पीरियड्स के दौरान योग के आसन

पीरियड्स के दौरान योग के आसन

पीरियड्स के दौरान योग करने से इसमें होने वाले दर्द और थकान से राहत मिल सकती है यद्यपि कुछ महिलाओं को लगता है की इस समय सिर्फ आराम पर ध्यान देना चाहिए। यही कारण है की पीरियइस के दौरान योग करें या न करें  इसे लेकर महिलाओं के मन में भ्रम बना रहता है | आज हम इसी भ्रम को कुछ कम करने की कोशिश करेंगे | जैसा की हम सबको विदित है की योग सेहत के लिए संजीवनी है। एक ऐसी संजीवनी, जिससे बहुत सारी बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। मगर क्या उन खास दिनों में योग करना सही है, जब महिलाएं शारीरिक कष्ट से गुजर रही होती हैं। सिर दर्द, पेट दर्द, थकान, अत्यधिक रक्तस्राव, पीरियड्स के दौरान होने वाले इन कष्टों के बीच योग किया जा सकता है, लेकिन पीरियड्स के दौरान योग करते वक्त महिलाओं को कुछ सावधानियां अवश्य बरतनी पड़ेंगी |हालांकि अक्सर देखा गया है की इसमें होने वाले दर्द से महिलाएं काफी परेशान रहती हैं। कुछ महिलाओं के लिए यह आम बात होती है, लेकिन कुछ के लिए यह शरीर तोड़ देने वाला वक्त होता है। लेकिन पीरियड्स के दौरान योग व व्यायाम न केवल सुरक्षित है, बल्कि आपके शरीर के लिए भी अच्छा होता है। इन दिनों व्यायाम करने में कोई दिक्कत नहीं है। आपको शायद यकीन न हो, मगर कुछ सामान्य व्यायाम करने से पीरियड्स के समय होने वाली तकलीफों और दर्द से राहत मिलती है। यानी योगासन इस दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए बहुत ही अच्छा प्राकृतिक उपचार है, जिसका कोई भी साइड-इफेक्ट नहीं होता है। हां, बहुत ज्यादा तकलीफ हो या आपकी तबीयत ठीक नहीं है, तो अनावश्यक रूप से अपने आप को व्यायाम करने के लिए राजी नहीं करना चाहिए। याद रखें कि योगासन आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और यह आपके शरीर को कभी हानि नहीं पहुंचाएगा। कुछ महिलाएं पीरियड्स के दौरान योग करके खुद को ऊर्जावान महसूस करती हैं, तो वहीं कुछ इस समय योग करने से बचती है। इसलिए जरूरी है आप अपने शरीर की जरूरतों को समझें। यदि किसी भी समय आपके शरीर को आराम करने की जरूरत लग रही है, तो शरीर को कुछ समय के लिए आराम दें। चूंकि पीरियड्स के दौरान महिलाओं के मूड और शरीर में लगातार परिवर्तन होता रहता है, इसलिए शरीर की  बातें सुनना भी जरूरी है। अगर आपका मूड नहीं है, तो योग के लिए खुद पर दबाव न बनाएं। पीरियड्स के दौरान शरीर में कुछ खास तरह के हार्मोन स्राव होते हैं, जिसके प्रति कुछ महिलाएं अति संवेदनशील होती हैं। यह हार्मोन महिलाओं की मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है। मगर कुछ विशेष आसनों और प्राणायाम से हार्मोन के अति संवेदनशीलता कम हो जाती है। इससे शरीर पर पड़ने वाले अस्थायी प्रभाव को पूर्ण रूप से कम किया जा सकता है। जो महिलाएं इस दौरान भी योगाभ्यास और मेडिटेशन करती हैं, वे योग न करने वाली महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा तरोताजा महसूस करती हैं और मासिक धर्म की तकलीफ और उलझन से जल्द ही निजात भी पाती हैं। हालांकि मासिक धर्म के दौरान ऐसा माना जाता है कि ज्यादा थका देने वाले काम नहीं करना चाहिए, लेकिन योग विशेषज्ञों का कहना है कि पीरियड्स के दौरान योग रक्त-प्रवाह को अच्छा रखने और दर्द को दूर रखने के लिए किया जा सकता है | हालांकि ऐसे व्यायाम जिससे पेट के निचले हिस्से में दर्द हो, उसे करने से बचना चाहिए। इसके पीछे कारण यह है कि कुछ व्यायामों में गर्भाशय और फेलोपियन टयूब में मासिक धर्म में आने वाले खून की गति का प्रवाह अप्राकृतिक हो सकता है। इसलिए उन दिनों स्वस्थ और सुरक्षित योग करने के लिए जरूरी है कुछ योग विशेषज्ञों की सलाह लें। पीरियड्स के दौरान आप इनमें से कुछ योगाभ्यासों को ट्राई कर सकती हैं।

पीरियड्स के दौरान योग का भुजंगासन:

