प्राणायाम की सावधानियाँ व नियम

प्राणायाम की सावधानियाँ एवं नियमों की बात करें तो हम यहाँ पर प्राणायाम सम्बंधित लगभग सभी महत्त्वपूर्ण तथ्यों को लिख रहे हैं – जैसे यह किस समय करना चाहिए, कैसे करना चाहिए वगैरह । ऐसी तमाम बातें हम इसमें सम्मिलित कर रहे हैं, जिससे पाठक, भरपूर लाभ उठा सकें । प्राणायाम करने के दौरान किन किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी होता है ऐसे ही कुछ नियमों की लिस्ट निम्नवत है |

प्राणायाम की सावधानियाँ

  • बाह्य विघ्न जैसे मच्छर, मक्खियों या अन्य छोटे जीव जंतुओं से बचे रहने की पूरी व्यवस्था करनी चाहिए ।
  • पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर करने से प्राणायाम उचित ढंग से हो जाता है । (वृद्ध या रोगी अन्य वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं जैसे स्टूल या कुर्सी वगैरह)
  • प्राणायाम की सावधानियाँ कहती हैं की प्राणायाम के लिए चयनित स्थान शुद्ध एवं एकान्त हो, हवा की स्वच्छता एवं आवागमन भलीभाँति होना चाहिए ।
  • प्राणायाम करने वाले व्यक्ति को तामसिक वस्तुएँ, मांसाहार व मादक पदार्थ इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए । प्राणायाम का सम्पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए इनका त्याग करें व अपनी सुंदरता, तेज और बल में चार चाँद लगाएँ ।
  • योगासन के बाद और ध्यानाभ्यास से पहले प्रसन्नचित मन से प्राणायाम करें या अनुकूलतानुसार करें |
  • प्राणायाम की सावधानियाँ यह भी कहती हैं की कोशिश करें कि प्राणायाम का समय, स्थान व दिशा निश्चित हो ।
  • प्राणायाम का समय सूर्योदय और सूर्यास्त से संबंध रखता है परंतु किसी कारणवश यदि किसी और समय करें तो यह भोजन से कम से कम चार घंटे बाद होना चाहिए । प्राणायाम के आधे घंटे बाद भोजन कर सकते हैं ।
  • नेत्रों को नासिकाग्र पर केन्द्रित कर या बंद करके प्राणायाम का अभ्यास करें ।
  • प्राणायाम के नियम के अनुसार मन को पूर्ण रूप से श्वास क्रिया पर लगा लेना चाहिए । इससे आपकी एकाग्रता-शक्ति, स्मरणशक्ति और मानसिक शक्ति का विकास तेज गति से होगा ।
  • प्राणायाम की सावधानियाँ अपनाने के लिए कम आयु वाले बच्चे कुंभक क्रिया का अभ्यास न करें ।
  • शीघ्रता से प्राणायाम न करें और न ही फुफ्फुस रुंधे होने के समय करें ।
  • प्राणायाम के बाद शवासन में विश्राम करें ।
  • प्राणायाम का स्नान सम्बन्धी नियम कहता है की स्नान के बाद प्राणायाम करें तो ज्यादा लाभ होगा । परंतु प्राणायाम के ठीक बाद स्नान न करें । स्नान के लिए लगभग आधे घंटे रुकें ।
  • यदि बहुत ज्यादा मानसिक वेदना हो, मन और शरीर खिन्न हो, हताशा, उदासी या कोई उलझन हो तो कोई हल्का-फुल्का आसन करें या शवासन कर मन को शांति दें, तभी प्रारंभ करें ।
  • उचित ढंग से प्राणायाम न करना मन को बेचैन कर देता है, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और तनाव उत्पन्न करता है । चेहरे पर भी इसका असर दिखने लगता है, अतः ऐसे अशुद्ध अभ्यास से सदैव बचें ।
