डायबिटीज से जुड़े सवाल एवं उनके जवाब शंकाएँ,जिज्ञासाएं समाधान.

डायबिटीज से जुड़े सवाल जवाब पर बात करना इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि स्वयं अपने को या परिवार में किसी मित्र-बंधु को यदि डायबिटीज हो जाए तो मन में स्वतः ही तरह-तरह के सवाल उठ खड़े होते हैं । जैसे लंबे समय तक चलने वाले हर रोग के साथ समय की धारा में अनेकानेक अंधविश्वास और गलतफहमियाँ जुड़ जाते हैं वैसे ही डायबिटीज के साथ भी होता  है । डायबिटीज के ईलाज के बारे में न जाने कितने दावे हैं कोई किसी चीज को सार्थक बताता है कोई किसी जड़ी-बूटी को घर पर बेटे-बेटी में से किसी को रोग हो जाए तो जैसे हड़कंप ही आ जाता है । कुछ लोग रोग का पता चलते ही निराशावादी हो जाते हैं, सोचने लगते हैं कि डायबिटीज हो गई तो अब भला क्या हो सकता है । जबकि ठीक से इलाज लेने से और जीवन-शैली में स्वस्थ परिवर्तन लाकर डायबिटीज के साथ बहुत कुछ सामान्य जैसा जीवन जिया जा सकता है । यहाँ डायबिटीज से जुड़े सवाल जवाब आम शंकाओं, जिज्ञासाओं तथा गलतफहमियों के जवाब एवं खुले समाधान प्रस्तुत किये जा रहे हैं ।

डायबिटीज से जुड़े सवाल जवाब

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में पहला सवाल यह है की डायबिटीज में ब्लड शुगर पर नियंत्रण रखना क्यों जरूरी है ।

जवाब : कई अध्ययनों से इस तथ्य की पुष्टि हुई है कि डायबिटीज में ब्लड शुगर जितनी संतुलित रहे, रोगी के लिए उतना ही स्वास्थ्यकारी होता है । इससे डायबिटीज से उत्पन्न होने वाली तमाम जटिलताएँ, जैसे आँख के पर्दे, गुर्दो, धमनियों और तंत्रिकाओं में होनेवाले दुष्परिवर्तनों में महत्त्वपूर्ण कमी आती है । जिन लोगों में ब्लड शुगर संतुलित बनी रहती है उनमें इन जटिलताओं की दर 25 प्रतिशत कम पायी गई है । यह बहुत बड़ी बात है, चूंकि डायबिटीज के साथ सबसे बड़ी परेशानी उसके द्वारा उत्पन्न होने वाले ये दुष्परिवर्तन ही हैं । धमनियों के रुग्ण न होने से हृदय और रक्त संचार प्रणाली के स्वास्थ्य पर भी आँच नहीं आती और रक्तचाप भी नहीं बढ़ता ।

सवाल : क्या डायबिटीज में विटामिन और दूसरे पौष्टिक तत्त्वों से युक्त शक्तिवर्धक कैप्सूल लेने से कोई लाभ पहुँचता है ?

जवाब : हालाँकि समय-समय पर पोटेशियम, मैग्नेशियम, जिंक, क्रोमियम और वेनेडियम तथा डायबिटीज के बीच संबंध स्थापित करने के प्रयत्न हुए हैं किंतु अब तक कोई ऐसा स्पष्ट सबूत नहीं मिला है । जिससे इन तत्वों की उपयोगिता की पुष्टि हो सके । बीते कुछ वर्षों से डायबिटीज की उपज में फ्री-रेडिकल्स के हाथ होने के सिद्धांत ने भी जोर पकड़ा है । लेकिन ऐंटिऑक्सीडेंट देने से न तो रोग पर रोक लगा पाने में ही कामयाबी मिली है और न ही डायबिटीज को काबू कर पाने में कोई अतिरिक्त सफलता मिल पाई है । पर फिर भी ऐंटिऑक्सीडेंट-युक्त प्राकृतिक आहार जिसमें फल, सब्जी, सलाद अच्छी मात्रा में हों, लेने में कत्तई कोई हर्ज नहीं है । कोई व्यक्ति संतुलित संपूर्ण आहार लेता रहे तो उसे फिर किसी विटामिन या मिनरल युक्त कैप्सूल लेने की जरूरत नहीं होती ।

सवाल: डायबिटीज से जुड़े सवाल में तीसरा सवाल शराब से समबन्धित है कुछ लोगों का कहना है की उनके सुनने में आया है कि रोज थोड़ी मात्रा में मदिरा लेना हृदय के लिए अच्छा है । क्या डायबिटीज के होते हुए भी मदिरा ली जा सकती है ?

