अनार के फायदे औषधीय गुण एवं अनार से रोगों का ईलाज

अनार के फायदे में अनगिनत फायदे सम्मिलित हैं लेकिन इससे पहले की हम इनके बारे में वार्तालाप करें थोड़ा बहुत हम अनार के बारे में जानने की कोशिश करते हैं | भारतवर्ष में अनार की पैदावार लगभग हर जगह थोड़ी अधिक होती रहती है | कहा यह जाता है की भारत एवं अफगानिस्तान के उत्तरी भाग में उत्पन्न होने वाले अनार अत्यंत रसीले एवं उच्च किस्म के होते हैं | जहाँ तक अनार के पेड़ों का सवाल है ये विभिन्न शाखाओं से युक्त 6 मीटर तक ऊँचे होते हैं पेड़ की छाल पतली, पीली या गहरे भूरे रंग की होती है | अनार के फायदे में जानने वाली बात यह है की अनार का केवल फल ही औषधीय गुणों से युक्त नहीं होता बल्कि इसका पेड़ भी औषधीय गुणों से सरोबार होता है | जहाँ तक अनार की तासीर का सवाल है इसकी तासीर ठंडी होती है |

अनार के फायदे

पूरा आर्टिकल (लेख) एक नज़र में.

अनार में पाए जाने वाले विभिन्न तत्व:

अनार में सर्वाधिक मात्रा में टैनिन 22 प्रतिशत पाया जाता है | इसके अलावा मैन्नाइट (Mannite), पेक्टीन (Pectin), आइसोपेलिटियरीन (Isopelletierine) इत्यादि की कम मात्रा पाई जाती है | और  अनार में विटामिन सी, फॉस्फोरस, लोहा, चूना इत्यादि प्रचुर मात्रा में पाया जाता है |

अनार के प्रकार:

अनार मुख्यत तीन प्रकार का होता है इसमें अनार के प्रकारों के बारे में जिक्र करना इसलिए जरुरी हो जाता है क्योंकि अनार के प्रकार के आधार पर अनार के फायदे अलग अलग हो सकते हैं | अनार के प्रकार में खट्टा, खट्टा-मीठा, एवं मीठा अनार सम्मिलित है । इनके भी दो प्रकार हैं देसी और कंधारी ।

अनार के फायदे औषधीय गुण :

  • खट्टा अनार-वात तथा कफ का नाश करता है । अधिक खाने से रक्तपित्त करता है, खाँसी लाता है । हाजमा ठीक करता है । चटनी में पड़कर उसे स्वादिष्ट भी बनाता है ।
  • खट्टा-मीठा अनार हाजमा ठीक करता है । खाया-पीया हजम कर देता है ।
  • मीठा अनार जिसे कंधारी भी कहा जाता है तुरन्त रक्त बढ़ाता है, शक्ति-बल बढ़ाता है । इस अनार का रस बलवीर्य बढ़ाकर गाल लाल सुर्ख कर देता है ।
  • स्वास्थ्य बढ़ाता है । रोगों को रोकने की सामर्थ्य पैदा करता है ।
  • मीठा देसी ‘बेदाना’ अनार की सबसे अच्छी किस्म है । हर एक रोग में लाभकारी है ।
  • इस अनार के फायदे की बात करें तो इसके प्रयोग से लाभ-ही-लाभ होता है, हानि तनिक भी नहीं होती ।
  • इसका रस प्यास बुझाता है । खून बढ़ाता है । दुर्बल रोगी को भी ताक़त देता है ।
  • बुखार (मलेरिया) और मियादी बुखार (टायफ़ायड) के रोगी को इसका रस दिया जाता है । इससे रोगी की रोगनिरोधक शक्ति क्षीण नहीं होती । कंधारी तथा बेदाना अनार का रस हृदय (दिल) को ताक़त देता है ।

अनार से बीमारियों का ईलाज:

अनार के फायदे की बात करें तो यह एक ऐसा फल है जिसके उपयोग से भिन्न भिन्न बीमारियों की रोकथाम या ईलाज किया जा सकता है | अनार से रोकथाम किये जाने वाले रोगों की लिस्ट एवं उपयोग की विधि का वर्णन कुछ इस प्रकार से है |

