मिर्गी की बीमारी के कारण लक्षण एवं ईलाज

मिर्गी की बीमारी के कारण लक्षण एवं ईलाज

मिर्गी की बीमारी पर इस लेख के माध्यम से हम विस्तृत तौर पर वार्तालाप करेंगे लेकिन अक्सर आपने अपने आस पास किसी व्यक्ति को अचानक जमीन पर गिरते देखा होगा और उसके बाद लोगों से सुना होगा की उसे मिर्गी का दौरा पड़ा है | जी हाँ मिर्गी की बीमारी की यदि हम बात करें तो यह गिरने की बीमारी ही होती है इसमें पीड़ित व्यक्ति दौरा पड़ने पर गिर पड़ता है | इसमें पीड़ित व्यक्ति का पूरा शरीर अकड़ जाता है जिसे Seizure Disorder कहते हैं | आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से मिर्गी की बीमारी के कारणों, लक्षणों एवं इसकी रोकथाम के उपायों पर प्रकाश डालने की कोशिश करेंगे |

मिर्गी की बीमारी के karan-lakshan-ilaj

मिर्गी की बीमारी क्या है ?

मिर्गी की बीमारी का उद्गम सर्वप्रथम ग्रीक भाषा के शब्द Epilepsia से हुआ है क्योंकि इसी ग्रीक शब्द से ही अंग्रेजी भाषा के शब्द Epilepsy की उत्पति हुई है जिसका हिन्दी में अर्थ गिरने की बीमारी यानिकी मिर्गी होता है | गिरने की बीमारी नामक शब्द इस बीमारी को इसलिए दिया है क्योंकि इस बीमारी में पीड़ित व्यक्ति स्नायु कोषों से निकलने वाले विद्युतीय प्रवाह में होने वाले परिवर्तन के कारण जमीन पर वास्तव में गिर जाता है । जहाँ तक मनुष्य के मस्तिष्क का सवाल है यह  लाखों स्नायु कोषों से मिलकर बना होता है, जिन्हें न्यूरोन्स कहा जाता है, मष्तिष्क में उपलब्ध प्रत्येक न्यूरोन, खुद को Electrically Charged स्थिति में बनाए रखता है । मस्तिष्क अर्थात दिमाग द्वारा संपन्न होने वाली हर तरह की क्रिया जैसे महसूस करना, देखना, सोचना और मांसपेशियों की हलचल सब कुछ तभी होता है जब ये विद्युतीय संकेत एक न्यूरोन से दूसरे न्यूरोन से  होकर  गुजरते हैं । एक सामान्य एवं स्वस्थ्य मस्तिष्क निश्चित क्रम में लगातार यह विद्युतीय लय पैदा करता रहता है । यही कारण है की यदि कभी किसी न्यूरोन द्वारा ठीक तरीके से यह संकेत नहीं दिया जाता तो इस विद्युतीय लय में रूकावट पैदा हो जाती है । जिसके कारण मस्तिष्क में हलचल पैदा हो जाती है और इस हलचल को संक्षिप्त विद्युतीय तूफान भी कहा जाता है और यदि बीमारी के तौर पर इसका नामकरण करेंगे तो इसे ही मिर्गी की बीमारी कहते हैं । साधारण शब्दों में मिर्गी दरअसल मस्तिष्क में पैदा होने वाला एक तरह का विकार है जिसके कारण मरीज को बार-बार दौरा आ जाता है । जहाँ तक इस दौरे की अवधि अर्थात समयकाल का सवाल है यह मिर्गी के प्रकार के आधार पर अंतरित हो सकता है अर्थात मिर्गी के प्रकार के आधार पर यह दौरा कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक का हो सकता है |

मिर्गी की बीमारी का कारण (Cause of Epilepsy in hindi):

मिर्गी की बीमारी अर्थात मिर्गी के दौरे के भिन्न भिन्न कारण हो सकते हैं । मिर्गी एक ऐसा विकार अर्थात रोग है, जिसके एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं | लेकिन कुछ संभावित कारणों की लिस्ट निम्नवत है |

