योग निद्रा की जानकारी एवं करने की विधि

योग निद्रा का वर्तमान रहन सहन में महत्व समझने के लिए हमें यह स्वीकार करना होगा की जिस तरह से आज परिवेश वातावरण, पर्यावरण, रहन-सहन, एवं  व्यस्त भरा जीवन हो गया है, इन्हीं सब वजहों से मानव जीवन भी त्रस्त हो चला है । और अक्सर देखा गया है की जब आदमी तनाव से पीड़ित होता है तो वह अच्छे कामों की ओर नहीं अपितु बुरे कामों की ओर जल्दी अग्रसित हो जाता है | कहने का आशय यह है की व्यक्ति तनाव की स्थिति में दुनिया के जितने भी गलत काम जैसे नशा करना, लड़ाई-झगड़े करना, बात-बात में गुस्सा करना इत्यादि सभी करता है । पारिवारिक ज़िदगी व अड़ोस-पड़ोस आदि में हर जगह पर इसका असर दिखता है । इसलिए इन चीजों से बचने के लिए यदि हम अपने जीवन में योग निद्रा का प्रतिदिन अभ्यास करें, तो वर्तमान जीवन सुखी व शांतिमय हो जाएगा और भविष्य का निर्माण भी अच्छा होगा ।

योग निद्रा

योगनिद्रा क्या है?

योग निद्रा की यदि हम बात करें तो यह एक ऐसी क्रिया या एक ऐसी यौगिक नींद है, जो तुरंत आदमी की चेतना को, सोयी हुई/खोई हुई शक्ति को नई ताजगी भरी/ प्रसन्नता के साथ आत्मशक्ति को विकसित कर सकारात्मकता प्रदान करने में सहायक है । योग क्रिया को अपनाकर अर्थात इस विधि को अपनाकर मनुष्य स्वयं आत्म सम्मोहन कर चेतना की गहराई में प्रवेश करता है । और इसके अलावा अपने अवचेतन मन को सक्रिय करता है और कुछ ही पल में एक स्फूर्ति, ताज़गी, और नई चेतना के साथ उसका विकास होता है । योग निद्रा को विश्राम करने की एक विकसित पद्धति कह सकते हैं । बहुत बार ऐसा होता है की पूरी रात सोने के बावजूद भी हम थके हारे से लगते हैं इसलिए यह थकान मात्र योग निद्रा द्वारा मिटाई जा सकती है । योग निद्रा  मन की जाग्रत एवं सुषुप्ति के बीच की अवस्था है जहाँ अवचेतन मन कार्य करता रहता है और धीरे-धीरे शरीर में शिथिलता आती है एवं चेतना तथा अवचेतन मन सजग हो जाते हैं ।

योग निद्रा का अभ्यास कब करना चाहिए

योगनिद्रा का अभ्यास हमें नियमित रूप से प्रतिदिन करना चाहिए । ध्यान रहे जिस मनुष्य द्वारा योग निद्रा को अपने जीवन का अंग बना लिया जायेगा वह इसकी 5 या 10 मिनट की प्रक्रिया करके ही अपने पूरे चौबीस घंटों को सुनियोजित ढंग से व्यतीत कर सकता है एवं आनंदमयी और ऊर्जावान बना सकता है । इसमें व्यक्ति अथवा साधक जागते हुए सोता है । शरीर विश्राम की अवस्था में रहता है और चेतना पूर्ण रूप से जागरूक रहती है । योग निद्रा का अर्थ है पूर्णतः सजगता के साथ सोना । क्योंकि ऐसी अवस्था में भी सजगता और चेतनता बनी रहती है । मन की अनेक अवस्थाएँ होती है । व्यक्ति सभी प्रकार के तनाव चाहे वे शारीरिक हो, भावनात्मक हो या फिर मानसिक हो, योग निद्रा के माध्यम से उन सबसे तनाव रहित हो जाता है । इसे हम डिप्रेशन दूर करने की सबसे अच्छी पद्यति भी कह सकते हैं । जहाँ तक योग निद्रा के करने की विधि का सवाल है इसकी कई विधियाँ प्रचलित हैं नीचे हम कुछ प्रचलित विधियों का वर्णन करेंगे |

योग निद्रा करने की विधि:

