बिच्छू के काटने के लक्षण एवं ईलाज

बिच्छू के काटने पर असहनीय दर्द तो होता ही है साथ में इसका विष अर्थात जहर श्वसन व केन्द्रिय तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करता है । बिच्छू एक ऐसा विषैला कीट है जो ग्रामीण एवं जंगल से लगे इलाकों में तो पाया ही जाता है साथ में कच्ची जगहों में शहरों में भी यह कीट देखने को मिलता है | जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की यह एक विषैला कीट है इसलिए इसके काटने पर शरीर में विष फैलने का भी खतरा रहता है |

बिच्छू के काटने Scorpion-Sting

बिच्छू के काटने का लक्षण (Symptoms of scorpion Sting):

  • बिच्छू के काटने पर दंश वाले स्थान पर खुजली, सूजन व जलन के साथ तेज दर्द होता है ।
  • डंक मारे गए स्थान के चारों ओर लालिमा सी छा जाती है ।
  • वेदना अर्थात पीड़ा, डंक मारे गए स्थान से उठकर ऊपर की ओर फैलती सी महसूस होती है तथा एक दो घंटे के बाद वह स्थान सुन्न सा पड़ जाता है ।
  • बिच्छू के काटने पर बेचैनी, आंसू बहना, नाक से पानी बहना, मुह में लार अधिक बनना, पसीना अधिक आना, जी–मिचलाना, उल्टी आना इत्यादि लक्षण दिखाई दे सकते हैं ।
  • दौरे पड़ना व बाद में कोमा में चले जाना भी बिच्छू के काटने का एक लक्षण हो सकता है ।
  • बिच्छू के डंक के चार से छ: घंटे बाद काफी पसीना आता है और हृदय गति तेज हो
  • जाती है ।
  • मुंह से खून मिला हुआ झाग सा निकल सकता है ।
  • यदि बिच्छू के काटने के 2-4 घंटों के अंतर्गत लक्षणों में तेजी से वृद्धि हो, तो रोगी के बचने की संभावना कम रहती है |

बिच्छू के काटने का ईलाज (Treatment of Scorpion Sting):

  • बिच्छू के काटे हुए स्थान के ऊपर टूर्नीकेट बाँधी जा सकती है, जिसे हर पांच से दस मिनट कुछ सेकेंड के लिए ढीला किया जा सकता है, अन्यथा गेन्ग्रीन की संभावना रहती है
  • यदि आवश्यक हो तो बिच्छू द्वारा काटे गए स्थान पर चीरा लगाकर, रक्त निकाला जा सकता है व पानी या बर्फ का पैक लगाया जा सकता है । उस पर ताजा तैयार किया गया एक पोटैशियम परमैग्नेट व टारटरिक एसिड को पानी में मिलाकर लगाने से दर्द में राहत मिलती है ।
  • जलन व दर्द कम करने के लिए चिकित्सक द्वारा उचित मात्रा में प्रोकेन इंजेक्शन त्वचा में लगाई जा सकती है |
  • जहर का असर खत्म करने अर्थात बिच्छू के काटने पर विष को निष्फल करने के लिए चिकित्सक द्वारा विशिष्ट औषधि (Antivenom) उचित मात्रा में दी जा सकती है |
  • दर्द निवारक औषधि बाद में मुंह द्वारा शुरू की जा सकती है ।
  • पेशीय उद्वेष्टन को कम करने के लिए चिकित्सक द्वारा मरीज को उचित मात्रा में कैल्शियम शिरा मार्ग द्वारा दिया जा सकता है |
  • चिकित्सक द्वारा बच्चों में फुफ्फुसीय शोध से बचाव के लिए उचित मात्रा में एट्रोपीन इंजेक्शन दिया जा सकता है |
  • बिच्छू के काटने पर और अधिक गंभीर होने हाइड्रोकोर्टिसोन युक्त ग्लूकोज सेलाइन नस द्वारा दी जा सकती है ।

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