पोटैशियम के फायदे स्रोत कमी के लक्षण

पोटैशियम सबसे महत्त्वपूर्ण खनिजों में से एक है तथा यह प्रत्येक कोशिका के जीवन के लिये आवश्यक है । यह ऊतकों में पाये जाने वाले खनिजों में पर्याप्त मात्रा में मिलता है । पोटैशियम मुख्यरूप से अंतर-कोशिका द्रव में पाया जाता है । कोशिका के बाहर द्रव में पोटैशियम की कम मात्रा सामान्य पेशीय गतिविधि के लिये आवश्यक होती है । वयस्क मानव शरीर में औसतन 120 ग्राम पोटाशियम तथा 245 ग्राम पोटाशियम क्लोराइड होता है । शरीर में उपस्थित पोटाशियम में से 117 ग्राम कोशिकाओं में पाया जाता है तथा 3 ग्राम कोशिका के बाहर कक्ष में । पोटैशियम के सल्फेट तथा फास्फेट का निर्माण भी शरीर में भोजन से प्राप्त पोटाशियम से होता है ।

पोटैशियम क्या होता है

पोटैशियम नीले-सफेद रंग का एक धात्विक तत्व है जो अत्यधिक प्रतिक्रियात्मक होता है तथा प्रकृति में सरलता से नहीं मिलता है । यह ऊर्जा उत्पादन, ग्लाइकोजन और प्रोटीन के संश्लेषण में उत्प्रेरक के रूप में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है । एल्कोहल, कॉफी, चीनी तथा मूत्र-वर्धक दवा के अधिक सेवन से पोटैशियम की कमी हो सकती है । पोटाशियम का अवशोषण मुख्यरूप से छोटी आंत में होता है । सामान्य भोजन कर रहे स्वस्थ लोगों का लगभग 90 प्रतिशत पोटाशियम मूत्र में उत्सर्जित हो जाता है । पोटाशियम की बढ़ी हुई मात्रा तब मूत्र में उपस्थित होती है जब ऊतकों में पोटाशियम की हानि हो रही हो । शायद इसका सबसे महत्त्वपूर्ण कारण कोशिका प्रोटीन का विघटन है, जैसा मधुमेह में, कम भोजन करने तथा किसी घाव के बाद होता है ।

एसिडोसिस या तीव्र एसिडिटी से कोशिकाओं में पोटाशियम की कमी हो जाती है । वह रोगी जिन्हें मूत्र-वर्धक दवा दी जाती है ताकि मूत्र में सोडियम तथा पानी की मात्रा बढ़ सके, इसका एक नकारात्मक प्रभाव होता है, इसमें पोटैशियम का उत्सर्जन बढ़ जाता है । स्वस्थ व्यक्ति के मल में पोटाशियम बहुत कम मात्रा में होता है जबकि पाचक रसों में इसकी मात्रा अधिक होती है लेकिन यह आंत में दोबारा अवशोषित हो जाता है । हालांकि डायरिया के कारण मल में इसकी क्षति काफी बड़ी हो सकती है परन्तु त्वचा से पोटाशियम की हानि सामान्यतया न के बराबर होती है ।

पोटैशियम के शरीर में कार्य:

पोटैशियम क्षारीय कारक के रूप में महत्त्वपूर्ण है । यह रक्त तथा ऊतकों में उचित अम्लीय-क्षारीय संतुलन बनाए रखता है । यह अत्यधिक एसिडिटी की रोकथाम करता है । यह खनिज पेशीय संकुचन के लिये आवश्यक होता है इसलिये यह हृदय के सही प्रकार से कार्य करने के लिये भी ज़रूरी है, विशेषकर दिल की सामान्य धड़कन को बनाए रखने के लिये । यह हारमोनों के स्राव में वृद्धि करता है तथा रक्त के विषाक्त तत्वों को दूर करने में गुरदों की सहायता करता है । पोटैशियम हारमोन के उत्पादन को उत्तेजित करता है । जिससे स्त्रियों में हारमोनल अनियमितताओं की रोकथाम होती है । यह नाड़ी तंत्र के सही प्रकार से कार्य करने और थकान को दूर करने में सहायता करता है । यह रक्तचाप को कम करने में भी मददगार होता है ।

पोटैशियम के स्रोत

पोटैशियम भोजन पदार्थों में व्यापकरूप से पाया जाता है । दालें जैसे मुंग, मटर, अरहर तथा उड़द; सब्ज़ियां जैसे कमलककड़ी, फली, पत्ते वाली सब्ज़ियां तथा फल जैसे बेल, संतरे, आडू तथा खुर्मानी इत्यादि ।

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अनाज जिनमें पोटैशियम पाया जाता है

  • रागी
  • बाजरा
  • गेहूं का आटा
  • सूखी हुई मक्का
  • गेहूँ
  • कंगनी
  • पोहा

दालें तथा फलियाँ जिनमें पोटैशियम पाया जाता है

  • दली हुई मूंग
  • लोबिया
  • दली हुई अरहर
  • मोंठ
  • दली हुई उड़द
  • भुने हुए मटर
  • दला हुआ काला चना
  • मसूर की दाल

