मूत्रवाहक तंत्र Urinary System in Hindi

मूत्रवाहक तंत्र की बात करें तो इसमें दो वृक्क, दो मूत्र प्रणालियां एवं मूत्राशय अंग सम्मिलित होते हैं । इसलिए इस लेख के माध्यम से हम मनुष्य के यूरिनरी सिस्टम के बारे में जानने की कोशिश करेंगे |

मूत्रवाहक तंत्र urine system in hindi

मूत्रवाहक तंत्र के कार्य (Function of Urinary System in Hindi) :

रक्त जब घूमता हुआ वृक्क में पहुंचता है तो वृक्क अनावश्यक वस्तुओं को रक्त से अलग कर लेता है और जलीय तरल रूप में, जिसे साधारण बोलचाल की भाषा में मूत्र कहते हैं, को मूत्राशय में धकेल देता है । इस प्रकार यह मूत्रवाहक तंत्र मूत्र को शरीर से बाहर निकालकर हमारे शरीर को शुद्ध करता रहता है ।

मूत्र प्रणाली :

हमारे शरीर में दो मूत्र नलियां (Ureters) होती है । एक दाहिनी ओर, दूसरी बाई ओर इसकी लम्बाई 10 से 12 इंच तक होती है इसके दो सिरे हाते हैं, ऊपर का चौड़ा सिरा गुर्दे से और नीचे का पतला सिरा वस्तिगहर में मूत्राशय से मिला रहता है । मूत्रनली में ही कभी-कभी पथरी आकर रूक जाती है, जिससे रोगी को बड़ी तकलीफ होती है ।

मूत्राशय :

मूत्रवाहक तंत्र में मूत्राशय को ही बस्ति या मसाना कहते हैं । यह एक थैली है, जिसमें मूत्रनालियों द्वारा मूत्र आकर इकट्ठा होता है ।

मूत्राशय की स्थिति :

यह उदर में सबसे नीचे के भाग में वस्तिगहर में स्थित होता है । पुरूषों में इसके पीछे दो शुक्राशय और स्त्रियों में गर्भाशय होते हैं । मूत्र से भर जाने पर यह बिल्कुल गोल हो जाता है, मूत्र से खाली हो जाने पर इसकी शक्ल तिकोनी हो जाती है । मूत्राशय साधारण स्थितियों अर्थात दशाओं में 5 इंच लम्बा और 3 इंच चौड़ा होता है । मूत्राशय के एकदम नीचे के भाग से एक नली शुरू होती है, जिसे मूत्रमार्ग कहते हैं । यह पुरूषों में 7 से 8 इंच लम्बी होती है । इसके शुरू के भाग में प्रोस्टेट ग्रंथि रहती है । मूत्र वाहक तंत्र में प्रोस्टेट के आगे से वह लिंग के निचले भाग तक रहता है । लिंग के आगे छेद है उसे मूत्र द्वार कहते हैं ।

स्त्रियों का मूत्रमार्ग :

स्त्रियों का मूत्रमार्ग डेढ़ इंच लम्बा होता है और उसकी नली योनि की दीवार से मिली होती है तथा इसका छिद्र योनि के छिद्र से आधा इंच ऊपर होता है । मूत्रमार्ग से मूत्र होता हुआ छिद्र के मार्ग से बाहर आ जाता है ।

वृक्क की बनावट (Structure of kidney in hindi):

मूत्र बनाने वाले अंग को वृक्क (Kidney) या (गुर्दा) कहते हैं। हमारे शरीर में दो वृक्क होते हैं एक दायां और दूसरा बायां । ये रीढ़ के दाहिनी ओर बाई तरफ तथा 12 वीं पसली के सामने रहते हैं । यह चार इंच लम्बा, ढाई इंच चौड़ा होता है । वृक्क के ऊपर के सिरे के ऊपर टोपी की तरह एक प्रणालीविहीन ग्रंथि होती है, जिसे उपवृक्क (Adrenal gland) कहते हैं ।

मूत्रवाहक तंत्र में वृक्क के कार्य :

ये मूत्र को बाहर निकालकर शरीर को शुद्ध करते रहते हैं । इनका मुख्य कार्य खून से यूरिया, यूरिक एसिड और सोडियम आदि बेकार वस्तुओं को, रक्त से छानकर अलग कर लेना है । यह छानी हुई व्यर्थ वस्तु ही मूत्र में भेजते रहते है । मूत्रवाहक तंत्र में मूत्र के अवयव वृक्क के अंदर नहीं बनते बल्कि शरीर के दूसरे भागों में बनते हैं । वृक्क तो इन्हें खून से अलग करके मूत्र द्वारा बाहर निकाल देते हैं ।

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