मासिक धर्म से संबंधित समस्याओं के उपचार हेतु योग एक्सपर्ट पीरियड्स के दौरान योग में इस आसन को करने की सलाह देते हैं। प्रजनन संबंधी विकारों जैसे प्रदर, कष्टप्रद मासिक धर्म और अनियमित मासिक , धर्म आदि के कष्ट से यदि आप पीड़ित हैं तो आपको भुजंगासन करना चाहिए। यह आसन कब्ज के साथ-साथ स्लिप डिस्क में – भी मददगार है। इस आसन में पेट के बल लेटकर दोनों हाथों की हथेलियों को कंधे के सीध में लाएं। दोनों पैरों के बीच की दुरी को कम करें और पैरों को सीधा एवं तना हुआ रखें। अब सांस  लेते हुए शरीर के अगले भाग को नाभि तक उठाएं। लेकिन इस दौरान कमर पर ज्यादा खिंचाव नहीं आना चाहिए। इस योगाभ्यास को करते समय धीरे-धीरे श्वांस लें और धीरे-धीरे श्वांस छोड़ें। जब अपनी पहली अवस्था में आना हो, तो उस अवस्था में आएं। इस तरह से एक चक्र पूरा होता है इसे तीन बार तक दोहराने से पीरियड्स के दौरान आराम होता है ।

पीरियड्स के दौरान योग का Bhujanagasan

धनुरासन

पीरियड्स के दौरान योग के इस आसन में महिलाओं को ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं होती है,। यह आसन पेट की चर्बी को कम करने के साथ-साथ पीरियड्स के दर्द को दूर करने में भी काफी कारगर है। इस आसन में पेट के बल लेट जाएं। पैरों को घुटनों से मोड़े और दोनों हाथों से पैरों के पंजे पकड़ें। अब दोनों हाथों से दोनों पैरों को पीछे की तरफ खींचें और श्वांस अंदर खींचें। अपनी क्षमता के अनुसार सिर और जांघों को ऊपर की तरफ उठाने की कोशिश करें। इस आसन को 10 से 25 सेकंड तक करें।

Dhanurasan

उष्ट्रासन

कमर दर्द, साइटिका, स्किप डिस्कम महिलाओं की मासिक चक्र से जुड़ी समस्याओं में पीरियड्स के दौरान योग का यह आसन काफी फायदा पहुंचाता है। इस आसन को नित्य सुबह करने से चेहरे पर निखार आता है। इस आसन के दौरान आपके शरीर की स्थिति ऊंट की तरह हो जाती है। इसे करने के लिए घुटनों के बल बैठ जाएं, पीछे की तरफ आराम से झुकते हुए अपने दोनों हाथों से पैरों की एड़ियों को पकड़ें। अपने सिर को भी पीछे की तरफ झुकाएं। इस स्थिति में 20-25 सेकंड तक रहें। फिर सामान्य स्थिति में आ जाएं। इस क्रिया को 4-5 बार दोहराया जा सकता है अभ्यास के तौर पर यदि घुटनों में दर्द का अनुभव हो तो घुटनों एवं पैरों के नीचे कम्बल मोड़कर रखा जा सकता है | यदि गर्दन एवं कन्धों में तकलीफ हो तो इस आसन का अभ्यास जरुरी नहीं है |

Ushtrasan during pregnanacy

वज्रासन:

पीरियड्स के दौरान योग करने का यह आसन न सिर्फ पाचन की प्रक्रिया ठीक रखता है, बल्कि लोअर बैकपेन से भी आराम दिलाता है। इस आसन को करने के लिए घुटनों को मोड़कर पंजों के बल सीधा बैठे। दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिलने चाहिए और एड़ियों में थोड़ी दूरी होनी चाहिए। शरीर का सारा भार पैरों पर रखें और दोनों हाथों को जांघों पर रखें। । आपकी कमर से ऊपर का हिस्सा बिल्कुल सीधा होना चाहिए। थोड़ी देर इस अवस्था में बैठकर लंबी सांस लें। पांच मिनट से आधे घंटे तक पीरियड्स के दौरान योग अर्थात इस आसन का अभ्यास किया जा सकता है |

Vajrasan during pregnanncy

बद्ध कोणासन

यह आसन मासिक ऋतुस्राव को नियंत्रित करता है। जो महिला इस आसन को प्रतिदिन कुछ मिनट करती हैं, उन्हें प्रसूति के समय कम वेदना होती है। इस आसन से ओवरी के द्वारा हार्मोन्स का स्त्राव नियमित और संतुलित होने लगता है। इस आसन की मदद से पीरियड्स के दौरान ऊर्जा प्रवाह को बढ़ावा देने में मदद मिलती है, साथ ही उन दिनों में होने वाले असहनीय दर्द में भी आराम मिलता है। इस आसन को करने के लिए पैरों को सामने सीधे फैलाकर जमीन पर बैठ जाएं। अब पैरों को दोनों घुटनों से मोड़कर तलवों का एक साथ जोड़ते हुए एड़ियों को मूलाधार के पास ले जाएं। अब दोनों पंजों को हाथों से पकड़कर घुटनों को जमीन की तरफ दबाएं। रीढ़ को सीधा करते हुए श्वांस को अंदर खींच लें और श्वांस को छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। श्वांस लेते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं। या फिर आप इसे इस तरह से भी कर सकती हैं। जमीन पर मैट बिछाएं और लेट जाएं। बैक पर सपोर्ट के लिए तकिया का इस्तेमाल किया जा सकता है अब दोनों पंजो को मिलाएं और घुटनों को मोड़ लें इसी अवस्था में दस मिनट तक गहरी सांस लें। अब पीरियड्स के दौरान योग के इस आसन को दस बार करें। स्लिप डिस्क, सर्वाइकल, साइटिका की दिक्कत या हर्निया पीड़ित लोगों को यह आसान नहीं करना चाहिए |

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