नपुसंकता नामर्दी के कारण लक्षण एवं घरेलू उपचार

नपुसंकता नामर्दी की बात करें तो यह एक ऐसा रोग है जिसमे यह शारीरिक दुर्बलता किसी मानसिक कारक के कारण आती है | जैसे यदि किसी व्यक्ति के अंतर्मन में अन्दर अन्दर किसी बात को लेकर कोई द्वन्द चल रहा हो, या बहुत अधिक स्ट्रेस लेने के कारण भी पुरुषों में नपुसंकता नामर्दी यानिकी Impotency घर कर सकती है | यद्यपि इस रोग को दो स्थितियों में विभाजित किया जा सकता है | इस रोग में एक वह स्थिति होती है जब किसी पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं की कमी हो, या फिर उसके वीर्य में शुक्राणु हो ही नहीं, ऐसी स्थिति में वह पुरुष संतान पैदा करने में असमर्थ होता है अर्थात संतान पैदा करने का सामर्थ्य उसमे नहीं होता, भले ही वह अपनी जीवनसंगिनी को रति क्रीड़ा में बेहद संतुष्ट कर पाने में समर्थ हो, लेकिन किसी पुरुष में पिता न बनने वाली स्थिति नपुसंकता नामर्दी कहलाती है | दूसरी स्थिति में नामर्दी से ग्रसित पुरुष के यौनांग में उत्तेजना आती ही नहीं है, या फिर कभी कभी आती भी है तो इसका समापन भी बेहद जल्दी हो जाता है जिस कारण वह पुरुष अपनी जीवन संगिनी या जिससे भी वह समबन्ध स्थापित कर रहा हो को संतुष्ट कर पाने में असमर्थ होता है पुरुषों की यह स्थिति भी नपुसंकता ही कहलाती है | दूसरी स्थिति में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या है की नहीं क्योंकि वह अपनी सहचरी के साथ रतिक्रिया करने में असमर्थ नज़र आता है | अधिकतर मामलों में इस रोग की यह दोनों स्थितियां एक साथ होती हैं इसलिए किसी एक बीमारी का ईलाज करने में प्रयोग की जाने वाली दवाइयां दूसरे रोग के ईलाज में भी सहायक सिद्ध होती हैं यही कारण है की इन दो रोगों का अलग अलग वर्णन शास्त्रों में भी नहीं मिलता है |

नपुसंकता नामर्दी

नपुसंकता नामर्दी का कारण (Cause of Impotency in Hindi):

हालांकि नपुंसकता नामर्दी का कारण दोनों शारीरिक एवं मानसिक में से कुछ भी हो सकता है लेकिन कुछ मुख्य कारक निम्न हैं जो इस रोग के होने के खतरे को बढ़ावा देते हैं |

