प्रसव के दौरान एवं तुरंत बाद में बरती जाने वाली सावधानियां

प्रसव के दौरान हम तभी आवश्यक सावधानियों का अनुसरण कर पाएंगे जब हमें इसका ज्ञान होगा इसलिए सुरक्षित प्रसव कराने के लिए हमें सामान्य गर्भावस्था व सामान्य प्रसव के बारे में जानकारी होना आवश्यक है या यूं कहें कि High Risk Pregnancy, High Risk Factors का ज्ञान, प्रसव के दौरान होने वाली विषमताओं की पहचान होना अति आवश्यक है । प्रसव से पूर्व की यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि गर्भावस्था पूर्ण रूप से सामान्य है और सामान्य प्रसव की संभावना है । इसकी पुष्टिके लिए विशेषज्ञ सेवाएं भी ले सकते हैं । प्रसव के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों को हम तीन भागों में विभक्त कर सकते हैं |  इनमें प्रथम भाग प्रसव पीड़ा शुरू होने से शिशु के जन्म से पहले तक का,  | द्वितीय भाग  शिशु का जन्म होने के एक घंटे बाद तक एवं तृतीय भाग को Expulsion of placenta & membranes तक माना जा सकता है |

प्रसव के दौरान

प्रसव के दौरान सावधानियां (Precautions during delivery in hindi) :

प्रसव के दौरान निम्नलिखित सावधानियां अपनाई जा सकती हैं |

  • प्रसव कराने से पहले प्रसव के स्थान का चयन करना जरूरी है ।
  • ये स्थान साफ सुथरा होना चाहिए ।
  • प्रसव के दौरान प्रसव कराने वाली दाई/ANM शिक्षित व प्रसव क्रिया से भली भांति परिचित होनी चाहिए । उसको प्रसव कराने से पूर्व अपने हाथों की सफाई व मां के जनन्य अंगों की सफाई का ध्यान होना चाहिए ।
  • प्रसव क्रिया में इस्तेमाल होने वाले औजार कपड़े व रूई साफ-सुथरी हो ।
  • Inj pitocin या Oxytocin का बेबाक प्रयोग नहीं होना चाहिए ।
  • अगर प्रसव पीड़ा कम हो या ज्यादा कम हो तो उसका कारण सुनिश्चित करना चाहिए ।
  • कई बार सामान्य प्रसव पीड़ा बहुत देर तक चले और किसी कारण वश सामान्य प्रसव में दिक्कत हो तो कुदरत ही प्रसव पीड़ा को खत्म या मन्द कर देती है ।
  • प्रसव के दौरान उपर्युक्त स्थिति के लिए Inj Oxytocin का प्रयोग करने से पहले इस अवस्था का कारण ढूंढना चाहिए ।
  • अन्यथा बेबाक इस्तेमाल से मां व गर्भ में पल रहे बच्चे, दोनों को खतरा हो सकता है ।
  • Inj Oxytocine कभी भी IN Bolus नहीं देना चाहिए । जरूरी हो तो / Glucose के माध्यम से संतुलित गति से दे सकते हैं ।
  • कई बार प्रसव के दौरान, बच्चा होने से पहले, ज्यादा रक्त स्त्राव हो जाता है, तो इस स्थिति में मरीज को तुरंत किसी हस्पताल में ले जाना चाहिए ।
  • इसका समय 6 से 12 घंटे तक हो सकता है ।

 प्रसव के तुरंत बाद अपनाई जाने वाली सावधानियाँ  :

  • प्रसव के दौरान प्रसव होते ही शिशु को तुरंत किसी स्वच्छ चादर से सुखा लें और उसका मुंह, नाक, आंख साफ रूई व कपड़े से साफ करें ।
  • unli cord को धागे से या Clamp से बांधे ।
  • अगर Umli cord को धागे से बांधे तो इस बात का ध्यान रखें Umlilical cord कुछ देर बाद सिकुड़ जाती है और धागा ढीला पड़ जाता है इस कारण से बच्चे की नाभी से रक्त स्त्राव हो जाता है इसलिए बच्चे का umli cord stump संभालते रहना चाहिए ।
  • बच्चे की सांस की गति, बच्चे का रंग, दिल की धड़कन व बच्चे का रोना देखें ।
  • कोई Congamtal malformation के लिए चैक करें ।
  • शिशु के जन्म के बाद मां के जनन्य अंगों को साफ करके किसी प्रकार की चीर की जांच कर लें ।
  • अगर कहीं पर कोई Perineal tear हो तो उसकी रिपेयर कराएं । कभी Perineal tear anus व rectum तक चली जाती है ।
  • प्रसव के दौरान अगर सही रिपेयर न की जाए तो Recto vaginal fistula बन जाता है । अगर ऐसा हो जाता है तो विशेषज्ञ सेवाएं प्राप्त करें ।

प्रसव के दौरान प्लेसेंटा और उसकी झिल्ली के निष्काशन में सावधानियाँ

  • प्रसव के दौरान प्लेसेंटा की डिलीवरी के लिए इंतजार करें |
  • गर्भाशय की पेट से जांच कर लें कि गर्भाशय का गोला सख्त हो जाए । तभी Umbli cord को नीचे से हल्का सी Traction दें और धीरे से Placenta deliver करें ।
  • Umbli cord जोर से खींचने पर कई बार गर्भाशय पलटकर योनि से बाहर निकल जाता है और मां का जीवन खतरे में पड़ सकता है ।
  • कभी-कभी Placental delivery से पहले या बाद में ज्यादा रक्त स्त्राव हो जाता है । इसलिए हमें सब कुछ जांच करके कारण ढूँढना चाहिए | जैसे गर्भाशय का ठीक से न सिकुड़ना, किसी प्रकार की जनन्य अंगों की चीर, या खून का न जमना इत्यादि इसके कारण हो सकते हैं | कारण ढूंढकर उचित उपचार कराएं । प्रसव के दौरान कई बार Placenta अंदर ही रह जाता है, अगर रक्त स्त्राव ज्यादा न हो तो आधा घंटा तक इंतजार करें ।
  • यदि फिर भी नहीं आता है तो Glucose में 0xytocin 2 ampoule डालकर 10-12 डोप दे सकते हैं ।
  • फिर भी फिर अगर Placenta Deliver न हो तो हस्पताल में भेजें क्योंकि कई बार Placeula adherent हो सकता है और विशेषज्ञ सेवाओं की आवश्यकता हो सकती है ।
  • प्रसव के दौरान Placcnta Delivery के बाद यदि रक्त स्त्राव ज्यादा हो तो Methergin 1amp 21 2amp Im or IN & Hoodi Inj.synto lamp + inj methergin lamp मिलाकर दिए जा सकते हैं ।
  • ध्यान रहे यदि मरीज का P ज्यादा हो तो IN Inj. Methergin देने से दौरे पड़ सकते हैं । इसलिए I/V methergen जांच लें ।
  • प्रसव के दौरान रक्त स्त्राव जरूरत से ज्यादा हो या किसी उपचार से कंट्रोल न हो तो तुरंत बड़े हस्पताल में ले जाएं । अन्यथा मरीज की जान को खतरा हो सकता है । अगर सब कुछ ठीक हो तो मां के जनन्य अंगों को Betadine से साफ करके स्वच्छ पैड लगाएं और मां को पलंग पर लिटाएं ।
  • पैड लगाकर ही मरीज को हिलाना चाहिए । अन्यथा Air embolism का संकट पैदा हो सकता है और मां को बचाना मुश्किल हो सकता है । Air embolism के लक्षण मरीज को सांस लेने में दिक्कत, घबराहट, बी. पी. का कम होना, मरीज नीला पड़ जाना ।
  • शिशु को मौसम अनुसार कपड़े पहनाकर स्तनपान करवायें । स्तनपान जल्दी कराने से मां को दूध जल्दी आता है ।
  • मां के साथ शिशु को लिटाएं । स्वस्थ मां का स्वस्थ शिशु के लिए सुरक्षित प्रसव की आवश्यकता है ।

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