डायबिटीज का भोजन से ईलाज कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन

अक्सर डायबिटीज से पीड़ित बहुत सारे मरीजों के मन में ये सवाल उठते पाए गए हैं की क्या डायबिटीज का भोजन से ईलाज संभव है | कहने का आशय यह है की क्या डायबिटीज का मरीज एक स्वस्थ आहार शैली अपनाकर अपनी ब्लड शुगर को नियंत्रित कर सकता है | तो इसका जवाब यह है की हाँ यह सब कुछ संभव है लेकिन डायबिटीज में स्वस्थ आहार की बात उठते ही मन-मस्तिष्क में तरह-तरह की पाबंदियों का नक्शा खिंच आता है । लगता है कि अब तो निगोड़ी जुबान को तवज्जो देने के दिन लद गए । मीठा तो दूर, चावल और आलू से भी कन्नी काटनी पड़ेगी । चाय-दूध भी फीका पीना होगा । अनेक वर्षों से डायबिटीज का इलाज शुरू करते हुए दवा का पर्चा थमाते हुए डॉक्टर भी खानपान की चीजों की लंबी सूची पकड़ा देते थे जिन पर पूरी रोक-टोक होती थी । पर नए वैज्ञानिक शोध ने यह सब-कुछ उलट-पुलट करके रख दिया है । अध्ययनों से यह साबित हो गया है कि जरूरत सिर्फ खानपान में संतुलन और अनुशासन लाने की है ताकि डायबिटीज का भोजन से ईलाज संभव हो सके, इसमें बहुत अधिक परहेज और पाबंदियों की आवश्यकता अब नहीं रह गई है । यह खोज इतनी क्रांतिकारी है कि इसे समझने और स्वीकारने में डॉक्टरों को भी अभी समय लग रहा है । पर जिसे डायबिटीज है उसके लिए यह जानकारी निश्चित ही सुखद है । डायबिटीज में भी सामान्य जीवन की ही तरह संतुलित और पौष्टिक आहार जीवन की मूल आवश्यकता है, फर्क सिर्फ इतना है कि जब तक रोग न हो खुद के साथ लोग ज्यादती करने से बाज नहीं आते, जबकि रोग होने पर सावधान होना मजबूरी हो जाती है । सच यह भी है कि टाइप-2 डायबिटीज में मात्र आहार अर्थात भोजन  में सुधार और नियमित व्यायाम से ही बहुत से मामलों में रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है । कहने का आशय यह है की टाइप-2 डायबिटीज के मामलों में डायबिटीज का भोजन से ईलाज संभव है |

डायबिटीज का भोजन से ईलाज

व्यक्ति के अंतर्मन पर डायबिटीज का प्रभाव:

डायबिटीज का भोजन से ईलाज तो संभव है लेकिन डायबिटीज का पता चलते ही भीतर जैसे कुछ टूट सा जाता  है । लगता है कि अब बाकी की उम्र तो बस बंदिशों में बीतेगी । पाबंदियों की सबसे ज्यादा बिजली खानपान पर गिरेगी । न मिठाई, केक-पेस्ट्री, आइसक्रीम नसीब होंगे, न ही आलू-चावल और तो और चाय-दूध भी फीका पीना होगा । लेकिन यदि हम कहें की वर्तमान मेर ऐसी किसी भी पाबंदी की जरूरत नहीं, तो आप शायद यही कहेंगे कि “मियाँ, क्यों मजाक कर रहे हो | लेकिन सच यही है कि तरह-तरह के परहेज जो डायबिटीज में अब तक जरूरी समझे जाते थे, उन्हें अब आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान ने बेमायने साबित कर दिया है । भले ही यह बात आसानी से गले न उतरे, पर नवीन अध्ययनों से इस बात की पुष्टि हो गई है कि डायबिटीज में न तो मीठा बंद करने की जरूरत है, न चीनी छोड़ने की ! जरूरत है तो

