बेल के फायदे – फल जड़ छाल पत्तों के औषधीय गुण

बेल के फायदे जानने से पहले हम यह जान लेते हैं की बेल फल को अन्य नामों जैसे Aegle Marmelos, Correa, Rutaceae, Bael Fruit, Bael इत्यादि के नाम से भी जाना जाता है | बेल का पेड़ बहुत प्राचीन है । इस पेड़ में पुराने पीले लगे हुए फल दुबारा हरे हो जाते हैं तथा इनको  तोड़कर लगभग 6 महीने तक पत्तों की सहायता से ज्यों का त्यों रखा जा सकता है | कहने का आशय यह है की बेल फल को छह महीनों तक पत्तों की सहायता से इस तरह सुरक्षित रखा जा सकता है ताकि इनके औषिधिय गुण समाप्त न होयें | बेल के फायदे की बात करें तो बेल के फल, पत्ते, जड़, छाल ही नहीं अपितु इस पेड़ की छाया भी आरोग्य कारक होती है यही कारण है की बेल को पेड़ को पवित्र पेड़ माना जाता है | बेल के पेड़ के स्वरूप की बात करें तो बेल का पेड़ 25-30 फुट ऊंचा, 3-4 फुट मोटा, पत्ते जुड़े हुए, त्रिफाक और गन्धयुक्त होते हैं |

बेल के फायदे bael benefits

बेल की प्रकृति (Nature of Bael  in Hindi):

बेल फल की यदि हम बात करेंगे तो हम पाएंगे की इसका स्वरूप 2-4 इंच व्यास का गोलाकार धूसर और पीले रंग का होता है । इसके बीज छोटे कड़े होते हैं । बेल की तासीर गर्म होती हैं । बेल के अंदर टैनिक एसिड़, एक उड़नशील तेल, एक कड़वा एक चिकना लुआबदार पदार्थ पाया जाता हैं । बेल के फायदे यह हैं की बेल की जड़, तत्वों और छाल में चीनी को कम करने वाले तत्व एवं टैनिन पाये जाते हैं । बेल के फल के गूदे में मांरशेलीनिस तथा बीजों में पीले रंग का तेल पाया जाता है जोकि बहुत ही बढ़िया तरीके से पेट साफ़ करने का कार्य करता है | बेल का फल-लघु (छोटा), तीखा, कषैला होता है |

बेल के औषधीय गुण या बेल के फायदे:

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की बेल फल में ही नहीं अपितु इसकी जड़, छाल, पत्तों और यहाँ आधे पके हुए फल में भी औषधीय गुण विद्यमान होते हैं | इसलिए बेल के फायदे के इस क्रम में हम बेल के फल, जड़ छाल एवं पत्तों के फायदे के बारे में भी जानने की कोशिश करेंगे |

  • बेल के फायदे में पहला फायदा यह है की बेल कफ वात को शांत करने वाला, रुचिकारक, उत्तेजक, फल होता है |
  • यह पाचन को ठीक करने का, दिल को स्वस्थ रखने का, एवं खून को गाढ़ा करने का भी काम करता है |
  • यह बलगम को समाप्त करने वाला भी होता है |
  • इसका उपयोग मूत्र (पेशाब) और शर्करा को कम करने के लिए भी किया जा सकता है |
  • बेल के फायदे में अगला फायदा यह है की यह अनेक बीमारियों जैसे दस्त, खुनी दस्त, डायबिटीज, श्वेतप्रदर इत्यादि में लाभकारी होता है |
  • इसके अलावा मासिक धर्म में अधिक खून आना एवं खूनी बवासीर जैसी समस्या को भी यह ठीक करने में सहायक होता है |
  • बेल का फल उत्तेजक, पाचन, चिकना, गर्म तथा दर्द, गाठिया, पेचिश, कफातिसार, वात, एवं कफनाशक होता है तथा यह आंतों को ताकत भी देता है |
  • बेल का आधा पका हुआ फल भी छोटा, कड़वा, कषैला, होता है जिसकी तासीर गर्म ही होती है यह चिकना, संकोचक, पाचन, हृदय और कफवात को नष्ट करने में सहायक होता है ।
  • बेल की मज्जा और बीज के तेल अधिक गर्म और तेज वात को समाप्त करते हैं ।
  • बेल के पके फल भारी, कड़वा, तीखा रस युक्त मधुर (मीठा) होता है। यह गर्म जलन पैदा करने वाला, पेट साफ करने वाला, वातनुलोमक, वायु को उत्पन्न करने वाला और हृदय को ताकत देने वाला फल है |

बेल के पत्तों के फायदे:

बेल के फायदे में अगला क्रम इसके पत्तों का है बेल के पत्तों के औषधिय गुण कुछ इस प्रकार से हैं |

  • बेल के पत्ते संकोचक, पाचक, त्रिदोष (वात, पित और कफ) विकार को नष्ट करने वाले होते हैं |
  • बेल के पत्तों का दूसरा फायदा यह है की ये घाव की सूजन को दूर करने में सहायक होते हैं |
  • इसके अलावा शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन को कम करते हैं |
  • विष तथा मधुमेह में भी लाभदायक होते हैं |
  • पेट में पानी भरना एवं पीलिया जैसी बीमारी में भी बेल के पत्तों के फायदे देखे गए हैं |
  • इसके अलावा बुकह्र एवं आँखों से तिरछे दिखाई देने वाले रोग के उपचार में भी सायक होते हैं |