  • नियमित आसन से फुफ्फुसों के तंतुओं में लोच आ जाता है और प्राणायाम उचित ढंग से होता है ।
  • प्राणायाम की सावधानियाँ कहती हैं की प्राणायाम से पूर्व मूत्राशय और अंतराशय (आँतों) को खाली कर लेना चाहिए ।
  • तेज़ ध्वनि के बीच और घबराहट के समय प्राणायाम न करें ।
  • प्राणायाम के समय या बाद में किसी प्रकार की शारीरिक व मानसिक परेशानी हो तो तुरंत योग शिक्षक से परामर्श लें ।
  • सामान्य मनुष्य के लिए आवश्यक है कि उसकी नाड़ियों में प्रवाहित होने वाले रक्त में ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में हो । यह पूर्ति प्राणायाम द्वारा हो जाती है ।
  • योग शास्त्रों के अनुसार पूरक, कुंभक और रेचक का अंतराल 1:4:2 होना चाहिए । अर्थात् जितना समय पूरक में लगे उससे चौगुना कुंभक में और पूरक से दोगुना समय रेचक में लगना चाहिए ।
  • प्राणायाम की संख्या का निर्धारण करें । सभी निर्देशों का पालन करते हुए संख्या बढ़ाएँ ।
  • प्राणायाम की सावधानियाँ अपनाने से पहले यह जान लें की कुछ प्राणायाम गर्मी बढ़ाते हैं और कुछ शीत । अतः जो परिस्थिति के अनुकूल हो, वही अभ्यास करें ।
  • प्रथम रूप से प्राणायाम के अभ्यास के लिए दो बातें ज़रूरी हैं । एक मन की स्थिरता और दूसरी मेरुदण्ड की स्थिरता । मेरुदण्ड को ऐसी स्थिति में रखकर बैठने का अभ्यास करें कि वह न तो ज्यादा पीछे की तरफ़ झुका हो और न ही ज्यादा आगे की तरफ़ । पीछे की तरफ़ झुकने से फुफ्फुस का प्रसार होगा । आगे की ओर झुकने के कारण वे फैल नहीं पाते । इसलिए अभ्यासी को चाहिए कि वह मेरुदण्ड में स्थिरता लाएँ ।
  • सिद्धासन, पद्मासन, सुखासन एवं स्वस्तिकासन प्राणायाम के लिए अधिक उपयोगी रहते हैं ।
  • मन की एकाग्रता और श्वास में लय अति आवश्यक है ।
  • हठयोग प्रदीपिका में सूत्रकार का कहना है कि जैसे प्रशिक्षक शेर, हाथी या चीते को धीरे-धीरे पालतू बनाता है उसी प्रकार साधक को क्रमशः अपने श्वास-प्रश्वास पर नियंत्रण करना चाहिए अन्यथा परिणाम विपरीत होते हैं ।
  • प्राणायाम का नियम यह भी कहता है की गंभीर रोगी और गर्भवती महिलाओं को योग शिक्षक से परामर्श करना चाहिए एवं उपवासी व्यक्ति या खाली पेट अथवा भोजन करने के तुरंत बाद कभी प्राणायाम नहीं करना चाहिए ।
  • जिस स्थान पर प्राणायाम करें वहाँ संभव हो तो वायु मंडल को भी शुद्ध कर लें । धूप, गुग्गल या शुद्ध घी के दीपक लगाने से मन में भी पवित्रता की वृद्धि होती है । (चित्त की शुद्धता बढ़ती है ।)
  • प्राणायाम की सावधानियाँ में इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की आसन सही ढंग से न किया जाए तो श्वसन क्रिया मंद हो जाती है तथा सहनशीलता कम हो जाती है ।

नए अभ्यासी को प्राणायाम करते समय प्राणवायु को धीरे-धीरे पूरक और रेचक करना चाहिए । श्वास को रेचक और पूरक करते समय में जल्दबाज़ी न करें । धीरे-धीरे अभ्यास करें, इस प्रकार प्राणायाम का अभ्यास करने से कोई हानि नहीं होती और न कोई रोग होता है । कोई रोग हो भी तो धीरे-धीरे आरोग्य लाभ ही होता हैं और योग सिद्धि मिल जाती है ।

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