सब्जियाँ जिनमें पोटैशियम पाया जाता है

  • कमलककड़ी
  • सेम
  • अरबी
  • बंदगोभी
  • शकरकंदी
  • चौलाई
  • ग्वारफली
  • आलू
  • हरा पपीता
  • पालक
  • बैंगन
  • हरा करेला
  • हरा टमाटर

फल जिसमें पोटैशियम पाया जाता है

  • बेल
  • आडू
  • खुर्मानी
  • लुकाट
  • खरबूजा
  • चेरी लाल
  • नींबू
  • बेर
  • आँवला
  • पका हुआ आम

मछली समुद्री भोजन व माँस

  • रोहू
  • मटन पेशी
  • झींगा
  • सिंघी
  • कोई
  • हिल्सा
  • भेड़ का यकृत
  • कटला
  • मांगरी

इसके अलावा गाय के दूध, दही में भी पोटैशियम की मात्रा पायी जाती है ।

  पोटैशियम की कमी के लक्षण:

स्वस्थ व्यक्तियों में पोटैशियम की न्यूनता की संभावना कम ही होती है । क्योंकि सामान्य भोजन में इस खनिज की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति हो जाती है । लेकिन पेट-आंत के रोगों के दौरान पोटाशियम की न्यूनता तब हो सकती है जब इसमें अत्यधिक उल्टी तथा डायरिया हो, साथ ही डायबीटिक एसिडोसिस, पोटाशियम की हानि करती नेफ्राइटिस तथा उपचार में स्टेरायड का प्रयोग आदि । मानसिक तथा शारीरिक बोझ के कारण भी पोटैशियम की न्यूनता हो सकती है । पोटाशियम की न्यूनता के कारण शरीर में अकारण थकान, बढ़ी हुई दिल की धड़कन, हाथ तथा पैरों की अत्यधिक कंपकंपाहट तथा ठंड के प्रति नाड़ियों की अधिक संवेदनशीलता होती हैं । इसकी कमी से अल्सर तथा हड्डी के टूटने में स्वास्थ्य लाभ धीमा होता है ।

पोटैशियम के स्वास्थ्य लाभ:

जब भी संभव हो, पोटाशियम की कमी की आपूर्ति करने के लिये पोटाशियम युक्त भोजन का सेवन करें या पोटाशियम क्लोराइड के रूप में इसे लें । इसे गोलियों के रूप में भी लिया जा सकता है ।

कम ब्लड शुगर :

कम ब्लड शुगर के इलाज में पोटैशियम का प्रयोग लाभदायक पाया गया है । यह एक ऐसी अवस्था होती है जिसमें आलस्य, थकान, अरुचि, तनाव, घबराहट, कमज़ोरी, कंपकंपाहट, पसीना तथा सिरदर्द हैं । यदि पिछली रात सम्पूर्ण भोजन न किया हो तो उपरोक्त लक्षण प्रात: आरंभ होकर सारा दिन चलते रहते हैं  । चीनी तथा पोटाशियम क्लोराइड के सेवन से तुरंत आराम आ जाता है ।

पेशीय असामान्यताएं :

पेशीय असामान्यताओं के लिये पोटैशियम मूल्यवान होता है। एक अध्ययन में, स्वस्थ स्वयंसेवकों को पोटाशियम से न्यून परिष्कृत भोजन एक सप्ताह दिया गया, जिसके कारण उनमें पेशीय कमज़ोरी, अत्यंत थकान, कब्ज तथा मानसिक अरुचि विकसित हो गई। यह सभी लक्षण तुरंत ही गायब हो गए जब उन्हें 10 ग्राम पोटाशियम क्लोराइड दिया गया । अध्ययनों ने यह भी दर्शाया है कि पोटैशियम की न्यूनता के कारण पेशियां कमज़ोर, ढीली, कोमल तथा आंशिकरूप से लकवाग्रस्त हो जाती हैं। इन अवस्थाओं में पोटाशियम को बड़ी खुराकें लेने पर ही स्वास्थ्य-लाभ मिलता है ।

शियाटिका :

पोटैशियम के सेवन को बढ़ाने से अक्सर ऐंठी हुई टांग तथा शियाटिका से होने वाली परेशानी को दूर किया जा सकता है । इसका कारण पोटाशियम का नाड़ी कार्य में योगदान है । अधिक मात्रा में सब्जियों के जूस तथा बढ़ी हुई मात्रा में पोटाशियम सप्लीमेंट देने से लाभ होता है ।

सावधानियां :

पोटैशियम का विषाक्त प्रभाव पेशियों तथा हृदय में प्रकट हो सकता है । पेशीय कमज़ोरी तथा मानसिक अरुचि सामान्यतया स्पष्ट होते हैं । रक्त में पोटाशियम की उच्च सघनता केवल गंभीर बीमारियों में ही पाई जाती है जैसे गुर्दे की खराबी तथा गुर्दे का काम न कर पाना । इन अवस्थाओं में, क्षतिग्रस्त कोशिकाओं से निकलने वाले रक्त में पोटाशियम का रिसाव हो सकता है ।

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