अनार से तपेदिक का ईलाज:

अनार के फायदे में यह भी सम्मिलित है की इससे फेफड़े की टीबी की रोकथाम की जा सकती है | इसके लिए मीठे कंधारी या बेदाना अनार के रस में जरा-सा नमक, पिप्पली, जीरा, सोंठ और दालचीनी का चूर्ण डालकर दो महीने लगातार पिलाएँ। एक बार में अनार के रस का एक छोटा ग्लास काफी है । रोगी के अनुसार इसकी मात्रा घटाई-बढ़ाई जा सकती है । यह नि:संदेह लाभदायक सिद्ध होगा ।

तपेदिक को दूर करने के लिए दूसरा घरेलू नुस्खा:

250 ग्राम मीठा कंधारी या बेदाना अनार का रस लीजिये, 10 ग्राम पीपल (पिप्पली),

10 ग्राम सोंठ (गुंठी), 10 ग्राम जीरा (सफ़ेद),10 ग्राम दालचीनी (अस्ली, बढ़िया)

5 ग्राम केसर, 100 ग्राम पुराना गुड़ लीजिये |

विधि : अनार के फायदे लेने के लिए इन सब चीजों को कड़ाही में डालकर मन्द आँच पर पकाइए । जब खूब गाढ़ा हो जाए तो नीचे उतारकर इसमें छोटी इलायची के दाने का चूर्ण 5 ग्राम बुरककर भलीभाँति मिला दें । पाँच-पाँच ग्राम की गोलियाँ बनाकर रख लीजिए । रोगी को प्रतिदिन प्रात:-सायं एक-एक गोली एक छोटा ग्लास भेड़ या बकरी के दूध के साथ दीजिए । पूरी गोलियाँ खत्म होने पर आप प्रत्यक्ष देखेंगे कि रोगी को बहुत लाभ होगा ।

अनार से रक्तहीनता (अनीमिया) का ईलाज:

अनार, मौसमी, संतरा इन तीनों का मिश्रित रस एक छोटा ग्लास दोपहर बाद प्रतिदिन पीने से रक्त-हीनता दूर होती है ।

श्वेत प्रदर (ल्युकोरिया)का ईलाज:

श्वेत प्रदर ल्यूकोरिया का अनार से ईलाज करने के लिए 20 ग्राम अनार के ताज़ा पत्ते, 2 ग्राम काली मिर्च, 100 ग्राम पानी लें | और तीनों को कुंडी में खूब पीस लें । छानकर इसे बोलत में भरकर रख लें । प्रतिदिन सवेरे-शाम प्रदर की रोगिणी को पिलाएँ । विदित हो कि श्वेत प्रदर वह रोग है, जिसमें रोगिणी की योनि से सफेद लेस-सी निकला करती है ।

दूसरी विधि से श्वेत प्रदर का ईलाज:

500 ग्राम अनार की जड़ की छाल, 4 लीटर पानी लें और अनार की जड़ की छाल मोटी-मोटी (छरड़ा) कूटकर पानी में डालकर काढ़ा पकावें । जब पानी चौथा हिस्सा बाकी रहे, तो उस पानी से योनि में डूश दीजिए । फिर साफ, बारीक, मुलायम सूती कपड़े के टुकड़े को साफ पानी में भिगोकर प्रतिदिन योनि में रखें । इससे कुछ दिनों में ही श्वेत प्रदर को आराम होता है ।

अनार से खांसी का ईलाज:

अनार के फायदे में यह फायदा खांसी से जुड़ा हुआ है अनार से खांसी का ईलाज करने के लिए 40 ग्राम अनार के फल का छिल्का, 10 ग्राम काली मिर्च, 6 ग्राम पीपल (पिप्पली), 6 ग्राम जौखार (यवक्षार) 80 ग्राम गुड़ लें  | उसके बाद इन चीजों में से 80 ग्राम् गुड़ लेकर उसकी गाढ़ी चाशनी बना लें । बाकी सब चीज़ों को बारीक पीसकर साफ-सूखे कपड़े में छाने और तैयार चाशनी में डाल दें । दो-दो ग्राम की गोलियाँ बनाकर छाया में सुखा लें | दिन में चार बार गर्म पानी से एक गोली निगल लें या एक गोली मुँह में रखकर चूसें ।

