विटामिन K के फायदे, स्रोत, कमी के लक्षण एवं उपयोगिता

यदि हम सामान्य तौर पर Vitamin K की बात करें तो हम पाएंगे की इस विटामिन अर्थात विटामिन K  का सीधा सम्बन्ध रक्त जमने की प्रक्रिया से है । जब मनुष्य को किसी स्थान पर चोट लगने से कोई रक्त वाहिनी को क्षति पहुँचती है और उस नलिका से रक्त का स्राव होता है तो थोड़ी ही देर में रक्त गाढ़ा हो जाता है और उस स्थान पर एक गड्ढा-सा बनकर रक्त बहना बंद हो जाता है | यद्यपि इस रक्त जमने की प्रक्रिया से कई चीजें सम्बन्ध रखती हैं, उनमें से एक तत्व ‘प्रोथेम्बीन’ होता है, जिसका निर्माण यकृत अर्थात लिवर में होता है । इसके निर्माण के लिए रक्त अर्थात खून में विटामिन K की उपर्युक्त मात्रा में उपस्थिति बेहद आवश्यक होती है। इस विटामिन की न्यूनता से ‘प्रोथ्रोम्बीन’ की मात्रा कम हो जाती है और इस तरह रक्त जमने की क्रिया में विलम्ब हो सकता है । जब रक्त  में प्रोथ्रोम्बीन की मात्रा सामान्य की 35 प्रतिशत रह जाती है तब ऐसे व्यक्तियों में चोट आदि लगने से अथवा आप्रेशन के बाद रक्त जमने की क्रिया में व्यवधान उत्पन्न हो जाता है । जब Vitamin K की अधिक कमी हो जाती है तो रक्त में प्रोथ्रोम्बीन की मात्रा केवल 15 प्रतिशत रह जाती है और तब इस स्थिति में ऐसे व्यक्ति में स्वत: रक्तस्राव की प्रवृत्ति पाई जाती है ।

विटामिन K के फायदे, स्रोत कमी के लक्षण

विटामिन K के स्रोत (Sources of Vitamin K In Hindi):

Vitamin K मुख्यत: निम्न खाद्य पदार्थों में पाया जाता है |

  • यह विटामिन हरी शाक-भाजी में सर्वाधिक तौर पर पाया जाता है |
  • पालक, करमकल्ला, गोभी, गाजर के ऊपरी भाग में यह विटामिन प्रचुर मात्रा में पायी जाती है |
  • बन्दगोभी के हरे पत्तों, सोयाबीन, अंकुरित अनाज और टमाटर में भी Vitamin K पाया जाता है |
  • पालक, अल्फालफा (ल्यूसन घास), ताजा पैदा हुए कोमल हरे जौ, चावल के छिलके, हरी सब्जियों और पशुओं के जिगर में यह विटामिन बहुतायत रूप में पाया जाता है ।
  • पशुजन्य खाद्य पदार्थों में भी Vitamin K पाया जाता है ।
  • आँतों में उपस्थित जीवाणु भी इस विटामिन अर्थात विटामिन के का निर्माण करते हैं ।

विटामिन K के फायदे (Benefits of Vitamin K in Hindi):

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की Vitamin K रक्त को जमाने में सहायक होता है | इसके अलावा और भी फायदे होते हैं जिनका विवरण निम्नवत है |

  • विटामिन के बाहरी रक्तस्राव को रोकने के अलावा आंतरिक रक्तस्राव को रोकने में भी सहायक होता है |
  • यह विटामिन मासिक धर्म प्रवाह और मासिक धर्म में होने वाले दर्द को रोकने में भी सहायक होता है |
  • विटामिन K लिवर अर्थात यकृत में prothrombin का निर्माण करने में सहायक होता है जो रक्त को ज़माने में सहायक होता है |
  • यह विटामिन ब्लड प्रेशर अर्थात रक्त चाप को कम रखने या संतुलित रखने में मददगार साबित होता है क्योंकि यह रक्त धमनियों में खनिजों के निर्माण को रोकता है यह प्रक्रिया सम्पूर्ण शरीर में रक्त के परिसंचरण में सहायक होती है |
  • इस विटामिन का फायदा हड्डियों के स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ होता है यह हड्डियों में फ्रेक्चर के खतरे को कम करने में सहायक है |
  • ऑतों के विकारों में जिनमें वसा का आत्मीकरण नहीं होता, उनमें भी इस विटामिन K का प्रयोग काफी फायदेमंद होता है ।
  • पाचन संस्थान के उन विकारों में जिनमें विटामिन K का आत्मीकरण ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है  उनमें इस विटामिन का प्रयोग लाभकारी होता है |
  • हीमोफीलिया परप्यूरा इत्यादि रक्तस्राव कारक रोगों में विटामिन ‘के’ का प्रयोग अपेक्षित होता है ।

विटामिन K की विशेषताएं (Features of Vitamin K in Hindi):

  • आँतों में कुछ जीवाणु ऐसे होते हैं जो Vitamin K का निर्माण करते हैं किन्तु सल्फा औषधियों के प्रयोग से आँतों के इन जीवाणुओं का नाश हो सकता है और इस विटामिन का निमॉण रुक सकता है |
  • वसा में घुलनशील अन्य विटामिनों की तरह ही इसके आत्मीकरण के लिए भी ‘पित्त’ की उपस्थिति अनिवार्य है ।
  • जब आँतों में पित्त नहीं आता है, तब विटामिन K का आत्मीकरण रुक जाता है।
  • कुछ दवाइयों जैसे – आर्गेनिक, आर्सेनिकल, सल्फोनेमाइड, एस्पिरिन और सैलिसिलेट इत्यादि के प्रयोग से रुधिर में prothrombin की मात्रा कम हो सकती है जिसके कारण रोगियों में रक्तक्षरण की प्रवृत्ति उत्पन्न हो सकती है ।
  • रक्तस्त्राव के समय रक्त जमने के समय का ज्ञान किया जाता है और इसे ‘प्रोथ्रोम्बीन टाइम’ कहा जाता है ।

विटामिन K की कमी के लक्षण :

विटामिन के की कमी से शरीर अर्थात यकृत में Prothrombin का निर्माण रुक जाता है जिससे निम्न स्थितियां पैदा हो सकती हैं |

  • स्वत: रक्तस्राव की स्थिति में पीठ, नितम्ब, जाँघ तथा अन्य दबने वाले स्थानों पर तन्तुओं के अन्दर रक्त क्षरण होने लगता है ।
  • जोड़ों में  रक्तस्राव, रक्तवमन, नाक से खून आना, मूत्र में रक्त या मल के साथ रक्तस्राव हो सकता है ।
  • नवजात शिशुओं में रक्तक्षरण की प्रवृत्ति मिलती है ।
  • शिशु के जन्म से 5-6 दिन की अवधि में शिशु की नाभि से, मूत्र मार्ग से, गुदा मार्ग से, वमन से और कपाल के अन्दर रक्तक्षरण होने लगता है।
  • शरीर में यकृत के विकारों में, पित्तस्रोत, नलिका में किसी भी कारण से अवरोध होने पर, अवरोध-जन्य कामला में रक्तक्षरण की प्रवृत्ति पाई जाती है ।

Vitamin K का उपयोग कब करना चाहिए

उपर्युक्त सभी अवस्थाओं में विटामिन K का प्रयोग कराना आवश्यक होता है। किन्तु यकृत अर्थात लिवर के उन गम्भीर रोगों में जहाँ यकृत कोषों का सामूहिक क्षय या नाश हो चूका हो  वहाँ विटामिन K के प्रयोग से बड़ा लाभ इसलिए नहीं होता क्योंकि प्रोथ्रोम्बीन के निर्माण के लिए पर्याप्त स्वस्थ यकृत अनिवार्य होता है । एक स्वस्थ व्यक्ति का प्रोथ्रोम्बीन टाइम 10 से 15 सेकेण्ड तक होता है। यदि यह समय 30 सेकेण्ड हो तो रोगी पर विशेष ध्यान देना चाहिए और यदि यह टाइम 45 सेकेण्ड हो जाये तो समझना चाहिए कि रक्तक्षरण की प्रवृत्ति होगी। अत: ऑप्रेशन करते समय पहले रोगी के रक्त का प्रोथ्रोम्बीन टाइम का ध्यान करना आवश्यक होता है, और यदि यह टाइम अस्वाभाविक हो तो विटामिन K का अवश्य प्रयोग कराना चाहिए। इसके अतिरिक्त उन अवस्थाओं में जिनमें रक्तक्षरण की प्रवृति हो तो विटामिन ‘के’ का प्रयोग करना चाहिए। । जिन स्त्रियों में होता, उनमें भी इस विटामिन K प्रयोग की आवश्यकता होती है। जिन स्त्रियों में गर्भपात की स्वाभाविक प्रवृत्ति हो या गर्भाश्य से रक्त का स्राव होता हो, उनको भी यह विटामिन लाभ प्रदान करता है। रोगी का रक्त बहुत अधिक बहने और न रुकने पर इसका इन्जेक्शन लगाने से डेढ़ से तीन घंटे के अन्दर रक्त बहना रुक जाता है। रक्तस्त्राव वाले प्राय: समस्त रोगों में इसकी आवश्यकता पड़ती है, अतएव इसे इन्जेक्शन द्वारा ही प्रत्युक्त करना चाहिए। वयस्क रोगियों में रोग की तीव्रता के अनुसार अधिकतम 300 मिलीग्राम एक बार प्रतिदिन तथा न्यूनतम 10 मिलीग्राम दिन में 1 बार प्रयोग करा सकते हैं।

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About Author:

Post Graduate from Delhi University, certified Dietitian & Nutritionists. She also hold a diploma in Naturopathy.

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