँ। साँस भीतर खींचते हुए पैर को धीरे-धीरे नीचे ले आएँ। फिर दूसरा पैर उठाएँ और यही प्रक्रिया दोहराएँ।

एड़ी से कूल्हे तक: फर्श पर पीठ के बल लेट जाएँ । साँस अंदर खींचकर दाएँ घुटने को मोड़कर पेट के ऊपर लाएँ । एड़ी से कूल्हे तक छूने की कोशिश करें । साँस बाहर छोड़े तथा पैर को फर्श पर सीधा करें। अब यही प्रक्रिया दूसरे पैर के पास दोहराएँ ।

प्रसव के बाद तीसरे सप्ताह में व्यायाम:

दोनों पैर उठाना: फर्श पर सीधे कमर के बल लेट जाएँ। साँस बाहर छोड़ते हुए दाएँ पैर को जहाँ तक संभव हो, ऊपर उठाएँ। साँस अंदर खींचें, फिर साँस बाहर छोड़ते हुए पैरों को नीचे करें।

उठना-बैठना: फर्श पर पीठ के बल लेट जाएँ। बाँहों को मोड़कर छाती पर रखें । साँस बाहर छोड़ते हुए पेट सिकोड़ते हुए सिर व कंधों को उठाएँ। फिर साँस अंदर खींचें तथा फर्श पर धीरे से सीधे लेट जाएँ पेट पर जोर डाले बिना जितना संभव हो, उठने की कोशिश करें ।

पीठ के बल सीधे लेटे हुए अपनी बाँहों को जाँघों से सटाकर रखें । पैर की उँगलियों को खिंचाव के साथ सामने फैलाएँ। अब अपने सिर और पैरों को फर्श से थोड़ा ऊपर उठाएँ । कुछ सेकंड तक वैसे ही रहें, फिर विश्राम करें ।

अपनी हथेलियों को जमीन से सटाकर रखें । बाएँ पैर को फर्श पर आराम करने दें और दाएँ पैर को सीधा रखते हुए उठाएँ तथा उसे ऊपर-नीचे की गति दें । ऐसा कुछ सेकंड के लिए करें और फिर बाएँ पैर से इस क्रिया को दोहराएँ ।

दोनों हथेलियों को जमीन पर रखते हुए अपने सिर को झुकाकर उनके बीच में लाएँ । पैरों को सीधी रखें । अपने आगे के भाग को स्ट्रेच करते हुए कुछ सेकंड तक रुकें, फिर ढीला छोड़ दें । ऐसा कुछ देर करें । अपने दोनों पाँव के बीच 20 इंच की दूरी रखते एवं पीठ को सीधी रखते हुए खड़ी हो जाएँ । अब धीरे-धीरे घुटनों में दूरी बनाते हुए अपनी कमर को नीचे लाएँ । पेट की मांसपेशियों को कड़ा रखते हुए चार-पाँच बार कमर को नीचे-ऊपर करें । गर्भावस्था में व्यायाम फायदेमंद होते हैं लेकिन प्रसव के बाद इस व्यायाम से पेट की मांसपेशियाँ कड़ी होती हैं और पीठ में लचीलापन आता है ।

दोनों पैरों को सटाकर रखें और दोनों पाँवों के बीच 2 इंच की दूरी रखें । फिर हाथों को सामने सीधे फैलाकर रखें । अब बैठने की कोशिश करें, जैसे कि पीछे कुरसी रखी हुई हो । चार-पाँच बार ऊपर-नीचे इस तरह करें । गर्भावस्था में व्यायाम के जैसे ही इस व्यायाम से भी पैरों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं ।

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About Author:

Post Graduate from Delhi University, certified Dietitian & Nutritionists. She also hold a diploma in Naturopathy.

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