मासिक धर्म क्या है इसका महत्व, सावधानियाँ एवं होने की प्रक्रिया.

मासिक धर्म शुरू होने के पहले दिन जब रक्त निकलता है तो लड़कियां आमतौर पर घबरा उठती हैं । इसका मुख्य कारण यह है कि उन्हें पहले से इसके बारे में अपनी मां, भाभी या बड़ी बहन से शिक्षा नहीं मिली है कि भविष्य में उनके सामने भी यह दिन आयेगा । अतः घबराने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि हर नारी के जीवन में यह दिन आता है और 45 वर्ष की अवस्था तक नियमित रहता है । यह परिवर्तन स्वाभाविक और प्राकृतिक है । अतः हर बड़ी महिला को अपने घर में यौवन की दहलीज पर कदम रखती हर किशोरी को शारीरिक परिवर्तनों की जानकारी समय-समय पर पहले ही देते रहना चाहिए, ताकि उस वक्त उनके मन में किसी तरह का भय उत्पन्न न हो ।

मासिक धर्म क्या है

मासिक धर्म क्या है ?

मासिक धर्म एक सहज स्वाभाविक प्राकृतिक शारीरिक क्रिया है । स्त्रियों के जननांगों में दो डिम्ब नलिकायें होती हैं । इनके किनारों पर बादाम के आकार-प्रकार की एक-एक डिम्ब ग्रन्थि जुड़ी होती है । इन्हीं डिम्ब ग्रन्थियों में डिम्बों का निर्माण होता है जो विवाह के बाद पुरुष के शुक्राणु से मिलकर संतान की रचना करते हैं । 10-11 वर्ष की किशोरी की डिम्ब ग्रन्थियों में हजारों की संख्या में अर्धविकसित डिम्ब भरे पड़े रहते हैं, क्योंकि इस उम्र में किशोरी भी अर्धविकसित अवस्था में होती है । लगभग 15 वर्ष की अवस्था वाली लड़की के डिम्ब पूर्ण विकसित हो जाते हैं और उसमें गर्भ धारण करने की क्षमता आ जाती है ।

नारी के स्वास्थ्य पर मासिक धर्म का महत्व:

मासिक धर्म के बिना नारी मां नहीं बन सकती । उसका शारीरिक विकास नहीं हो सकता और सबसे बड़ी बात, उनमें नारीत्व के गुण पूर्णतया नहीं होते । मासिक धर्म के आरम्भ में शुद्ध रक्त नहीं होता, बल्कि एक प्रकार की लसिका स्राव होता है । कुछ दिन बाद रक्त स्राव होने लगता है । मासिक धर्म आरम्भ में अनियमित रहता है, परन्तु इसमें चिंता की कोई बात नहीं है ।

मासिक धर्म का स्राव नारी के शरीर के कौन से अंग से होता है

स्त्रियों की जननेन्द्रिय में दो छिद्र ऊपर-नीचे होते हैं । ऊपर वाला छोटा छिद्र मूत्र मार्ग होता है। नीचे वाला छिद्र थोड़ा बड़ा होता है। मासिक धर्म के समय इर्स छिद्र में से रक्तस्राव होता है । विवाह के बाद पुरुष इसी मार्ग से संभोग क्रिया करता है और गर्भ रहने पर 9 महीने बाद बच्चा भी उसी मार्ग से पैदा होता है । हर महीने जो रक्तस्राव होता है, वह गर्भाशय से संबद्ध जो एक झिल्ली होती है, उससे रिस-रिसकर बाहर आता है । यह रक्त शरीर के रक्त से भिन्न होता है । यह कुछ अधिक गाढ़ा व गहरा रंग लिए होता है ।

मासिक धर्म के दौरान होने वाले परिवर्तन एवं सावधानियाँ:

गर्भ धारण की अवस्था में मासिक धर्म बंद हो जाता है । मासिक धर्म के समय शुरू-शुरू में किशोरी लड़कियां कुछ विचलित होती हैं, पर कुछ समय बाद वे इसकी आदी हो जाती हैं । इस काल में लड़कियों में आलस्य छा जाता है । परन्तु इससे उन्हें बचना चाहिए । इन दिनों अधिक मसालेदार व्यंजन तथा तैलीय खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए । इन्हीं दिनों उनमें कामोत्तेजना की तीव्रता बढ़ती है । परन्तु उन्हें संयम से रहकर किसी बुरी आदत का शिकार होने से बचना चाहिए । अपना मन अन्य मनोरंजनों, पढ़ाई या किसी रचनात्मक कार्य में लगाना चाहिए । इस यौवन काल में किशोरियों के शरीर में यौवन का उफान जन्म लेता है, अत: सजने और संवरने का भी यही काल होता है और बिगड़ने-बरबाद होने का भी यही काल होता है । अतः यौवन के उफान का अन्य रचनात्मक कार्यों में जो भविष्य में आने वाले सुनहरे जीवन का द्वार खोलते हैं, उनमें लगाना चाहिए । अत: इसी उम्र में नारी-शरीर की पूरी रचना प्रक्रिया गर्भधारण की स्थिति, प्रसव आदि के बारे में जानकारी तथा किसी गलत काम से होने वाले दुष्परिणामों की भी पूरी-पूरी जानकारी दे देनी चाहिए, ताकि वे कोई भी गलत कदम उठाने की ओर प्रवृत्त न हो सकें और अपनी भलाई-बुराई स्वयं समझने में समर्थ हो सकें । क्योंकि उन्हें गलत काम के परिणामों का ध्यान बना रहेगा । बुरी आदतों में प्रोत्साहन देने वाले पुरुष और स्त्रियों से सावधान रहना चाहिए और उन्हें स्पष्ट बता देना चाहिए कि हम अनभिज्ञ नहीं हैं । इन्हीं दिनों मुंहासे, एक्ने, कील, झाइयां आदि चेहरे पर उभरती हैं कारण इस अवस्था में शरीर का तेजी से विकास होता है । और कई शारीरिक, मानसिक असंतुलन पैदा हो जाते हैं । शरीर में हार्मोन सम्बन्धी परिवर्तन होने लगते हैं । उत्तेजना का उफान अपनी चरम सीमा पर होता है । मन में तरह-तरह के सपने, कल्पनाएं, भावनाएं, जिज्ञासाएं, समस्याएं जागृत होती हैं । परन्तु संकोच वश वे इन्हें किसी से कहने में असमर्थ होती हैं । इन्हीं मनोभावों, जिज्ञासाओं, कामोत्तेजना की भावना को दबाने छिपाने से शरीर की ग्रन्थियां खासकर तैलीय ग्रन्थियां ज्यादा उत्तेजित होकर अधिक तेल छोड़ने लगती हैं । तैलीय त्वचा पर धूल, गंदगी के कण चिपक कर तरह-तरह विकार उत्पन्न कर देते हैं । फलस्वरूप चेहरे पर मुहासे, एक्ने, कील, झाइयां आदि निकल आते हैं । ऐसे में सादा भोजन, हरी सब्जियां, फल और ठंडे पेय पदार्थ अधिक मात्रा में लेना चाहिए । गरिष्ठ तला हुआ मिर्च-मसाले का भोजन और गर्म पेय पदार्थों को बन्द कर देना चाहिए तथा चेहरे की तैलीय परत को दिन में साबुन से कई बार धोकर हटाते रहना चाहिए इससे इनका जोर कम हो जाता है ।

मासिक धर्म होने की प्रक्रिया:

हर दो माह बाद एक डिम्ब ग्रन्थि से निकलकर बाहर गर्भाशय में आता है । इसी प्रकार दूसरी डिम्ब ग्रन्थि से | भी दो माह में एक डिम्ब बाहर निकलता है । इस प्रकार दोनों डिम्ब ग्रन्थियां बारी बारी से एक-एक डिम्ब छोड़ती रहती हैं । इस तरह हर माह एक डिम्ब उनके गर्भाशय में उपस्थित हो जाता है । डिम्ब ग्रन्थि से निकलकर साथ वाली सूक्ष्म नलिकाओं की सहायता से चलकर गर्भाशय में आ जाता है । परन्तु पुरुष के शुक्राणु विवाह से पहले तो गर्भाशय में मौजूद नहीं रहते । इस कारण यह डिम्ब शुक्राणु (पुरुष के वीर्य में मौजूद सूक्ष्म अणु) से संपर्क न होने की दशा में गंदे खून के रूप में योनि मार्ग से बाहर निकल जाते हैं । चूंकि डिम्ब एक माह में एक बार गर्भाशय में आता है अतः माह में एक ही बार  रक्तस्राव होता है । यही मासिक धर्म या मासिक स्राव कहलाता है । इस प्रकार यह पूर्ण प्राकृतिक क्रिया है जो हर युवती के जीवन में आती है ।

मासिक धर्म का स्राव कितने दिनों तक रहता है

मासिक स्राव चार दिन तक धीरे-धीरे होता है । चौथे दिन लगभग नहीं के बराबर होता है और पांचवें दिन बिल्कुल साफ हो जाता है । उन दिनों रूई के कोमल पैड्स या कोमल कपड़े की मोटी पट्टी योनि मार्ग पर बांधी जाती है । इसे लंगोटी की तरह लगाकर बांध लिया जाता है, ताकि रक्त का स्राव इस पट्टी में आकर जज्ब हो जाए और कपड़े न बिगड़े । इन पट्टियों को दिन में दो बार बदलना चाहिए । सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए । योनि मार्ग की पट्टी बदलने से पहले अच्छी तरह स्वच्छ डिटोल मिले पानी से धो लेना चाहिए । यह धारणा गलत है कि इन चार दिनों तक स्नान नहीं करना चाहिए । बल्कि मासिक धर्म के दौरान रोज स्नान अवश्य करें और स्वच्छता नियमित करती रहें । इन दिनों दूर बैठना भी जरूरी नहीं, यह पुरानी रीति है । शुरुआत में मासिक धर्म कुछ अनियमित-सा रहता है, परन्तु बाद में यह नियत समय पर होता है । यदि कोई अन्य तरह की समस्या हो तो अपने से बड़ी स्त्री या सहेली को समस्या अवश्य बता दें । इसमें झिझकने से स्वयं का ही नुकसान है । समय पर बताने और जानकारी लेते रहने से सब कुछ सामान्य रहता है । लगभग 45 वर्ष के आस-पास मासिक धर्म अपने आप बन्द हो जाता है । यह भी एक स्वाभाविक क्रिया है । परन्तु युवावस्था में मासिक धर्म रुकने या बन्द होने के दो ही कारण हो सकते हैं, या तो कोई विशेष गड़बड़ी या फिर गर्भाधान अर्थात् पेट में बच्चा आ जाने का पहला संकेत । गर्भाधान पुरुषसंपर्क से ही संभव होता है ।

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