टिटनेस के कारण, लक्षण , प्रकार एवं ईलाज की जानकारी |

टिटनेस नामक इस बीमारी का नाम शायद सभी ने कभी न कभी अवश्य सुना होगा जी हाँ जब भी मनुष्य को किसी धातु जैसे लोहे इत्यादि से चोट लगती है तो तुरंत टिटनेस (Tetanus) के इंजेक्शन लगाने को कहा जाता है | ताकि भविष्य में आने वाले इन्फेक्शन एवं सुजन इत्यादि से बचा जा सके टिटनेस नामक इस रोग को अन्य नामों जैसे धनुस्तम्भ, लाक जाँ, हनस्तम्भ,धनुर्वात इत्यादि के नाम से भी जाना जाता है । इस रोग की यदि हम पैदा होने की बात करें तो यह मुखतः ‘क्लास्ट्रीडियम टिटेनाई’ (clostridium tetani bacteria ) द्वारा होता है | इस बैक्टीरिया का जन्म मनुष्य के शरीर में किसी जख्म द्वारा हो सकता है अर्थात इस तरह का बैक्टीरिया मनुष्य के शरीर में जख्म द्वारा प्रविष्ट हो सकता है | यह बैक्टीरिया घाव में विष पैदा करने में सहायक होता है जिससे अधिकतर तौर पर टिटनेस नामक यह रोग तीव्र संक्रामक एवं प्राणघातक ही होता है । टिटनेस के रोग में जबड़ों का आपस में भिंच जाना, शरीर के सभी मांसपेशियों में ऐंठन, शरीर का धनुष की तरह पीछे की ओर मुड़ जाना, दौरे पड़ना व श्वासनीय ऐंठन हो जाता है । इस रोग की अवधि 2-14 दिनों तक की हो सकती है |

टिटनेस कारण लक्षण उपचार

टिटनेस के प्रकार (Types of tetanus):

टिटनेस मुख्यतः चार प्रकार होता है |

  1. स्थानीय टिटनेस (Local Tetanus):

इस प्रकार का यह टिटनेस सबसे साधारण टिटनेस होता है इसमें घाव या उसके आस पास के क्षेत्रों से जुड़ी मांसपेशियों में कसावट या ऐंठन के साथ दर्द महसूस होता है |

  1. मष्तिष्क टिटनेस (Head Tetanus):

जैसा की नाम से ही विदित है यह प्रमुख रूप से सिर या मष्तिष्क में चोट के कारण या कान के संक्रमण के बाद दो से तीन दिनों के अन्दर तेजी से फैलता है | इस प्रकार का यह टिटनेस एक साथ कई मांसपेशियों को प्रभावित कर सकता है इसमें चेहरे की मांसपेशियां भी प्रभवित होती हैं और जबड़ा ऐंठ जाता है | इस प्रकार का यह टिटनेस भी कुछ समय बाद साधारण टिटनेस में परिवर्तित हो सकता है |

  1. नवजात टिटनेस (Neonatal tetanus):

नवजात का अर्थ नवजात शिशु यानिकी जन्मजात से है, और इसलिए नवजात टिटनेस से अभिप्राय उस टिटनेस से लगाया जा सकता है जो नवजात शिशुओं में पाया जाता है | यह अक्सर बच्चे में इम्युनिटी की कमी एवं नाभि के संक्रमण एवं ऐसे बच्चों को होता है जिन्हें गर्भ के दौरान टीके न लगे हों |

  1. सामान्य टिटनेस (General Tetanus):

टिटनेस का यह प्रकार सबसे सामान्य इसलिए है क्योंकि बहुतायत तौर पर यही प्रकार होता है यद्यपि यह टिटनेस भी मनुष्य के सिर से शुरू होकर अन्य भागों की ओर अग्रसित होता है | इसमें भी प्रभावित व्यक्ति के जबड़े में ऐंठन शुरू होती है जिससे जबड़ा बंद हो जाता है | इसके अलावा चेहरे की मांसपेशियों, गर्दन, छाती और टांगों में भी जकड़न महसूस होती है | इस दौरान व्यक्ति को पसीना आना, ब्लड प्रेशर बढ़ जाना इत्यादि समस्या भी हो सकती हैं |

टिटनेस के कारण (Cause of Tetanus)

