मुहं के छाले, मुहं आना – Stomatitis कारण लक्षण ईलाज |

Stomatitis को मुहं आना या मुहं के छाले भी कहा जाता है इसमें प्रभावित व्यक्ति के मुहं और जीभ पर छोटे छोटे घाव या छाले हो जाते हैं | यही कारण है की Stomatitis से प्रभावित व्यक्ति को खाना खाने, पानी पीने या अन्य तरल पदार्थ पीने में, बोलने में भी परेशानी हो सकती है | इसलिए जब भी किसी भी व्यक्ति के मुहं में मुहं के छाले होते हैं तो वह कोशिश करता है की इनसे जल्द से जल्द कैसे निजात मिल सकती है | और वह इस तरह से भी सोचने लगता है की आखिर उसके मुहं में छाले होने के क्या कारण रहे होंगे | जहाँ तक बच्चों में Stomatitis होने का सवाल है इसमें बच्चों की जीभ व मुख की झिल्ली पर लाल लाल दाने से हो सकते हैं, जिससे बच्चे को दूध पीने में दिक्कत होती है और वह दूध नहीं पी पाता है जिसके कारण वह भूख से रोता रहता है |

मुहं के छाले, मुहं आना - Stomatitis

मुहं में छाले के कारण (Cause Of Stomatitis in Hindi):

बड़ों एवं बच्चों में इस रोग के होने के अलग अलग कारण हो सकते हैं, इसलिए सबसे पहले हम बड़ों में इस रोग के होने के कारणों को जानने की कोशिश करेंगे |

बड़ों में मुहं के छाले होने के कारण:

बड़ों में मुहं के छाले होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं |

  • अत्यधिक गरिष्ठ भोजन के सेवन से मुहं के छाले हो सकते हैं |
  • पेट में आंतरिक गड़बड़ी के चलते भी यह हो सकते हैं |
  • खाना ठीक से हजम न हो पाने पर कब्ज हो सकती है जिससे मुहं के छाले हो सकते हैं |
  • अत्यधिक गर्म चीजों का सेवन करने के दौरान मुहं जल जाने के कारण भी ये हो सकते हैं |
  • किसी ग्रसित व्यक्ति का जूठा इत्यादि खाने से भी इस तरह की समस्या हो सकती है |
  • शराब, सिगरेट, तम्बाकू, गुटखा इत्यादि का सेवन करने से भी मुहं के छाले हो सकते हैं |
  • पोषण युक्त भोजन न करना एवं विटामिन बी की कमी से भी इस तरह की समस्या उत्पन्न हो सकती है |
  • महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमिताओं एवं गड़बड़ी के कारण भी मुहं के छाले हो सकते हैं |
  • अत्यधिक एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग के कारण भी इस तरह की समस्या हो सकती है |

बच्चों में मुहं के छाले होने के कारण:

बच्चों में मुहं के छाले होने अर्थात Stomatitis के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार से हैं |

  • मुहं के छाले candida albicans नामक फफूंदी के संक्रमण से होते हैं |
  • बच्चों की दूध पीने वाली बोतल और उसके निप्पल को अच्छी तरह साफ़ न करने पर भी इस तरह की समस्या का जन्म हो सकता है |
  • बच्चे द्वारा चुसनी का अधिक उपयोग करने पर भी मुहं के छाले हो सकते हैं |
  • बच्चों को जरुरत से ज्यादा गरम दूध पिलाने पर उनका मुहं जल सकता है जिससे मुहं में छाले हो सकते हैं |

मुहं के छाले के लक्षण (Symptoms of Stomatitis in Hindi):

  • जीभ, तलुए गाल की भीतरी झिल्ली पर छोटे सफेद छाले हो जाते हैं जिनके चारों ओर ललाई छाई रहती है |
  • इन छालों की यदि हम बात करें तो यह जमें हुए दही के जैसे होते हैं जिन्हें आसानी से खींचकर अलग नहीं किया जा सकता वरना इनसे खून निकलने लगता है ।
  • किसी बच्चे में मुहं के छाले होने पर वह बालक दूध नहीं पी पाता जिससे वह रोता रहता है ।
  • छाले होने पर मुहं के अन्दर लार अधिक बनने लगती है जिससे मुहं से अधिक लार निकल सकती है |

मुहं के छालों का ईलाज (Treatment of Stomatitis in Hindi):

हालांकि मुहं के छालों का ईलाज कारणों के आधार पर अंतरित हो सकता है, इसलिए ग्रसित व्यक्ति को चिकित्सक की सलाह पर ही जैल या अन्य औषधियों का उपयोग करना चाहिए | यहाँ पर हम कुछ सामान्य औषधियों का जिक्र करेंगे जिन्हें इस प्रकार की समस्याओं से निजात पाने के उपयोग में लाया जाता रहा है |
चिकित्सक द्वारा प्रभावित व्यक्ति को Gentian Violet या boroglycerine मुहं के छालों पर लगाने को दी जा सकती है |
चूँकि यह एक फफूंदी जनित संक्रमण होता है इसलिए इसे रोकने के लिए चिकित्सक द्वारा मरीज को nystatin, miconazole इत्यादि औषधियां निर्धारित मात्रा में दी जा सकती हैं | इसके अलावा मुहं पर लगाने के लिए Hamycin Suspension for mouth दी जा सकती है |

मुहं के छाले के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां:

  • अपने मुहं की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें ।
  • यदि बच्चा चुसनी का प्रयोग करता है तो उसे बंद कर दें।
  • निप्पल व दूध की बोतल को दूध पिलाने से पहले अच्छे तरह से गरम या गुनगुने पानी से साफ़ कर लें ।
  • गरिष्ठ भोजन जैसे अधिक तला भुना, नमक मिर्च, मसालेदार भोजन का परहेज करें |
  • मुहं के छाले के दौरान अधिक मीठी चीजें खाने से भी बचना चाहिए |
  • शराब, सिगरेट, बीड़ी, तम्बाकू इत्यादि मादक पदार्थों का सेवन इस दौरान त्याग दें या बहुत कम कर दें |
  • इस दौरान बिना डॉक्टर की सलाह के किसी प्रकार के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने से बचें |

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