अनार से पायरिया का ईलाज:

इस रोग में दांतों से पीप आने लगता है अनार के फायदे में यह फायदा इसी रोग से जुड़ा हुआ है | इसके लिए 500 ग्राम अनार के फल का छिलका, 10 ग्राम फिटकरी, 10 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम सेंधा नमक लें और सबको खूब बारीक पीसकर मलमल के टुकड़े में छानकर प्रतिदिन प्रातः-सायं मंजन करने से पायरिया दूर होता है ।

आमातिसार (आँव बादी) या रक्तातिसार (खूनी आँव) का ईलाज :

इसके लिए 200 ग्राम अनार के फल का छिलका, 2 लीटर बकरी का दूध लें और छिल्का बारीक पीसकर कपड़छन करके दूध में पकाएँ । जब चौथा हिस्सा रह जाए तो उतारकर रख लें । प्रतिदिन 5 ग्राम देने से दोनों प्रकार के अतिसार में आराम होगा ।

अनार से बुखार और खाँसी का ईलाज :

अनार के फायदे में यह फायदा लेने के लिए 20 ग्राम अनार के फल का छिल्का, 10 ग्राम गुड़

10 ग्राम सोंठ, 20 ग्राम पिप्पली, 5 ग्राम दालचीनी, 5 ग्राम छोटी इलायची, 5 ग्राम तेजपात लें और

सबका अलग-अलग चूर्ण बना लें और सबको मिलाकर दोबारा कूट लें । यह चूर्ण दिन में दो बार 5 ग्राम कवोष्ण (गुनगुने) पानी से दें ।

अनार से पीलिया का शर्तिया ईलाज:

मीठे ‘बेदाना’ या मीठे कंधारी अनार का रस 1 प्याला-भर लोहे के पात्र (बर्तन) में रात को छत पर रख दीजिए । प्रात: उठकर उसमें मिश्री घोल लें । कूजा (मुल्तानी) मिश्री हो तो और भी अच्छा है । एक पक्ष (पखवाड़ा=15 दिन) तक पीने से पीलिया बिल्कुल दूर हो जाता है ।

खाँसी की अचूक दवा :

यद्यपि खांसी में अनार के फायदे के बारे में हम बता चुके हैं लेकिन यह दूसरी विधि है इसमें 20 ग्राम मीठे अनार-फल का छिल्का, 3 ग्राम लाहौरी नमक, 3 ग्राम काली मिर्च लें | इसके बाद इन्हें पहले कूट-पीस लें, तब पानी डाल-डालकर साफ-सुथरी खरल में रगड़े । खूब बारीक होने पर 1-1 ग्राम की गोली बना लें । मुंह में दो गोली एक-साथ रखकर दो-दो घंटे बाद चूसें । इमली, अमचूर, खट्टा नींबू आदि का प्रयोग हर्गिज़ न करें । खाने के साथ पानी पीते समय एक-दो ग्रास (कौर) सूखी (बिना चुपड़ी) रोटी के खा लें । जल्दी आराम होगा ।

अनार से काली खाँसी का ईलाज  

यह छूत की बीमारी प्रायः छोटे बच्चों को होती है । पहले हफ्ते यह साधारण खाँसी जैसी होती है, धीरे-धीरे खाँसी का दौरा उठने लगता है और उसका समय बढ़ता जाता है । बच्चे का मुँह लाल हो जाता है । कभी उल्टी भी हो जाती है । आँखों में पानी आ जाता है । इसकी पक्की पहचान है कि रोगी बच्चा खाँसने के समय साँस लेने के लिए काँखता है और कराहता है । यह एक महीने तक चलती है और प्रायः इसे लाइलाज (असाध्य) समझा जाता है । कहा जाता है कि एक मास बाद यह अपने-आप हट जाती है । इसे कुत्ता खाँसी भी कहा जाता है । इससे बच्चा बहुत थक जाता है और बेहाल हो जाता है । कभीकभी इससे निमोनिया होने की आशंका होती है । ऐसे रोग में अनार के फायदे देखे गए हैं इसके लिए अनार के फल का छिल्का खूब बारीक पीस लें । यह चूर्ण दो ग्राम लेकर दूध में उबालकर बच्चे को पिला दें ।