योग निद्रा करने के लिए सर्वप्रथम अपने आसन पर पीठ के बल आराम से लेट जाइए, अपने शरीर को ढीला रखें । पैरों के बीच थोड़ा सा अंतर रखें । दोनों हाथों को कमर से कुछ दूर रखें । हथेलियाँ आसमान की तरफ़ खुली रखें । शरीर में किसी भी प्रकार का तनाव न रखें, यदि कोई तनाव हो तो उसे शिथिल कर दें । बिल्कुल ढीला शरीर रहने दें । सिर से पैर तक ढीला रखें । , नेत्रों को बंद करिए । जब तक नेत्रों को खोलने के लिए न कहा जाये तब तक नेत्र बंद रखिए । शरीर का कोई-सा भी अंग न हिलाएँ, ढीला शरीर, पूर्ण रूप से ढ़ीला शिथिलं शरीर, अब गहरी श्वास लीजिए । धीरे-धीरे गहरी लम्बी श्वास लीजिए । लम्बी श्वास छोड़िए अब फिर से लम्बी श्वास लीजिए और लम्बी श्वास छोड़िए । अब आप मन ही मन संकल्प लीजिए कि मैं योग निद्रा के अभ्यास के लिए पूर्ण रूप से तैयार हूँ कि मै सोऊँगा नहीं, मैं सोऊँगा नहीं, मैं सोऊँगा नहीं । अब आप हमारे द्वारा दिये गये निर्देशों को ध्यान पूर्वक सुनिए । अपने मन को किसी भी प्रकार के विचारों या कल्पनाओं में मत लगाइए । पूर्णत: विचारों से मुक्त हो जाइए । आप सुनने तथा चेतना के स्तर पर कार्यरत रहेंगे । किंतु शारीरिक रूप से पूर्णतः अचेत पड़े रहेंगे । आप अपने मन को सिर से पैर तक घुमाइए । सम्पूर्ण शरीर में चेतना या मन की जागरुकता को निर्देशानुसार घुमाएँगे । अपने अंगों के प्रति सचेत रहिए और पूर्ण रूप से एकाग्रता बनाए रखें । अब अपनी चेतना को शरीर के विभिन्न चक्र एवं अंगों पर घुमाइए । मानसिक रूप से हमारे  साथ-साथ आप भी मन ही मन उन बातों को दोहराएँ जिन्हें हम कहते हैं और आपको उस अंग के बारे में सजग रहना है । अपने बाएँ हाथ की ओर ध्यान दीजिए । अपनी मानसिक चेतना (सजगता) को ले जाइये बाएँ हाथ का अँगूठा, पहली अँगुली, दूसरी अँगुली, तीसरी अँगुली, चौथी अँगुली, बाई हथेली, कलाई, कुहनी, कधा, बगल, बाई ओर की कमर बाएँ पैर का पंजा, अँगूठा, पहली अँगुली, दूसरी अँगुली, तीसरी अँगुली चौथी अँगुली, दायाँ हाथ का अँगृष्ठा, पहली अँगुली, दूसरी अँगुली, तीसरी अँगुली, चौथी अँगुली, दाएँ हाथ की हथेली, कलाई, कुहनी, भुजा, दाएँ हाथ का कधा, दाएँ हाथ के बगल वाला भाग, दाई ओर की कमर, दाई जाँघ, दायाँ घुटना, दाई पिंडली, टखना, दाई ऐड़ी, पैंजा, दाएँ पैर का अँगूठा, पहली अँगुली, दूसरी बाई भौंह, भूमध्य, दाहिनी आँख की पलक, दाहिनी आँख की पुतली, पूरी दाहिनी आँख, बाई आँख की पलक, बाई आँख की पुतली, पूरी बाई आँख, दाहिना कान, दाहिना गाल, बायाँ कान, बायाँ गाल, नाक के दाहिने तरफ़ का भाग, नाक के दाँई तरफ़ वाली छाती, बाँई तरफ़ वाली छाती, पूरी छाती, नाभि, पेट और पेट का निचला भाग । पूरा दाहिना हाथ, पूरा बायाँ हाथ, पूरा दायाँ पैर, पूरा बायाँ पैर, दायाँ नितम्ब, बायाँ नितम्ब, मेरुदण्ड, पूरी पीठ, पेट, छाती, शरीर का सामने वाला भाग, शरीर का पीछे वाला हिस्सा, पूरा शरीर, सम्पूर्ण शरीर, सम्पूर्ण शरीर को एक साथ देखें ।

