सीने में गोली लगने पर क्या करना चाहिए

अक्सर आये दिन समाचारपत्रों व टेलीविजन पर सीने में गोली लगने की घटनाएं आम बात हो गई है । अवैध रूप से निर्माण होने वाली देशी तमंचों व रिवाल्वर की तो भरमार हो गई है । पहले तो हर छोटे कस्बों व नगरों में गुंडे, मवाली व आपराधिक प्रवृति के लोग अपनी करतूतों को अंजाम देने के लिए इन देशी तमंचों का खुलेआम इस्तेमाल करते थे, पर यह रोग अब बड़े-बड़े महानगरों में तेजी से फैल रहे हैं । इसलिए आज हम हेल्थ टिप्स नामक इस श्रेणी में यही जानने की कोशिश करेंगे की सीने में गोली लगने पर क्या करना चाहिए और यह कैसे लगती है कितनी खतरनाक होती है इत्यादि विषय पर भी विस्तृत तौर पर वार्तालाप करेंगे |

सीने में गोली लगने पर क्या करें

सीने में गोली कैसे लगती है?

सीने में गोली तीन तरह से लग सकती है । पहले तो यह बिल्कुल पास से फायर किया जाये या फिर दूर से । कभी कभी चांदमारी क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों की छाती में सेना के नौजवानों द्वारा अभ्यास परीक्षण के दौरान चलाई गई गोली दिशाहीन व छिटक कर घुस जाती है । लोगों के जेहन में यह ख्याल अक्सर आता है कि ऐसा क्यों होता है कि कुछ लोग सीने में गोली लगने के तुरंत बाद घटनास्थल पर ही दम तोड़ देते हैं, कुछ लोग छाती में गोली लगने के बाद जिंदा हस्पताल तक तो पहुंच जाते हैं पर वहां जाकर कुछ घंटों में ही काल कवलित हो जाते हैं । कई लोगों का छाती का ऑपरेशन भी हो जाता है उसके बावजूद भी कुछ दिनों के बाद स्वर्ग सिधार जाते हैं तो कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें सीने में गोली लगने के बाद भी उनका बाल बांका नहीं होता और छोटे से ऑपरेशन के बाद सबकुछ ठीक-ठाक हो जाता है ।

गोली खतरनाक क्यों होती है?

छाती के अंदर जब गोली प्रवेश करती है, तो यह छाती की दीवार के अलावा छाती के अंदर स्थित अंगों जैसे फेफड़े या दिल या फेफड़े से निकलने वाले खून की मोटी नली या सांस की नली या फिर खाने की नली को जख्मी कर देती है । इसके अलावा छाती के आसपास स्थित महत्वपूर्ण अंग भी क्षत-विक्षत हो सकते हैं । अगर बंदूक या रिवाल्वर की नली की दिशा छाती की तरफ है पर सीधी न होकर या ऊपर की तरफ है, तो गोली छाती के अंदर से गर्दन के अंदर स्थित अंगों को घायल कर देगी, अगर बंदूक की नली गोली चलाते वक्त थोड़ा नीचे की तरफ  केंद्रित है, तो पेट के अंदर स्थित महत्वपूर्ण अंग जैसे जिगर, तिल्ली, छोटी आंत व खून की मोटी नालियां गंभीर रूप से घायल हो जाती है ।

सीने में लगने वाली गोली तुरंत मौत का पैगाम कब लाती है

छाती में प्रवेश करने वाली गोली पर लगने वाली मौत की मुहर कुछ बातों पर निर्भर करती है । जैसे छाती के कौन से हिस्से से गोली प्रवेश करती है, कितनी जल्दी छाती से लगी गोली से घायल व्यक्ति सही अस्पताल में पहुंचता है, गोली चलाते वक्त, रिवाल्वर की नली की स्थिति क्या थी, अगर छाती के बीचों-बीच गोली लगी है, तो दिल से निकलनेवाली मोटी खून की नली जख्मी हो सकती है । यानी घटनास्थल पर मौत छाती के बायी तरफ लगने वाली गोली भी यमदूत की सवारी बनकर आ जाती है, क्योंकि यहां दिल व फेफड़ों को जानलेवा खून की नलियां गंभीर रूप से जख्मी हो जाती है । सीने में गोली की घटना में समय का बड़ा महत्व है । अगर समय रहते उचित हस्पताल में घायल व्यक्ति को नहीं पहुंचाया जाता और भयंकर रक्तस्राव समय रहते नियंत्रित नहीं हो पाता, तो घायल व्यक्ति की मौत हो जाती है । देखा गया है कि अगर केवल फेफड़े से होने वाले भयंकर रक्त प्रवाह को समय रहते रोक लिया जाये, तो मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ सकती है ।

क्या सीने में लगी गोली को निकालने में ज्यादा जोर देना चाहिए

सीने में गोली लगने पर सीने या छाती से गोली निकलवाने पर ज्यादा जोर नहीं देना चाहिए । बल्कि छाती में गोली लगने पर सबसे पहले सर्जन का उद्देश्य यह होता है कि रक्तस्राव को रोका जाये, रक्त की कमी हो जाने से दूसरे महत्वपूर्ण अंगों में पड़नेवाली जानलेवा प्रभाव को कैसे नियंत्रित किया जाए । घायल व्यक्ति के रिश्तेदार अज्ञानतावश छाती में फंसी गोली को निकलवाने में ज्यादा जोर देते हैं । और वे ऐसा मानते हैं कि गोली निकल जाये, तो सब ठीक हो जायेगा पर ऐसा मानना उनका केवल एक भ्रम है । गोली से हुए क्षत विक्षत अंगों की देखभाल से ही मरीज की जान बच पाती है न कि गोली के निकाल देने से, गोली छाती के अंदर अगर सुरक्षित जगह पड़ी भी है, तो कोई नुकसान नहीं करती, द्वितीय विश्व महायुद्ध में घायल हुए सैंकड़ों सिपाहियों के शरीर में अब भी गोली के छरें पड़े हैं । और यह सैनिक आराम से घूम रहे हैं ।