जवाब: डायबिटीज में मदिरा को लेकर अलग से कोई विशेष नियम नहीं है । तय है कि अगर अग्न्याशय में सूजन हो, ट्राइग्लिसराइड की मात्रा बढ़ी हुई हो या तंत्रिकाओं में न्यूरोपैथी के परिवर्तन आ चुके हों तो मदिरा से परहेज करना जरूरी होगा । लेकिन यदि अन्य सभी प्रकार से स्वास्थ्य अच्छा हो, तो रोज 15 ग्राम अल्कॉहल लिया जा सकता है । मायने यह कि या तो 12

आउंस बीयर या 5 आउंस वाइन या 2 आउंस व्हिस्की या इतनी ही रम लेने में कोई नुकसान नहीं । पर यह सावधानी जरूर बरतें कि मदिरा के साथ भोजन अवश्य लें । अकेली मदिरा लेने से ब्लड शुगर अचानक घट सकती है । इस बात का भी हमेशा ध्यान रखें कि मदिरा को लेकर कभी अति न हो जाए । ऐसे लोग जो बहुत पीने लगते हैं उनके शरीर पर इसका बुरा असर पड़ता है । यकृत और अग्न्याशय में सूजन आ सकती है, रक्तचाप बढ़ सकता है तथा दिल-धमनियों और मस्तिष्क पर भी दुष्प्रभाव नजर आते हैं ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में चौथा सवाल पारिवारिक है, अक्सर एक ही परिवार में कई लोग एक साथ डायबिटिक होते हैं । ऐसा क्यों ? क्या डायबिटीज छुतहा रोग है ? ।

जवाब : नहीं, डायबिटीज संक्रामक या छुतहा रोग कत्तई नहीं है । किसी डायबिटिक व्यक्ति के संपर्क में आने या उसके साथ रहने से यह रोग नहीं होता । किसी बच्चे को डायबिटीज हो तो उसके साथ खेलने-कूदने से डायबिटीज नहीं होती । किसी परिवार में एक से अधिक जनों को डायबिटीज होने के मायने सिर्फ ये हैं कि रोग वंशानुगत रूप से भी हो सकता है । माँ या पिता या उनके परिवार में डायबिटीज हो, तो बच्चों में भी रोग के गुणसूत्र आ सकते हैं । भाइयों और बहनों में एक साथ रोग होने के पीछे भी यही जेनेटिक कारण दोषी होता है ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में पांचवा सवाल शादी से समबन्धित है | एक माँ बाप का कहना है की उनकी 19 वर्षीया बेटी डायबिटिक है । क्या उसका विवाह करना उचित होगा ? क्या वह अपनी गृहस्थी ठीक से चला सकेगी ?

जवाब : हाँ, क्यों नहीं ! पर इतना जरूर करें कि रिश्ता तय करने से पहले ही वर-पक्ष को बिटिया की डायबिटीज के बारे में जरूर बता दें । यह बात छुपाने से बाद में परेशानी आ सकती है । विवाह के बाद भी इंसुलिन के टीके और खानपान में परहेज छोड़े नहीं जा सकते । लड़के वालों को पहले से विश्वास में लेने से वर तलाशने में कठिनाई तो होगी, पर कम से कम बाद में आरोपों और तनाव से बचे रहेंगे । सच कहूँ तो जरूरी यह है कि बिटिया के विवाह से अधिक उसे अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रेरित करें । अनेक ऐसे युवा लोग हैं । जिन्होंने डायबिटीज होने पर भी अपने चुने हुए क्षेत्र में सबको पीछे छोड़ दिया और जीवन से कोई गिला-शिकवा नहीं रखा, बल्कि उसे उत्सव के समान जिया है ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में यह सवाल फैमिली प्लानिंग से जुड़ा हुआ है | रजनी का कहना है की मैं एक युवती हूँ और मुझे डायबिटीज है । क्या मैं गर्भ-निरोधक गोलियाँ ले सकती हैं ?

