रक्त का रासायनिक संगठन एवं कार्य

सामान्य तौर पर शरीर के वजन का लगभग 1/11 यानिकी लगभग 9% मात्रा खून की पायी जाती है | दूसरे उदाहरण में हम कह सकते हैं की मनुष्य शरीर में रक्त की मात्रा प्रति किलोग्राम औसतन नब्बे मिलीलीटर होती है | इसलिए यदि हम एक 60 किलोग्राम वजन के व्यक्ति के अन्दर रक्त की मात्रा की बात करेंगे तो हम पाएंगे की उसमे लगभग 5.4 लीटर रक्त पाया जाता है | यद्यपि मनुष्य शरीर में  खून की मात्रा चौबीस घंटों में पांच प्रतिशत तक घट बढ़ सकती है | शारीरिक व्यायाम से एवं ऊँचे स्थानों पर खून की मात्रा कुछ बढ़ सकती है |

रक्त blood-structure-and-functions-in-hindi

रक्त का रासायनिक संगठन :

खून के रासायनिक संगठन की बात करें तो हमारे खून में निम्नलिखित तीन वस्तुएं पाई जाती हैं ।  रक्तवाही – पलाज्मा,  लाल रक्त कण और  श्वेत कण जिनका संक्षिप्त वर्णन कुछ इस प्रकार से है ।

  1. रक्तवाही पलाज्मा :

यह हल्के रंग का तरल होता है । इसमें खून  के लाल कण और श्वेत कण तैरा करते हैं ।

  1. लाल रक्त कण :

ये खून के लाल कण होते हैं । इन कणों के कारण ही हमारा रक्त लाल-लाल होता है । इनकी मोटाई 1/12000 इंच, चौड़ाई अथवा लम्बाई 1/3200 इंच होती है । ये पुरूषों में 50,00,000 और स्त्रियों में 45,00,000 के लगभग होते हैं । रक्त कणों का कार्य ऑक्सीजन (प्राणप्रद वायु) को फेफड़ों से लेकर शरीर के प्रत्येक तंतु में पहुंचाना है ।

  1. रक्त के श्वेत कण :

श्वेत कण लाल रक्त कणों से बड़े होते हैं, किंतु इनकी संख्या लाल कणों से कम होती है । मोटे रूप में यह समझ लें कि 500 या 600 लाल रक्त कणों के पीछे एक श्वेत कण होता है । इनकी लम्बाई 1/2000 इंच के करीब होती है । खून के श्वेत कणों की शक्ल थोड़ी-थोड़ी देर में बदलती रहती है, इसलिए इनकी शक्ल कभी गोल, कभी लम्बी व कभी चौड़ी दिखाई देती है ।

श्वेत कण कहाँ बनते हैं :

रक्त के श्वेत कण हड्डी, मज्जा, प्लीहा और लसीका ग्रथियों में बना करते हैं ।

क्या श्वेत कणों की संख्या घटती-बढ़ती है?

खून के श्वेत कणों की संख्या दिन में कई बार घटती-बढ़ती है । आमतौर पर भोजन के बाद ये अधिक हो जाते हैं । गर्भावस्था में रक्तस्त्राव के बाद भी इनकी संख्या बढ़ जाया करती है, किंतु उपवास करने की सूरत में ये कण घट जाते हैं ।

श्वेत कण क्या-क्या कार्य करते हैं? :

यदि बाहर से किसी रोग के कीटाणु हमारे शरीर में घुस जाते है तो ये श्वेत कण उनके इर्द-गिर्द घेरा डालकर उनको नष्ट कर डालते हैं । इस कारण इनको शरीर रक्षक कहा जाता है । ये श्वेत कण हानिकारक और रोगोत्पादक कीटाणुओं को नष्ट करके हमारे शरीर को अनेक प्रकार के रोगों से बचाए रखते हैं ।

रक्त के कार्य (Functions of Blood in Hindi):

हमारे शरीर में रक्त निम्नलिखित कार्य करता है

  • भोजन के सारे भाग को ग्रहण करना : यह भोजन के जज्ब हुए भाग को
  • शरीर के हर भाग में पहुंचाता है ।
  • शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाना : यह फेफड़ों से ताजा ऑक्सीजन लेकर शरीर में सब जगह पहुंचाने का कार्य करता है ।
  • कार्बन डाईआक्साइड गैस को फेफड़ों में ले जाना : यह शरीर में काम करने से उत्पन्न हुए कार्बन डाईऑक्साइड गैस को फेफड़ों में ले जाता है और फेफड़ों से यह कार्बन डाईआक्साइड गैस (अशुद्ध वायु) को बाहर निकालने में भी मदद करता है |
  • तापक्रम स्थिर रखना: यह शरीर का तापक्रम कायम रखता है ।
  • भोजन के अनुपयोगी भाग को त्वचा तथा वृक्क तक पहुंचाना : यह अनुपयोगी पदार्थों को तंतुओं से लेकर त्वचा व वृक्कों तक पहुंचा देता है, जहां से वे शरीर से बाहर निकाल दिए जाते हैं ।
  • प्रणालीविहीन ग्रंथियों के रसों को पहुंचाना: यह प्रणालीविहीन ग्रंथियां डक्टलैस ग्लैण्ड्स के रसों को शरीर में आवश्यक स्थानों पर पहुंचा दिया करता है ।
  • शरीर की ग्रंथियों को आवश्यक पदार्थ देना:  खून शरीर की सब ग्रंथियों को आवश्यक पदार्थ प्रदान करता है, जिससे वे अपना काम अच्छी तरह कर सके ।
  • शरीर की ऊष्णता स्थिर रखना : यह शरीर की गर्मी को 4 फारनाइट (तापक्रम) पर स्थित रखकर मनुष्य को जीवित रखता है ।
  • शरीर को आर्द्र रखना : यह हमारे शरीर को आर्द्र (गीला) रखकर, उसको सूखने से बचाता है ।
  • समस्त तंतुओं का पोषण करना : रक्त शरीर के सब तंतुओं को उनका भोजन (आक्सीजन) पहुंचाकर उनका पोषण किया करता है ।

यह भी पढ़ें:

मानव पाचन तंत्र की सम्पूर्ण जानकारी

About Author:

HBG Health desk is a team of Experienced professionals holding various skills. They are expert to do research online and offline on health, beauty, wellness, and other components of health in Hindi.

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *