Bladder Cancer – मूत्राशय कैंसर |

Bladder Cancer को हिन्दी में मूत्राशय का कैंसर कह सकते हैं भारत की यदि हम बात करें तो इस प्रकार का कैंसर महिलाओं की तुलना में भारतीय पुरुषों में अधिक देखने को मिलता है | यद्यपि Bladder Cancer इंडिया में आम नहीं है अगर आंकड़ों की बात करें तो लगभग 1 लाख लोगों में से किसी तीन भारतवासियों में यह बीमारी देखने को मिल सकती है | एक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2001-2003 में भारत के पांच प्रमुख शहरों दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बंगलौर एवं भोपाल में Bladder Cancer यानिकी मूत्राशय कैंसर से पीड़ित लगभग 1626 मरीज पुरुष पाए गए, जो की इन शहरों में कुल कैंसर पीड़ितों की संख्या का 3.7% था | यद्यपि जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं भारत में मूत्राशय कैंसर की समस्या आम नहीं है लेकिन फिर भी इस विषय पर वार्तलाप करना इसलिए बेहद जरुरी हो जाता है क्योंकि शुरूआती दिनों में इलाज होने पर इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है वर्ष 2006 में मुंबई के एक अस्पताल टाटा मेमोरिअल में 280 मरीज जो Bladder cancer से पीड़ित थे उनका सफलतापूर्वक इलाज संभव हुआ |

Bladder Cancer

Bladder Cancer Kya Hai:

जहाँ तक ब्लैडर अर्थात मूत्राशय की बात है यह शरीर का एक खोखला, मांसपेशी एवं गुब्बारे जैसा अवयव है | इसका शरीर में मुख्य कार्य मूत्र को जमा कर उसका संचय करना है | जब ब्लैडर यानिकी मूत्राशय मूत्र से पूरी तरह भर जाता है तो वह मनुष्य के मस्तिष्क को नसों द्वारा सन्देश भेजने लगता है ऐसे में व्यक्ति को मूत्राशय को खाली करने की लालसा होती है | शरीर के इसी अवयव में जब असमान्य कोशिकाओं का प्रादुर्भाव होने लगता है तब उसे Bladder Cancer कहा जाता है |

ब्लैडर कैंसर होने के कारण:

यद्यपि ब्लैडर कैंसर किसी को भी हो सकता है लेकिन बहुतायत तौर पर यह कैंसर ऐसे व्यक्तियों में देखा गया है जिनमे निम्न घटकों की उपस्थिति थी | यह भी जरुरी नहीं है की जिन व्यक्तियों में ऐसे घटक मौजूद होते हैं उन्ही को Bladder Cancer हो सकता है बल्कि इन घटकों के मौजूद होने पर इस कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है |

  • ऐसे लोग जो धूम्रपान करते हैं उनमे ब्लैडर कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है अर्थात धूम्रपान इस प्रकार के कैंसर के जोखिम का प्रमुख घटक है | व्यक्ति द्वारा जितनी अधिक सिगरेट, तम्बाकू इत्यादि का उपभोग किया जाता है उतना ही ब्लैडर कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है | यह इसलिए होता है क्योंकि सिगरेट एवं अन्य धूम्रपान के धुएं में केमिकल अर्थात रसायन होते हैं | जो धूम्रपान करने पर व्यक्ति के रक्तप्रवाह में चले जाते हैं और किडनी में छन कर मूत्राशय में आ जाते हैं | यही रसायन धीरे धीरे ब्लैडर की भित्तियों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती हैं जो कुछ वर्षों के पश्चात् कैंसर होने का कारण बन सकता है |
  • ब्लैडर कैंसर अधिकतर तौर पर वृद्ध व्यक्तियों अर्थात 40 से अधिक उम्र वाले व्यक्तियों में देखने को मिलता है |
  • कार्यस्थल में कार्य के दौरान रसायनों अर्थात केमिकल के संपर्क में आना भी ब्लैडर कैंसर का कारण हो सकता है | पहले विभिन्न रंगों की फैक्ट्रियों, मुद्रण, कपड़ा, चमड़ा, प्लास्टिक इत्यादि उद्योगों में उपयोग में लाये जाने वाले केमिकल को भी ब्लैडर कैंसर होने का कारण माना गया हालांकि वर्तमान में ऐसे रसायनों पर सरकार की तरफ से रोक लगा दी गई है |
  • महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में इस प्रकार का कैंसर अधिक पाया जाता है |
  • ऐसे व्यक्ति जो लकवे से ग्रस्त होते हैं उनमे मूत्राशय संक्रमण भी अधिक होते हैं जिससे ब्लैडर कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है |
  • यदि परिवार में किसी सदस्य को पहले ब्लैडर कैंसर हुआ हो तो ऐसी स्थिति में उस परिवार से सम्बंधित व्यक्तियों में भी ब्लैडर कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है |

Symptoms of Bladder Cancer in Hindi:

Bladder cancer के कुछ सामान्य लक्षण निम्नवत है हालाँकि यह जरुरी नहीं है की यदि किसी व्यक्ति में निम्नवत लक्षण पाए जाते हैं तो उसे ब्लैडर कैंसर ही है बल्की यदि किसी व्यक्ति में निम्नवत लक्षण पाए जाते हैं तो उसे चिकित्सक से राय परामर्श अवश्य लेनी चाहिए और हो सकता है की कहीं ऐसा मूत्राशय कैंसर के कारण हो रहा हो |

  • पेशाब में रक्त आना अर्थात खून विद्यमान रहना ब्लैडर कैंसर का एक सामान्य सा लक्षण है इसलिए ऐसा प्रतीत होने पर व्यक्ति को अपने पारिवारिक चिकित्सक की राय आवश्य लेनी चाहिए |
  • पेशाब करते वक्त जलन होने या बार बार पेशाब लगना, या पेशाब त्याग करने के लिए उद्धिग्न रहना किसी संक्रमण के लक्षण होते हैं और इन लक्षणों पर लम्बे समय तक ध्यान नहीं दिया गया तो बाद में ये ब्लैडर कैंसर का रूप धरण कर सकते हैं |
  • पेट के या पीठ के निचले भाग में दर्द का आभास होना यद्यपि यह ब्लैडर कैंसर का सामान्य लक्षण नहीं है और इनके होने का कारण ब्लैडर में संक्रमण या किडनी में पथरी का होना भी हो सकता है | लेकिन ऐसे लक्षण दिखने पर भी व्यक्ति को चिकित्सक को अवश्य दिखाना चाहिए |

Types of Bladder Cancer:

Bladder Cancer के विभिन्न प्रकार होते हैं इनमे से कुछ मुख्य प्रकार निम्नवत हैं |

  1. Transitional cell carcinoma(TCC):

Transitional cell carcinoma जिसे urothelial carcinoma (UCC) भी कहा जाता है यह ब्लैडर कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार है urotheliam ब्लैडर की अंदरूनी परत को कहते हैं और इसकी कोशिकाओं को Transitional Cell कहा जाता है इन्ही कोशिकाओं से इस प्रकार के कैंसर की शुरुआत होती है |कुछ ब्लैडर कैंसर की शुरुआत ब्लैडर की भित्तियों में tumor का प्रादुर्भाव होने के कारण होती है तो अन्य में प्रारम्भिक स्तर में ऐसे कैंसर की अवस्था से होती है जो मांशपेशियों फैलने वाला नहीं होता है इसमें ब्लैडर की अंदरूनी परत का समबन्ध होता है | यदि शुरूआती तौर पर ध्यान नहीं दिया गया तो कुछ ऐसे कैंसर जो मांशपेशियों में नहीं फैलते हैं बाद में फैलने वाले कैंसर के रूप में परिवर्तित भी हो सकते हैं |

  1. Carcinoma in Situ (CIS):

Carcinoma in Situ ब्लैडर कैंसर का या प्रकार मांशपेशियों में फैलने वाला प्रकार है | यह ब्लैडर में चपटे Blood vessel हिस्से के स्वरूप में दिखाई दे सकता है | इसकी फैलने एवं विकसित होने की क्षमता TCC की तुलना में अधिक होती है | इसलिए समय रहते यदि इसकी योग्य चिकित्सा न हुई तो यह बेहद खतरनाक रूप धारण कर सकता है |

  1. Papillary

ब्लैडर का Papillary Cancer एक प्रारम्भिक कैंसर है जिसका अभिप्राय यह है की कैंसर ने मूत्राशय की दीवार की मांसपेशी या संयोजी ऊतक पर आक्रमण अभी नहीं किया है | कुछ व्यक्तियों में CIS एवं Papillary दोनों की उत्पति देखी जा सकती है |

इन तीनो के अलावा Bladder Cancer के अन्य भी कई दुर्लभ प्रकार देखे जा सकते हैं इनमे मुख्य रूप से दो squamous cell carcinoma एवं adenocarcinoma ब्लैडर कैंसर के प्रकार मुख्य हैं | इनमे ब्लैडर के परत की दूदरे प्रकार की कोशिकाओं से squamous cell carcinoma शुरू होता है एवं glandular cells यानिकी कोशिकाओं से adenocarcinoma का उद्गम होता है | इन दोनों प्रकार के कैंसर की बढ़ने,  फैलने एवं विकसित होने की गति बड़ी तीव्र होती है |

 

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