Bronchoscopy मेडिकल टेस्ट क्या है क्यों और कैसे किया जाता है.

ब्रोंकोस्कोपी (Bronchoscopy) नामक यह जांच व्यक्ति की श्वास नलियों एवं फेफड़ों की जांच करने का एक टेस्ट हैं | इस मेडिकल टेस्ट को अंजाम देने के लिए एक छोटी सी tube समबन्धित व्यक्ति के नाक या मुहं के रस्ते से फेफड़ों तक पहुंचाई जाती है | यह मेडिकल टेस्ट फेफड़ों की जांच करने या श्लेष्म को हटाने के लिए किया जाता है | जब इस परीक्षण के दौरान Tissues के सैंपल लेकर उसका प्रयोगशाला में अध्यन किया जाता है तो इस क्रिया को biopsy कहा जाता है | जिस किसी भी व्यक्ति को चिकित्सक द्वारा Bronchoscopy  नामक जांच के लिए सुझावित किया गया है उस व्यक्ति को परीक्षण परिसर में आते समय अपने परिवार के किसी सदस्य को अपने साथ लाने की आवश्यकता होगी | क्योंकि जांच के बाद वाहन चलाना इत्यादि प्रभावित व्यक्ति के लिए जोखिम भरा हो सकता है | जहाँ तक जांच में समय लगने की बात है इसमें लगभग दो घंटों तक का समय लग सकता है लेकिन प्रभावित व्यक्ति को कुछ अतिरिक्त समय का कार्यक्रम बनाकर जांच परिसर में पहुंचना पड़ेगा |

Bronchoscopy-test-information in hindi

Preparation for Bronchoscopy in Hindi :

Bronchoscopy नामक इस मेडिकल टेस्ट की तैयारी व्यक्ति को टेस्ट के एक दिन पहले से करनी पड़ेगी |

  • जांच के पहले दिन मध्य रात्रि के बाद प्रभावित व्यक्ति या महिला को कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए यहाँ तक की पानी पीना भी वर्जित माना गया है |
  • इसके अलावा यदि व्यक्ति की कुछ नियमित तौर पर दवाएं चल रही हैं तो चिकित्सक के कहने पर वह दवाएं सादा पानी के साथ ले सकता है |

ब्रोंकोस्कोपी जांच कैसे की जाती है |

  • प्रभावित व्यक्ति या महिला के परीक्षण परिसर में पहुँचने पर स्टाफ द्वारा प्र्बह्वित व्यक्ति को अस्पताल का गाउन पहनने को दिया जा सकता है |
  • उसके बाद प्रभावित व्यक्ति या महिला को या तो कुर्सी पर बिठाया जाता है या फिर मेज पर लेटने को कहा जा सकता है |
  • उसके बाद हाथ की नस में Intravenous सूई लगाई जाती है |
  • उसके बाद सम्बंधित व्यक्ति या महिला को हाथ में लगी सुई के माध्यम से कुछ आराम पहुँचाने वाली दवाएं दी जा सकती है |
  • यदि प्रभावित व्यक्ति पुरुष है तो उसे छाती में उपलब्ध बाल साफ़ करने को कहा जा सकता है क्योंकि इस प्रक्रिया में छाती पर छोटे छोटे पैड रखे जाते हैं |
  • उसके बाद नर्स या स्टाफ द्वारा प्रभावित व्यक्ति का ब्लड प्रेशर, एवं हृदय की गति को बार बार मापा जा सकता है |
  • शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा का पता करने के लिए चिकित्सक द्वारा अंगुली में कोई क्लिप लगाईं जा सकती है |
  • और जब जांच की प्रक्रिया शुरू होती है तो उस दौरान प्रभावित व्यक्ति को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन दी जा सकती है |
  • ब्रोंकोस्कोपी (Bronchoscopy) नामक इस मेडिकल टेस्ट को अंजाम देने के लिए प्रभावित व्यक्ति के मुहं एवं नाक पर सुन्न करने की दवाई स्प्रे की जा सकती है |
  • उसके बाद चिकित्सक द्वारा सम्बंधित व्यक्ति की नाक या मुहं में एक tube डाली जाती है जिसे सम्बंधित व्यक्ति अपने गले में महसूस भी कर सकता है और हो सकता है की उसे खांसी आ जाय लेकिन व्यक्ति अच्छे ढंग से सांस भी ले सकता है |
  • प्रभावित व्यक्ति को ब्रोंकोस्कोपी मेडिकल टेस्ट के दौरान बोलना नहीं चाहिए क्योंकि इससे उसके गले में दर्द का आभास हो सकता है |
  • उसके बाद चिकित्सक द्वारा फेफड़ों में उपलब्ध श्लेष्म को हटा दिया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर Tissues के सैंपल लिए जा सकते हैं |
  • यह प्रक्रिया कर लेने के बाद tube हटा ली जाती है |

ब्रोंकोस्कोपी जांच के बाद क्या हो सकता है |

ब्रोंकोस्कोपी (Bronchoscopy) जांच के बाद निम्न स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं |

  • जांच के लगभग एक घंटे बाद तक नर्स द्वारा बार बार आपके ब्लड प्रेशर, ह्रदय गति एवं अन्य जांच की जा सकती हैं |
  • सम्बंधित व्यक्ति ने जिन दवाओं का सेवन या जो दवाइयां सुई के माध्यम से सम्बंधित व्यक्ति के शरीर में प्रविष्ट कराइ गई थी उनसे व्यक्ति को नींद आ सकती है इसलिए सम्बंधित व्यक्ति को वाहन नहीं चलाना चाहिए और परिवार के किसी सदस्य के साथ ही घर को प्रस्थान करना चाहिए |
  • प्रभावित व्यक्ति के गले या नाक में दर्द हो सकता है आवाज भारी एवं खांसी भी हो सकती है यदि खांसी में थोडा रक्त भी दिखाई दे तो घबराएँ नहीं यह ब्रोंकोस्कोपी मेडिकल टेस्ट के बाद सामान्य सी बात है |
  • जांच के लगभग दो घंटे बाद सुन्न करने वाली दवाई का असर बेअसर हो जाता है उसके बाद प्रभावित व्यक्ति खा पी सकता है |

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