अब महसूस करें कि पूरा शरीर अर्धचेतन अवस्था में ज़मीन पर लेटा हुआ है । – अपनी श्वास-प्रश्वास की ओर ध्यान दीजिए । अनुभव कीजिए कि आप श्वास ले रहे हैं और श्वास छोड़ रहे हैं । सामान्य रूप से श्वास-प्रश्वास कीजिए । अब कल्पना कीजिए कि आप समुद्र के किनारे घूम रहे हैं । समुद्र की लहरें आपके पैर का स्पर्श कर रही हैं । शीतलता महसूस हो रही है । मंद-मंद सुगन्धित हवा बह रही है । आपको मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ कर रही हैं । सामने से सूर्योदय हो रहा है । धीरे-धीरे सूर्य की किरणें आपके ऊपर आ रही हैं । आपको एक नई चेतना मिल रही है । वहीं पर खड़े होकर आप चेतना का अनुभव कर रहे हैं । सूर्य का रंग लाल है और उसकी किरण सामने एक बगीचे पर भी पड़ रही है । आप उस बगीचे की तरफ़ जा रहे हैं । बगीचे में पहुँच कर आपने देखा कि बहुत ही सुन्दर फूल रंगबिरंगे खिले हुए हैं । उनकी खुशबू आपको आ रही है । आपको नई ताज़गी का अनुभव हो रहा है । आप उसी बगीचे में बैठ जाते हैं । चारो तरफ़ शांति ही शांति है । अब आप अपने पूरी चेतना के साथ वापिस अपने शरीर की तरफ़ लौट रहे हैं । अपने शिथिल पड़े हुए शरीर का अनुभव कीजिए । अपनी श्वास-प्रश्वास के प्रति सजग हो जाइए । श्वास आ रही है, श्वास जा रही है । आती-जाती श्वास को देखिए । अब आप पूर्ण रूप से शरीर को बाई तरफ़ से करवट दिलवाइए फिर दाई करवट लीजिए । पुन: बाई और करवट लीजिए और उठकर बैठ जाइए । ऊँ का तीन बार लम्बी ध्वनि के साथ उच्चारण कीजिए, नेत्र बंद ही रहने दीजिए ।

ऊँ असतो मा सदगमय।

तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥

मृत्योर्माऽमृतंगमय ।

ऊँ शान्ति शान्ति शान्ति ।

हथेलियों को आपस में रगड़िए हथेलियों को नेत्रों में लगाइए। चेहरे में हाथ को फेरते हुए धीरे-धीरे आँख खोलिए एवं अब नई चेतना व उर्जा को महसूस कीजिए और नए उत्साह के साथ जीवन को आगे बढ़ाइये। इस प्रकार हम नये जीवन की शुरुआत कर सकते हैं ।

योग निद्रा और कैसे कैसे कर सकते हैं :

योग निद्रा के करने की हमने एक विधि का वर्णन ऊपर किया हुआ है लेकिन इसी प्रकार हम और भी कई धारणाएँ बनाकर योग निद्रा कर सकते हैं । जैसे सात – चक्रों का ध्यान, गिनती गिनते हुए पहले सीधी गिनती फिर उल्टी गिनती । स्वर्ग की कल्पना कर सकते हैं । समीशरण का ध्यान कर सकते हैं । नदियाँ, तालाब, रूपस्थ ध्यान, पदस्थ ध्यान, सिर्फ़ आत्मा का निविंकल्प ध्यान, हिमालय में बर्फाँले क्षेत्र का ध्यान, सिद्ध क्षेत्र का ध्यान, तीर्थ क्षेत्र आदि कई प्रकार की धारणाओं को मन में लाकर हम योग निद्रा कर सकते हैं ।

योग निद्रा के लाभ:

योग निद्रा के मुख्य रूप से लाभ इस प्रकार से हैं |

योग निद्रा करके शारीरिक/मानसिक रूप से तनाव रहित हो जाते हैं ।

  • योग निद्रा द्वारा कोई भी व्यक्ति अपने शरीर के रोगों को समाप्त कर सकते हैं ।
  • योग निद्रा के दौरान उन रोग के बारे में ऐसा विचार करें कि वे ठीक हो रहे हैं ।
  • बार-बार ऐसा चिन्तन करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिस कारण वे रोग दूर हो जाते हैं ।
  • योग निद्रा से मानसिक क्षमता बढ़ा सकते हैं ।
  • स्मरण शक्ति बढ़ा सकते हैं ।
  • बच्चों का मानसिक विकास हो सकता है ।
  • योग निद्रा से शरीर में नई चेतना आ जाती है और आप अपने सातों चक्र की ऊर्जा को रूपान्तरित कर सकते हैं ।
  • अपनी ऊर्जा को ऊध्र्वमुखी कर सकते हैं ।
  • सभी क्षेत्रों में चाहे वे सांसारिक हों, ग्रहस्थ हों, आध्यात्मिक हों, प्रगति कर सकते हैं ।
  • क्रोध, मान, माया, लोभ को खत्म कर सकते हैं ।
  • सकारात्मक ध्यान करके आप अच्छे इंसान बन सकते हैं ।

योग निद्रा में सावधानियाँ

  • योग निद्रा के समय व्यक्ति को सोना नहीं चाहिए ।
  • दिए जा रहे निर्देशों को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिये ।
  • योग निद्रा का अभ्यास करते समय यदि कोई व्यक्ति नींद की अवस्था चला जाता है तो उसके माथे को स्पर्श करें। उसके पैर का अँगूठा स्पर्श कर जाग्रत अवस्था में लाने की कोशिश करनी चाहिए ।

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