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डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कोपी

डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कोपी क्या है और कैसे की जाती है.

डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कोपी क्या है ?

डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कोपी एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा डॉक्टर इनफर्टिलिटी बार-बार गर्भपात व गर्भाशय में असामान्य रक्तस्राव का निदान व अध्ययन करते हैं | इसके द्वारा गर्भाशय के अंदर की जांच की जाती है, जिसके द्वारा गर्भाशय की असामान्यताओं जैसे- internal fibroids, septum, scarring, polyps congenital malformations का निदान किया जाता है । इस प्रक्रिया से पहले अथवा बाद में एन्डोमेट्रियल बायोप्सी व हिस्ट्रोसैल्पिन्जोग्राफी की जा सकती है ।

डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कोपी

डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कापी कैसे की जाती है?

डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कापी के लिये सबसे पहले गर्भाशय के मुख अथवा सर्विक्स को series of dilatators के द्वारा थोडा खींचा जाता है । जब सर्विक्स फैल जाती है, तब हिस्ट्रोस्कोप को सर्विक्स से गर्भाशय में डाला जाता है । यह हिस्ट्रोस्कोप लैप्रोस्कोप के समान ही होता है, परन्तु उससे कुछ छोटा होता है । हिस्ट्रोस्कोप के द्वारा गर्भाशय में कार्बन डाइऑक्साइड गैस अथवा special clear solution डाला जाता है । यह गैस अथवा सोल्यूशन गर्भाशय को फैला देता है, म्यूकस व रक्त को साफ कर देता है, जिससे डॉक्टर गर्भाशय के अंदर की संरचना को आसानी से देख सकते हैं । डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कापी की प्रक्रिया जनरल अथवा लोकल दोनों प्रकार के एनेस्थीसिया द्वारा की जा सकती है । यह मासिक होने के तुरंत बाद की जाती है, जिससे गर्भाशय की कैविटी को भलीभांति देखा जा सकता है व गर्भावस्था में व्यवधान का भी डर नहीं रहता है । इस प्रक्रिया में 20 से 30 मिनट का समय लगता है ।

ऑपरेटिव हिस्ट्रोस्कोपी क्या है  :

ऑपरेटिव हिस्ट्रोस्कोपी द्वारा डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कोपी के दौरान पायी गयी कई असामान्यताओं का उपचार किया जा सकता है । यह उपचार डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कोपी के साथ भी किया जाता है व बाद में भी किया जा सकता है । यह प्रक्रिया भी डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कोपी की ही भांति होती है, परन्तु इसमें हिस्ट्रोस्कोप के साथ-साथ कुछ उपकरणों जैसेscissors, biopsy forceps, electrosurgical, laser instruments व graspers का भी प्रयोग किया जाता है । इसके द्वारा गर्भाशय में से fibroids, scar tissue, polyps आदि को दूर किया जा सकता है । गर्भाशय की कैविटी की इस सर्जरी के बाद, उसमें Foley catheter अथवा intrauterine device (IUD) डाला जाता है, जिससे गर्भाशय की दीवारें आपस में रगड़ न पायें व घाव आदि न हो । इस प्रक्रिया के बाद इन्फेक्शन से बचने के लिये व गर्भाशय की परत की हीलिंग के लिये एन्टीबॉयटिक व हॉरमोन की दवाएं भी दी जाती हैं ।

यदि गर्भाशय में septum है, तो क्या किया जा सकता है ? :

septum गर्भाशय के बीच तंतुओं का एक अतिरिक्त फोल्ड होता है, जो गर्भाशय को विभक्त करता है | यह जन्मजात होता है, जो जन्म से ही वहां स्थित हो सकता है । यदि गर्भाशय में अन्य कोई असामान्यता नहीं है, तो इस septum को ऑपरेटिव हिस्ट्रोस्कोपी द्वारा काटकर निकाला जा सकता है । इसे जनरल अथवा स्पाइनल एनेस्थीसिया के साथ किया जा सकता है व आप उसी दिन घर जा सकते हैं । Septum को wire electrode के द्वारा, जिसे डॉक्टर ऑपरेटिव हिस्ट्रोस्कोप से अंदर डालते हैं, के द्वारा काटा जाता है ।

