बवासीर के लक्षण, कारण, प्रकार ईलाज. Piles Symptoms and treatment in hindi

बवासीर यानिकी Piles से भारतवर्ष में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में बहुत सारे लोग पीड़ित हैं इस बीमारी का होने का जो मुख्य कारणों में सामिलित हैं उनमे असमय खानपान एवं अनियमित दिनचर्या है | Piles गुदा द्वार के आस पास की नसों में सूजन के चलते विकसित हो सकता है | या साधारण शब्दों में यदि हम कहें तो बवासीर या Piles से हमारा अभिप्राय रक्त की वाहिकाओं या धमनियों से है जोकि गुदा द्वार के पास फूलकर लटकने लगती है और अंगूर जैसे मस्से का आकार धारण कर लेती है । इसकी पहचान करना बेहद ही सरल होता है जैसे की इसमें नसों में सूजन आ जाती है जिस कारण सम्बंधित रोगी को मलत्याग करने में अत्यधिक पीड़ा का अनुभव होता है | इसलिए आज हम हमारे इस लेख Piles Symptoms and treatment in hindi के माध्यम से इसके होने के कारण, लक्षण एवं संभावित ईलाज के बारे में जानने की कोशिश करेंगे |

Bawasir-piles-ke-karan-lakshan-prkar-stage-ilaj-in-hindi

बवासीर होने के कुछ संभावित कारण:

Piles होने के कुछ संभावित कारणों की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |

  • नसों के वाल्वज में अनुवांशिक कारणों से खराबी भी बवासीर होने का कारण हो सकती है |
  • लगातार लगातार कब्ज रहने से भी बवासीर की आशंका बढ़ जाती है |
  • ज्यादा देर बैठे रहने या खड़े रहकर कार्य करने से
  • शौच क्रिया के समय शौच के लिए अनावश्यक जोर लगाने से
  • गर्भावस्था में बच्चेदानी के दबाव की वजह से भी बवासीर हो सकती है |
  • ट्यूमर या रसौली के दबाव की वजह से भी बवासीर या Piles हो सकती है |

बवासीर अर्थात Piles होने के लक्षण:

Piles के कुछ प्रमुख लक्षणों की लिस्ट निम्नवत हैं |

  • गुदाद्वार के आस पास भारीपन, खुजली, जलन इत्यादि होना बवासीर के लक्षणों में सम्मिलित हैं |
  • शौंच में या शौच के साथ खून का गिरना
  • गुदाद्वार से मस्सों का बाहर आ जाना
  • कुछ परिस्थतियों में गुदा में दर्द का अनुभव हो सकता है ।

बवासीर हेतु किये जाने वाले निरीक्षण एवं जांच:

चिकित्सक गुदाद्वार के बाहरी निरीक्षण तथा प्रोक्टोस्कोप से आंतरिक परीक्षण द्वारा बवासीर की अवस्था तथा मस्सों की संख्या का निदान का लेते हैं। इसके अतिरिक्त इन परीक्षणों से गुदा में कोई अन्य रोग जैसे कैंसर, गुदाचीर, रसौली या भगन्दर इत्यादि का भी पता लगाया जा सकता है |

खून की कमी पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जा सकता है जिसमे Hemoglobin की मात्रा का पता लग सकता है |

इन्फेक्शन इत्यादि की जांच के लिए  TLC & DLC टेस्ट किये जा सकते हैं |

बड़ी आंत में अन्य रोगों की जांच के लिए बेरियम एनीमा तथा कोलोनोस्कोपी जांच करवाई जा सकती है इन जांचो से कैंसर, पोलिप, अल्सरेटिव, कोलाटिव इत्यादि का पता चलता है |

Types of Piles in Hindi:

Piles को Hemorrhoids भी कहते हैं इसे दो भागों बाह्य एवं आंतरिक में विभाजित किया जा सकता है |

  1. बाह्य बवासीर (External Piles) :

यह बवासीर गुदा के बाहरी किनारे पर होते हैं जो बेहद दर्दनाक होते हैं क्योंकि ये रक्त वाहानियाँ सूजी होती हैं जो बाहर से अन्दर की और फैली हुई रहती हैं इस प्रकार के इस बवासीर को बाह्य बवासीर या perianal hematoma कहते हैं | यह प्रकार आंतरिक बवासीर के मुकाबले कम मात्रा में देखने को मिलता है यद्यपि इसमें खुजली एवं दर्द आंतरिक बवासीर के मुकाबले अधिक होता है | इस तरह के बवासीर में सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है |

  1. आंतरिक बवासीर (Internal Piles):

बवासीर का यह प्रकार अधिकतर तौर पर दिखाई देता है कहने का आशय यह है की यह बाह्य बवासीर की तुलना में काफी आम प्रकार है | इसमें आंतरिक श्लेष्म झिल्ली के नीचे नसें पहिल जाती हैं और गुदाद्वार से 2-4 सेमी. ऊपर गुदा अवरोधक हो जाती है ये गुदा में उपस्थित dentate line से ऊपर होती हैं | ये आम तौर पर दर्द रहित होती हैं अर्थात आंतरिक बवासीर में दर्द कम होता है या फिर होता ही नहीं आंतरिक बवासीर में गुदाद्वार से रक्त स्राव होता है |

बवासीर की अवस्थाएं (Stages of piles in Hindi):

बवासीर को मुख्य रूप से तीन अवस्थाओं में बांटा जा सकता है

पहली अवस्था:  बवासीर की इस अवस्था में मस्से केवल अंदर ही रहते हैं और शौच में रक्त स्राव अर्थात खून आ सकता है । ये बवासीर के मस्से गुदाद्वार के बाहर बिना प्रोक्टोस्कोप के दिखाई नहीं देते हैं |

दूसरी अवस्था: बवासीर की दूसरी अवस्था में मस्से शौच के समय मलद्वार से बाहर निकल

आते हैं, और उसके बाद ये अपने आप वापिस अंदर चले जाते हैं या फिर इनको अंदर करना पड़ता है।

तीसरी अवस्था:  बवासीर या Piles की तीसरी अवस्था में मस्से गुदा के बाहर ही रहते हैं अगर अंदर कर भी दे तो अंदर रूकते नहीं हैं ।

बवासीर का ईलाज (Treatment Of Piles in Hindi):

बवासीर के ईलाज की हम यदि बात करें तो हम पाएंगे की इसके ईलाज करने के बहुत सारे तरीके जैसे दवाइयों द्वारा, टीकों द्वारा, ठंडी गैस द्वारा, बैडिंग द्वारा एवं ऑपरेशन द्वारा संभव हैं | यद्यपि हम नीचे इन सभी तरीकों के बारे में बात अवश्य करेंगे लेकिन साथ में यह भी कहना चाहेंगे की हमारे द्वारा दी गई जानकारी केवल ज्ञानवर्धन हेतु है किस रोगी को कौन सी दवाइयां या उपचार की आवश्यकता है यह सिर्फ योग्य चिकित्सक ही तय कर सकते हैं |

बवासीर का दवाइयों द्वारा ईलाज:

यदि किसी रोगी को पहले या दुसरे दर्जे की बवासीर है अर्थात शुरू की अवस्था में जैसे कि पहले तथा दूसरे दर्जे की बवासीर में खून रोकने तथा सूजन कम करने के लिए चिकित्सक द्वारा मरीज को कुछ दवाईयां दी जा सकती हैं जो रोगी को  कुछ समय के लिए लाभ पहुंचा सकती हैं | इन दी जाने वाली दवाइयों की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |

  • dobesil capsule – 1 कैप्सूल दिन में दो बार सुबह शाम सात दिनों तक |
  • daflon capsule- 1 कैप्सूल दिन में दो बार सुबह शाम पांच दिनों तक |
  • venusmin forte – 1 टेबलेट सुबह शाम सात दिनों तक |

बवासीर का टीके द्वारा ईलाज:

बवासीर के टीके की यदि हम बात करें तो यह एक खास किस्म की दवाई का टीका होता है जिसे कि लगाने से पूर्व शल्य चिकित्सक द्वारा स्वयं तैयार किया जाता है । इसे प्रोक्टोस्कोप द्वारा पूर्ण रूप से बैक्टीरिया रहित तकनीक से लगाया जाता है। यह बवासीर का टीका भी बवासीर की पहली अवस्था एवं दूसरी अवस्था में ही प्रभावी होता है।

ठंडी गैस द्वारा बवासीर का ईलाज:

बवासीर के ईलाज की यह विधि भी Piles की पहली अवस्था एवं दूसरी अवस्था में ही असरदार है इसमें क्रायो सर्जरी से बवासीर के मस्सों को फ्रीज किया जाता है |

बैडिग द्वारा बवासीर का ईलाज :

बैडिग प्रक्रिया में एक विशेष यंत्र की सहायता से बवासीर के मस्से पर टाइट इलास्टिक बैण्ड लगाया जाता है ताकि बैंड से मस्से में खून का दौरा रूक जाए | यह विधि भी पहले तथा दूसरी  अवस्था की बवासीर में ही उपयोगी है।

आपरेशन द्वारा बवासीर का ईलाज:

ऐसे रोगी जिनमे उपर्युक्त दी गई कोई भी विधि असरकारक न हो या फिर जिन रोगियों में बवासीर तीसरी अवस्था का हो उन रोगियों में शल्य क्रिया अर्थात सर्जरी द्वारा Piles के मस्सो को हटाया जाता है इस शल्यक्रिया को Haemorroidectomy भी कहते हैं |

बवासीर के बारे में प्रचलित भ्रांतियां व तथ्य (Facts and Misconception about Piles in Hindi)

Misconception:  गुदाद्वार के पास की जो भी बीमारियां, होती हैं वे सभी  बवासीर ही होती हैं?

Facts: नहीं, बवासीर, गुदाचीर, भगन्दर ये तीनों अलग-अलग रोग हैं । इनको लक्षण व सही पहचान के लिए रोगी को कुशल शल्य चिकित्सक अर्थात सर्जन की सलाह लेनी चाहिए।

Misconception: बवासीर यानिकी Piles एक गुप्त रोग है तथा अप्राकृतिक यौन क्रिया से होता है?

Facts: नहीं, इसका यौन क्रिया से कोई सम्बंध नहीं, लेकिन anal Condyloma or fissure, anal intercourse के कारण हो सकते हैं।

Misconception: बवासीर एक ला-इलाज अर्थात कभी न ठीक होने वाली बीमारी है?

Facts: नहीं, बवासीर एक ऐसी बीमारी बिलकुल नहीं है जिसका ईलाज नहीं है अपितु बवासीर का  स्थायी इलाज संभव है, बशर्ते कि इसका उपचार ऐसे शल्य चिकित्सक सर्जन से करवाया जाए जिन्हें बवासीर के रोगियों के इलाज में महारत हासिल हो |

Misconception:हर तरह की बवासीर का एक टीके के माध्यम से उम्र भर के लिए ईलाज संभव है?

Facts: नहीं, टीका केवल पहले तथा दूसरे दुर्जे की बवासीर में ही उपयोगी होता है । परहेज तथा सावधानियां न रखने से इसका प्रभाव कुछ समय बाद कम हो सकता है |

Misconception: बवासीर के ऑपरेशन के बाद शौच नियंत्रण कार्यप्रणाली ढंग से कार्य नहीं कर पाती है?

Facts: यह धारण भी तथ्यों पर आधारित नहीं है। यदि रोगी की बवासीर काफी पुरानी है तथा Sphincter की मांसपेशियां काफी कमजोर हो चुकी है। तो ऐसे रोगियों को पतले मल को रोकने में कुछ कठिनाई हो सकती है। लेकिन ऐसा केवल लगभग पांच प्रतिशत परिस्थतियों में होता है।

Misconception: बवासीर का रोग, आपरेशन के बाद दोबारा हो जाता है क्या यह सही है?

Facts: यह भी एक भ्रांति है जोकि तथ्यों से कोसों दूर है, Haemoriodectomyका आपरेशन करने के बाद अगले 20 वर्षों में बवासीर दोबारा होने की संभावना केवल 3 से 5 प्रतिशत लोगों में ही होती है। कुछ रोगी क्रायो सर्जरी या Lord’s Procedure या अन्य मस्सों को बांधने वाली विधियों को भी आपरेशन समझ लेते हैं। ऐसे में इस प्रकार की भ्रांति और ज्यादा फैलती है। आपरेशन करवाने के बाद रोगी को अपनी दिनचर्या तथा खानपान का ध्यान तो रखना ही चाहिए  अन्यथा जिन कारणों से बवासीर पहले हुआ है वह कारण यदि यथावत रहेंगे तो दोबारा रोग होने की संभावना भी होती रहेगी ।

बवासीर में भोजन व अन्य सावधानियां

  • बवासीर के रोगी को कब्ज निवारक दवाईयों पर निर्भरता नहीं बनानी चाहिए।
  • रोगी को शाकाहारी भोजन, फलों तथा सब्जियों का अधिक उपयोग करना चाहिए।
  • गाजर, मूली, खीरा, शलगम, पपीता, घीया, इत्यादि का ज्यादा सेवन करना चाहिए।
  • इच्छा तथा मौसम के अनुसार 3 से 4 लिटर पानी या शिकजी या लस्सी (छाछ) का प्रतिदिन सेवन करना चाहिए । आटे में से
  • प्रतिदिन सैर या हल्का व्यायाम करना चाहिए ।

बवासीर यानिकी Piles शुरू में सहज ठीक होने वाला रोग, है, लापरवाही करने से रोग बढ़ता है तथा इलाज कठिन हो जाता है, बवासीर अन्य रोगों जैसे कि कैंसर,आंत का घाव, रसौली इत्यादि का लक्षण भी हो सकता है, इसलिए बवासीर के पहले लक्षण से सचेत हो जाना चाहिए तथा बिना किसी हिचकिचाहट के अच्छे चिकित्सक से परामर्श लेकर इस रोग से छुटकारा पाना चाहिए ।

About Author:

HBG Health desk is a team of Experienced professionals holding various skills. They are expert to do research online and offline on health, beauty, wellness, and other components of health in Hindi.

One thought on “बवासीर के लक्षण, कारण, प्रकार ईलाज. Piles Symptoms and treatment in hindi

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *