रेबीज कारण, लक्षण एवं उपचार |

रेबीज नामक इस बीमारी को हाइड्रोफोबिया एवं जलांतक भी कहा जाता है | यह रोग किसी पागल कुत्ते या अन्य किसी जानवर के काटने से उत्पन्न होने वाला एक संक्रामक रोग है, जो एक वायरस द्वारा एक दुसरे को फैलता है | रेबीज नामक इस बीमारी का रोगी के तंत्रिका तंत्र पर बेहद असर होता है | जहाँ तक इस बीमारी के के वायरस का सवाल है इस बीमारी का वायरस जानवरों के लार में रहता है भारतवर्ष की यदि हम बात करें तो लगभग 90% रेबीज का वायरस कुत्तों के काटने के कारण फैलता है |

रेबीज बीमारी लक्षण कारण उपचार

रेबीज बीमारी के कारण:

रेबीज की बीमारी से पीड़ित कोई भी जानवर जैसे कुत्ता, बंदर या अन्य जंगली जानवर के काटने पर उसकी लार द्वारा इसका वायरस मनुष्य के शरीर में पहुंच जाता है, और तंत्रिका तंत्र में इस वायरस की संख्या लगातार बढ़ती जाती है ।

रेबीज बीमारी के लक्षण (Symptoms of Rabies in Hindi):

जानवरों में इस रोग के लक्षणों की बात करें तो यह रोग जानवरों में लगभग दस दिनों तक रहता है और दस दिनों के बाद जानवर की मृत्यु हो सकती है | इस रोग के लगने के दौरान किसी भी जानवर के व्यवहार में अचानक से परिवर्तन आ जाता है और वह पागल सा होकर काटने लगता है, पानी से उसे दर लगता है इसलिए पानी को देखकर दूर भागता है, उसकी आवाज में भी परिवर्तन दिखाई दे सकता है | उसे दौरे पड़ते हैं और अंत में वह मर जाता है |

मनुष्य में रेबीज बीमारी के लक्षण:

मनुष्य में इस रोग के लक्षणों को तीन अवस्थाओं में बांटा जा सकता है |

  • रेबीज के शुरूआती दिनों यानिकी पहली अवस्था में पीड़ित व्यक्ति जहाँ पर किसी जानवर ने काटा है उस जगह पर बैचैनी एवं संवेदनहीनता महसूस कर सकता है | इस लक्षण के अलावा पीड़ित व्यक्ति को हल्का बुखार, सिरदर्द, थकान,उल्टी आना, गला खराब रहना व निगलने में परेशानी भी हो सकती है | पीड़ित व्यक्ति की ऐसी स्थिति एक से चार दिन तक रह सकती है ।
  • दूसरी अवस्था encephalitic यानिकी मस्तिष्क शोथ की हो सकती है इस अवस्था में रोगी भयभीत, चिंतित, अवसाद, क्षुब्ध, उत्तेजित, भ्रमित, हो जाता है । मष्तिष्क का तापमान 40 डिग्री सैल्सियस या इससे भी ज्यादा हो सकता है और हल्की सी आवाज या रोशनी भी रोगी को अव्यवस्थित कर देती है ।
  • तीसरी अवस्था में पहुँचने पर मनुष्य को कोई भी वस्तु निगलने में परेशानी हो सकती है और धीरे-धीरे यह परेशानी इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि रोगी को पानी तक निगलने में परेशानी होने लगती है | रेबीज नामक इस बीमारी के रोगी को पानी से डर लगने लगता है इस बीमारी को ‘हाइड्रोफोबिया’ कहते हैं । भोजन निगलने में सहायक मांसपेशियों में पेरालिसिसि होकर तरल फैरिंक्स व मुंह में इकट्ठा हो जाते हैं जिससे लार टपकने लगती है । श्वास गति अनियंत्रित होने की वजह से रोगी कोमा में जा सकता है और इस स्थिति के दो से पांच दिन में रोगी की मृत्यु हो सकती है ।
  • रेबीज नामक इस बीमारी की पहचान के लिए काटने वाले कुत्ते पर नज़र रखनी चाहिए की वह पागल होता है या नहीं ।
  • कुत्ता काटने के बाद यदि दस दिन तक जिंदा रहता है तो इसका अभिप्राय यह है की कुत्ता पागल नहीं है इसलिए रेबीज नामक इस बीमारी के होने की संभावना नहीं है  ।
  • रेबीज नामक इस बीमारी की मुख्य पहचान यह है की पानी को देखते ही मरीज को दौरे पड़ने लग जाते हैं ।

रेबीज का उपचार (Treatment of Rabies in Hindi):

रेबीज नामक इस बीमारी में खाने वाली औषधि से मरीज को कोई लाभ नहीं होता है, इसलिए किसी भी जानवर के काटने पर पीड़ित को तुरंत चिकित्सक के पास या हस्पताल ले जाना चाहिए ।

काटने पर क्या करें

सहायक उपचार के तौर पर निम्न गतिविधियाँ जानवर के काटने के बाद की जा सकती हैं |

कुत्ते या किसी अन्य जानवर के  काटते ही जख्म के कुछ ऊपर हटकर कस कर पट्टी बांध देनी चाहिए ।

शरीर के काटे हुए हिस्से को साबुन तथा पानी से अच्छे से धोया जा सकता है और उसके बाद 1 प्रतिशत सिटावेलोन से रगड़कर घाव को धोकर उस पर आयोडीन या एल्कोहल लगाया जा सकता है ।

कुत्ते या अन्य पशु द्वारा काटे जाने पर चिकित्सक द्वारा Anti Rabies Vaccine या Rabipur Vaccine इस प्रकार से लगाई जा सकती हैं |

  • पहला इंजेक्शन काटने के तुरंत पश्चात् |
  • दूसरा इंजेक्शन काटने के तीसरे दिन |
  • तीसरा इंजेक्शन काटने के सांतवें दिन |
  • चौथा इंजेक्शन, चौदहवें दिन |
  • पांचवा इंजेक्शन एक महीने बाद |
  • जरुरत होने पर छठा इंजेक्शन तीन महीने बाद |

रेबीज से पीड़ित कुत्ते या अन्य पशु के काटे हुए घाव पर न तो टाँके लगाये जाते हैं और न ही उस पर पाती की जाती है बल्कि उस घाव को अच्छी तरह साफ़ करके खुला छोड़ दिया जाता है |

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One thought on “रेबीज कारण, लक्षण एवं उपचार |

  1. Rebiz teen mahine ke kutte kaatne se bhi hota hai kya aaj se ek saal pehle mujhe 3 mahine ka kutta ke bacche jo bimar tha dawai dene ke time uska daant lag gaya per wo bimari ke kaaran wo 10 dino ke bhitar mar gaya kiya mujhe bhi rebiez ho sakti hai us kutte ko porbo naamak bimari thi

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