  • ऐसे लोग जो अफीम, चरस, शराब, हेरोइन, स्मैक इत्यादि नशीले पदार्थों का सेवन करते हों उनमे यह रोग होने का खतरा अधिक रहता है |
  • किशोरावस्था में अत्यधिक हस्तमैथुन भी इसका एक कारण हो सकता है |
  • यौवनकाल में स्त्री प्रसंगों में अधिकाधिक संग्लिप्तता भी एक कारण हो सकती है |
  • ऐसे पुरुष जिनमे लंबे समय से पेट के रोग जैसे कब्ज, अपच, अजीर्ण, वायु प्रकोप एवं अन्य बीमारिया जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा इत्यादि भी नपुसंकता नामर्दी का कारण हो सकते हैं |
  • उपर्युक्त बीमारियों के ईलाज करने हेतु ली जा रही दवाओं के दुष्प्रभाव इत्यादि भी ऐसे कारण हैं जिनसे पुरुषों में कामेच्छा की कमी या कामेच्छा होने के बावजूद पौरुष में उत्तेजना न आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं |
  • चूँकि वर्तमान में इन्जेक्शन, कैपसूल, गोलियां व पीने वाली एलोपैथिक दवाओं का प्रचलन नशे के रूप में अधिक बढ़ रहा है इसलिए पुरुषों में इस बीमारी के होने की संभावना भी उतनी ही अधिक बढ़ रही है ।
  • जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में पहले भी बता चुके हैं की नपुसंकता नामर्दी के मानसिक कारण भी हो सकते हैं इनमे मुख्य रूप से व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा, सांसारिक परेशानियों से पैदा होने वाला तनाव, घर या ऑफिस में होने वाले क्लेश से उत्पादित डिप्रेशन हैं |
  • इसके अलावा यदि स्त्री खूबसूरत एवं आकर्षक न हो, रतिक्रीड़ा में एक्टिव रूप से शामिल न हो तो यह भी नपुंसकता का एक कारण बन सकता है |
  • अक्सर देखा गया है जिन पुरुषों के अवैध समबन्ध होते हैं तो उन्हें हमेशा इस बात की चिंता रहती है की कहीं उनके इस अवैध समबन्ध के बारे में उनकी बीवी या समाज को पता न चल जाय इस कारण उनमे भय, चिंता, आशंका घर कर जाती है जो नामर्दी का एक कारण बन सकती है ।
  • ऐसे व्यक्ति जो अपनी संगिनी को संतुष्ट कर पाने में सक्षम तो होते हैं लेकिन वीर्य में शुक्राणु के अभाव के कारण संतान पैदा करने में समर्थ नहीं होते, इनकी नपुसंकता नामर्दी का मुख्य कारण मानसिक न होकर शारीरिक होता है |
  • ऐसे लोग जो किशोरावस्था से ही अप्राकृतिक मैथुन में लिप्त होते हैं उनके वीर्य में बाद में शुक्राणु की कमी हो सकती है |
  • ऐसे लोग जो अपनी जवानी में अधिकाधिक मैथुन कार्य में लिप्त तो होते हैं लेकिन फिर पौष्टिक भोजन नहीं करते हैं में भी इस तरह की समस्या उत्पन्न हो सकती है |
  • इसके अलावा ऐसे लोग जिन्हें देर या लम्बे समय तक अत्यधिक गर्मी वाले स्थानों में कार्य करना पड़ता है, या एक्स रे इत्यादि के रेडीएशन से भी वीर्य में शुक्राणुओं की कमी हो सकती है |
  • जहाँ तक वीर्य में शुक्राणुओं का बिलकुल न होने का कारण है ये विभिन्न कारण जन्मजात भी हो सकते हैं | इसके अलावा कनफेड़ इत्यादि रोग होने के बाद भी यह स्थिति पैदा हो सकती है |

नपुसंकता नामर्दी के लक्षण (Symptoms of Impotency in Hindi):

नपुसंकता नामर्दी के कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार से हैं |

  • पुरुष के वीर्य में शुक्राणुओं की मात्रा में कमी होना
  • वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं का प्रतिशत बेहद कम होना नपुंसकता के लक्षण हैं ।
  • वीर्य में इतने शुक्राणुओं का न होना, जिससे व्यक्ति संतान पैदा कर सके |
  • कामेच्छा में कमी होना |
  • रति क्रीड़ा में अक्षम होना |
  • स्त्री के स्पर्श, आलिंगन व मधुर व्यवहार के बावजूद भी लिंग में बिल्कुल भी उत्तेजना न होना भी नामर्दी के लक्षण हैं |
  • लिंग में उत्तेजना होने के बावजूद इसका एकदम से समाप्त हो जाना भी नपुसंकता के लक्षण हैं |

 नपुसंकता नामर्दी का घरेलू ईलाज (Treatment of Impotency Hindi):