  • कोई भी ऐसा कारण जो मष्तिष्क में न्यूरोन की सामान्य क्रिया में रूकावट पैदा करने की कोशिश करे या रुकावट पैदा कर दे ।
  • मस्तिष्क में पैदा होने वाली कोई भी गड़बड़ी या अन्य कोई भी बिमारी मिर्गी का कारण हो सकती है ।
  • मिर्गी के दौरे का संबंध मस्तिष्क के संक्रमण से भी होता है |
  • किसी मानसिक आघात या अन्य किसी भी पहचानी जा सकने वाली समस्या से भी मिर्गी की बीमारी हो सकती है |
  • कुछ लोगों को कई बार गर्भावस्था में भी मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं |
  • नींद की कमी या दवाइयों को डॉक्टर के बताये अनुसार न लेना भी मिर्गी के दौरे का कारण हो सकती है |
  • ड्रग्स या शराब का अधिक सेवन या किसी तरह की बीमारी भी एक कारण हो सकती है |
  • रोशनी, तेज आवाज और स्पर्श के प्रति अधिक संवेदनशीलता के कारण भी मिर्गी की बीमारी या मिर्गी का दौरा पड़ सकता है ।

मिर्गी की बीमारी के लक्षण :

मिर्गी की बीमारी के कारण मिर्गी का दौरा पड़ने पर पीड़ित व्यक्ति की आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है । उस व्यक्ति को अजीब-अजीब या असामान्य बातों का एहसास होने लगता है पीड़ित व्यक्ति की शारीरिक गतिविधि भी असामान्य हो जाती है । जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की मिर्गी का दौरा बहुत थोड़े-समय अर्थात कुछ सेकंड से लेकर मिनटों तक रहता है । लुच समय के बाद मस्तिष्क के स्नायु कोष फिर से अपने आप अपनी सामान्य स्थिति में आ जाते हैं । मिर्गी के प्रकारों के आधार पर मिर्गी की बीमारी के लक्षण सामान्तया कुछ इस प्रकार से हो सकते हैं |

  • पीड़ित व्यक्ति पूरी तरह मूच्छित होकर, जमीन पर गिर सकता है ।
  • मिर्गी की बीमारी में अचानक से पूरा शरीर ऐंठ अर्थात अकड़ जाता है और पीड़ित व्यक्ति को झटके लगना शुरू हो जाते हैं |
  • पीड़ित व्यक्ति एक टक किसी वस्तु या व्यक्ति घूर सकता है |
  • पीड़ित व्यक्ति की आखों में भय छा जाता है |
  • पीड़ित व्यक्ति में किसी तरह की प्रतिक्रिया न होना भी मिर्गी के लक्षण हो सकते हैं |

मिर्गी के लिए जांच (Test for Epilepsy in hindi):

मेडिकल साइंस की उन्नति के साथ चिकित्सकों द्वारा मिर्गी का निदान करने के लिए तरह-तरह के परीक्षण या जांचें एवं उपाय विकसित किए गए हैं, इन जांचों से यह पता लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति विशेष को मिर्गी की बीमारी है या नहीं, यदि किसी व्यक्ति को बीमारी है तो उसका प्रकार क्या है | इन सब प्रश्नों का हल ढूंढने के लिए चिकित्सक द्वारा पीड़ित व्यक्ति के तरह-तरह के दर्द रहित परीक्षण लिए जाते हैं जो जिनके परिणाम आने के बाद ही चिकित्सक यह बता पाने में सक्षम हो पाता है की किसी व्यक्ति को मिर्गी की बीमारी है या नहीं | मिर्गी की बीमारी की पुष्टि करने में सहायक कुछ मुख्य परीक्षण इस प्रकार से हैं |

ईईजी टेस्ट (electroencephalogram Test):

मिर्गी की बीमारी का पता लगाने के लिए चिकित्सक द्वारा ईईजी टेस्ट किया जा सकता है |   ईईजी का फुल फॉर्म electroencephalogram होता है यह परीक्षण मस्तिष्क की विद्युत् क्रियाओं का अध्यन करने के लिए किया जाता है | इस परीक्षण के दौरान व्यक्ति को बिठाकर या लिटाकर व्यक्ति के माथे पर पैड रख दिए जाते हैं, ये पैड मस्तिष्क में होने वाली विद्युतीय गतिविधि को पकड़ लेते हैं, और साथ ही एक ऐसे उपकरण में भेज देते है जो मस्तिष्क की तरंगों का प्रिंट आउट तैयार कर देता है ।

ब्रेन स्कैन (Brain Scan):