  • टिटनेस नामक इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण एक जीवाणु जिसे clostridium tetani कहते हैं होता है |
  • जहाँ तक इस प्रकार के जीवाणु के पाए जाने की बात है यह जीवाणु मिट्टी, खाद, घरेलू पशुओं और मनुष्य की छोटी आंत में पाया जाता है ।
  • प्रसव के बाद नवजात शिशु की नाल यदि गंदे अर्थात दूषित औजार से काटी जाए तो टिटनेस होने की संभावना रहती है ।
  • ऐसे बच्चे जिनका कान बह रहा हो यदि उनके कान को किसी पिन या माचिस से साफ़ किया जाय तो इस तरह के रोग होने की संभावना रहती है |
  • ऐसी महिलाएं जिनके प्रजनन अंगों की जांच किसी गंदे या दूषित औजार से की जाए उनमे भी टिटनेस होने का ज्यादा खतरा रहता है ।
  • गहरी चोट लग जाना भी इसके होने का एक कारण हो सकता है ।

टिटनेस के लक्षण (Symptoms of Tetanus in Hindi):

इस रोग के मुख्य लक्षण कुछ इस प्रकार से हैं |

  • टिटनेस में शरीर की मांसपेशियों में अकड़न उपर से नीचे की ओर बढ़ती है अर्थात सिर से पैरों की ओर बढती है जबकि, टाक्सिन अर्थात विष तंत्रिका तंत्र में नीचे से ऊपर की ओर बढ़ता है ।
  • सबसे पहले मुहं की मासपेशियों में अकडन आने से मुख खुल नहीं पाता इस कारण बोलने व निगलने में कठिनाई होती है ।
  • टिटनेस में दोनों जबड़े बंद होने से दांत भी आपस में भींच जाते हैं ।
  • गले के पिछले भाग, पेट व हाथ-पैर की मांसपेशियों में आक्षेप उत्पन्न होता है ।
  • उपर्युक्त लक्षणों से युक्त रोगी पीठ की ओर धनुष के समान मुड़ जाता है ।
  • श्वासतंत्र की पेशियों में ऐंठन आने से रोगी द्वारा श्वास नहीं लिया जाता है, इस स्थिति में रोगी की मृत्यु हो जाती है ।
  • टॉक्सिन यानिकी विष शरीर में तीन सप्ताह तक सक्रिय रह सकता है । पहला सप्ताह समाप्त होते-होते बीमारी पूर्ण रूप धारण कर लेती है व दूसरे सप्ताह में जस की तस स्थिति बनी रहती है | इस रोग के अंत में रोगी या तो ठीक हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है ।
  • टिटनेस नामक इस रोग के लक्षण जितनी जल्दी शुरू होते हैं, रोगी के ठीक होने की संभावना उतनी ही कम होती है |

टिटनेस का ईलाज (Treatment of Tetanus of Hindi)

रोगी में टिटनेस रोग की पुष्टि होने पर उसे अस्पताल में भर्ती करा देना चाहिए |
चिकित्सक द्वारा  घाव को ऊपर से भली प्रकार साफ करके, एण्टीसेप्टीक डेसिंग की जा सकती है

इसके अलावा चिकित्सक द्वारा  इंजे. बैंजाइल पेनिसीलिन,इत्यादि  कुल्हे की मांसपेशी में दी जा सकती हैं । यदि मरीज को चिकित्सक द्वारा इससे संवेदनशील पाया जाता है तो टेट्रासाइक्लीन या इरीथ्रोमाइसीन देते हैं ।

  • चिकित्सक द्वारा Anti Tetanus syrum (TS.) की उपयुक्त यूनिट IV द्वारा (आई. वी.) दी जा सकती हैं । प्रति सप्ताह उचित मात्रा इनकी दी जा सकती है |
  • रिफ्लेक्स स्पाज्म को नियंत्रित करने के लिए तीव्र आक्रमण में प्रोमेजिन क्लोर प्रति 6 घंटे बाद, डायजीपाम प्रति 6 घंटे बाद और पैरेल्डिहाइड प्रति 6 घंटे बाद उपयुक्त मात्रा में दी जा सकती हैं । रोगी को शांत व अंधेरे कमरे में रखा जा सकता है ।
  • रायलस ट्यूब द्वारा प्रोटीनयुक्त आहार दिया जा सकता है ।
  • यदि रोगी को श्वास लेने में परेशानी हो तो ‘ट्रेकियोस्टोमी” कर देते हैं ।
  • शरीर में तरल की कमी होने पर डेक्सट्रोज सेलाइन दे सकते हैं ।
  • रोग से बचाव के लिए घाव बनते ही टिटनेस टाक्साइड का टीका दे सकते हैं ।

तीव्र आक्षेप से पृष्ठीय स्पाइन (Dorsal spine) में फ्रैंक्चर हो जाता है | टिटनेस रोग में बिना चिकित्सा के रोगी की अन्त में मृत्यु हो जाती है । क्योंकि श्वासतंत्र की पेशियों में ऐंठन होने से रोगी श्वास नहीं ले पाता ।

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