बहेड़ा के फायदे – स्वाद, रंग, स्वरूप एवं औषधीय गुण.

बहेड़ा के फायदे अर्थात औषधीय गुणों से शायद हर कोई परिचित होगा, इसे अन्य नामों जैसे Beleric Myroboian, Terminalia Belerica के नाम से भी जाना जाता है | इसके अलावा अलग प्रदेशों में उनकी स्थानीय भाषा के मुताबिक इसे अलग अलग नामों से भी जाना जाता है | जहाँ तक बहेड़ा के पेड़ों की बात है ये पेड़ बहुत ऊंचे, फैले हुए और लंबे होते हैं । इसके पेड़ 18 से 30 मीटर तक ऊंचे होते हैं जिसकी छाल लगभग 2 सेंटीमीटर तक मोटी हो सकती है । बहेड़ा के पेड़ पहाडों और ऊंची भूमि में अधिक मात्रा में पाये जाते  है । कहा यह भी जाता है की इसकी छाया स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम होती है । बहेड़े के पत्ते बरगद के पत्तों के समान होते हैं तथा इसके पेड़ भारतवर्ष में लगभग सभी राज्यों में पाये जाते हैं । चूँकि बहेड़ा प्राचीनकाल से ही अनेकों रोगों को ठीक करने के उपयोग में लाया जाता रहा है इसलिए आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से बहेड़ा के फायदे के बारे में जानने की कोशिश करेंगे |

बहेड़ा के फायदे

बहेड़ा का रंग स्वाद स्वरूप एवं प्रकृति:

जहाँ तक बहेड़ा के रंग का सवाल है यह रंग में भूरा एवं पीला होता है इसका स्वाद हल्का मीठा होता है | और जहाँ तक बहेड़े की तासीर अर्थात प्रकृति का सवाल है इसकी तासीर गर्म होती है | यह पेड़ अधिकतर तौर पर पहाड़ों एवं जंगलों में देखने को मिलता है | बहेड़ा के पत्ते लगभग 12 सेंटीमीटर से लेकर 20 सेंटीमीटर तक लम्बे, तथा 6 सेमी. से लेकर 9 सेमी. तक चौड़े बरगद के पत्तों के समान होते हैं | बहेड़े के फल की आकृति अंडाकार होती है, जिसकी लम्बाई 3 सेमी. तक हो सकती है । बहेड़े के फल के आंतरिक भाग में निकलने वाले फल को बहेड़े की मींगी कहा जाता है | लेकिन जहाँ तक बहेड़ा के फायदे अर्थात इसके औषधीय गुणों की बात है इनमे अधिकतर तौर पर बहेड़े के फल के छिलके का उपयोग किया जाता रहा है | पेड़ पर इसके फल गुच्छों के रूप में लगते हैं |

बहेड़ा के फायदे औषधीय गुण:

बहेड़ा के फायदे लेने के लिए ध्यान देने योग्य बात यह है की इसकी 3 ग्राम से 6 ग्राम तक मात्रा औषधि के रूप में प्रयोग में लायी जा सकती है | बहेड़ा के प्रमुख औषधीय गुणों की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |

  • कहते हैं की मनुष्य शरीर में बहुत सारे रोगों का द्योतक कब्ज बीमारी होती है और बहेड़ा के फायदे में सबसे पहला फायदा यही है की यह कब्ज को दूर करने वाला होता है ।
  • इसका उपयोग अमाशय को शक्तिशाली बनाने में मदद करता है |
  • बहेड़ा भूख को बढाने, एवं वायु रोगों को दस्तों की सहायता से दूर करने में मदद करता है |  यह पित्त समबन्धि रोगों को दूर करने वाला होता है |
  • बहेड़ा सिर दर्द को दूर करता है एवं पाइल्स को भी खत्म करने में सहायक है |
  • बहेड़ा के फायदे में अगला फायदा यह है की यह आखों व दिमाग को स्वस्थ व शक्तिशाली बनाने में भी मददगार साबित होता है |
  • बालों की सफेदी एवं कफ जैसे रोगों में भी बहेड़ा लाभदायक होता है |
  • बहेड़ा कफ एवं पित्त का नाश करने वाला तथा बालों को सुन्दर बनाने वाला होता है ।
  • बहेड़ा के फायदे में अगला फायदा यह है की यह गला बैठने में भी बेहद उपयोगी होता है ।
  • बहेड़ा क्षय रोग (टीबी), कुष्ठ रोग में लाभदायक होने के साथ साथ नशा, खून की खराबी और पेट के कीड़ों को नष्ट करने का भी कार्य करता है |

बहेड़े की मींगी के फायदे:

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की बहेड़े के फल के आंतरिक भाग को बहेड़े की मींगी कहा जाता है जो स्वाद में मीठी होती है | बहेड़े के फायदे में इसके फायदों को भी सामिलित किया जा सकता है जिनका विवरण कुछ इस प्रकार से है |

  • बहेड़े की मींगी प्यास को मिटाने में मददगार साबित होती है |
  • इसमें उल्टी को रोकने एवं कफ को शांत करने का औषधीय गुण विद्यमान है |
  • यह वायु दोषों को दूर करने में भी मदद करती है |
  • बहेड़े की मींगी हल्की, कषैली और नशीली होती है ।
  • इससे निर्मित सुरमे को आँखों में उस वक्त उपयोग में लाया जा सकता है जब उसमे फुला हो क्योंकि यह आँखों के फूले को दूर करता है ।