हालांकि यदि नपुसंकता नामर्दी नामक यह रोग दूसरी स्थिति से जुड़ा हुआ हो अर्थात जिसमे पुरुष के लिंग में उत्तेजना नहीं आती है तो इसका ईलाज साइकोथेरेपी के माध्यम से किया जाता है इसमें ग्रसित व्यक्ति में आत्मविश्वास जगाने की भरपूर कोशिश की जाती है की उसे किसी प्रकार की कोई बीमारी या कमजोरी नहीं है, ताकि वह मैथुन क्रिया को संपन्न करने में सक्षम हो सके | ऐसे लोग जो अपनी किशोरावस्था में अप्राकृतिक मैथुन में शामिल रह चुके हैं उनमे प्रथम बार यौन संबंध स्थापित करते समय डर बना रहता है कि वे यौन क्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कर पाएंगे या नहीं क्योंकि ऐसे लोग आत्मविश्वास की कमी के कारण पहली बार यौन क्रिया में असफल हो सकते हैं | इस कारण उनके मन में यह बात घर कर सकती है की वे इस कार्य को करने के योग्य नहीं हैं | शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्तियों का ईलाज केवल मनोचिकित्सा के द्वारा ही संभव होता है, शारीरिक रूप से कमजोर होने की स्थिति में निम्नलिखित घरेलू ईलाज के टिप्स अपनाये जा सकते हैं |

  • नपुसंकता नामर्दी से ग्रसित व्यक्तियों को खाली पेट सुबह अंजीर के पके हुए फल खाने चाहिए ।
  • नामर्दी का दूसरा घरेलू ईलाज करने के लिए सबसे पहले सूखे अंजीर, किशमिश, छोटी इलायची के दाने, बादाम की गिरी, पिस्ता, चिरोंजी, 20-20 ग्राम मिस्री व केशर 2 ग्राम ले लें फिर इन सबको अच्छी तरह बारीक कूटकर पीस लें, अब इसे एक कांच के पात्र में डाल दें, अब इस कांच के पात्र में गाय का घी डालें और नित्य दस दिनों तक इस मिशन को धूप दिखाएँ उसके बाद दो दो चम्मच मिश्रण दूध के साथ सुबह शाम लिया जा सकता है |
  • नपुसंकता नामर्दी का घरेलू ईलाज करने के लिए सर्वप्रथम सूखे अंजीर, शतावरी, सफेद मूसली, किशमिश, चिरोंजी, बादाम की गिरी, पिश्ता, चिरौजी, सालम मिस्री, गुलाब के फूल, शीतल चीनी इत्यादि की 100-100 ग्राम मात्रा ले लें | अब इन सबको बारीक से अच्छी तरह पीस लें और चीनी की चाशनी में अच्छी तरह पका लें । जब यह जमने योग्य हो जाता है तो इसमें 10-10 ग्राम लौह भस्म, केशर, अभ्रम भस्म एवं प्रवाल भस्म डालकर अच्छी तरह मिला लिया जाता है | उसके बाद इसे सुबह शाम दो दो चम्मच दूध के साथ लिया जाता है |
  • शहद के साथ तुलसी और गिलोय का एक-एक चम्मच स्वरस सुबह शाम लेने से भी नामर्दी दूर होती है |
  • शहद एवं तुलसी के पत्तों का स्वरस तैयार कर लें फिर इसमें बंगभस्म को घोटकर मूंग के दानों के बराबर की गोलियां बनाएं व एक एक गोली सुबह-शाम दूध के साथ लेते रहें ।
  • इस विधि में विदारी कन्द एवं असगध नागौरी (छोटी असगन्ध) को बराबर मात्रा में अच्छी तरह कूट लें | उसके बाद इस चूर्ण को सुबह शाम एक एक चम्मच सेवन करें ध्यान रहे इस चूर्ण का सेवन मिश्री मिले हुए दूध के साथ किया जाना चाहिए |
  • नपुसंकता नामर्दी का घरेलू ईलाज करने के लिए बड़ा गोखरू, गिलोय, विदारी कंद, सफ़ेद मूसली , मुलेठी एवं लौंग बराबर मात्रा में ले लें, उसके बाद इसका चूर्ण बनाकर इस चूर्ण को आधा आधा चम्मच सुबह शाम दूध के साथ ले सकते हैं |
  • यह घरेलू उपचार की दवाई तैयार करने के लिए काले धतूरे के बीज छाया में सुखाये जा सकते हैं एवं बारीक पीस कर शहद के साथ घोटे जा सकते हैं ।उसके बाद इनकी उड़द की दाल के बराबर की गोलियां बनाई जा सकती हैं । और अंत में इन गोलियों को सुबह शाम एक-एक गोली दूध के साथ लिया जा सकता है ।
  • 200 ग्राम सफेद मूसली, 100 ग्राम शीतल चीनी, 50 ग्राम वंशलोचन व 50 ग्राम छोटी इलायची के बीज को लेकर कूट लें । उसके बाद इनमे 20-20 ग्राम अभ्रक भस्म व प्रवाल भस्म मिला लें । बाद में इसे एक-एक ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ लिया जा सकता है ।
  • नपुसंकता नामर्दी का अगला घरेलू ईलाज का नुस्खा कहता है की सर्वप्रथम उड़द की दाल व कौंच के बीज समान मात्रा में ले लें और फिर इन्हें पीसकर इनका चूर्ण बना कर रख लें । अब 50-100 ग्राम की मात्रा में सुबह व शाम दूध में खीर की तरह पका कर खाएं ।
  • दस दस ग्राम शुद्ध शिलाजीत व छोटी पीपल का चूर्ण ले लें और उसमें 1-1 ग्राम बंगभस्म व प्रवालभस्म मिला लें । उसके बाद इस मिश्रण को 1 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करें ।
  • नागबला, शतावर, सफेद मूसली, पुनर्नवा, असगन्ध, व गोखरू इन सभी को बराबर की मात्रा में ले लें और इनका चूर्ण बना लें ।और इस चूर्ण को मिश्री मिले हुए दूध के साथ एक एक चम्मच सुबह शाम लें |
  • छोटी पीपल, काली मूसली, सफेद मूसली, इलायची के बीज, कोंच के बीज, असगध, शतावर, तालमखाना इत्यादि को बराबर मात्रा में ले लें उसके बाद इसका चूर्ण बना लें | और इस चूर्ण को बजी मिश्री मिले हुए दूध के साथ सुबह शाम एक एक चम्मच लें |
  • रति क्रीड़ा में संलिप्त होने से पहले अर्थात समागम से पहले अम्बर को तिल के तेल में मिला लें, और उसके बाद लिंग पर इसका लेप करें इससे उत्तेजक शक्ति बढती है |
  • गुलाब के परफ्यूम में कपूर मिला कर समागम अर्थात रतिक्रीड़ा से 1 घण्टा पहले इन्द्रिय यानिकी लिंग पर लेप करने से भी स्तंभन शक्ति में वृद्धि होती है ।

