दांतों की संरचना प्रकार एवं कार्य teeth structure function

दांतों की बनावट या दांतों की संरचना की यदि हम बात करें तो सामान्य तौर पर  दांतों के जबड़े के बाहर दिखने वाले हिस्से को ही लोग दांत समझने लगते हैं लेकिन वास्तविकता यह है की दांतों की संरचना में दांत का जितना हिस्सा जबड़े के बाहर रहता है उससे कहीं अधिक हिस्सा जबड़े के अन्दर रहता है |

दांतों की संरचना

दांतों की संरचना (Structure of teeth in Hindi):

दांतों की संरचना में इस प्रकार से एक दांत को लगभग तीन हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है |

  1. शिखर : यह दंतवेष्ठ से बाहर निकला होता है इसे दन्त मुकुट (Crown) के नाम से भी जाना जाता है ।
  2. ग्रीवा: यह शिखर और मूल के मध्य संकुचित भाग होता है जो मसूढ़ों के अन्दर घुसा रहता है ।
  3. मूल: यह दांतों की संरचना में सबसे आखिरी हिस्सा होता है जो हनु की अस्थियों से लगा होता है इसे दांत की जड़ अर्थात Tooth Root भी कहा जाता है ।

दांतों की बनावट अर्थात दांतों की संरचना पर बात करते हुए हमें यह भी जान लेना बेहद जरुरी है की हमारा प्रत्येक दांत मुख्य रूप से तीन परतों से मिलकर बना हुआ होता है |

Enamel Layer : दांतों की संरचना में दांतों की सबसे उपरी परत को इनेमल परत कहा जाता है यदि एक निरोगी अर्थात स्वस्थ जाँच की हम बात करें तो उसमे यह परत सफ़ेद एवं चमकीली होती है | यह परत दांतों को रोग से भी बचाती है और उन्हें सुन्दर एवं आकर्षक बनाये रखती है |

Dentine Layer: दांत की यह परत इनेमल परत के नीचे विद्यमान होती है |

Bony Layer: दांतों की यह परत सबसे निचले वाली परत है |

दांतों की तीन तीन परतें होने के पश्चात् भी प्रत्येक दांत अन्दर की ओर से खोखले होते हैं दांतों के इस खोखले हिस्से को पल्प कैविटी कहा जाता है और इनके अंदर ही दन्त मज्जा विद्यमान होती है जिसकी अति सूक्ष्म नाड़ियों के माध्यम से दांतों में रक्त संचार होता है |

दांतों के प्रकार:

उपर्युक्त वाक्यों में हमने दांतों की संरचना को संक्षेप में समझने की कोशिश की है आइये आगे हम जानने की कोशिश करेंगे दांतों के प्रकार के बारे में | सामान्य तौर पर दांतों के प्रकार की यदि हम बात करें तो दांत दो प्रकार के होते हैं  दूध के दांत या अस्थायी दांत और स्थायी दांत या अन्न के दांत

 दूध के दांत या अस्थायी दांत:

दूध के दांत 6-7 माह की आयु में निकलने लगते हैं और ढाई साल में निकल आते हैं । दूध के दांत संख्या में कुल 20 होते हैं । सब बच्चों में एक ही समय पर दांत नहीं निकलते । एक वर्ष की आयु में 6, डेढ़ वर्ष की आयु में 16 और ढाई वर्ष की आयु में 20 दांत निकलते है । ये दूध के दांत 5-6 वर्ष की आयु में गिरने लग जाते हैं और इनके स्थान पर अन्न के दांत अर्थात स्थायी दांत आने लगते हैं ।

  • 6 से 7 मास तक के बच्चे के दो दांत जिन्हें काटने वाले निचले बीच के दांत कहा जाता है निकलते हैं |
  • 8 से 9 मास तक चार दांत जिन्हें काटने वाले उपरी बीच के दांत कहा जाता है निकलते हैं |
  • दसवें महीने में दो दांत काटने वाले निचले दांत निकलते हैं |
  • 12 से 14 वे मास तक अगले निचले और ऊपर की चार दाढ़ के दांत निकलते हैं |
  • 16 से 18 मास तक नीचे और ऊपर की चार किलियाँ निकलती हैं |
  • 2 वर्ष की आयु में पिछली और ऊपर की चार दाढ़ के दांत निकलते हैं |

स्थायी दांत अन्न के दांत:

दांतों की संरचना में दूध के 20 दांत दो या ढाई वर्ष की आयु तक पूरी तरह निकल आते हैं फिर 6 वर्ष की आयु के लगभग इन दांतों के स्थान पर स्थायी दांत (अन्न के दांत) आ जाते हैं । इनके निकलने में अक्सर कोई कष्ट नहीं होता । ये प्रत्येक जबड़े में 16 होते हैं, और दोनों जबड़ों में दांत निकलते हैं ।

  • छठे सातवें साल तक काटने वाले बीच के चार स्थायी दांत निकलने लगते हैं |
  • आठवें साल में काटने के बीच में चार स्थायी दांत और निकलने लगते हैं |
  • दसवें ग्यारहवें साल में छोटी दाढ़ के आठ दांत निकलने लगते हैं |
  • बारहवें साल में दाढ़ के चार दांत और निकलने लगते हैं |
  • पन्द्रहवें साल में बड़ी दाढ़ के आठ दांत और निकलने लगते हैं |
  • अटठारह से पच्चीस साल में दाढ़ के चार दांत और निकलने लगते हैं |

अन्न के दांतों की संख्या 32 होती है, ये 16 ऊपर, 16 नीचे होते हैं । 5-6 साल के बाद दूध के दांतों के स्थान पर ये नए अन्न के दांत आने लगते हैं और 14 वर्ष की आयु तक ‘प्रज्ञादंत’ को छोड़कर सभी दांत आ जाते हैं । प्रज्ञादंत (अक्कल दाढ़) 16 साल के बाद निकलती है । और इनके निकलते समय दांतों में कुछ दर्द सा हुआ करता है । कभी-कभी यह 25-30 साल की आयु तक भी नहीं निकलती है ।

दांतों के कार्य (Function of teeth) :

हमारे दांत बहुत से महत्वपूर्ण कार्य सम्पादित करते हैं, जिनमें से कुछ कार्य इस प्रकार से हैं  दांतों काम भोजन को कुचलना, पीसना, काटना इत्यादि होता है । दांतों के इन कार्यों को चवर्ण क्रिया या चबाने की क्रिया कहा जाता है | इस क्रिया को करने से अर्थात चबाने से भोजन पीस जाता है | इसके अलावा दांत जीभ को बोलने में सहायता भी पहुंचाते हैं, दांतों की संरचना में दांत ही ऐसे अंग है जो भोजन को गीला करके उसकी एक गोली सी बनाकर उसे गले के नीचे अन्न नली में धकेल देते हैं, ये अपनी एक रासायनिक वस्तु टालिन द्वारा अपचनशील श्वेतसार को पाचनशील में बदल देते हैं क्योंकि यह कार्य अमाशय नहीं कर सकता इसलिए श्वेतसार के पाचन के लिए भोजन में इसका मिलना आवश्यक है |

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