सिर्फ समय से भोजन करने की, उसे संतुलित और पौष्टिक बनाए रखने की और उतनी ही मात्रा में ग्रहण करने की जितने की शरीर को उसकी जरूरत है । अपने साथ ऐसी अति न करें कि कपड़े छोटे पड़ने लगें । न ही ऐसा भोजन करें कि किसी पौष्टिक तत्त्व के लिए शरीर तरसता रह जाए । डायबिटीज का भोजन से ईलाज करने के लिए भोजन ऐसा हो कि स्वाद भी बना रहे और स्वास्थ्य भी अच्छा रहे । स्वस्थ और हृष्ट-पुष्ट शरीर के लिए जरूरी है कि शरीर उन सभी चीजों को सही-सही मात्रा में प्राप्त करता रहे जिनकी उसे जरूरत है । इसी से उसकी जटिल मशीन बिना किसी बाधा के चलती रह सकती है, और यह तभी हो सकता है जब भोजन में सभी प्रकार की पौष्टिक चीजों का सही अनुपात में समावेश हो । मोटे तौर पर हमारे भोजन में तीन प्रकार के पोषक तत्व विद्यमान होते हैं, जिनकी उपस्थिति डायबिटीज का भोजन से ईलाज करने में अनिवार्य है |

डायबिटीज में कार्बोहाइड्रेट:

कार्बोहाइड्रेट शरीर के लिए ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं । उनसे शरीर के सभी अंगों को काम करने की शक्ति मिलती है । मस्तिष्क सोचता-विचारता है, दिल की धड़कनें जिंदा रहती हैं, पेशियाँ मुस्तैदी से भाग-दौड़ पाती हैं । सभी कार्बोहाइड्रेट मूल रूप से शुगर से बने होते हैं । नाना प्रकार की शुगर-जैसे ग्लूकोज, फ्रक्टोज, सुक्रोज, माल्टोस और लैक्टोस शुगर ऐल्कोहॉल जैसे सॉर्बिटॉल, जाइलीटॉल और मैनीटॉल; तथा स्टार्च जैसे एमिलोस और एमिलोपेक्टिन, सभी कार्बोहाइड्रेट के रूप हैं । अब तक यह समझा जाता था कि ऐसी सभी चीजें जिनमें शुगर मात्रा अधिक होती है जैसे चीनी, शहद, मिठाई, गोलियाँ, टॉफी, चॉजैम, केक-पेस्ट्री से डायबिटीज में परहेज बरतना जरूरी है । सोच थी कि यह बहुत आसानी से और बहुत जल्दी पच जाते हैं जिससे भीतर की शुगर तुरंत जज्ब होकर खून में पहुँच जाती है । इसी आधार पर यह भी सोच थी कि ऐसी चीजें जिनमें कार्बोहाइड्रेट की संरचना ज्यादा जटिल होती है, अधिक सुरक्षित होती हैं । लेकिन वैज्ञानिकों ने  हाल में जब इस सोच की पुष्टि करने के लिए प्रयोग किए तो इनके नतीजे चौंका देने वाले निकले । इस प्रयोग में डायबिटीज से घिरे और सामान्य स्वस्थ लोगों के छोटे-छोटे अलग-अलग ग्रुप में बाँटकर छः हफ्तों तक चीनी, स्टार्च और दूसरी कार्बोहाइड्रेट चीजें दी गईं तथा उनकी ब्लड शुगर पर निगरानी रखी गई । पता चला कि तीनों प्रकार के कार्बोहाइड्रेट का ब्लड शुगर पर एक जैसा असर पड़ा । निष्कर्ष यह कि सभी कार्बोहाइड्रेट चाहे मिठाई और चाहे स्टार्च ब्लड शुगर पर एक जैसा असर डालते हैं । इसलिए मीठे पर पाबंदी लगाना गलत है । यह चौंका देनेवाली जानकारी अमेरिकी डायबिटिक एसोसिएशन की सन् 2003 में जारी की गई सिफारिशों में है ।  पर हाँ, इस नई जानकारी का यह आशय बिलकुल नहीं है कि खूब मीठा ही मीठा खाएँ । रिपोर्ट के अनुसार किसी भी संतुलित आहार में अर्थात डायबिटीज का भोजन से ईलाज में कार्बोहाइड्रेट की भागीदारी 50-60 प्रतिशत ही होनी चाहिए, इससे अधिक नहीं । अब चाहे तो इसे मिठाई खाकर पूरी कर लें और चाहे स्टार्च-युक्त कार्बोहाइड्रेट जैसे रोटी, चावल, मक्का, दाल, सब्जियाँ जैसे आलू और शक्करकंदी; फ्रक्टोज़ और विटामिन देने वाले फल; लैक्टोस देने वाला दूध और दूध से बनी चीजें, और हरी-भरी सब्जियाँ । तय है चुनाव करना जरा भी मुश्किल नहीं ! कोई भी स्वास्थ्य-प्रिय व्यक्ति मिठाई के मुकाबले अनाज, दालें, हरी-भरी सब्जियों और दूध को अधिक पसंद करेगा । इन चीजों से ही उसे विटामिन, खनिज, प्राकृतिक रेशा और दूसरे जरूरी पोषक तत्त्व मिल सकेंगे जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं । इसकी तुलना में मिठाई क्षणिक संतुष्टि देने के अलावा निरी कैलोरी का भंडार है । चावल, आलू और शक्करकंदी जैसे स्टार्च-युक्त आहार भी डायबिटीज में वर्जित गिने जाते रहे हैं । शोधपरक अध्ययनों से स्पष्ट हो गया है कि यह प्रतिबंध भी बेमायने है । जरूरत सिर्फ इतनी है कि कार्बोहाइड्रेट की कुल मात्रा पर ध्यान दें । यदि आप अधिक कार्बोहाइड्रेट लेते हैं, तो इंसुलिन की कमी के चलते यह आपकी ब्लड शुगर बढ़ाकर ही मानेगा । इसलिए डायबिटीज का भोजन से ईलाज करने के लिए उचित यह है कि पूरे दिन में हर बार थोड़े-थोड़े कार्बोहाइड्रेट लेते रहें ।