सीने में गोली लगने पर ईलाज की विधियाँ:

ऑपरेशन में कभी-कभी फेफड़े के कुछ हिस्से या फेफड़े को निकालना पड़ जाता है, इन ऑपरेशन को “लोबेक्टमी” या “न्यूमोनेक्टमी” कहते हैं । कभी-कभी जख्मी सांस की या खून की नली की मरम्मत करनी पड़ती है, गोली द्वारा खून की नली में बने छेद को भी बंद करना पड़ता है, अगर गोली फेफड़े को आर-पार चीरती हुई चली गई है, तो ऐसी दशा में छाती खोलकर एक विशेष ऑपरेशन पल्मोनरी ट्रैक्टोमी” किया जाता है । इसमें फेफड़े के अंदर जिस मार्ग से गोली गई है, उस रास्ते को पूरा खोल कर रिसते हुए खून व हवा की नलियों को एक-एक करके बंद किया जाता है, कभी-कभी गैर अनुभवी सर्जन जल्दबाजी में फेफड़े में गोली के प्रवेश व निकास द्वारा को सील कर बंद कर देते हैं, जिसमें ” एयर एंबोलिस्म” जैसे जानलेवा स्थिति पैदा हो जाती है, इसलिए हमेशा ऐसे अस्पतालों में जायें, जहां एक अनुभवी थोरेसिक सर्जन की उपलब्धता हो ।

सीने में गोली लगने पर क्या करें?

सीने में गोली लगने पर पहली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक-एक मिनट कीमती है, इसलिए बहुमूल्य समय को नष्ट न करें । अक्सर देखा गया है कि घायल व्यक्ति के नजदीकी रिश्तेदार मरीज को लेकर छोटे-मोटे अस्पताल में ले जाते हैं । फिर वहां कुछ घंटे बिताने के बाद किसी बड़े अस्पताल में घायल व्यक्ति को ले जाया जाता है । ऐसे में घायल व्यक्ति के सही इलाज में लगने वाला बहुमूल्य समय व्यर्थ में गंवा दिया जाता है और मरीज जाने अनजाने मौत के कगार पर पहुंच जाता है । मरीज के परिवारवालों को चाहिए कि छाती में गोली लगते ही किसी आधुनिक, बड़े व अच्छे अस्पताल में जायें । सीने में गोली लगने से घायल व्यक्ति के इलाज के लिए उपयुक्त अस्पताल वह होते हैं, जहां पर नियमित फेफड़े व दिल के आपरेशन होते हों और जहां अनुभवी थोरेसिक यानि वेस्ट सर्जन की 24 घंटे उपलब्धता हो, यह दोनों बातें अत्यंत महत्वपूर्ण है, तीसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि उस अस्पताल में अत्याधुनिक व बड़ा ब्लड बैंक होना बहुत जरुरी है क्योंकि आवश्यकता पड़ने पर 30 या 40 बोतल खून का आनन-फानन में इंतजाम हो सके ।

सीने में गोली लगने का अत्याधुनिक ईलाज :

आईसीयू का अत्यंत महत्वपूर्ण रोल है । आईसीयू में प्रति दो शैय्याओं के बीच एक कृत्रिम श्वास यंत्र की उपलब्धता होती है । होता यह है कि चमक-दमक वाले तथाकथित नामीगरामी बड़े अस्पतालों में कहने को तो आईसीयू यूनिट है पर बेड के अनुपात में अपेक्षित वेंटीलेटर की संख्या नहीं होती है । इसके परिणाम यह होता है कि जरुरत में वक्त वेंटीलेटर की सुविधा न मिलने पर मरीज को असली फायदा तो नहीं हो पाता, केवल खानापूर्ती रह जाती है । अत्याधुनिक मशीनें जुटा लेना ही काफी नहीं होता मशीनों को सही ढंग से इस्तेमाल करने वाले अनुभवी लोग भी होने चाहिए । छाती में गोली लगने के बाद अगर फेफड़े के आपरेशन की जरुरत पड़े तो थोरेसिक सर्जन के साथ-साथ अनुभवी क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट की टीम भी होनी चाहिए । ऑपरेशन के बाद क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों के द्वारा की गई देखभाल, गोली से घायल व्यक्ति के स्वास्थ्य लाभ में अत्यंत लाभकारी होती है । सीने में गोली लगने पर अस्पताल में प्रवेश करने के पहले यह जरुर पता कर लें कि वहां मल्टी स्लाइड सीटी एंजियो, एमआरआई इको कार्डियोग्राफी, डिजिटल सब्ट्रक्शन एंजियोग्राफी एवं ब्रांकोस्कोपी जैसा जांचों की सुविधाएं हैं या नहीं । सीने में गोली लगने पर सबसे पहले सर्जन का उद्देश्य यह होता है कि रक्तस्त्राव को रोका जाए और रक्त की कमी हो जाने से दूसरे महत्वपूर्ण अंगों में पड़नेवाले जानलेवा प्रभाव को कैसे नियंत्रित किया जाए, यही दो महत्वपूर्ण कदम होते हैं जिन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है ।

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