बेल के जड़ व छाल के फायदे:

जहाँ तक बेल के जड़ व छाल के फायदों की बात है इनकी गिनती बेल के फायदे में ही होती है जिनका विवरण निम्नलिखित है |

  • बेल की जड़ और छाल उल्टी, दर्द, त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) को दूर करने में सहायक होते हैं |
  • नाड़ी तंतुओं के लिये शामक, कुछ नशा पैदा करने वाली, के तौर पर भी इसको प्रयोग में लाया जाता है |
  • बेल की जड़ और छाल बुखार को दूर करने वाले, भूख को बढ़ाने वाले पदार्थ के तौर पर भी प्रयोग में लाये जा सकते हैं |
  • यह दस्त,पेशाब करने में कष्ट होना, हृदय की कमजोरी जैसी बीमारियों में भी प्रयोग में लाये जाते हैं |

विभिन्न बीमारियों में बेल के फायदे:

बेल के फायदे के अगले कर्म में हम कुछ बीमारियों का वर्णन करेंगे जिनमे बेल के फल, पत्ते या जड़, छाल के प्रयोग से राहत मिलती है |

  1. बालों या सिर में जूँ होने पर :

बेल के फायदे में अगला फायदा यह है की यदि बालों या सिर में जूँ पैदा हो जाएँ तो इनको नष्ट करने के लिए बेल के पके हुए फल के आधे कटोरी जैसे छिलके को साफकर उसमें तिल का तेल और कपूर मिलाकर दूसरे भाग से ढककर रखने से तेल को सिर में लगाने से सिर में जूँ नहीं रहती हैं ।

  1. दिल का दर्द होने पर :

इस बेल के फायदे में बेल के पत्तों का उपयोग किया जाता है एक ग्राम बेल के पत्तों के रस में 5 ग्राम गाय का घी मिलाकर शहद के साथ सेवन करने से दिल के दर्द में जल्दी आराम मिलता है ।

  1. बाल रोग की स्थिति में :

5 से 10 मिलीलीटर कच्चे फलों की मज्जा तथा आंवले की गुठली के काढ़े को दिन में 3 बार सेवन करने से बाल रोगों में लाभ मिलता है ।

  1. हैजा व उल्टी बीमारियों में:

बेल के फायदे में अगला फायदा लेने के लिए  10–10 ग्राम आम की मोंगी और बेल की गिरी को लेकर पीसकर 500 ग्राम पानी में पकायें । पकने पर 100 ग्राम शेष रहने पर इसमें शहद और मिश्री को मिलाकर 5 से 20 ग्राम तक इच्छानुसार रोगी को पिलाने से हैजा और उल्टी में आराम मिलता है । इसके अलावा दूसरी विधि यह है की 1 से 4 ग्राम तक बेल की गिरी और गिलोय को पीसकर आधा किलो पानी में पकायें । पकने पर 250 ग्राम शेष रहने पर इसे छानकर थोड़ा-थोड़ा रोगी को पिलायें । यदि हैजा तेज हो तो इस काढ़े में जायफल, कपूर और छुहारा मिलाकर काढ़ा तैयार करें तथा बार-बार थोड़ा-थोड़ा सा रोगी को पिलाते रहें इससे हैजे और उल्टी में जल्द ही आराम मिलता है ।

  1. पेट में पानी का भर जाने की समस्या होने पर:

यदि किसी के पेट में पानी भरने की समस्या हो गई हो तो उसे बेल के फायदे लेने के लिए 25 से 50 ग्राम ताजे बेल के पत्तों का रस लेना होगा और उसमें 1 से डेढ़ ग्राम छोटी पिप्पली का चूर्ण मिलाकर रोगी को पिलाना होगा इससे पेट में पानी भरने की समस्या में बेहद आराम मिलता है |

  1. मलेरिया का बुखार होने पर

मलेरिया के बुखार में बेल के फायदे लेने के लिए 7 मिलीलीटर बेल के पते का रस सुबह और शाम लेने से मलेरिया के बुखार में लाभ प्राप्त होता है |

  1. गर्भवती स्त्री को उल्टी होने पर:

गर्भवती स्त्री को उल्टी होने पर चावलों के पानी के साथ बेलगिरी के चूर्ण को मिलकर पीने से उल्टियाँ बंद हो जाती हैं |

  1. शरीर की बदबू को दूर करना:

शरीर की बदबू में बेल के फायदे लेने के लिए समबन्धित व्यक्ति को बेल के पाटों का रस निकालना होगा, और इस रस में शंख का चूर्ण मिलाकर शरीर पर लेप लगाना होगा इससे शरीर से आने वाली बदबू कम हो जाएगी | इसके अलावा शरीर से बदबू दूर करने की दूसरी विधि यह है की बेल के पत्तों के साथ काली अगर, खस, चन्दन इत्यादि को पीसकर लेप तैयार कर लें और फिर इस लेप को शरीर पर लगा लें |

About Author:

Post Graduate from Delhi University, certified Dietitian & Nutritionists. She also hold a diploma in Naturopathy.

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