डायबिटीज में प्रोटीन

डायबिटीज का भोजन से ईलाज की बात करें तो बचपन से ही हमें यह पाठ पढ़ाया जाता है कि तंदुरुस्त बनना है तो खूब प्रोटीन खाओ । यह सच है कि शरीर के भीतर चल रहे निर्माण और मरम्मत के लिए प्रोटीन अनिवार्य है । उसकी कमी होने पर न सिर्फ हमारी पेशियाँ सूख जाती हैं, कोशिकाओं की मरम्मत भी रुक जाती है, शरीर की रोग बचाव प्रणाली काम करने लायक नहीं रहती और एक समय के बाद शरीर में पानी भर जाता है । पर यह स्थिति अब कम लोगों में ही देखने में आती है । डायबिटीज में तो और भी कम ! हमारे आहार में 10-20 प्रतिशत अंश प्रोटीन हो तो यह काफी है । यह जरूरत हम दाल, सोयाबीन, अनाज, मूंगफली, दूध, पर्न मछली, मुर्गे और अंडे खाकर पूरी कर सकते हैं । सप्रेटा दूध, पनीर और वनस्पतियाँ, मांस, मुर्गे और अंडे से बेहतर हैं, चूँकि इनमे वसा का अंश कम है । और हाँ, कोई डाइट-गुरु वजन घटाने के लिए उच्च प्रोटीन और कम कार्बोहाइड्रेट वाले आहार की सलाह दे तो बिल्कुल न मानिएगा । यह उच्च प्रोटीन आहार गुर्दो की सेहत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है । डायबिटीज का भोजन से ईलाज करने में ध्यान रहे की कहीं डायबिटिक नेफरोपैथी शुरू हो चुकी हो, तब तो प्रोटीन का राशन वैसे ही आधा कर देना होता है ।

डायबिटीज में वसा

हमेशा से बदनाम रही वसा भी हमारे बहुत काम की चीज है । यह हमें ऊर्जा तो देती ही है, उसी की बदौलत हम भोजन से विटामिन-ए, विटामिन-डी, विटामिन-ई और विटामिन-के जज्ब कर पाते हैं, ठंड से बच पाते हैं, चुनिंदा हॉर्मोन बना पाते हैं और अपनी तंत्रिकाओं के लिए इंसुलेशन जुटा पाते हैं । फिर उसके बिना भोजन का स्वाद कहाँ ! भोजन की थाली में घी, मक्खन, तेल पर बिल्कुल प्रतिबंध लग जाए तो कितनी ही चीजें खुद ही बाहर हो जाएँगी ।

