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डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्याएं

डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्याएं एवं उनका ईलाज

डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्याओं की बात करें डायबिटीज से ग्रस्त महिलाओं में तरह तरह की यौन समस्याओं का उद्गम होने लगता है | यद्यपि सहज और सुगम शारीरिक मिलन के लिए महिलाओं की योनि-मार्ग का स्वस्थ और पर्याप्त मात्रा में नम रहना बेहद जरूरी होता  है । लेकिन डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्याओं में सबसे पहली समस्या यह है, की  डायबिटीज होने पर भग की संवेदनशीलता एवं योनि मार्ग का रक्त प्रवाह धीरे धीरे शिथिल होने लगता है | इससे यौन अनुभूति मंद होती जाती है और यौन रुचि भी मरती जाती है यही कारण है की ऐसी महिलाओं के योनि मार्ग में भी नमी पहले जैसी नहीं रहती है | तो आइये जानते हैं की यदि योनि मार्ग में नमी न रहे तो इस यौन समस्या से कोई महिला कैसे निपट सकती है |

डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्याएं

डायबिटीज में महिलाओं की योनि मार्ग शुष्क होने पर क्या करें

हालांकि डायबिटीज से ग्रसित महिला में इस तरह की यौन समस्या अर्थात योनि मार्ग का शुष्क होना न हो इसके लिए डायबिटीज पर जितना कुशल नियंत्रण रहे, उतना ही अच्छा होता है । ब्लड शुगर काबू में रहने से महिला की धमनियां एवं तंत्रिकाएं स्वस्थ  रहती हैं । लेकिन परेशानी शुरू हो जाए तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित होता है । योनि-मार्ग के शुष्क होने की समस्या से अस्थायी रूप से निपटने के लिए दैहिक मिलन के समय योनि में के-वाई जैली जैसी जैली लगाने से सहवास-क्रिया सहज और सुगम एवं आनंदमयी बनायी जा सकती है ।

डायबिटीज में योनि संक्रमण:

डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्याओं में दूसरी यौन समस्या योनि में संक्रमण होना है कहने का आशय यह है की डायबिटीज से ग्रस्त महिलाओं की योनि कई प्रकार के संक्रमणों से भी घिर सकती है । इससे तरह-तरह की परेशानियाँ शुरू हो जाती हैं । यद्यपि योनि संक्रमण कई प्रकार के हो सकते हैं ।

डायबिटीज में कैंडीडीयासिस (Candidiasis in Diabetes):

डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्याओं में कैंडीडीयासिस  नामक यह भी एक समस्या है | क्योंकि  डायबिटीज के होते कैंडिडा योनि में कभी भी डेरा डाल सकता है । यह एक फफूंद है जिसके होने से योनि में खुजलाहट होती है, जगह-जगह दही-जैसी सफेद पपड़ी जम जाती है और रति-क्रीड़ा यानिकी सहवास में भी तकलीफ होती है । हालांकि डायबिटीज में केडिडा का संक्रमण एक आम समस्या है, लेकिन यदि यह संक्रमण बार-बार हो तो समझ लें कि सम्बंधित महिला का ब्लड शुगर नियंत्रण में नहीं है ।

डायबिटीज में योनि संक्रमण का ईलाज:

डायबिटीज में योनि संक्रमण से छुटकारा पाने के लिए महिला को किसी स्त्री-रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए । चिकित्सक की सलाह एवं निर्देशानुसार स्थानीय रोगाणु-रोधक क्रीम या पेसरी (जैसे माइकोस्टेटिन, निस्टेटिन) का पूरा कोर्स किया जा सकता है । यह ईलाज यानिकी उपचार पुरुष-साथी के लिए भी बेहद जरूरी होता है, अन्यथा यह रोग दुबारा भी हो सकता है । बार-बार संक्रमण हो तो डायबिटोलॉजिस्ट से भी जरूर सलाह ले लेनी चाहिए । और इसका यह मतलब लगना चाहिए कि डायबिटीज-रोधी दवाओं में सुधार की जरूरत है ।

डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्या यू.टी.आई.

डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्याओं में यू.टी.आई भी एक समस्या है कहने का आशय यह है की योनि संक्रमण के समान डायबिटीज होने पर स्त्रियों में मूत्रीय तंत्र के संक्रमण (urinary tract infection) की दर भी कई गुना बढ़ जाती है । यौन-सक्रियता की उम्र में इसकी संभावना सबसे अधिक होती है । यह संक्रमण प्राय: सहवास यानिकी रति क्रीड़ा के समय लगता है । योनि-छिद्र से बैक्टीरिया मूत्र-छिद्र और फिर मूत्र-नली से ऊपर मूत्राशय में पहुँच जाते हैं । समय से दवा शुरू न हो तो संक्रमण के गुर्दों अर्थात किडनी में पहुँचते भी देर नहीं लगती है । संक्रमण होने पर मूत्र त्याग करते समय जलन होती है, कॅपकॅपी देकर बुखार आ सकता है और पुट्ठों में दर्द भी उठ सकता है । मूत्र की जाँच से संक्रमण की आसानी से पुष्टि हो सकती है ।

Urinary tract infection से बचने के लिए क्या करें

चूँकि डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्याओं में यह भी एक आम समस्या है और इससे बचने के लिए कुछ सावधानियों को अपनाना बेहद जरुरी होता है जिनका वर्णन इस प्रकार से है |

  • संक्रमण से बचने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें ।
  • सूती अंडरवियर पहनें और उसे रोज बदलें ।
  • कुछ छोटी-छोटी सावधानियाँ अमल में लाने से भी बचाव हो सकता है ।
  • जैसे, रति-क्रीड़ा के बाद शीघ्र ही बाथरूम हो आने से यदि बैक्टीरिया मूत्राशय में पहुँचे भी होते हैं तो मूत्र के साथ धुल जाते हैं और भीतर पैठ नहीं लगा पाते ।
  • इसी प्रकार यह सावधानी भी बरतें कि जैसे ही लघुशंका की इच्छा उठे, बाथरूम जाने में देर न करें। ।
  • संक्रमण के प्रथम लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से सलाह लें ।
  • मूत्र का नमूना जाँच के लिए देते ही ऐंटिबायोटिक दवा शुरू कर दें ।
  • उसे पूरी मात्रा में पूरे समय तक लें । उसे बीच में भूलकर भी बंद न करें ।
  • यह दवा आमतौर पर कम से कम दो-तीन हफ्ते तक चलती है । इसके साथ खूब मात्रा में पानी पीना भी फायदा करता है ।

उपर्युक्त वाक्यों में हम डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्याओं के बारे में बात कर चुके हैं | लेकिन अब सवाल यह उठता है की यदि डायबिटीज से ग्रसित महिला की इच्छा गर्भ धारण करने की हुई तो क्या वह गर्भधारण कर सकती है | यह साबित हो चूका है की यदि गर्भधारण से पहले ब्लड शुगर नियंत्रित रहे और गर्भधारण के बाद भी उस पर नियंत्रण बना रहे तो बच्चे पर इसके कोई प्रतिकूल असर नहीं होते हैं | लेकिन डायबिटीज में महिलाओं की यौन समस्याओं में बहुत साड़ी यौन समस्याएं ऐसी भी होती हैं जिनसे महिलायें अंजन रहती है इसलिए जब भी गर्भधारण का मन हो तो डॉक्टर से बात अवश्य करनी चाहिए ताकि वे आपकी आवश्यक जांच करके यह निर्णय ले पाने में सक्षम हो सकें |

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