जवाब : हाँ, आप चाहें तो ले सकती हैं, लेकिन आपके लिए गर्भ-निरोध की कोई दूसरी विधि जैसे कंडोम, डायफ्राम या योनि में रखी जानेवाली गर्भ-निरोधक गोली प्रयोग करना बेहतर होगा । यह सच है कि गर्भनिरोधक गोलियों के अपने लाभ हैं, लेकिन सीमा यह है कि उनमें उपस्थित हार्मोन ब्लड शुगर और रक्त-संचार प्रणाली पर अप्रिय प्रभाव डाल सकते हैं । डॉक्टर से बात करके आप ऐसी कोई गर्भ-निरोधक गोलियाँ भी चुन सकती हैं जिनमें इस्टरोजेन और प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन सीमित मात्रा में होते हैं ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में यह सवाल मातृत्व सुख से जुड़ा सवाल है | इसमें एक महिला ने पूछा है क्या डायबिटीज के होते हुए माँ बना जा सकता है ?

जवाब : हाँ, क्यों नहीं ! पर गर्भधारण के पहले से ही इसके लिए तैयारी शुरू कर देना अच्छा होता है । इस बाबत संतान-बीज धारण करने से पहले डॉक्टर से भी बात कर लेनी चाहिए । हो सकता है वह आपकी दवा में कुछ फेरबदल करे । इन दिनों ब्लड शुगर पर जितना अच्छा नियंत्रण रहे, उतना ही अच्छा है । इससे स्वस्थ संतान होने की संभावना प्रबल हो जाती है । कोख में गर्भ के आने के बाद पहले 8-10 हफ्तों में ही बच्चे के अंग-अवयव शक्ल ले लेते हैं । अतः गर्भावस्था के शुरू के हफ्तों में ब्लड शुगर पर योग्य नियंत्रण रखने से शिशु में जन्मजात विकृतियों की दर बहुत सीमा तक कम की जा सकती है । गर्भावस्था के दौरान भी समय-समय पर डॉक्टर के पास जाते रहना जरूरी होता है । कुछ स्थितियों में बच्चे को जन्म देने के लिए डॉक्टर को सीजेरियन ऑपरेशन करने की जरूरत पड़ती है । इस विषय में पहले से ही पूरी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए और निर्णय लेने में देर नहीं करनी चाहिए चूंकि उस पल एक-एक क्षण बच्चे के जीवन की दृष्टि से बेशकीमती होता है ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में एक महिला ने पूछा है मुझे डायबिटीज है । क्या मेरा बच्चा भी डायबिटिक होगा ?

जवाब : सामान्य माँओं के बच्चों की तुलना में डायबिटिक माँओं के बच्चों में डायबिटीज होने की संभावना थोड़ी ही ज्यादा होती है । अतः इस आशंका में डूबे रहने में कोई सार्थकता नहीं ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में यह सवाल इंसुलिन से जुड़ा है | रोहित ने कहा है मेरे डॉक्टर ने मुझे इंसुलिन लेने की सलाह दी है । पर मैं इस चक्कर में नहीं पड़ना चाहता । क्या डायबिटीज-रोधी गोलियों में रद्दोबदल करके काम नहीं चल सकता ?

जवाब : हर डायबिटिक की दवा की जरूरत अलग-अलग होती है । यह जरूरत समय के साथ बदलती भी रह सकती है । यह भी होता है । कि एक समय तक एक दवा काम करती रहे और कुछ सालों बाद काम करना बंद कर दे । डायबिटीज-रोधी गोलियों के साथ यह एक आम समस्या है । ऐसे में ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए इंसुलिन लेना जरूरी हो जाता है ।  कई बार किसी कठिन घड़ी से पार पाने के लिए भी कुछ समय के लिए इंसुलिन लेनी पड़ सकती है । ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर चलना ही ठीक रहता है । यदि ब्लड शुगर बहुत समय तक बिगड़ी रहे, तो उसका शरीर पर बुरा प्रभाव जरूर पड़ता है । इसलिए इंसुलिन के प्रति पूर्वग्रह रखे बिना उसका लाभ उठाने में ही भलाई है । डायबिटीज-रोधी गोलियों से स्थिति सँभल सकती, तो आपको इंसुलिन लेने की सलाह डॉक्टर नहीं देता ।

