प्राणायाम के लाभ फायदे जिन्हें हर किसी को जानना चाहिए

प्राणायाम का नाम शायद अपने जीवन में सबने सुना होगा लेकिन जब बात प्राणायाम के लाभ की आती है तो इन लाभों के बारे में शायद ही किसी को पता होगा | आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से प्राणायाम से होने वाले फायदों या लाभों के बारे में वार्तालाप करेंगे | ताकि प्राणायाम करे लाभ के बारे में जानकर लोग प्राणायाम की ओर अग्रसित होकर अपने सवास्थ्य को बेहतर बना सकें | प्राणायाम से होने वाले प्रमुख फायदों की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |

प्राणायाम के लाभ

  • प्राणायाम के लाभ में पहला लाभ यह है की यह दीर्घ आयु प्रदान करता है ।
  • प्राणायाम ब्रह्मचर्य कारक है । अर्थात् यह बिंदु को ऊर्ध्वमुखी बनाता है, जिससे ओज, तेज तथा बल बढ़ता है ।
  • ब्रह्मचर्य और प्राणायाम को एक-दूसरे का पूरक भी कह सकते हैं । क्योंकि
  • जो मनोयोग से प्राणायाम करता है, उसके विषय-कषाय दूर होते हैं । काम-वासना का शमन होता है एवं जो ब्रह्मचर्य का पालन करता है वह साधक प्राणायाम अति शीघ्र साध लेता है ।
  • प्राणायाम त्रिदोष नाशक होता है (वात, पित्त, कफ का नाश करता है।)
  • प्राणायाम से समस्त शरीर में जीवन और शक्ति का संचार होता है ।
  • प्राणायाम के लाभ में अगला लाभ यह है की यह बुढ़ापे को दूर रखता है । बुढ़ापे में श्वास क्रिया के मंद हो जाने के कारण हृदय को पूरी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे फुफ्फुसों की वायु कोशिकाएँ संकुचित हो जाती हैं । प्राणायाम द्वारा साधक रक्तसंचार की गति को सामान्य करता हुआ श्वासोच्छवास की पूर्ति कर लेता है । प्राणायाम दूषित नाड़ियों का शुद्धिकरण कर यह शरीर को फुर्तीला बना देता है ।
  • प्राणायाम शारीरिक और मानसिक बल ही नहीं बढ़ाता बल्कि वह आत्मा का
  • भी उत्थान करता है । अतः प्राणायाम को जीवन का अंग बना लेना चाहिए । शुद्ध ढंग से किया गया अभ्यास सांसारिक विषय-वासनाओं से विमुख करता
  • है और साधक में पाँचों इन्द्रियों को वश में करने की क्षमता आ जाती है ।
  • यदि हम आसन में परिपक्व हो जाएँ और उसके बाद प्राणायाम का लाभ लें तो हमें अप्रत्याशित लाभ प्राप्त होगा ।
  • प्राणायाम के लाभ में अगला लाभ यह है की प्राणायाम क्रिया करने से जठराग्नि तेज होती है, जिससे क़ब्ज़ एवं अन्य ऐसी समस्याएँ नहीं होतीं ।
  • प्राणायाम का सम्बंध हमारी स्नायु-प्रणाली से बहुत अधिक है । यदि ये ध्वस्त हो जाएँ तो मन एकाग्र नहीं हो पाता । स्नायु में तनाव रहता है । तो मन में भी तनाव रहेगा और जब तक मन शांति की स्थिति में न हो, ग्रहणशील न हो, तब तक प्राणायाम का अभ्यास हो ही नहीं सकता ।  प्राणायाम से रोग प्रतिरोधक शक्ति का विकास होता है ।
  • प्राणायाम द्वारा अतीन्द्रिय ज्ञान का प्रकाश होकर अज्ञान का नाश होता है ।
  • प्राणायाम करके हम एक प्रकार से इस विश्व को भी स्वास्थ्य देने में सहयोगी बन जाते हैं ।
  • प्राणायाम के लाभ में इस लाभ की बात करें तो इसमें उदर प्रदेश के समस्त रोग दूर होते हैं, जैसे पाचन तंत्र संपूर्ण रूप से स्वस्थ होता है, जिस कारण क़ब्ज़ का नाश होता है । आँतों में मल नहीं चिपकता अतः वायु विकार का भी नाश होता है । इसलिए वायु संबंधी रोग जैसे सिरदर्द, माइग्रेन, बालों का असमय सफ़ेद होना, वात दर्द (घुटनों का दर्द, कमर दर्द आदि) का शमन होता है ।
  • पाचन तंत्र के सुचारु रूप से परिचालन होने के कारण भोजन अच्छी तरह से पचता है । अतः भोजन में पाए जाने वाले विटामिन, प्रोटीन एवं खनिज लवण पूर्णतः हमारे शरीर को पोषकता प्रदान करते हैं, जिससे हमारा शरीर बुढ़ापे तक स्वस्थ रहता है । और स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण होता है, इसलिए बुढ़ापे में किसी प्रकार का मानसिक उद्वेग या कोई मानसिक अस्वस्थता नहीं रहती । जिस कारण बुढ़ापे में होने वाली बीमारियाँ, अतिक्रमण नहीं कर पाती ।
  • प्रणायाम के लाभ में अगला लाभ पाचन तंत्र से समबन्धित है | चूंकि प्राणायाम करने से पाचनतंत्र फुफ्फस एवं हृदय प्रदेश सुचारु रूप से काम करते हैं । अतः शरीर को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है । एवं रक्त की शुद्धता बढ़ती है । रक्त संचार ठीक ढंग से होता है । रक्त संचार अच्छा हो तो पूरे शरीर को नवजीवन, नवचेतना, स्फूर्ति प्राप्त होती हैं । शरीर का कायाकल्प होता है । ओज़-तेज़ बढ़ता है । चेहरे में झुर्रिया नहीं पड़ती, चेहरे में चमक रहती है । आँखें सुन्दर दिखती हैं । हम हमेशा जब तरोताज़ा दिखते हैं, तो सामने वाला भी खुश रहता है । हमारे आसपास का वातावरण भी खुशनुमा बन जाता है, जिस कारण हम घर, परिवार, पड़ोसी, दोस्त, शहर, प्रदेश, देश एवं विश्व को इस पंचतत्व से बने ऊर्जावान शरीर द्वारा अनुप्राणित करते हैं ।

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