भोजन के प्रकार एवं उनका मनुष्य मन पर प्रभाव

भोजन के प्रकार पर वार्तालाप करने से पहले एक पुरानी कहावत का यहाँ पर जिक्र कर लेते हैं यह कहावत आहार से सम्बंधित कहावत है इस कहवत के अनुसार ‘’जैसा खाओगे अन्न वैसा रहेगा मन’’ जैसा पिओगे पानी वैसी होगी वाणी’’ प्रचलित है | मनुष्य जो भी भोजन करता है वह अपने इस शरीर के लिए ही करता है इसलिए यदि मनुष्य द्वारा भोजन करने के लिए कोई पैमाना तय नहीं किया गया तो वह बीमार हो सकता है | भोजन के प्रकार पर नज़र डालने से पहले हमें यह जनन्ना बेहद जरुरी है की शास्त्रों एवं डॉक्टर में आहार को लेकर जो एक बात समान रूप से नज़र आती है वह है शाकाहार ही सबसे उत्कृष्ट आहार है यह आहार ही मनुष्य के शरीर में पर्याप्त विटामिन, प्रोटीन और कई अन्य खनिज लवणों की पूर्ति कराता है | भोजन हमारे जीवन में बहुत प्रभाव डालता है भोजन से हमारी मानसिकता पर बेहद गहरा प्रभाव पड़ता है | योग्य आहार की उपयोगिता की बात करें तो योग्य भोजन से हमारा आशय ऐसे भोजन से है जो शारीर में ग्रहण किये जाने के पश्चात् उर्जा उत्पन्न करते हुए तंतुओं का निर्माण करके टूटे फूटे तंतुओं की मरम्मत करके शरीर की विभिन्न क्रियाओं के लिए सहायक होता है | भोजन के प्रकार के बारे में जानने से पहले यह भी जानना जरुरी हो जाता है की किसी भी व्यक्ति द्वारा भूख लगने पर जितना भोजन ग्रहण किया जाता है वह उस व्यक्ति की खुराक कहलाती है | और यह भी सच है की प्रत्येक व्यक्ति की खुराक अलग लग होती है यह खुराक आयु, मौसम, कद काठी, सामाजिक परिवेश के आधार पर अंतरित हो सकती है |

भोजन के प्रकार

संतुलित भोजन क्या है

भोजन के प्रकार के बारे में जानने से पहले संतुलित भोजन के बारे में जानना भी आवश्यक है एक संतुलित भोजन से हमारा आशय एक ऐसे भोजन से है जिसमे विटामिन, कार्बोहायड्रेट, वसा, प्रोटीन, खनिज इत्यादि विद्यमान हों | शरीर के संतुलन को बनाये रखने के लिए 75% क्षार प्रधान एवं 25% अम्ल प्रधान भोजन की आवश्यकता होती है | भोजन को संतुलित भोजन बनाने के लिए एक ही प्रकार का भोजन न लेकर कई गुणों व रसों से युक्त आहार लेना चाहिए |

भोजन के प्रकार

भोजन के प्रकार की यदि हम बात करें तो यह मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं जिनका संक्षिप्त वर्णन हम निम्नवत तौर पर करेंगे |

  1. सात्विक भोजन:

सात्विक भोजन के अंतर्गत ऐसे भोज्य पदार्थ आते हैं जो जीव को प्राण, स्वास्थ्य, प्रसन्नता इत्यादि दें ये भोज्य पदार्थ रस युक्त प्राकृतिक और प्रकृति से सरल रूप से प्राप्त किये जाते हैं और यह आयुवर्धक एव बुद्धिवर्धक होते हैं | सात्विक भोजन के प्रकार मन को शांत कर कुशाग्र बुद्धि और संतुलित आचरण पैदा करते हैं | सात्विक भोजन अन्नमय, प्राणमय, मनोमय तथा विज्ञानमय कोशों को सामान रूप से पोषित करते हैं तथा समस्त कोशों में संतुलन बनाये रखते हैं | सात्विक भोजन की लिस्ट में दाल, चावल, गाय का दूध, घी, मीठे फल एवं वे पदार्थ जो पेड़ पौधे तथा दूध घी से बने हों आते हैं | इसके अलावा सात्विक भोजन के प्रकार में आयु, बुद्धि, बल, आरोग्य, सूख, प्रीती बढ़ने वाले रसयुक्त चिकने, स्थिर रहने वाले आहार भी सम्मिलित हैं |

  1. राजसी भोजन:

राजसी भोजन के अंतर्गत ऐसे भोज्य पदार्थ जो तीखे, अम्लीय, क्षारीय, अत्यधिक गर्म, जलन पैदा करने वाले तरह तरह के मसाले, तेल, घी इत्यादि में भुनकर स्वाद के लिए जायकेदार बनाये जाते हैं राजसी भोजन के प्रकार के अंतर्गत आटे हैं इनमे गरम मसाले, चाय, कॉफ़ी, तम्बाकू, काली मिर्च इत्यादि इस श्रेणी में आटे हैं | ऐसे भोजन शरीर की प्रक्रिया को अत्यधिक तीव्र करते हैं जिनसे शरीर में अधिक प्राण का संचार होने लगता है जो ठीक नहीं होता है | इसलिए राजसी भोजन के प्रकार पंचकोशों में असंतुलन का कारण बन जाते हैं | कडवे, खट्टे, लवण युक्त भोजन, दुःख और शोक उत्पन्न करने वाले होते हैं | इसके अलावा रिच डाइट जैसे हलुआ, पूरी , ज्यादा टला हुआ भोजन भी राजसी भोजन की ही श्रेणी में आता है |

  1. तामसिक भोजन:

तामसिक भोजन के अंतर्गत ऐसे भोज्य पदार्थ आते हैं जो बासी हों, मृत हों या उन्हें आंशिक रूप से सडाया गया हो | तामसिक भोजन के प्रकार में मांस, मछली, अंडे, बासी भोजन तथा अधिक मात्रा में भोजन लेना एवं शराब का एवं करना भी तामसिक भोजन की प्रवृत्ति को जन्म देता है | बासी, प्रदूषित, डिब्बों में बंद भोजन तामसिक भोजन की श्रेणी में आता है | जिस भिजन को बहुत समय पहले पकाया हुआ हो और रस रहित हो एवं दुर्गन्ध युक्त एवं अपवित्र हो वह तामसिक भोजन कहलाता है | लहसुन प्याज इत्यादि भी तामसिक भोजन की श्रेणी के अंतर्गत आते हैं |

भोजन के प्रकार का मन पर प्रभाव:

कहते हैं व्यक्ति जैसा भोजन करेगा वैसे ही उसके विचार एवं कार्य होंगे इसलिए हमें यह ध्यान देना होगा की भोजन के प्रकार तथा गुणों का प्रभाव व्यक्ति के शरीर पर ही नहीं पड़ता है अपितु मन पर भी पड़ता है तो आइये जानते हैं विभिन्न प्रकार के भोजन का मन पर क्या प्रभाव पड़ता है |

  • सात्विक भोजन के प्रकार का मन पर प्रभाव:

सात्विक भोजन करने से सत्वगुण समबन्धी विचार एवं क्रियाएं होती हैं | सात्विक भोजन करने से सत्वगुण जैसे सत्य, ज्ञान, बुद्धि की कुशलता, शांति, मन की स्थिरता व गंभीरता, ह्रदय की शुद्धता, मन की सरलता , आनंद, सुख इत्यादि सकरात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं | सात्विक भोजन के प्रकार से संयम तथा सहनशीलता का विकास होता है शारीर बीमारियों से दूर एवं स्वस्थ बना रहता है चित्त में निर्मलता बनी रहती है |

  • राजसी भोजन का मन पर प्रभाव:

राजसी भोजन से मन की चंचलता, व्यवहार में ईर्ष्या, द्वेषी एवं झगड़े की प्रवृत्ति, वाणी में कठोरता एवं कर्कशता तनाव एवं दुःख इत्यादि परिणाम प्राप्त होते हैं | राजसी भोजन के प्रकार क्रोध, वासनाओं तथा उत्तेजना को जन्म देते हैं | मन सदा चंचल रहता है शरीर में भारीपन की अनुभूति होती है चित्त में एकग्रता की कमी देखि जाती है और तंत्रिका तंत्र उत्तेजित रहता है |

  • तामसिक भोजन के प्रकार का मन पर प्रभाव:

तामसिक भोजन के सेवन से आलस्य, अज्ञान, मोह, मद, क्रोध, भारीपन इत्यादि दुष्प्रभाव होते हैं | तामसिक भोजन के प्रकार से विचार और व्यवहार में कठोरता, क्रूरता, एवं हिंसा आदि आती रहती हैं | व्यक्ति स्वार्थी, झगड़ालू, इत्यादि प्रकृति का हो जाता है तामसिक भोजन करने वाले व्यक्ति का व्यवहार रुखा एवं राक्षशी प्रवृत्ति का हो जाता है जो परेशानी एवं दुःख का कारण बनता है |

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