मिर्गी की बीमारी को पकड़ने के लिए चिकित्सक द्वारा ब्रेन स्कैन भी किया जा सकता है इस परीक्षण के दौरान यह पता लगाया जाता है कि कहीं मनुष्य के मस्तिष्क का कोई हिस्सा तो क्षतिग्रस्त नहीं हो गया, जिसके कारण मिर्गी के दौरे पड़ते हों | स्कैन की यदि हम बात करें तो इसका सबसे सामान्य प्रकार है सीटी स्कैन (कप्यूटेड टेमोग्राफी) इस परीक्षण के दौरान व्यक्ति को एक छोटे से पलंग पर लिटा दिया जाता है और सर की तरफ से इस पलंग को स्कैनर में डाल दिया जाता है जोकि वाशिंग मशीन के ड्रम जैसे आकार का होता है, मशीन के भीतर अलग-अलग एंगल से मष्तिष्क के एक्सरे लिए जाते हैं, इन एक्सरे को कप्यूटर के जरिए गुजारा जाता है ताकि व्यक्ति के  मष्तिष्क की तस्वीर तैयार हो सके । इसके अलावा इससे भी आधुनिक एक और तकनीक है जिसे हम MRI (मैग्नेटिक रेजीनेस इमेजिंग)  कहते हैं । यह मष्तिष्क की उच्च-क्वालिटी की तस्वीर उपलब्ध कराने में सक्षम है, इसमें एक्सरे या अन्य विकिरण का उपयोग नहीं होता, इस मशीन की आकृति की बात करें तो ड्रम जैसे स्केनर में एक शक्तिशाली चुम्बक होता है, जो मस्तिष्क से मिलने वाले संकेतों को पकड़ लेता है, इन संकेतों को कप्यूटर में डाला जाता है, जो स्कैन किए गए क्षेत्र की एक 3 आयामी तस्वीर तैयार कर उन्हें स्क्रीन पर प्रदर्शित कर देता है ।

रक्त परीक्षण (Blood test):

रक्त परिक्षण यानिकी ब्लड टेस्ट में सामान्यत: डॉक्टर द्वारा रक्त का नमूना लेकर इसकी जांच करने प्रयोगशाला भेजा जाता है | इसमें चिकित्सक द्वारा व्यक्ति की सामान्य स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की जाती है,  चिकित्सक रक्त परीक्षण की जानकारी के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि क्या कोई ऐसा कारण है जो व्यक्ति के मिर्गी के दौरों के लिए जिम्मेदार हो सकता है ।

मिर्गी की बीमारी का ईलाज कैसे होता है :

चिकित्सक द्वारा मिर्गी की बीमारी का ईलाज शुरू करने से पहले यह जानना जरूरी होता है कि मरीज को किस प्रकार की मिर्गी की बीमारी है, यह पता करने के लिए चिकित्सक द्वारा कुछ  परीक्षण और जांच जिनका जिक्र हम उपर्युक्त वाक्यों में कर चुके हैं करवाए जा सकते हैं । मिर्गी की बीमारी का ईलाज करने से पहले पीड़ित अर्थात रोगी को किस प्रकार की मिर्गी की बीमारी है, यह जानना बहुत ही जरूरी होता है, क्योंकि इसके आधार पर ही मरीज को दिया जाने वाले उपचार बेहतर असरकारक साबित हो सकते हैं | सामान्यत: इसका उपचार करने के लिए एंटी एपीलेप्टिक या एंटी कन्वलशन दवाइयां दी जाती हैं । इन दवाओं का चुनाव करते समय चिकित्सक द्वारा यह ध्यान विशेष रूप से रखा जाता है कि रोगी की मिर्गी की बीमारी का प्रकार क्या है? इन दवाओं का विपरीत प्रभाव Side Effects क्या हो सकता है?और  इसकी कितनी खुराक रोगी के लिए असरदार साबित हो सकती है? इन आधुनिक दवाइयों की मदद से ज्यादातर रोगियों की बीमारी की रोकथाम संभव है, और इनसे कोई गंभीर विपरीत प्रभाव भी पैदा नहीं होते । मिर्गी की बीमारी से ग्रसित रोगी को अपने ईलाज के दौरान अपने डाक्टर के निर्देश और सलाह पर अमल करना बेहद जरूरी होता  है । इसके अलावा रोगी को चाहिए की वह अपने ईलाज में प्रयुक्त होने वाली दवाइयों के विषय में चिकित्सक से बेझिझक बात करे |
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