सांप के काटने के लक्षण और ईलाज

सांप के काटने के लक्षणों एवं ईलाज पर प्रकाश डालने से पहले यह समझ लेना जरुरी है की  सांप यानिकी सर्प अधिकतर ग्रामीण इलाकों में या जंगल के आसपास के इलाकों में पाये जाते हैं । साँपों की विभिन्न प्रजातियाँ झाड़ियों में, जंगल में, कूड़े में, खण्डहर में व वृक्ष के खोखले हुए भाग इत्यादि में छिपे रहते हैं । सांप के काटने के बारे में कहा जाता है की सामन्यतया सांप अपने आप नहीं काटते हैं लेकिन यदि इन पर गलती से या जानबूझकर आक्रमण किया जाए तो ये क्रोधित होकर काट लेते हैं । जहाँ तक अपने देश में साँपों की प्रजातियों का सवाल है भारत में कोबरा, क्रेट, वाइपर इत्यादि प्रजाति के सांप अधिक मात्रा में पाए जाते हैं । एक आंकड़े के मुताबिक हमारे देश भारतवर्ष में प्रत्येक वर्ष सांप के काटने से मरने वालों की संख्या तक़रीबन  20,000 है | अर्थात कहने का आशय यह है की भारतवर्ष में प्रत्येक साल सर्प दंश के कारण बीस हज़ार लोगों की मृत्यु हो जाती हैं जो की एक डरावना आंकड़ा है । इसी बात के मद्देनजर आज हम सांप के काटने के लक्षणों एवं ईलाज के बारे में जानने की कोशिश करेंगे |

सांप के काटने के लक्षण ईलाज

सांप के काटने के लक्षण (Symptoms of Snake Bite in Hindi):

जैसा की हम सबको विदित है की सांप का विष अर्थात जहर उसकी लार ग्रंथियों में समाहित होता है | चूँकि भारतवर्ष में विभिन्न प्रजाति के सांप पाए जाते हैं इसलिए अलग अलग प्रजाति से संबध रखने वाले सांप के काटने के लक्षण अलग अलग होते हैं |

कोबरा प्रजाति के सांप के काटने के लक्षण:

  • कोबरा प्रजाति के सांप के काटने पर इसका जहर स्नायु तंत्र को बहुत जल्दी प्रभावित करता है |
  • प्रभावित व्यक्ति में घबराहट, जी मिचलाना एवं उल्टियों के लक्षण उजागर हो सकते हैं |
  • स्नायु तंत्र के प्रभावित होने से शरीर की मांसपेशियां शिथिल हो जाती है जिससे हाथ-पैरों में कमजोरी आ सकती हहै ।
  • प्रभावित व्यक्ति के मष्तिष्क में तरह तरह के विचार इकट्ठे हो जाते हैं व उसे साफ-साफ समझ नहीं आता है ।
  • कोबरा प्रजाति के सांप के काटने पर कम दिखाई देने लगता है ।
  • प्रभावित व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है ।
  • नाड़ी कमजोर एवं आंखों की पलकें झुक जाती है ।
  • व्यक्ति को बोलने में भी परेशानी होने लगती है ।
  • शुरूआती अवस्था में प्रभावित व्यक्ति के मुंह से लार गिरने लगती है व जीभ तथा लेरेजिन्यल मांसपेशियों में पक्षाघात हो सकता है ।
  • सांस में परेशानी होने के कारण दौरे पड़ते हैं लेकिन ह्रदय की धड़कन लगातार बनी रहती है |
  • कोबरा प्रजाति के सांप के काटने पर बाद में पेट में ऐंठन के साथ दर्द भी उठता है ।

वाइपर प्रजाति के साँपों के काटने के लक्षण:

  • वाइपर प्रजाति के साँपों के काटने पर काटे हुए स्थान से अत्यधिक मात्रा में खून बहने लगता है |
  • काटे हुए स्थान पर जलन के साथ दर्द भी होता है ।
  • काटे हुए स्थान पर सूजन आ जाती है |
  • वाइपर प्रजाति के सांप के काटने के लगभग 10-12 घंटे बाद काटा हुआ स्थान नीला पड़ जाता है ।
  • नाक, मुंह से खून आना, खून की उल्टी, दस्त व मूत्र में भी खून आना लक्षणों की लिस्ट में सम्मिलित हैं ।
  • प्रभावित व्यक्ति के हालात अधिक गंभीर होने पर उल्टियां व मलमूत्र नहीं रुक पाते हैं ।
  • ब्लड प्रेशर बेहद कम हो जाता है व रक्त संचार में तीव्र कमी आने से मृत्यु तक हो सकती है ।

नाग प्रजाति के सांप के काटने के लक्षण:

  • नाग प्रजाति के सांप के काटने पर काटे हुए स्थान पर किसी प्रकार का कोई दर्द नहीं होता है |
  • प्रभावित व्यक्ति को नशा सा छाने लगता है और उसे बेहोशी आ जाती है ।
  • नाग प्रजाति के सांप के काटने पर सुन्नपन पैरों से सिर की ओर बढ़ता है ।
  • प्रभावित व्यक्ति के गला व जीभ धीरे धीरे काम करना बंद कर देते हैं |

सांप के काटने पर ईलाज:

  • चिकित्सक द्वारा कोबरा सर्प के काटने पर प्रभावित व्यक्ति पर निओस्टिग्मीन-एट्रोपीन चिकित्सा और वाइपर सर्प के काटने पर फाइब्रीनोजन के साथ हिपेरिन का प्रयोग किया जा सकता है |
  • चूँकि सर्प के मुंह में ग्राम नेगेटिव पैथोजन होते हैं, इसलिए इनसे बचाव के लिए चिकित्सक द्वारा प्रभावित व्यक्ति को उचित ब्राड स्पेक्ट्रम एण्टीबायटिक दी जा सकती हैं ।
  • इंजेक्शन टेटेनस टाक्साइड की उचित मात्रा चिकित्सक द्वारा मांसपेशी में दी जा सकती है ।
  • दर्द के लिए दर्द निवारक दवाई एस्प्रिन इत्यादि का प्रयोग किया जा सकता है ।
  • वाइपर दंश में डायजीपाम प्रयोग में लाये जा सकते हैं लेकिन कोबरा दंश में इनका प्रयोग नहीं करें तो अच्छा है ।
  • खून के जमने में दिक्कत होने पर चिकित्सक द्वारा इंजेक्शन हिपेरिन उचित मात्रा में उचित समयअन्तराल पर प्रभावित व्यक्ति को शिरा मार्ग के माध्यम से दी जा सकती हैं |
  • आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित व्यक्ति को खून भी चढ़ाया जा सकता है |

ध्यान देने योग्य बातें:

सांप के काटने पर कुछ ध्यान देने योग्य बातें निम्नवत हैं |

  • मरीज को 24 घंटे तक केवल केवल आई.वी. तरल ही दें और 24 घंटे बाद ही मुहं के माध्यम से तरल पदार्थ देना शुरू करें |
  • नाग प्रजाति के सर्प के जहर की घातक मात्रा 15 मिलीग्राम है अर्थात 15 मिलीग्राम जहर शरीर में प्रविष्ट हो जाने के बाद प्राणघातक हो सकता है |
  • वाइपर प्रजाति के सांप के जहर की घातक मात्रा 40 मिलीग्राम है |
  • सांप के काटने पर जितनी जल्दी हो सके मरीज को चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए क्योंकि नाग प्रजाति के सांप के काटने पर कुछ घंटों में एवं वाइपर प्रजाति के सर्प के काटने पर कुछ दिनों में मरीज की मृत्यु हो सकती है |
  • मरीज को बिलकुल भी सोने न दें |

 

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