डायबिटीज में ब्लड शुगर की जाँच-परीक्षण कब कैसे करें .

डायबिटीज में ब्लड शुगर की जांच समय समय पर बेहद जरुरी होती है और डायबिटीज नामक इस बीमारी में जीने की कला यही है की इस पर से कभी भी अपना नियंत्रण हटने नहीं देना चाहिए | यद्यपि यह कण्ट्रोल किस समय किस स्थिति में है इसके लिए कई जांचे एवं परीक्षण किये जाते हैं इन सब में डायबिटीज में ब्लड शुगर की जांच बेहद महत्वपूर्ण जांच है | यह परीक्षण अर्थात मेडिकल जांच एक ऐसी जांच है जिसे घर पर भी किया जा सकता है | इसी बात के मद्देनज़र आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से ब्लड शुगर मेडिकल जांच के बारे में जानने की कोशिश करेंगे | डायबिटीज के साथ जीवन जीना वास्तव में एक कला है कोई बेहद काबिल फनकार ही डायबिटीज में जीवन रागिनी के तारतम्य को इस तरह से साध सकता है की इस बीमारी के बावजूद भी उसका जीवन संगीतमय बना रहता है | डायबिटीज के साथ जीवन को संगीतमय बनाने के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता इस बीमारी के साथ तालमेल बिठाने की होती है | साथ में यह भी ध्यान रखना पड़ता है की जीवन रागिनी के रूप में जाने जाने वाले ये तार इतने ढीले न हों की शरीर पर रोग हावी हो जाय, और इतने कसेहुए भी न हों की जीवन रुपी यह डोर ही टूट जाय | इसलिए जैसा की हम सबको विदित है कोई भी रोग तभी नियंत्रण में हो सकता है जब उसकी वास्तविक स्थिति पता हो, कहने का आशय यह है की शरीर की जैव रासायनिकी किस स्थिति में है और उसमे कहाँ किस सुधार की आवश्यकता है यह जानकारी हमें मिलती रहे डायबिटीज में ब्लड शुगर नामक जांच से कहीं न कहीं खून में शर्करा का पता चलता है जिससे शरीर की जैव रसायनिकी स्थिति का पता लगाया जा सकता है और इस जंक एवं कुछ अन्य जांचों जैसे ग्लाइकोसलेटिड हीमोग्लोबीन टेस्ट इत्यादि से यह सुनिश्चित हो पाता है की बीमारी पर अंकुश लगाने के लिए कौन सी दवा किस मात्रा में देने से रोगी की स्थिति में सुधार होगा |

डायबिटीज में ब्लड शुगर की जांच

 

टाइप 1 डायबिटीज में ब्लड शुगर की जांच:

टाइप-1 डायबिटीज में दिन में कई बार भी ब्लड शुगर की जाँच करनी पड़ सकती है। उसी से इंसुलिन की मात्रा घटाने-बढ़ाने का निर्णय लिया जाता है । वयस्क रोगी यह जाँच खुद ही घर पर कर सकता है और डाक्टर के निर्देश के अनुसार अपने उपचार में सुधार ला सकता है ।

टाइप-2 डायबिटीज में ब्लड शुगर की जांच:

टाइप-2 डायबिटीज में भी समय-समय पर ब्लड शुगर की जाँच करते रहना जरूरी होता है । यह बात अब साबित हो चुकी है कि ब्लड शुगर जितनी कट्रोल में रहे, शरीर उतना ही स्वस्थ और हृष्ट-पुष्ट रहता है और डायबिटीज के होते हुए भी उसका बाल-बाँका नहीं होता । टाइप-2 डायबिटीज में ब्लड शुगर की जाँच कितने-कितने दिनों बाद की जानी चाहिए यह कोई निश्चित नहीं है लेकिन जब जब बीमारी उग्र रूप धारण करने लगे तब तब उसे समझने और साधने के लिए यह जांच बार बार दोहरानी अति आवश्यक होती है क्योंकि ऐसी स्थिति में ऐसे किये बिना काम नहीं चलता है ।

गर्भावस्था में डायबिटीज में ब्लड शुगर की जांच की उपयोगिता:

गर्भवती डायबिटिक स्त्री के लिए भी ब्लड शुगर की जाँच की असीम उपयोगिता होती है । गर्भस्थ शिशु के बढ़ने के साथ-साथ माँ की ब्लड शुगर बदलती रहती है, और माँ और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए माँ को दी जा रही इंसुलिन की मात्रा में अनिवार्य परिवर्तन लाना जरूरी होता है । जिन लोगों में ब्लड शुगर बहुत घटती-बढ़ती रहती है, उनमें समस्या को ठीक से समझने के लिए कभी-कभी दो-एक दिन चौबीसों घंटे ब्लड शुगर मापने की भी जरूरत पड़ जाती है । यह मॉनीटरिंग बार-बार हाइपोग्लाईसीमिया  के दौर से गुज़र रहे रोगियों के लिए बहुत महत्व रखती है | कुछ लोग अपने रोग पर नजर रखने के लिए आज भी मूत्र जाँच पर निर्भर करना पसंद करते हैं । यह सच है कि डायबिटीज में ब्लड शुगर की जांच के दौरान खून में शुगर की मात्रा जांचने के मुकाबले मूत्र जांच करना बेहद आसान है और उस प्रक्रिया में सूई लगाने का दर्द भी नहीं झेलना पड़ता । पर समस्या यह है कि मूत्र में शुगर देखना उतना भरोसेमंद नहीं है जितना कि ब्लड शुगर नापना । यह सोच बिल्कुल गलत है कि शरीर में जब शुगर बढ़ती है तो यह पहले मूत्र में नजर आती है और बाद में रक्त में दिखती है । सच यह है कि जब तक खून में शुगर 180 mg/dl के पार नहीं पहुँच जाती, तब तक यह मूत्र में नजर ही नहीं आती है । इससे भी बड़ी दिक्कत यह है कि अगर गुदों पर डायबिटीज का असर आ जाए, तब मूत्र जाँच बिल्कुल ही किसी काम की नहीं रहती । खून में शुगर कितनी ही बढ़ जाए, मूत्र की जाँच करने पर कुछ पता नहीं चलता है ।

डायबिटीज में ब्लड शुगर की जांच घर पर कैसे करें?

रक्त में शुगर की मात्रा नापना अब इतना सरल हो गया है कि आप यह जाँच घर पर खुद कर सकते हैं । इसके लिए उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिलने लगे हैं, जिनसे ब्लड शुगर आसानी से मॉनीटर की जा सकती है । यह ब्लड ग्लूकोज़ मॉनीटर कई मॉडलों में आते हैं, पर मोटे तौर पर उनके काम करने का ढंग लगभग एक जैसा ही होता है। उनसे रक्त में ब्लड शुगर नापने  में मुश्किल से दो मिनट भी नहीं लगते, और हाथ के हाथ रिपोर्ट पता चल जाती है ।

Step 1 :  डायबिटीज में ब्लड शुगर जाँचने के लिए बूंद भर खून की ही जरूरत होती है । यह खून का नमूना अँगुली से लिया जा सकता है । इसके लिए ऐसी विशेष सूइयाँ भी मिलती हैं, जो स्प्रिंग प्रणाली से जुड़ी होती हैं । उनमें बटन दबाते ही तेजी से एक महीन सूई बाहर निकलती है और अँगुली को गोदकर भीतर लौट जाती है । यह सूई इतनी महीन होती है और इस तेजी से काम करती है कि लगभग न के बराबर दर्द होता है ।

Step 2 : :  डायबिटीज में ब्लड शुगर जाँचने के लिए अब अगला कदम खून की बूंद को टेस्ट स्ट्रिप्स पर चढ़ाना होता है अर्थात ग्लूकोज़ नापने के लिए खून की बूंद को खास तौर पर बनी पत्तीनुमा टेस्ट स्ट्रिप पर लाया जाता है | और इसी टेस्ट स्ट्रिप के माध्यम से ब्लड ग्लूकोज़ मॉनिटर खून में उपस्थित ग्लूकोज़ की मात्रा को पढता है | यह एक छोटा सा उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसमें टेस्ट स्ट्रिप से रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा नापने की क्षमता होती है |