विभिन्न बीमारियों में बहेड़ा के फायदे:

बहेड़ा विभिन्न औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण इसका उपयोग अनेकों रोगों को दूर करने में किया जाता है जिनमे से कुछ की लिस्ट इस प्रकार से है |

  • कोई भी व्यक्ति जो हाथ पैरों की जलन से ग्रसित हो को बहेड़ा के फायदे लेने के लिए बहेड़े की मींगी, फल का आंतरिक हिस्सा यानिकी बीज को पानी के साथ पीस लेना चाहिए | उसके बाद इस पेस्ट को हाथों और पैरों में लगाने से जलन में राहत मिलती है | इसके अलावा शरीर के किसी भी हिस्से में जलन होने पर प्रभावित क्षेत्र में यह लेप लगाया जा सकता है | जलन से राहत पाने के और घरेलू उपचार के बारे में पढ़ें |
  • कफ समस्या होने पर बहेड़ा का फायदा लेने के लिए बहेड़े के पत्तों का उपयोग किया जा सकता है, बहेड़े के पत्तों को पीसकर काढ़ा तैयार करने से और उसमे चीनी मिलाकर पीने से कफरोग दूर होने में मदद होती है |
  • खांसी की समस्या से ग्रसित व्यक्ति बहेड़े की छाल का कोई एक टुकड़ा अपने मुहं में रखकर चूसते रह सकते हैं इससे बलगम निकलने में मदद होती है जिससे खांसी बंद हो जाती है |
  • यौन समस्याओं से जूझ रहे व्यक्ति या अपनी कामशक्ति को बढ़ाने के इच्छुक व्यक्ति नियमित रूप सरे बहेड़े के छिलके का उपयोग कर सकते हैं |
    आँखों की रौशनी से सम्बंधित रोगों में बहेड़ा के फायदे लेने के लिए बहेड़े के छिलके का चूर्ण तैयार कर लें और उसमे उतनी ही मात्रा में मिश्री मिला लें, और इस चूर्ण को एक एक चम्मच सुबह शाम गरम पानी के साथ ले सकते हैं |
  • वर्तमान में कब्ज एक आम समस्या है कब्ज में बहेड़ा के फायदे लेने के लिए बहेड़े के अधपके फल को पीस लेते हैं ताकि इस चूर्ण तैयार हो जाय | उसके बाद इसे नियमित रूप से एक-एक चम्मच पानी के साथ लेते हैं | जिससे कुछ दिनों बाद कब्ज समाप्त हो जाती है | कब्ज के अन्य उपचारों के बारे में जानने के लिए पढ़ें.
  • ऐसे व्यक्ति जीने सांस या दमे की बीमारी हो वे भी इस बहेड़ा का फायदा ले सकते हैं इसके लिए उन्हें बहेड़े एवं धतूरे के पत्तों को बराबर मात्रा में लेकर पीसना होगा, उसके बाद इस चूर्ण को चिलम, हुक्के इत्यादि में भरकर पीना होगा कहा यह जाता है की ऐसा करने से दमा रोग में आराम मिलता है | दमा रोग के अन्य उपचारों के बारे में जानने के लिए यह पढ़ें.
  • सर्दी जुकाम से ग्रसित व्यक्ति बहेड़ा के फायदे लेने के लिए बहेड़े को घी में डुबोकर या उसके ऊपर घी के हाथ लगाकरपकाने के लिए चूल्हे या कोयलों में रख देते हैं, जब यह पक जाता है तब इसे निकालकर इसका बाहर का छिलका मुहँ में रखकर चूसने लगते हैं | सर्दी जुकाम के अन्य उपचारों के बारे में जानकारी के लिए पढ़ें.
  • ऐसे लोग जिन्हें बालों के गिरने की समस्या है वे इसका फायदा लेने के लिए लगभग दो चम्मच बहेड़े के फल के चूर्ण को एक कप पानी में पूरी रात के लिए भीगा देते हैं, और अगले दिन सुबह इस पानी को बालों के जड़ों पर लगाया जाता है | इस विधि को नियमित तौर पर अपनाने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है | बालों के झड़ने की समस्या के अन्य उपचारों की जानकारी के लिए पढ़ें.
  • दस्त से ग्रसित लोगों को बहेड़ा के फायदे लेने के लिए सर्वप्रथम कुछ बहेड़ा के फलों को चूल्हे में जलाना होगा और उसके बाद इन जले हुए बहेड़ों की राख को एकत्रित करना होगा | उसके बाद इस राख में लगभग एक चौथाई कालानमक मिलाया जा सकता है और इसे नित्य एक चम्मच दो बार लेने से दस्त में आराम मिलता है |आयुर्वेद के अनुसार बहेड़े के यदि रस की बात करें तो यह मधुर तथा कषैला हो सकता है | यह गुण में बेहद हल्का, खुश्क होता है एवं इसकी  प्रकृति या तासीर  गर्म होती है | बहेड़ा के फायदे मुख्य रूप से विभिन्न रोगों जैसे  कामशक्ति की कमी, बालों के रोग, जुकाम तथा हाथ-पैरों की जलन में देखे जा सकते हैं | वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार बहेड़ा फल में 17 प्रतिशत टैनिन, 25 प्रतिशत मींगी  में हलके पीले रंग का तेल, सैपोनिन एवं राल पाए जाते हैं ।

 

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