नपुसंकता नामर्दी के लिए आयुर्वेदिक दवाइयां:

  • नपुसंकता नामर्दी के आयुर्वेदिक ईलाज के लिए उपयोग में लायी जाने वाली प्रमुख दवाइयां इस प्रकार से हैं |
  • रतिबल्लभरस
  • शुद्ध शिलाजीत
  • मकरध्वज
  • शतावरी पाक
  • मन्मथ रस
  • मूसली पाक
  • अश्व गंधारिष्ट
  • चन्द्र कला रस
  • लंवगांदी चूर्ण
  • कामचूड़ामणिरस
  • धातु पौष्टिक चूर्ण
  • अभ्रक भस्म
  • शुक्र्बल्ल्भ रस
  • हीरा भस्म
  • स्वर्ण भस्म

नपुसंकता नामर्दी के लिए उपयोग में लायी जाने वाली अन्य औषधियां:

  • डिवाइन आनन्द प्लस कैप्सूल (बी.एम.सी. फार्मा),
  • शुक्र संजीवनी वटी व शिवाप्रवंग स्पेशल (धूतपापेश्वर),
  • मदन विनोद वटिका (झण्डु)
  • एशरी फोर्ट कैपसूल (एमिल)
  • टेन्टैक्स फोर्ट (हिमालय)
  • केशरादिवटी (बैद्यनाथ)
  • पालरिवीन फोर्ट व नियो गोलिया (चरक) आदि ।

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की नपुसंकता नामर्दी का ईलाज मनोचिकित्सकीय के तौर पर भी किया जा सकता है यह व्यक्ति के रोग पर निर्भर करता है की उसे किस प्रकार के ईलाज की आवश्यकता है और कौन सा ईलाज उस व्यक्ति के लिए अधिक प्रभावी रहेगा |

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