ब्लड शुगर की जाँच कैसे करें

  • सबसे पहले साबुन से अपने होथ धोएँ और उन्हें ठीक से सुखा लें । अँगुली पर गंदगी होने से खून का नमूना दूषित हो जाता है और ब्लड शुगर की ठीक रीडिंग नहीं मिल पाती । स्पिरिट से भी अँगुली साफ करना ठीक नहीं, इससे भी रीडिंग गलत हो जाती है ।
  • टेस्ट स्ट्रिप की डिब्बी से एक टेस्ट स्ट्रिप निकालें और तुरंत डिब्बी पर दुबारा ढक्कन कस दें । हवा की नमी आ जाने से टेस्ट स्ट्रिप्स ठीक से काम नहीं करतीं है ।
  • अब खून का नमूना लेने के लिए अँगुली के एक तरफ सूई से गोदें । हर बार किसी नई जगह से नमूना लें और उँगली भी बदलते रहें । अँगुली के पोर पर से खून लेने से काम करने में दिक्कत आ सकती है ।
  • रक्त में ब्लड शुगर जांचने के लिए खून की बूंद टेस्ट स्ट्रिप पर ले लें ।
  • टेस्ट स्ट्रिप ब्लड ग्लूकोज़ मॉनीटर में डाल दें और रीडिंग आने का इंतजार करें । ब्लड ग्लूकोज़ मॉनीटर टेस्ट स्ट्रिप में शुगर की मात्रा पढ़कर तुरंत उसे अपने डिस्प्ले पेनल पर प्रदर्शित कर देता है ।

ब्लड ग्लूकोज़ मॉनीटर के कुछ मॉडलों में इलेक्ट्रॉनिक-स्मृति की भी व्यवस्था होती है और बटन दबते ही पिछली कई रीडिंग्स पेनल पर सामने आ जाती हैं । यह पूरी की पूरी प्रणाली इतनी छोटी होती है कि इसे पस या ब्रीफकेस में रखा जा सकता है । यों तो ब्लड ग्लूकोज़ मॉनीटर की कीमत उसके मॉडल पर निर्भर करती है, पर सामान्य ब्लड ग्लूकोज़ मॉनीटर बाजार में तीन से छह हजार रुपए के बीच खरीदे जा सकते हैं । अधिक खर्च टेस्ट स्ट्रिप्स का होता है, जो अब भी काफी महँगी हैं ।

डायबिटीज में ब्लड शुगर की जांच कब कब करानी चाहिए?

डायबिटीज में ब्लड शुगर की जांच का यह निर्णय की जाँच कितनी बार और दिन में किस समय की जाए, रोग की किस्म, उग्रता और उपचार को ध्यान में रखकर किया जाता है । ऐसे मरीज जो इंसुलिन ले रहे होते हैं, उन्हें दिन में कम से कम दो-तीन बार यह जाँच करने की जरूरत होती है । पर जब तक ब्लड शुगर कट्रोल में नहीं आती तब तक सुबह खाली पेट, नाश्ते के बाद, दोपहर और रात के भोजन के बाद तथा सोने से पहले जाँच करना जरूरी होता है । टाइप-2 डायबिटीज में यह जाँच इतनी बार नहीं करनी पड़ती । सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा हो, तो हफ्ते-पंद्रह दिन पर जाँच कर लेना भी काफी होता है । जिन लोगों में खानपान में सुधार और नियमित व्यायाम से ही रोग कट्रोल में आ जाता है, उनके लिए तीन-तीन महीने पर जाँच कर लेना भी पर्याप्त है ।

घर पर जाँच करने के लाभ:

डायबिटीज में ब्लड शुगर की जान्छ घर पर अपने आप करने के कई लाभ होते हैं जिनका विवरण कुछ इस प्रकार से है ।

  • सबसे पहला लाभ यह है कि खुद जाँच करने से दूसरों पर निर्भरता ख़त्म हो जाती है |
  • घर पर मरीज जब चाहें तब जाँच कर सकते हैं ।
  • घर पर जांच करने पर कहीं आने जाने की परेशानी नहीं होती जो की मरीजों के लिए अधिक सुविधजनक होता है |
  • घर पर जांच करने से रिपोर्ट का तुरंत पता चल जाता है |
  • किसी जाँच-लेबोरेटरी के मुकाबले खर्च कम आता है और नतीजे भी पूरी तरह विश्वसनीय होते हैं ।

यदि आपको अपने से ब्लड शुगर नापने में दिक्कत हो, तो आप किसी जाँच-लेबोरेटरी की भी मदद ले सकते हैं । ज्यादातर जाँच-लेबोरेटरी उसी दिन शाम तक ब्लड शुगर की रिपोर्ट दे देती हैं ।

डायबिटीज में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य के जितना करीब रहे, उतना ही अच्छा है । पर डायबिटीज में सुबह खाली पेट यह 80-120 mg/dl के बीच और भोजन के डेढ़-दो घंटे बाद 180 mg/dl से कम रहे तो भी बहुत अच्छा है ।

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