चिकन पॉक्स के कारण लक्षण एवं ईलाज

चिकन पॉक्स को कई अन्य नामों जैसे छोटी चेचक, छोटी माता, बेरीसेला इत्यादि नामों से भी जाना जाता है | चिकन पॉक्स नामक यह रोग एक बेहद ही तीव्र संक्रामक रोग है, और अधिकतर तौर पर इस तरह का यह रोग बच्चों को अपना शिकार बनाता है | इस बीमारी के शुरूआती दौर में सिर में सिरदर्द एवं बुखार होता है | और उसके बाद शरीर पर पानी वाले छोटे छोटे दाने निकल आते हैं |

चिकन पॉक्स karan lakshan ilaj

चिकन पॉक्स होने के कारण:

चिकन पॉक्स के होने का मुख्य कारण एक वायरस जिसे herpes varicella zoster कहा जाता है होता है | जहाँ तक इस वायरस के फैलने की बात है यह हवा, थूक, छींक या रोगी के कपड़े, विस्तर पर लगे फोड़े फुंसियों के तरल के संपर्क में आने से भी हो सकता है | कहने का आशय यह है की चिकन पॉक्स नामक यह बीमारी एक संक्रामक रोग है जो रोगी के छींकने, खांसने या उपर्युक्त अन्य कारणों से फैलती है | कहने का आशय यह है की इस रोग को पैदा करने वाले वायरस का संक्रमण रोगी के मुंह से  निकले छोटे-छोटे बिन्दु कणों से फैलता है । जो बड़ों के अपेक्षा बच्चों को अपना शिकार अधिक बनाता है | चिकन पॉक्स नामक यह रोग एक बार होने के बाद दुबारा नहीं होता है ।

चिकन पॉक्स या छोटी चेचक होने के लक्षण (Symptoms)

चिकन पॉक्स या छोटी चेचक के अधिकांश लक्षण शुरू में धीमे व कुछ समय के लिए ही होते हैं । लेकिन इसके बावजूद कुछ प्रमुख लक्षणों की लिस्ट निम्नवत है |

  • इस रोग के शुरुआत दौर में बुखार, हाथ-पैरों में दर्द हो सकता है |
  • शुरुआत में उल्टियाँ भी हो सकती है |
  • अधिकतर स्थितियों में 24 घंटे के दौरान बिना किसी लक्षण के शरीर पर दाने निकल आते हैं |
  • चिकन पॉक्स में यह दाने सर्वप्रथम पीठ उसके बाद पेट पर, चेहरे पर और अंत में धीरे-धीरे हाथ-पैरों पर भी फैल जाते है ।
  • यह दाने मध्यकाल पर अधिक होते हैं और आरम्भ में इन दानों के निशान मात्र होते हैं जो कुछ ही घंटों में छालों का रूप ले लेते हैं |
  • उसके बाद इन छालों में मवाद पड़ जाती है और ये छाले इतने नरम होते हैं कि कपड़े के स्पर्शमात्र से भी फट जाते हैं ।
  • रोगी को इन दानों में बहुत खुजली होती है, तक़रीबन एक सप्ताह में छाले सूखने पर पपड़ी सी बन जाती है इस प्रकार के यह फफोले अलग-अलग निकलते हैं ।

चिकन पॉक्स की पहचान कैसे करें

चिकन पॉक्स की यदि हम बात करें तो दानों का निकलना व फफोले का रूप लेना ही इसकी पहचान है | शरीर पर उभरे दानों का फफोले के रूप में परिवर्तित हो जाने के अलावा इसमें मरीज की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने से अन्य बैक्टीरिया द्वारा किए गए आक्रमण के परिणाम स्वरूप दूसरे लक्षण भी प्रकट हो सकते हैं । इनमे मुख्य निम्न हैं |

  • चिकनपाक्स न्यूमोनिया हो सकता है
  • एनसेफेलाइटिस जिसमे सिरदर्द, गर्दन अकड़ जाना, उल्टी, बेचैनी, दौरे पड़ कर कोमा में चले जाना कभी-कभी पक्षाघात भी हो सकता है ।

चिकन पॉक्स का ईलाज (Treatment of chicken pox in Hindi):

चिकन पॉक्स नामक यह बीमारी कुछ समयावधि अर्थात 11 से 21 दिनों के अन्दर अन्दर कुछ सावधानियां बारात कर अपने आप ठीक हो जाती है | कहने का आशय यह है की इस तरह की बीमारी के लिए दवाओं से अधिक आवश्यकता सावधानियों की होती है | हालांकि चिकन पॉक्स के दौरान बुखार आने पर डॉक्टर की सलाह पर paracetamol  गोली का इस्तेमाल किया जा सकता है | इसके अलावा जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं यह अपने आप ठीक हो जाने वाला रोग है, इसलिए मरीज एवं मरीज के परिवार वालों को सिर्फ सावधानियां बरतने की आवश्यकता होती है |

  • मरीज को घर के अन्य सदस्यों से दूर रहना चाहिए |
  • प्रभावित व्यक्ति को भरपूर आराम करना चाहिए |
  • शरीर के फफोलों को स्पंज कर मरीज को नियमित रूप से कपड़े पहनाएं |
  • रोगी को आहार के तौर पर साफ़म स्वच्छ, ताजा भोजन दें |
  • यदि बच्चे को चिकन पॉक्स हुआ है तो उसे खुजलाने से मना करें |
  • बहुत अधिक खुजली होने पर डॉक्टर की सलाह पर Avil की गोली दी जा सकती है |
  • इसके अलावा खुजली वाले स्थल पर डॉक्टर की सलाह पर ही calamine lotion लगाया जा सकता है |
  • यदि चिकन पॉक्स के साथ द्वितीयक संक्रमण भी है तो डॉक्टर द्वारा रोगी को उपयुक्त एंटी बायोटिक दी जा सकती हैं |

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