सवाल : फिर तो इंसलिन भी कछ समय बाद असर करना बंद कर सकती है । क्या इंसुलिन के प्रति भी शरीर आदी नहीं हो जाता ? इंसुलिन के काम न करने पर क्या करते हैं ?

जवाब : यह सवाल इंसुलिन के साथ बेमायने है । इंसुलिन तो एक कुदरती हॉर्मोन है । उसका काम ही शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा को नियंत्रण में रखना है । सामान्य व्यक्ति में जब-जब इसकी जरूरत पड़ती है, अग्न्याशय इसे पूरी कर देता है । पर डायबिटीज में ऐसा नहीं हो पाता । इसीलिए बाहर से इंसुलिन देकर यह जरूरत पूरी की जाती है ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में यह सवाल आदित्य ने किया है मैं डायबिटिक हूँ, इंसुलिन के टीके लेता हूँ । जाँघों पर जहाँ टीके लगाता हूँ, वहाँ कई जगह त्वचा ऊबड़-खाबड़ हो गई है, गड्ढे पड़ गए हैं और गाँठे बन गई हैं । इस समस्या का क्या समाधान है ?

जवाब : इस समस्या का समाधान बिल्कुल सरल है रोज टीके की जगह बदलते रहें । एक दिन टीका एक जाँघ पर, दूसरे दिन दूसरी जाँघ पर, तीसरे दिन दाएँ कूल्हे पर, चौथे दिन बाएँ कूल्हे पर, पाँचवें दिन पेट पर, छठे दिन बाँह पर-इसी प्रकार टीके की जगह बराबर बदलते रहेंगे तो यह परेशानी नहीं होगी ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में अगला सवाल ड्राइविंग सम्बन्धी है | रमेश ने कहा है मैं डायबिटिक हूँ और इंसुलिन के टीके लेता हूँ । क्या मैं कार चला सकता हूँ ?

जवाब : हाँ, क्यों नहीं ! बस इतना ध्यान रखें कि इंसुलिन लेने के बाद समय से खा-पी लें और ब्लड शुगर को कम न होने दें । हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति में कार चलाना ठीक नहीं । उससे मानसिक क्षमता पर बुरा असर पड़ता है और आप कोई गलती कर सकते हैं ।

सवाल : यदि मैं बीमार हो जाऊँ और भोजन न कर पाऊँ तो क्या मेरे लिए इंसुलिन लेते रहना ठीक होगा ?

जवाब : कत्तई नहीं ! उस समय ब्लड शुगर का स्तर नापकर ही सही निर्णय लिया जा सकता है । अचानक किसी बीमारी के आने पर या किसी संक्रमण के समय शरीर की इंसुलिन की जरूरत बढ़ जाती है । इसके विपरीत कई घंटों तक कुछ न खाएँ-पीएँ तो ब्लड शुगर भी घट जाती है । दोनों स्थितियों से तालमेल करने का सबसे व्यावहारिक तरीका ब्लड शुगर को ठीक से जाँचकर इंसुलिन की मात्रा तय करना है ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में यह सवाल कामकाज सम्बन्धी है | गणेश ने कहा है मुझे डायबिटीज हो गई है । क्या मैं सामान्य रूप से काम कर सकूँगा ? मुझे अपनी नौकरी बदलनी तो नहीं पड़ेगी ?

जवाब : डायबिटीज होने से कार्यक्षमता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है । रोग के कारण कोई सीमाएँ भी नहीं लगतीं । पर फिर भी ऐसी नौकरी हो जिसमें समय से आना-जाना हो तो बेहतर होता है । जिन नौकरियों में शिफ्ट ड्यूटी होती है, उनमें समय से दवा लेने और खाने-पीने में कठिनाई आ सकती है ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में अगला सवाल नौकरी सम्बन्धी है | नरेंद्र जी ने कहा है  मेरे बेटे को डायबिटीज है । इसके कारण उसे नौकरी मिलने में परेशानी तो नहीं होगी ?

