सांस के दौरे (अस्थमा) का ईलाज एवं सावधानियां

सांस के दौरे से हमारा आशय एक ऐसी बीमारी से है जिसमे सम्बंधित रोगी को खुलकर सांस नहीं आती है । इसमें रोगी न तो ढंग से बैठ पाता है और न ही ढंग से खड़ा हो पाता है । कहने का आशय यह है की सांस के दौरे के वक्त रोगी कुछ भी कार्य करने में असमर्थ हो जाता है | इस रोग में मुंह द्वारा दी गई औषधि लगभग बेअसर ही रहती है | और जहाँ तक इस बीमारी के होने का मुख्य कारण है वह है प्रदूषण यही कारण है की वर्तमान में यह रोग शहरों में बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है ।

सांस के दौरे अस्थमा का ईलाज

दमा अस्थमा का अटैक आने पर ईलाज (Treatment of Asthma Attack in Hindi):

सांस के दौरे अर्थात अस्थमा का अटैक आने पर चिकित्सक द्वारा निम्न चिकित्सा की जा सकती है |

  • चिकित्सक द्वारा रोगी को पम्प के द्वारा सालब्यूटामोल के 1-2 पफ लेने को कहे जा सकते हैं । इससे आराम न आने पर रोगी को एक पफ और लेने को डॉक्टर द्वारा परामर्शित किया जा सकता है ।
  • चिकित्सक द्वारा मरीज को अमीनोफाइलिन 250 मिग्रा. 10 से 20 मिली. सेलाइन में मिलाकर दिया जा सकता है |
  • डॉक्टर द्वारा मरीज के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए 2 से 5 मिग्रा. टेब. काम्पोज दी जा सकती है ।
  • इसके अलावा रोगी को लम्बी व गहरी सास लेने को भी कहा जा सकता है ।
  • सांस के दौरे में यदि रोगी को उपरोक्त चिकित्सा से आराम न हो तो रोगी को हस्पताल में दाखिल करवा देना चाहिए ताकि रोगी हस्पताल में रोगी का निम्न ढंग से ईलाज संभव हो । हस्पताल में रोगी को नेजल या फेस मास्क से ऑक्सीजन दी जा सकेगी । ऑक्सीजन को देने से पहले चिकित्सक द्वारा हयूमिडीफाई किया जायेगा ।
  • इसके अलावा यदि मरीज को पहले एड्रीनलिन हाइड्रोक्लोराइड नहीं दी गई है तो चिकित्सक द्वारा मरीज को निर्धारित मात्रा में यह त्वचा में दी जा सकती है |

सांस के दौरे अर्थात दमे के ईलाज में सावधानी

  • सांस के दौरे का ईलाज करते वक्त एड्रीनलिन के प्रयोग के समय ब्लड प्रेशर को बराबर देखते रहना चाहिए । ब्लड प्रेशर के ज्यादा कम होने पर इन्जेक्शन नहीं देना चाहिए ।
  • चिकित्सक द्वारा इन्जेक्शन सालबुटामोल की मात्रा एवं इसके देने के तरीके का विशेष ध्यान रखना चाहिए जैसे वयस्कों को यह IV के माध्यम या ग्लूकोज में मिलाकर दी जा सकती है |
  • चिकित्सक को चाहिए की वह रोगी को इसके साथ में नेबुलाइजर से सालबुटामोल की इरोजल (aerosol) थेरेपी दे। क्योंकि यह थेरेपी सांस के दौरे में वाष्प के रूप में सीधे फेफड़ों में पहुंच कर बहुत जल्दी आराम करती है । यह फेफड़े के दबाव को भी कम करती है और बलगम को निकालने में भी मदद करती है ।
  • चिकित्सक को चाहिए की वह इन्जेक्शन अमीनोफायलीन 250 मिग्रा. को 15 मिली. नार्मल सेलाइन में पतला करके 10 से 15 मिनट में लगाएं या रोगी को इसकी ड्रिप दे । अमीनोफायलीन के एम्पयूलस को ग्लूकोज की बोतल में मिलाकर धीरे-धीरे 6 से 8 घंटे में ड्रिप दी जा सकती है। चिकित्सक को चाहिए की वह दमा अस्थमा के दौरे अर्थात सांस के दौरे का ईलाज करते वक्त मरीज रोगी की ई.सी.जी. व ब्लड प्रेशर पर भी नज़र बनाये रखे ।
  • चिकित्सक द्वारा इन्जेक्शन हाइड्रोकोर्टिसोन निर्धारित मात्रा में धीरे से I/V के माध्यम से दी जा सकती है । साथ में डेकाड़ोन या बिटामीथासोन भी I/V के माध्यम से दी जा सकती है । इन इन्जेक्शनों को पहले 2 घंटे में दिन में तीन बार और उसके बाद मात्रा को कम करके मांस में लगाया जा सकता है । और फिर डॉक्टर द्वारा धीरे-धीरे दवाईयों की मात्रा कम की जा सकती है ।

दमे अर्थात सांस के दौरे का ईलाज करते वक्त ध्यान देने योग्य बातें

चिकित्सक को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की कार्टीकोस्टीयराइड्स दमे में जीवन रक्षक का काम करते हैं । इसलिए हस्पताल में रोगी के दाखिल होते ही यह औषधियां अवश्य दी जानी चाहियें । किसी प्रकार का कोई भी संक्रमण सांस के दौरे अर्थात अस्थमा को तीव्र कर देता है इसलिए संक्रमण को रोकने के लिए ब्राड स्पेक्ट्रम एण्टीबायोटिक दवाइयां दी जा सकती हैं |  ध्यान रहे की रोगी के इलेक्ट्रोलाइटस् की जांच करते रहना चाहिए । साथ ही साथ मरीज को पीने के लिए हल्का गर्म पानी दें, और दिन में तीन बार भाप दें ।

सांस के दौरे से बचाव:

  • अस्थमा के रोगी को धूल, मिट्टी, धुआं व प्रतिक्रिया वाली औषधियों से बचना चाहिए ।
  • घरवालों अर्थात परिवारवालों को चाहिए की वह रोगी को साफ-सुथरे कमरे में विश्राम कराएँ ठहराएँ ।
  • भोजन में बेहद ही सादा परन्तु पौष्टिक खाना दें ।
  • मरीज को ज्यादा पानी पीने की सलाह दें ।
  • धूम्रपान व मद्यपान से बिल्कुल दूर रहने को कहें |
  • सांस के दौरे से प्रभावित रोगी को हल्की–फुलकी वर्जिश करने को कह सकते हैं ।

 

About Author:

HBG Health desk is a team of Experienced professionals holding various skills. They are expert to do research online and offline on health, beauty, wellness, and other components of health in Hindi.

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *