गुहेरी आँख की फुंसी कारण लक्षण एवं ईलाज

आँख में अर्थात पलक के नीचे होने वाली फुंसी को गुहेरी कहा जाता है | गुहेरी नामक यह रोग पलक के बालों के कोषक में संक्रमण के कारण हो सकता है, पलक के नीचे होने वाली फुंसी अर्थात गुहेरी का होने का जो मुख्य कारण होता है वह पलक के बालों पर होने वाला संक्रमण होता है | गुहेरी यानिकी पलक के नीचे होने वाली इस फुंसी का रंग लाल हो सकता है जो  तीन-चार दिन में पीप पड़ने के बाद स्वयं भी फट सकती है । कहने का आशय यह है की पलक के नीचे होने वाली यह फुंसी पीड़ादायक एवं बदसूरत तो ओ सकती है लेकिन यह बहुत अधिक गंभीर नहीं होती इसलिए कुछ घरेलू नुश्खों जैसे ओइनमेंट या गरम सेक से भी इसमें राहत मिल सकती है | इस पलक के नीचे होने वाली फुंसी के कारण यदि रोगी के आँखों की दृष्टी में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन दिखाई दे और उपर्युक्त बताई गई घरेलु नुश्खों से कोई असर न हो रहा हो तो गुहेरी से पीड़ित व्यक्ति को तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए |

गुहेरी -palak-ke-neeche-ki-phunsi

गुहेरी अर्थात पलक के नीचे फुंसी होने के कारण:

  • अधिकतर तौर पर यह बड़े लोगों में स्टेफाईलोकोकस नामक जीवाणु के संक्रमण से होती है ।
  • इसके अलावा गुहेरी मधुमेह, कमजोर क्षीण रोगी व उन व्यक्तियों में भी अधिक देखने को मिलता है जो अपने भोजन में कार्बोहाइड्रेड ज्यादा लेते हैं ।
  • उन व्यक्तियों में अधिक हो सकती है जिन्हें दृष्टि की कमजोरी हो ।
  • ऐसे लोग जो स्वच्छता का ध्यान न रखते हों को भी गुहेरी हो सकती है |

गुहेरी अर्थात पलक के नीचे की फुंसी के लक्षण

गुहेरी अर्थात पलक के नीचे की फुंसी होने के मुख्य लक्षण इस प्रकार से हैं |

  • रोगी की पलकों में तीव्र पीड़ा के साथ भारीपन व गर्मी का अहसास ।
  • जिस पलक में गुहेरी होती है उस पलक में सूजन व ललाई आ जाती है ।
  • जिस बिन्दु पर होती है वहां पर छूने से बहुत दर्द भी होता है ।
  • सम्पूर्ण पलक के किनारे पर द्रवजन्य शोथ पाया जाता है ।
  • रोमक के आधार के निकट एक सफेद पस वाला बिंदु बन जाता है ।
  • तीन-चार दिन बाद फुसी के पक जाने के बाद मवाद निकल जाने से, रोगी को आराम मिलता है ।

गुहेरी का ईलाज (Treatment):

  • प्रभावित पलक की दिन में दो तीन बार कपड़ा गर्म करके सिकाई की जा सकती है |
  • उस पलक अर्थात प्रभावित क्षेत्र में जेन्टामाइसिन की बूंदे दिन में चार बार चिकित्सक की सलाह पर डाली जा सकती हैं इसके अलावा रात को सोते समय मरहम भी लगाई जा सकती है | मरीज डॉक्टर की सलाह पर दिन में चार बार कैप्सूल एम्पीसिलीन 250 मिली ग्राम ले सकता है |
  • पस बन जाने पर डॉक्टर द्वारा प्रभावित पलक के बाल को खींच कर बाहर निकाला जा सकता है या छोटा सा चीरा निकालकर पस निकालकर उसपे मलहम पट्टी लगाई जा सकती है |

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