जवाब : यह इस पर निर्भर करेगा कि वह क्या करना चाहता है । अधिकांश सरकारी नौकरियों में डायबिटीज होने पर प्रवेश मुश्किल है । पर प्राइवेट नौकरियों में कंपनी पर है कि वह क्या नीति रखे । फिर आपका बेटा अपना व्यवसाय शुरू करने का भी निर्णय ले सकता है ।

सवाल : मैंने सुना है कि सैकरीन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है । उससे कैंसर हो जाता है । क्या यह सच है ?

जवाब : नहीं, यदि ऐसा होता तो सैकरीन का प्रयोग कभी का बंद हो चुका होता । सैकरीन के ऊपर बीच-बीच में संदेह के बादल मँडराए जरूर हैं, पर उन्हें वैज्ञानिकों से अधिक मीडिया ने शह दी है । सच्चाई यह है कि अमेरिका के फड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने भी सैकरीन को पूरी स्वीकृति दी हुई है । सैकरीन से कैंसर होने की बात यदि जरा भी सच होती तो उस पर प्रतिबंध लग गया होता ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में यह सवाल आयुर्वेदिक ईलाज से समबन्धित है | राकेश ने कहा है मेरे एक परिचित के मुताबिक सदाबहार की जड़े, जामुन की गुठलियाँ, मेथी, करेले और नीम के पत्ते खाने से डायबिटीज जड़ से दूर हो जाती है । क्या यह बात सच है ?

जवाब : जामुन, मेथी, करेले के ऊपर आयुर्वेद में यह विश्वास सैकड़ों साल पुराना है कि ये मधुमेह में उपयोगी हैं । कुछ नवीन परीक्षणों में भी जैव वैज्ञानिकों ने उनमें डायबिटीज-रोधी गुण होने की पुष्टि की है । लेकिन यह गुण ऐसे नहीं हैं कि अकेले उनकी मदद से ब्लड शुगर संतुलित हो जाए । इसलिए वर्तमान जानकारी के आधार पर उन्हें मधुमेह औषध के विकल्प के रूप में देखना उचित न होगा । उनकी उपयोगिता भोजन के बाद ब्लड शुगर को किसी सीमा तक नियमित करने तक सीमित है । इन वनस्पतियों में दूसरे भी बहुत से स्वास्थ्यवर्धक गुण हैं । मेथी के बीज लेने से कोलेस्टेरॉल पर भी अच्छा असर पड़ता है; इसलिए इन वनस्पतियों के सेवन में भलाई ही है । बस, इनके प्रति इतने मोहित न हो जाएँ कि दवा छोड़ दें और रोग की ओर से बिल्कुल लापरवाह हो जाएँ ।

सवाल : डायबिटीज से जुड़े सवाल में यह सवाल भी डायबिटीज के आयुर्वेदिक उपचार से जुड़ा हुआ सवाल है इसमें हेमंत ने लिखा है, विजयसार के बारे में आपकी क्या राय है ?

जवाब : यह गहरी दिलचस्पी का विषय है । विजयसार यानी पेट्रोकार्पस मारसुपियम मध्य प्रदेश में उगनेवाली वनस्पति है । आयुर्वेद उसे मधुमेह में उपयोगी मानता रहा है । उससे बने पात्र में रखा जल और उसका पाउडर नियमपूर्वक ग्रहण करने से ब्लड शुगर पर अनुकूल प्रभाव देखा गया है ।

इन गुणों की पुष्टि करने के लिए वैज्ञानिक शोध भी किए जा रहे हैं । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में चल रहे शोध के क्या परिणाम आते हैं यह आनेवाले दिनों में साफ हो जाएगा, लेकिन इतना तो स्पष्ट है ही कि इस प्रकार की औषधियों की आजमाइश करने के चक्कर में मूल दवाएँ बंद कर देना और रोग को बढ़ा लेना ठीक नहीं होता है ।

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