यदि गर्भाशय में fibroid है तो क्या किया जा सकता है ? :

डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कापी की जाँच में यदि गर्भाशय में fibroid  पाए जाते हैं तो कुछ fibroid को आपरेटिव हिस्ट्रोस्कोप द्वारा डाले गये wire loop electrode के द्वारा हटाया जा सकता है । यह लूप fibroids को हटाता है, फिर टुकड़ों को बाहर निकाला जाता है । इस तकनीक द्वारा केवल गर्भाशय की कैविटी में रहने वाले fibroids को ही हटाया जा सकता है ।

यदि गर्भाशय में Polyp है, तो क्या किया जा सकता है? :

Polyps गर्भाशय की परत में विकसित होने वाली टिशूज की अतिरिक्त संरचनायें हैं । इनके कारण अत्यधिक रक्तस्राव होता है । डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कापी के दौरान यदि गर्भाशय में ये पाए जाते हैं तो   इन्हें ऑपरेटिव हिस्ट्रोस्कोपी द्वारा निकालना आसान होता है ।

यदि कोई असामान्यता नहीं है व अत्यधिक रक्तस्राव है, तो क्या हो सकता है?:

कई स्त्रियों की जैसे उम्र बढ़ती है, उन्हें मासिक के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होता है । यदि दवाओं व हॉरमोन से यह रक्तस्राव नियंत्रित नहीं होता है, तो हिस्ट्रैक्टॉमी की आवश्यकता पड़ती है । एक प्रक्रिया हाल ही में विकसित हुई है, जिसके द्वारा गर्भाशय की परत को हिस्ट्रोस्कोपी द्वारा नष्ट करके निकाला जाता है । इस प्रक्रिया को endometrial ablation कहते हैं ।

डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कापी के अन्य विकल्प क्या हैं ? :

इसकी आवश्यकता लक्षण व परिस्थिति के आधार पर पड़ती है । गर्भाशय की जांच अल्ट्रासाउण्ड द्वारा भी की जा सकती है । इसके अतिरिक्त कुछ केस में डी. एण्ड सी. इस प्रक्रिया का विकल्प हो सकता है, जिसमें सर्विक्स को फैलाकर गर्भाशय में विकसित हुई असामान्य संरचना आदि को curette नामक उपकरण द्वारा बाहर निकाला जा सकता है, परन्तु डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कापी द्वारा गर्भाशय की जांच सबसे अधिक बारीकी से हो सकती है । गर्भाशय की जांच व उपचार के लिये यह एक श्रेष्ठ विधि है ।

हिस्ट्रोस्कोपी से क्या खतरा हो सकता है ? :

डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कोपी में खतरा कम होता है । इसमें एक सामान्य समस्या यह होती है कि गर्भाशय में छेद अथवा पंचर हो सकता है, परन्तु यह छेद स्वतः ही ठीक हो जाता है । इसके लिये सर्जरी आदि की आवश्यकता नहीं होती है । इस प्रक्रिया में यह जटिलता 100 में से 1 अथवा 2 केस में ही होती है ।इस प्रक्रिया से कुछ अन्य समस्यायें भी हो सकती हैं, जैसे सांस लेने में कठिनाई रक्त का थक्का जमना, शरीर का तापमान गिरना व एलर्जी आदि । इस सर्जरी की प्रक्रिया में एक जटिलता यह हो सकती है कि पेट में किसी अंग को क्षति पहुंच सकती है व रक्तस्राव हो सकता है ।

किन परिस्थितियों में डॉक्टर को दिखाना आवश्यक होता है :

यदि डाइग्नोस्टिक हिस्ट्रोस्कापी के बाद निम्न लक्षण नज़र आएँ तो डॉक्टर से संपर्क करें |

  • यदि 101° से अधिक बुखार हो ।
  • पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द हो ।
  • असामान्य स्राव हो रहा हो ।
  • अधिक रक्तस्राव हो रहा हो ।

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