हेयर कलरिंग करने के टिप्स सावधानी एवं माउज का प्रयोग

हेयर कलरिंग की बात करें तो आज बाल केवल इसलिए डाई नहीं किए जाते कि वे सफेद हो गए हैं, बल्कि आज बालों में काले के अतिरिक्त ग्रे, गोल्डन, ब्राउन, ब्रॉन्ज आदि से लेकर गुलाबी, लैवेंडर, ग्रीन आदि अनेक शेड्स भी फैशन का रूप ले चुके हैं । हेयर कलरिंग के तीन मुख्य रूप हैं—टेम्परेरी डाई, सेमी परमानेंट डाई तथा परमानेंट डाई । टेम्परेरी डाई एक अस्थायी पद्धति है जो एक शैंपू तक ही टिकती है । सेमी परमानेंट 4-6 सप्ताह तक चलती है । परमानेंट डाई का असर लंबे समय तक बना रहता है । भारत में सबसे अधिक सेमी परमानेंट डाई का प्रचलन है । बाल डाई करते समय यानिकी हेयर कलरिंग करते समय इन आवश्यक टिप्स का ध्यान रखना चाहिए ।

हेयर कलरिंग

  • हेयर कलरिंग यानिकी बालों को डाई करने से पहले बालों की संरचना की पूर्ण जानकारी तथा रंगों
  • का विस्तृत ज्ञान अत्यंत आवश्यक है । वरना डाई की प्रक्रिया बालों को हानि पहुंचा सकती है । पहली बार लगाने से पहले एलर्जी टेस्ट जरूर कर लें ।
  • रंग का चुनाव करते समय व्यक्तित्व, उम्र, चेहरे का आकार, व्यवसाय आदि का ध्यान भी रखना चाहिए । बालों में एक साथ दो रंग भी किए जा सकते हैं या बालों की कुछ लटों को रंगकर भी व्यक्तित्व निखारा जा सकता है । पार्टी या समारोह के मौके पर छवि के अनुरूप टचअप किया जा सकता है ।
  • गेहुंए रंग तथा मेच्योर व्यक्तित्व पर स्वाभाविक ब्लैक या ब्राउन रंग ठीक लगते हैं । सांवली व गहरे रंग की त्वचा पर काले बाल शोभा देते हैं । गोरी त्वचा पर गोल्डन, ब्रॉन्ज आदि रंग सुंदर लगते हैं।
  • हेयर कलरिंग करते समय कलर में चमक लाने के लिए कलर ग्लॉस का प्रयोग किया जा सकता है ।
  • बाल यदि बेहद रूखे या बेजान हैं तो रंगने से पहले बालों को कंडीशनिंग व प्रोटीन उपचार दिया जाना चाहिए ।
  • परमानेंट कलरिंग के बाद ‘शैंपू फॉर ग्लॉस’ का प्रयोग किया जा सकता है ।
  • परमानेंट कलरिंग कुशल हेयर ड्रेसर से ही करानी चाहिए ।

हेयर कलरिंग में सावधानियाँ:

  • क्या आपके बाल स्वस्थ दशा में हैं? अस्वस्थ होने पर कलरिंग से पूर्व उसका उपचार करवाएं।
  • यदि एलोपेशिया या बाल झड़ने की गंभीर समस्या है तो हेयर कलरिंग करवाएं।
  • बालों में रूसी होने पर पहले उसका निदान करें, फिर कलरिंग करें ।
  • सिर में खुजली, फोड़े-फुन्सी इत्यादि की शिकायत हो तो कलरिंग न करें।
  • बालों में मेहंदी का लेप लगा है तो कलरिंग न करें।
  • अस्थमा रोग और सांस से संबंधित अन्य रोगों से पीड़ित होने पर कलरिंग न करें।

 माऊज का प्रयोग

  • यह फोम के रूप में आता है ।
  • इसे गीले और सूखे बालों पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • माऊज में कंडीशनिंग तत्त्व होते हैं।
  • ये बालों को पोषण देने के साथ ही उनकी रक्षा भी करते हैं।
  • इसे बालों को ब्लो ड्राइ, स्क्रंचिंग और डिफ्यूज ड्राइंग करते समय इस्तेमाल करें।
  • माऊज को जड़ों में लगाते हुए नीचे तक आएं।
  • अपने बालों की प्रकृति के अनुरूप ही माऊज चुनें।
  • नॉर्मल माऊज प्रायः सभी हेयर स्टाइल के लिए ठीक रहता है।

सीरम का प्रयोग

  • सीरम ग्लॉसर्स, पॉलिश और शाइन लाने वाले स्प्रे तेल या सिलिकॉन से बने होते हैं ।
  • ये बालों में चमक और सौम्यता लाते हैं ।
  • सीरम का प्रयोग ज्यादा न करें, क्योंकि ये बालों को चिपचिपा बनाते हैं।

स्टाइलिंग लोशन का प्रयोग

  • अगर हीट सेटिंग के लिए इसका इस्तेमाल कर रही हैं, तो ध्यान दें कि उसमें थर्मल प्रोटेक्शन हो।
  • इनमें खास तरह के रेसिन होते हैं, जो बालों पर एक प्रकार की फिल्म बना लेते हैं।
  • इससे बालों पर गर्मी और अन्य चीजों का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।

वैक्स, पोमेड्स और क्रीम का प्रयोग

  • ये प्राकृतिक वैक्स जैसे कारनॉबा से बनाए जाते हैं।
  • इन्हें सौम्य बनाने के लिए मिनरल ऑयल और लैनोलिन का प्रयोग किया जाता है।
  • यह बालों को ग्लॉस और चमक देता है।
  • माऊज लगाते समय अच्छी तरह से इसे बालों में फैलाएं।
  • हीट स्टाइलिंग से बाल जल्दी सैट हो जाते हैं।
  • एयर स्टाइलिंग करने से पहले बालों में स्टाइलिंग लोशन या स्प्रे लगाएं।
  • कभी भी क्षतिग्रस्त बालों में एयर स्टाइलिंग न करें ।

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