लेकिन डायबिटीज का भोजन से ईलाज करते वक्त यह ध्यान देना भी जरुरी है की वसा के साथ कई परेशानियाँ भी हैं । यह बढ़ जाती है तो शरीर फैल जाता है और अपने साथ तरह-तरह के रोग ले के आता है । दूसरा, हमारा शरीर यूँ भी भोजन में मिली अतिरिक्त कैलोरी को अपने से ही वसा में बदल लेता है । यह ऐसा अवसर ही नहीं देता कि हमारे भीतर कभी वसा की कमी हो | फिर भी डायबिटीज का भोजन से ईलाज अर्थात संतुलित आहार में 20-30 प्रतिशत अंश वसा का होना चाहिए । इसमें से दो-तिहाई असंतृप्त वसा (अनसेचुरेटेड फैट) हो और एक-तिहाई ही संतृप्त वसा (सेचुरेटेड फैट) हो, तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए उत्तम है । असंतृप्त वसा में भी एकल असंतृप्त वसा (मोनोअनसेचुरेटेड फैट), बहु असंतृप्त वसा (पॉलीअनसेचुरेटेड फैट) से बेहतर है । एकल असंतृप्त वसा लेने से हमारे खून में कुल कोलेस्टेरॉल और एल.डी.एल. कोलेस्टेरॉल घटता है । बहु असंतृप्त वसा में भी मछली से मिलनेवाले औमेगा-3 फैटी एसिड में यह बड़ी खूबी है कि यह खून में ट्राइग्लिसराइड कम करता है।  गोश्त, सॉसेज, सुअर की चर्बी, अंडे का पीला हिस्सा, मुर्गा, घी, चीज़, मक्खन और नारियल का तेल संतृप्त वसा के धनी हैं, जबकि बादाम, सरसों का तेल और मूंगफली का तेल एकल असंतृप्त वसा के और करडी व सूरजमुखी का तेल बहु असंतृप्त वसा के उपयोगी स्रोत हैं । संतृप्त वसा के प्रति सावधान रहना जरूरी है, लेकिन ट्रांस-असंतृप्त फैटी एसिड युक्त हाइड्रोजेनेटिड वनस्पति घी से तो तौबा बोलने में ही भलाई है । यह एल.डी.एल. कोलेस्टेरॉल को इस प्रकार बढ़ाता है जैसे कि आसमान में तेजी से चढ़ती पतंग ! डायबिटीज का भोजन से ईलाज तभी संभव है जब निम्न बातों का ध्यान रखा जाय |

  • गोश्त, सॉसेज, सुअर की चर्बी, अंडे का पीला हिस्सा, मुर्गा, घी, चीज़, मक्खन और नारियल
  • का तेल लें तो बिल्कुल सीमित मात्रा में लें ।
  • चीजों को तलने के बजाय स्टीम, बेक या ग्रील कर लें ।
  • दूध पीएँ या पनीर खाएँ तो स्प्रेटा दूध का ।
  • दाल-सब्जी में ऊपर से घी डालना आज से ही बंद कर दें ।
  • शरीर पर जमा अतिरिक्त चर्बी से छुटकारा पाने के लिए कहीं तो कटौती करनी ही होगी इसके लिए व्यायाम किया जा सकता है !

डायबिटीज का भोजन से ईलाज करने के लिए कुछ मूल मंत्र

  • डायबिटीज का भोजन से ईलाज करने के लिए एवं अपने स्वास्थ्य की खातिर भोजन के संबंध में कुछ छोटी-छोटी सावधानियाँ भी अवश्य अमल में लानी चाहिए |
  • भोजन हमेशा समय से करें एक समय बाँध लें और रोजाना उसी समय पर भोजन करें ।
  • हर दिन एक जितना ही खाएँ । यह नहीं कि एक दिन इतना कि अति हो जाए, और अगले दिन बिल्कुल ही फाका कर जाएँ ।
  • एक समय में हमेशा थोड़ा ही खाएँ । चार-पाँच घंटे के अंतर से थोड़ा-थोड़ा खाना एकसाथ बहुत खाने के मुकाबले हमेशा बेहतर होता है । जब कभी आप अपने साथ अति करते हैं, तब-तब आपकी ब्लड शुगर बहुत बढ़ जाती है ।
  • डायबिटीज का भोजन से ईलाज करने के लिए भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा की मात्रा ठीक अनुपात में ही लें ।