काली खाँसी का दूसरी विधि से :

मुलहठी तथा अनार-फल का छिल्का जलाकर बारीक पीस लें । 1 ग्राम शहद में डालकर बच्चे को चटाइए । रात को सोने से पहले चटाना अधिक हितकर है, क्योंकि काली खाँसी रात को ही जोर पकड़ती है । रोगी बालक की छाती को हवा लगने से बचाना अत्यावश्यक है ।

परहेज़ : इस रोग में अनार के फायदे लेने के लिए बच्चे को कोकाकोला, आइसक्रीम, गोली-टिकिया-टॉफी हर्गिज न खाने दें । अचार, नींबू, खटाई, सोंठ-खटाई, गोलगप्पे आदि का कड़ा परहेज रहे । इन्हें बच्चा छुए भी नहीं ।

अनार से स्वप्नदोष का ईलाज:

अनार के फायदे में यह फायदा मनुष्य की सेक्स लाइफ से जुड़ा हुआ है किन्से (Kinsey) आदि आधुनिक कामशास्त्रियों (Sexologists) का कथन है, ‘‘जिन रोगियों की परीक्षा की गई, उनमें से लगभग सभी पुरुषों ने तथा सत्तर प्रतिशत स्त्रियों ने स्वीकार किया कि उन्हें कामवासना-सम्बन्धी स्वप्न आते हैं, चाहे इनमें रज या वीर्य का पात होता हो या न होता हो ।” कई बार स्वप्नदोष इस कारण अधिक होने लगता है कि व्यक्ति के पास कामवासना की पूर्ति का अन्य कोई साधन नहीं होता है । डॉ० गुथैल (Gutheil) तथा लैंडिस (Landis) का मत है कि स्वप्नदोष होना सामान्यतः स्वस्थ अवस्था है, उनका न होना ही अप्राकृतिक है । हाँ, यदि स्वप्नदोष बार-बार और अधिक होने लगे तो अवश्य ही उसपर विचार किया जाना चाहिए और उसकी चिकित्सा भी होनी चाहिए । यदि स्वप्नदोष महीने में दो-तीन बार से अधिक हो तो निम्नलिखित दवा का प्रयोग करें |

50 ग्राम कंधारी अनार का छिल्का, 50 ग्राम मुलहठी (मधुयष्टि) लें दोनों को कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बना लें । 3 ग्राम चूर्ण 6 ग्राम मधु (शहद) में मिलाकर सोने से पूर्व चाट लें । स्वप्नदोष दूर हो जाएगा । ध्यान दें रात्रि को लघुशंका (पेशाब) करके सोएँ । सोते समय दूध न पियें । पहले दाईं करवट सोएँ, फिर बाईं करवट, छाती पर हाथ न आने दें ।

प्रमेह (पेशाब के आगे-पीछे वीर्य टपकना) की दवा:

अनार के फायदे में यह फायदा पौरुष जननेद्रिय से जुड़ा हुआ है इसका ईलाज करने के लिए अनार के फल का छिल्का बारीक पीसकर 4 ग्राम ताजा पानी के साथ दिन में दो बार (प्रात:-सायं) खाने से मूत्राशय (मसाने) की गर्मी दूर होती है, वीर्य में स्तम्भन होता है, पेशाब बार-बार आना बन्द हो जाता है । स्वस्थ व्यक्ति की भाँति पेशाब खुलकर आने लगता है; परन्तु बार-बार नहीं आता और निर्वीर्य करनेवाले प्रमेह से मुक्ति मिलती है ।

About Author:

Post Graduate from Delhi University, certified Dietitian & Nutritionists. She also hold a diploma in Naturopathy.

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *