नाईट शिफ्ट के नुकसान रात की ड्यूटी सेहत पर डालती है बुरा असर

आज का हमारा विषय नाईट शिफ्ट के नुकसान पर आधारित है, नौकरी के बारे में अनेकों मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ प्रचलित हैं उनमे से ही एक ‘’हाँ जी की नौकरी, ना जी का घर’’ भी बेहद प्रचलित है | लेकिन जब नौकरी एवं स्वास्थ्य में से किसी एक को चुनना पड़ जाय तो हमारे हिसाब से हर कोई पहले स्वास्थ्य को ही चुनेगा क्योंकि यह बात सब जानते हैं की ‘’जान है तो जहान है’’ |  लेकिन हमारे समाज में प्रायः लोगों का यह मानना होता है कि दिन की अपेक्षा रात्रि के शांत वातावरण में एकाग्रचित्त होकर अधिक और अच्छा कार्य किया जा सकता है । हालांकि यह भी सत्य है की चिंतक, वैज्ञानिक और लेखक आदि तो प्रायः रात के समय ही विचार प्रधान कार्य करते हैं । सामान्य कामकाज करने वाले कुछ लोग यह भी सोच लेते हैं कि शाम या रात के समय नौकरी करके पूरे दिन अपने आपको स्वतंत्र रखा जा सकता है और इस प्रकार बचे हुए समय का सदुपयोग किया जा सकता है । इसलिए वे नाईट शिफ्ट के नुकसान को नज़रंदाज़ करके भी नाईट शिफ्ट करते हैं | लेकिन नाईट शिफ्ट करने के कुछ स्वास्थ्य समबन्धी नुकसान हो सकते हैं जिनका जिक्र हम अपने इस लेख में आगे करेंगे लेकिन उससे पहले मनुष्य जीवन में नींद के महत्व को समझ लेते हैं |

नाईट शिफ्ट के नुकसान

नींद का क्या महत्व है?

इसमें कोई संदेह नहीं कि हमारे शरीर और मन को स्वस्थ व सक्रिय बनाए रखने के लिए नींद का उतना ही महत्त्व है, जितना कि पौष्टिक आहार लेने व व्यायाम करने का । आयुर्वेद शास्त्र में कहा गया है कि अनुचित रात्रि जागरण करने, निद्रा के वेग को रोकने से जम्हाई, अंगों में पीड़ा, आलस्य, मस्तिष्क के रोग, आंखों में भारीपन, वात के प्रकोप से शरीर में रूक्षता बढ़ना आदि लक्षण पैदा हो जाते हैं ।

नींद की कमी से होने वाली बीमारियाँ:

नाईट शिफ्ट के नुकसान इसलिए होते हैं क्योंकि व्यक्ति को अपनी नींद पूरी करने का समय शायद दिन में न मिले कहने का आशय यह है की नाइट शिफ्ट की ड्यूटी करने वालों के पूरी नींद न लेने के कारण स्नायु संस्थान पर बहुत बुरा असर पड़ता है । इससे उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन, बैचेनी, झगड़ालू स्वभाव, क्रोध आना, हाथ-पैर लड़खड़ाना, मस्तिष्क की कार्यक्षमता कम होना, एकाग्रता की कमी, किसी काम में मन न लगना, याददाश्त का कमजोर होना, पूरे शरीर में आलस्य, शरीर टूटने की अनुभूति, बदन दर्द, सिर दर्द, भूख कम लगना, भ्रम उत्पन्न होना, काम करने की क्षमता घटना, थकान, शरीर दुर्बल होना, आंखें लाल होकर उनसे पानी गिरना, आंखें भारी होना, उत्साह की कमी, खून की खराबी से त्वचा बेनूर होना, त्वचा पर झुर्रियां, दाग-धब्बे पड़ना, अजीर्ण, माइग्रेन, हृदय रोग होना इत्यादि परेशानियां हो सकती हैं और बुढ़ापा जल्दी आता है ।

नाईट शिफ्ट के नुकसान:

  • नाईट शिफ्ट के नुकसान में सबसे पहला नुकसान तनाव और ह्रदय रोगों से समबन्धित है
  • मास्ट्रिच यूनिवर्सिटी, वाशिंगटन के डॉ. लुडोविक वैन एमेलस्वूर्ट के मतानुसार रात्रि की पाली में काम करने से भारी तनाव पैदा होता है । हृदय की गति खतरनाक ढंग से बढ़ जाती है । यही असामान्य गति हृदय रोग का प्रारंभिक लक्षण होता है, जो भविष्य में हृदय रोगों का कारण बनता है । जिन नाईट शिफ्ट के नुकसान की बात हम कर रहे हैं ये निष्कर्ष उन्होंने रात की पाली में ड्यूटी करने वाले 49 लोगों का अध्ययन करने के बाद पाए ।
  • नींद की कमी से महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है इसलिए इसे भी नाईट शिफ्ट के नुकसान में शामिल किया गया है | डेनमार्क में हुए एक अध्ययन से यह भी पता चला है कि जो महिलाएं रात्रि पाली (नाइट शिफ्ट) में काम करती हैं, उन्हें स्तन कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है । अध्ययन के मुताबिक जिन महिलाओं ने 6 साल से ज्यादा रात्रि पाली में काम किया, उनमें स्तन कैंसर होने की संभावना 70 प्रतिशत ज्यादा पाई गई ।
  • नींद की कमी से आंतों में अल्सर का खतरा भी बढ़ जाता है, उत्तरी इंग्लैंड स्थित न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि रात्रि में काम करने, जागने, भरपूर नींद न लेने से पेट में अल्सर होने का खतरा रहता है । इसलिए इसे भी नाईट शिफ्ट के नुकसान में शामिल किया गया है | उल्लेखनीय है कि पाचन के लिए जरूरी सिडिक गैस्ट्रिक जूस के तेजाबी असर से छोटी आंत की सतही परत को जो नुकसान होता है, उसकी मरम्मत रात को सोते समय ही होती है । मरम्मत करने वाला रसायन टी.एफ.एफ-2 का निर्माण रात में सोते समय सबसे अधिक और दिन में काम के दौरान सबसे कम होता है ।
  • नाईट शिफ्ट के नुकसान में मधुमेह का खतरा भी सम्मिलित है, शिकागो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 23 से 42 वर्ष के 27 स्वस्थ व्यक्तियों का अध्ययन कर बताया कि 8 घंटे से कम सोने वाले व्यक्तियों में इंसुलिन प्रतिरोधकता बढ़ जाती है, जो मधुमेह का खतरा बढ़ाती है । इस अध्ययन में साढ़े पांच से छह घंटे सोने वाले व्यक्तियों में 8 दिन बाद किए गए ग्लूकोज टालरेंस टेस्ट में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता 40 प्रतिशत कम देखी गई । शोधकर्ता ब्राइस मैंडर के मतानुसार कम सोने से स्वस्थ व्यक्ति की इंसुलिन कार्यक्षमता प्रभावित होती है ।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया मेडिकल स्कूल के त्वचा रोग विशेषज्ञ अलबर्ट क्लिगमैन के मतानुसार जब हम गहरी नींद में होते हैं, तो हमारे शरीर में इस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोंस का निर्माण भी सामान्य से कहीं ज्यादा होता है । कम सोने वालों की त्वचा पर दाग, धब्बे, झुर्रियां, मुंहासे वगैरह सामान्य से ज्यादा नजर आने का मुख्य कारण उनके शरीर में इन हार्मोंस की कमी ही होती है । इसलिए नाईट शिफ्ट के नुकसान में त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ भी सम्मिलित हैं | ज्यादा भरपूर नींद लेने वालों की त्वचा शानदार होती है, क्योंकि रात के समय त्वचा को दिन भर में हुए नुकसान की भरपाई करने का पूर्ण मौका मिल जाता है ।
  • नाईट शिफ्ट के नुकसान में याददाश्त का कमजोर होना भी सामिलित है अमेरिका में कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक डा. इलाना हेयर्स्टन ने चूहों पर किए शोध में पाया कि जिन चूहों ने कम नींद ली थी, उनकी याददाश्त में कमी पाई गई, वहीं पर्याप्त नींद लेने वाले चूहों की याददाश्त पूरी तरह ठीक थी । कम नींद न केवल सेहत के लिए बल्कि मस्तिष्क दोनों के लिए नुकसानदेह होती है और इसके कारण सीखने की क्षमता भी कम हो जाती है । कम सोने से मस्तिष्क के हिप्पोकैंपल में कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) की संख्या कम होने के कारण ही मस्तिष्क की सीखने की क्षमता, याददाश्त में कमी आती है ।
  • नाईट शिफ्ट करने से ताकत में कमी एवं बुढ़ापे का एहसास हो सकता है | इसलिए इसे भी नाईट शिफ्ट के नुकसान में शामिल किया गया है | म्यूनिख, रोगेंस्बर्ग के नींद विशेषज्ञ जुएर्गनत्सुन्ने का कहना है कि कम सोने वाले लोग जल्दी बूढ़े हो जाते हैं । उल्लेखनीय है कि हमारी दिन भर की गतिविधियों से जुड़े तथ्यों को मस्तिष्क सोते समय ही व्यवस्थित कर पाता है । हमारे शरीर में मेलाटॉनिन नामक एक महत्त्वपूर्ण हार्मोन केवल नींद की अवस्था में ही स्रावित होता है, जो शक्तिदायक एंटी-आक्सीडेंट तथा एंटीएजिंग असर रखता है । अतः कम सोने से हम इस महत्त्वपूर्ण, शक्तिदायक हार्मोन के लाभ से वंचित रह जाते हैं । शरीर को तरोताजा व स्वस्थ बनाए रखने के लिए रोजाना रात्रि को 8 घंटे की नींद अवश्य लें । रात्रि पाली में काम करने वाले व्यक्ति सुविधानुसार बीच-बीच में झपकी लेते रहें और दोपहर में अच्छी नींद ले लें, तो इन परेशानियों से बच सकते हैं ।

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