उपर्युक्त सावधानियाँ बरतने से ब्लड शुगर नपी-तुली रहेगी, अधिक बढ़ेगी-घटेगी नहीं ।

डायबिटीज का भोजन से ईलाज में मीठे के विकल्प:

डायबिटीज का भोजन से ईलाज करने के लिए आप चाहें तो चीनी, गुड़ और शक्कर के स्थान पर मिठास पैदा करने वाले ऐसे स्वीटनिंग ऐजेंट भी प्रयोग में ला सकते हैं । जिनमें चीनी जैसी मिठास तो होती है पर कैलोरी बिल्कुल न के बराबर होती हैं ।

सैकरीन (स्वीटेक्स):

सैकरीन सबसे पुरानी स्वीटनिंग ऐजेंट है । यह बाजार में स्वीटेक्स के नाम से उपलब्ध है और कई दशकों से प्रयोग में है । यद्यपि इसकी विश्वसनीयता पर मीडिया में बार-बार सवाल उठते रहे हैं । और एक समय पर इसके कैंसरकारी होने की भी चर्चा रही है, लेकिन यह शक सरासर गलत है । सच तो यह है कि अमेरिका की फंड एंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन जो दवाओं की सुरक्षा के प्रति बहुत जागरूक है ने भी इसे हरी झंडी दी हुई है । सैकरीन में एक कमी जरूर है कि इसे प्रयोग करने के बाद मुँह का स्वाद पल-भर के लिए कसैला हो जाता है ।

एस्परटेम (शुगर-फ्री, इक्वल):

रासायनिक संरचना की दृष्टि से एस्परटेम सैकरीन से बिल्कुल भिन्न है । यह दो अमीनो-एसिड्स–एस्पार्टिक एसिड और फिनाइलएलानीन के मिलन से तैयार किया गया है । इसकी मिठास चीनी से 200 गुना अधिक है, फिर भी इसमें कैलोरी बिल्कुल न के बराबर होती हैं ।  एस्परटेम मुँह में कसैलापन नहीं छोड़ता । यह स्वास्थ्य की दृष्टि से बिल्कुल हानिरहित है । पर इसकी कीमत सैकरीन से काफी ज्यादा है । एस्परटेम बाजार में ‘शुगर-फ्री’ और ‘इक्वल’ के नाम से मिलता है ।

 डायबिटीज का भोजन से ईलाज के लिए खूब खाएँ रेशेदार चीजें:

डायबिटीज का भोजन से ईलाज की बात करें तो प्राकृतिक रेशेदार चीजें हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी हैं । उन्हें भोजन में लेने से डायबिटीज में विशेष लाभ होता है । कार्बोहाइड्रेट्स से ग्लूकोज़ के बनने और खून में जज्ब होने की रफ्तार धीमी हो जाती है, और भोजन के बाद ब्लड शुगर एकाएक नहीं बढ़ती । प्राकृतिक रेशे लेने के दूसरे भी कई लाभ हैं । आँतों में पहुँचने पर प्राकृतिक रेशे पानी जज्ब कर लेते हैं और फूल जाते हैं । इससे आदमी कब्ज से बचा रहता है । बड़ी आँत का कैंसर होने की आशंका भी कम हो जाती है । साधारण भारतीय भोजन में प्राकृतिक रेशेयुक्त चीजें काफी मात्रा में होती हैं । अनाज, दालें, पत्तेदार सब्जियाँ और फल इस दृष्टि से बहुत उपयोगी हैं । पर आधुनिक जंक फूड इसकी भरपाई नहीं कर पाता है । डायबिटीज का भोजन से ईलाज करने के मद्देनज़र यहाँ कुछ ऐसी चीजों की सूची प्रस्तुत है जिनमें रेशे अच्छी मात्रा में होते हैं ।

 

 

रेशे की मात्रा सब्जियां फल अन्य
ये वे पदार्थ हैं जिनमें प्रति 100 ग्राम में 10 ग्राम रेशा पाया जाता है और ये प्रचुर मात्रा की श्रेणी में आते हैंमटर, लाल लोबिया, सूखे बेरखुबानी, अंजीरइसबगोल का छिलका,कॉर्नफ्लेक्स यीस्ट, चोकर, बादाम
ये वे पदार्थ हैं जिनमे प्रति 100 ग्राम में 6 से 10 ग्राम रेशा पाया जाता है |पालक, सेम, सरसों का सागकाला अंगूर, काली बेरी, रसभरी, खजूर, किशमिश 

चोकरवाला आटा, जई का दलिया, मूंगफली, चेस्टनट्स

ये वे पदार्थ हैं जिनमे प्रति 100 ग्राम में 2 से 5 ग्राम रेशा पाया जाता है |गाज़र, चुकंदर, फ़्रांसबीन, पत्ता गोभी, शलजम, मक्का, अंकुरित सब्जियां, मशरूम, मसूरसेब, केला, करोंदा, नाशपती, अलूचा, झरबेरी, आलूबुखारा, स्ट्रॉबेरीमैदा, डबलरोटी, अखरोट, सेवई
ये वे पदार्थ हैं जिनमे प्रति 100 ग्राम में 2  ग्राम से कम रेशा पाया जाता है |फूलगोभी, खीरा, सलाद , प्याज, मिर्च , शतावरी का साग, अजवाईनअंगूर, आम, लीची, अनन्नास, संतरा, तरबूज, चेरी, आडू

डायबिटीज का भोजन से ईलाज में करेले, जामुन और मेथी के गुण

डायबिटीज का भोजन से ईलाज की बात आती है तो इसमें करेले की चर्चा छूट जाए, यह भला कैसे हो सकता है | क्योंकि बहुत सारे स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रभावशाली व्यक्ति भी सुबह-शाम तो करेले का भोग लगाते ही हैं, साथ में नाश्ते की शुरुआत भी करेले के रस से करते हैं | यह सच  है कि इस विषय पर कई वैज्ञानिकों ने शोध किया है । कुछ ने करेले में ‘वनस्पति इंसुलिन’ होने का मत भी प्रस्तुत किया है, किंतु उनमें से कोई भी करेले की उपयोगिता का स्पष्ट प्रमाण नहीं जुटा सका है । वनस्पति इंसुलिन की बात में दम नहीं दिखता क्योंकि यदि करेले में इंसुलिन है भी तो आँतों के पाचक एन्जाइम उसे किसी काम का न छोड़ेंगे (इसी कारण इंसुलिन के टीके लेने पड़ते हैं, उसकी गोलियाँ कैप्सूल नहीं बन पाए)। हाँ, यह हो सकता है कि करेले में कोई शुगर घटाने वाला तत्व हो जिसके बारे में हम अभी तक न जान सके हैं । बहरहाल, सभी वनस्पतियों में यह उपयोगी गुण तो होता ही है कि खाने से ब्लड शुगर अकस्मात् नहीं बढ़ती । लेकिन जब भी डायबिटीज का भोजन से ईलाज का जिक्र आता है तो जामुन का नाम भी जुबान पर स्वत आने लगता है क्योंकि जामुन में डायबिटीज-रोधक गुण होने की कुछ बायोकेमिस्ट ने भी पुष्टि की है । पिछले ही दिनों उन्होंने जामुन में से एक सक्रिय तत्व निकालकर चूहों में उसकी ब्लड शुगर घटाने की क्षमता के साक्ष्य दिए और इस पर पेटेंट भी हासिल किया है । पर यह मनुष्य के लिए कितना उपयोगी है इसका गणित अभी अस्पष्ट है । यानी जामुन खाने में हर्ज नहीं है, लेकिन उसके चक्कर में दवा छोड़ना गलत है । इसी प्रकार डायबिटीज का भोजन से ईलाज करने की दिशा में मेथी की उपयोगिता पर भी कई अध्ययन हुए हैं । मेथी के बीजों से ट्राइगोनेललीन नामक गुणकारी ऐल्केलॉइड भी अलग किया गया है जो रक्त ग्लूकोज़ को कम करने में सहायक है । यह गुण मेथी की पत्तियों में नदारद है । इन वनस्पतियों से कितना लाभ पहुँचता है, यह न स्पष्ट होने पर भी इन्हें आजमाने में कोई हर्ज नहीं है, और आप चाहें तो आप भी प्रयोग कर देखें, पर इनके प्रति इतने उत्साहित भी न हों कि दवा ही छोड़ दें ।

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