गठिया का घरेलू ईलाज के लिए तीस से भी ज्यादा घरेलू उपाय नुश्खे.

गठिया का घरेलू ईलाज की बात करें तो कुछ घरेलू नुश्खों को अपनाकर गठिये के दर्द में राहत पायी जा सकती है | बीमारियों को अपने बुरे कर्मों का नतीजा मानने के बजाय यदि सकारात्मक सोच से धार्मिक आस्था और अध्यात्म का सहारा लिया जाए तो मरीजों को काफी राहत मिल सकती है । अमरीकी वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में पाया है कि जोड़ों के गठिया यानिकी रुमेटॉइड आर्थराइटिस के असाध्य दर्द  से पीड़ित मरीजों को धर्म एवं अध्यात्म की जीवन शैली अपनाने से दर्द कम करने और स्वस्थ रहने में काफी मदद मिली । सकारात्मक धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रवृत्तियों वाले मरीजों को अधिक प्रभावी ढंग से दर्द से मुक्ति एवं इस पर नियंत्रण पाते देखा गया है । अपनी बीमारियों को पापों या ईश्वरीय प्रकोप मानने की नकारात्मक सोच दर्द बीमारी में दर्द बढ़ाती है । इसके विपरीत ईश्वर के निकट अथवा जीवन के प्रति जुड़ाव रखने वाले मरीजों को अधिक सामाजिक समर्थन भी मिलता है । कहने का आशय यह है की गठिया का घरेलू ईलाज में खानपान तो सम्मिलित है ही इसके अलावा अध्यात्म भी सम्मिलित है |

गठिया का घरेलू ईलाज

गठिया का घरेलू ईलाज में ध्यान देने योग्य बातें:

  • गठिया का घरेलू ईलाज शुरू करने से पहले रोगी को निम्नांकित बातों का ध्यान रखना जरुरी है | सामान्यत: संधिशोथ यानिकी गठिया में व्यक्ति को कब्ज की शिकायत रहती है । रोगी को चाहिए कि वह शरीर में कब्ज न होने दे । इसके लिए एरण्ड-तेल का उपयोग लाभप्रद होता है ।
  • रोगी को तेल, मक्खन, घी आदि में तले गए पदार्थों से परहेज करना चाहिए ।
  • इसी प्रकार, भिण्डी, कटहल, भात (चावल) का निषेध करना चाहिए, गेहूँ, ज्वार, जौ का प्रयोग करना उपयुक्त होता है ।
  • अपने आहार में अत्यन्त गरम मसालों तथा मिर्च का प्रयोग उचित नहीं है ।
  • सौंठ, काली मिर्च, जीरा, लौंग तथा दालचीनी जैसे मध्यम मसालों का प्रयोग लाभदायक होता है ।
  • अचार, इमली, सिरका आदि पदार्थों से रोगी को दूरी बनाये रखनी चाहिए ।
  • रोगी की इच्छा हो, तो वह थोड़ी मात्रा में छाछ ले सकता है, परन्तु वह खट्टी नहीं होनी चाहिए ।
  • ध्यान रहे गठिया में हरे पत्ते वाली सब्जियाँ, जैसे पालक, बथुआ, चौलाई का रस हानिकारक है ।
  • आमवात के रोगी के लिए दही का सेवन हानिकारक है । ताजा मीठा दही अल्पमात्रा में केवल दोपहर के भोजन में लिया जा सकता है ।
  • माँस, मसूर की दाल भी इसमें हानिकारक है।
  • गठिया के रोग में रक्त में खटाई की प्रधानता हो जाती है, नमक खाने से यह खटाई बढ़ती है । अत: गठिया के रोगी को नमक का सेवन नहीं करना चाहिये ।
  • चाय पेशाब में यूरिक एसिड बढ़ाती है। उससे जोड़ों का दर्द व वजन बढ़ता है। अत: वात के रोगियों को चाय नहीं पीनी चाहिए।

गठिया का घरेलू ईलाज के लिए नुश्खे:

      • गठिया का घरेलू ईलाज करने के लिए नींबू का इस्तेमाल किया जा सकता है | मौसम के अनुसार ठंडे या गर्म पानी में नीबू निचोड़ कर नित्य नीबू-पानी पीना लाभदायक होता है । स्वाद के लिए इसमें शहद मिला सकते हैं, अर्थात् नीबू, शहद, पानी मिला कर पी सकते हैं ।
      • गठिया रोग में अखरोट, पेठा, लौकी, खीरा, खरबूजा खाना लाभदायक है ।
      • गेहूँ के घास का रस पीना इस रोग में बहुत लाभदायक होता है ।
      • खट्टे फलों के रस, सब्जियाँ जैसे लौकी, टमाटर का रस पीकर ही रहने से यह रोग ठीक हो जाता है ।
      • यदि रोग का प्रभाव हड्डियों पर हो जाये तो गठिया का घरेलू ईलाज करने के लिए कैल्शियम, फास्फोरस वाले पदार्थ अधिक लेने चाहिए ।
      • अंकुरित अन्न का सेवन भी आमवात में लाभकारी है ।
      • गठियावाय (Gout) के रोगी के लिए टमाटर भी लाभदायक है ।
      • गठिया का घरेलू ईलाज करने के लिए 50 पत्ती हरा पोदीना की लें या आधा चम्मच पिसा हुआ सूखा पोदीना भी ले सकते हैं इसे एक गिलास पानी में उबाल लें । जब यह पानी आधा रह जाय तो इसे छानकर पी लें प्रतिदिन ऐसा दो बार करने से गठिया में लाभ होता है |
      • सन्धिवात, गठिया में गाजर के फायदे लेने के लिए गाजर, ककड़ी, चुकन्दर (Beet) तीनों का रस समान मात्रा में मिला लें और इसे पी जाएँ । यदि तीनों सब्जियाँ उपलब्ध न हों तो जो मिलें उन्हीं का मिश्रित रस पिया जा सकता है । ऐसा करने से इस रोग में तुरंत लाभ होता है |
      • गठिया के रोगी को अपने पायजामे या पतलून की जेब में एक आलू रखना चाहिए जो उसकी आमवात से रक्षा करेगा | हालांकि यह घरेलू नुश्खा थोड़ा अविश्वसनीय जैसा बिलकुल है लेकिन कहा जाता है की ऐसा करने से लाभ होता है | इसके अलावा आलू खाने से और कच्चे आलू को पीसकर वातरक्त (Gout) में अँगूठे पर लगाने से भी दर्द कम होता है । दर्द वाले स्थान पर लेप भी कर सकते हैं ।
      • प्याज द्वारा गठिया का घरेलू ईलाज करने के लिए प्याज को पकाकर खा सकते हैं | इसके अलावा प्याज का रस एवं सरसों का तेल बराबर मात्रा में मिला कर इससे वहां मालिश करें जहाँ दर्द हो रहा हो |
      • गठिया में लहसुन भी फायदेमंद होता है | इसका फायदा लेने के लिए एक गाँठ लहसुन लीजिये फिर उसे छील लीजिये उसके बाद एक गिलास पानी में डाल लीजिये | सुबह उठकर लहसुन को पीसकर वही पानी में डालकर पी लीजिये पानी पीने के बाद एक चम्मच बटर जरुर खाए और इसका सेवन ऐसे ही एक हप्ते तक नियमित रूप से करे | फिर इसी तरह से दूसरे हप्ते में दो गाठं लहसुन तथा तीसरे हप्ते में तीन लहसुन की गाठं रोज इसी तरह से लें आपको वात रोग में फर्क नजर आएगा |
      • लहसुन द्वारा गठिया का घरेलू ईलाज के लिए इसके तेल की मालिश भी की जा सकती है | लहसुन की खीर बनाने के लिए एक बड़ी गाँठ ले लें और इसे साफ़ कर लें | फिर इन कलियों के दो दो टुकड़े करके इन्हें दूध में उबाल लें इस प्रकार से बनी खीर का लगभग 6 सप्ताह तक सेवन करने से गठिया की बीमारी ठीक हो जाती है | ध्यान रहे लहसुन की खीर को पीसकर फिर दूध में मिलाकर एवं उबालकर भी तैयार की जा सकती है इसका समय रात के समय करें | हालांकि यह नुश्खा अपनाते समय खटाई एवं मिठाई वाली चीजों का परहेज करना चाहिए |
      • तीसरी विधि के अनुसार लहसुन को पीस लें फिर इस पेस्ट को तिल के तेल में मिला लें और फिर इसका सेवन करें इसके अलावा आधा चम्मच लहसुन का रस तैयार कीजिये फिर इस रस में एक चम्मच गर्म घी मिला दीजिए और उसके बाद प्रतिदिन सुबह शाम इसका सेवन करें |
      • गठिया रोग के कारण अक्सर जोड़ों में एवं पैरों में दर्द होता है इस दर्द से राहत पाने के लिए थोड़ी सी हिंग लें और पानी के साथ इसे पी जाएँ लाभ होता है |
      • मेथी से भी गठिया का घरेलू ईलाज किया जा सकता है | वायु और वात की बीमारियों में मेथी का शाक लाभकारी होता है । इसके अलावा मेथी के लड्डू बनाने के लिए मेथी के दानों को घी में भुन लें ठन्डे होने पर इनके छोटे छोटे लड्डू बना लें | उसके बाद इन्हें सुबह शाम खाएं दस दिन तक यह प्रक्रिया करने पर लाभ होता है |
      • गठिया में मेथी का लाभ दूसरी विधि से भी लिया जा सकता है इसके लिए सर्वप्रथम चार चम्मच मेथी दाना लीजिये और इसे एक गिलास पानी में भिगोकर रात भर के लिए छोड़ दें | सुबह उठकर इस पानी को छान लें और हल्का गर्म करके पी जाएँ | इसके अलावा अंकुरित मेथी भी गठिया में लाभदायक होती है |
      • तीसरी विधि के अनुसार दो चम्मच दाना मेथी लें और किसी बर्तन में दो कप पानी लें फिर मेथी को इसमें डालकर उबाल लें | जब पानी एक कप रह जाय तो इसे पीने लायक होने दें और पी जाएँ कुछ महीनों तक हर दिन सुबह शाम इसे पीने से गठिया के अलावा कमर दर्द एवं कब्ज में भी लाभ होता है |
      • गठिया का घरेलू ईलाज के लिए अदरक का इस्तेमाल भी किया जा सकता है | सबसे पहले अदरक का रस तैयार कर लें फिर इसमें देशी घी मिला लें और इसका सेवन करें | देशी घी न हो तो शहद मिलाया जा सकता है | इसके अलावा एक गिलास पानी में दस ग्राम सौंठ उबाल लें और इसमें स्वादानुसार चीनी या मिश्री मिला लें जब यह ठंडा हो जाय तो इसे पी जाएँ | जोड़ों का दर्द ठीक करने के लिए सौंठ एवं हरड बराबर की मात्रा में ले लें और दोनों को पीसकर चूर्ण तैयार कर लें इस चूर्ण को आपस में मिला दें फिर इसे पानी के साथ फंकी मर के पीयें |
      • गठिया रोग में शहद भी लाभकारी होता है इसलिए इस रोग से ग्रस्त लोगों को शहद का सेवन अधिकाधिक करना चाहिए |
      • गठिया में तुलसी का फायदा लेने के लिए तुलसी के कुछ पत्तों को एक बर्तन पर उबालने के लिए रख दें उसके बाद एक कपड़ा लें और उत्पादी भाप की सेक गठिया से पीड़ित अंगों पर लगायें | और बाद में इसी पानी से उन अंगों को धो भी सकते हैं | थोड़े तुलसी के पत्ते, थोड़ी काली मिर्च को पीस लें और फिर इसमें गाय का घी मिला दें फिर खाएं |
      • खांड एवं असगंद बराबर की मात्रा में ले लें और फिर इस मिश्रण को पीसकर चूर्ण बना लें उसके बाद सुबह शाम दूध के साथ इसकी फंकी लें |
      • थोड़ी सी रेत ले लें और उसे तवे पर गरम कर लें उसके बाद गरम रेत की कपड़े पर पोटली बाँध लें | और इस पोटली से पीड़ित अंगों का सेक करें |
      • जोड़ो का दर्द दूर करने के लिए चुकन्दर का सेवन करें |
      • यूरिक एसिड की वृद्धि के कारण यदि गठिया अर्थात वात रोग हो तो इस स्थिति में गठिया का घरेलू ईलाज करने के लिए अपने रसोईघर में जाएँ एक ककड़ी उठायें और उसका रस बना लें उसके बाद गाज़र उठायें उसका भी रस बना लें |अब दोनों ककड़ी एवं गाजर का जूस आधा आधा गिलास पी जाएँ |
      • एक किलो पानी लें और उसमे 60 ग्राम कुलथी डालकर उसे उबाल लें जब केवल 250 ग्राम पानी रह जाय तो उस पानी को छान लें, और उसमे जरां सेंधा नमक एवं आधा चम्मच पिसी हुई सौंठ मिला लें फिर इस पेय को पी जाएँ |
      • जिस अंग में दर्द हो वहां पर तिल के तेल की मालिश भी आराम पहुंचाती है | गठिया का दर्द दूर करने के लिए बीस ग्राम सौंठ, चालीश ग्राम अखरोट की गिरी, डेढ़ सौ ग्राम काला तिल, सौ ग्राम गुड मिला दें | और फिर हर सुबह शाम इसका सेवन गरम पानी के साथ करें |
      • अजवाईन से गठिया का घरेलू ईलाज करने के लिए अजवाईन का अर्क या अजवाईन का तेल रोगी के जोड़ों पर या जहाँ दर्द हो रहा हो वहां मला जा सकता है | अजवाईन के तेल से आशय तिल के तेल में अजवाईन मिलाने से है |
      • एक चम्मच पिसी हुई अजवाईन ले लें और उसमे अपने स्वाद के अनुसार नमक मिला सकते हैं इस चूर्ण का सुबह शाम पानी के साथ खाली पेट सेवन करने से भी गठिया में लाभ होता है |
      • इस विधि से गठिया में अजवाईन का फायदा लेने के लिए सर्वप्रथम दो गिलास पानी पतीले में लें और उसके बाद उसमे दो चम्मच अजवाईन एवं दो चम्मच नमक डालकर उबालें | फिर इस पानी में कपडा भिगोकर दर्द वाले स्थान का सेक करें |

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About Author:

Post Graduate from Delhi University, certified Dietitian & Nutritionists. She also hold a diploma in Naturopathy.

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