डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी (Diagnostic laparoscopy (DL) or Telescopic test) in Hindi.

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी क्या है :

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी को Telescopic test के नाम से भी जाना जाता है | यह एक प्रक्रिया है, जिसमें डॉक्टर पेट के अंदर के अंगों व टिशुओं को देखने के लिये लैप्रोस्कोप का प्रयोग करते हैं । यह उपकरण अर्थात लैप्रोस्कोप एक पतली सी मैटल रॉड होती है, जिसमें लाइट व एक छोटा सा कैमरा लगा हुआ होता है ।

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी टेस्ट क्यों किया जाता है:

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी  नामक यह टेस्ट पेट में दर्द एवं उससे जुड़े रोगों की स्थिति जानने एवं उनके निदान के लिए किया जाता है | और यह टेस्ट करना तब जरुरी हो जाता है जब चिकित्सक को बिना चीरे वाली जांचों से रोग की स्थिति का जायजा नहीं हो पाता है | निम्न स्थितियों में लेप्रोस्कोपी का प्रयोग किया जा सकता है |

  • रोगी के चिकत्सकीय स्थिति की जांच के लिए एवं उनका उपचार के लिए |
  • पेट में किसी असमान्य चीज का पैदा होने के एहसास के कारण |
  • महिला के बांझपन का ईलाज करने के लिए |
  • पेट के कैंसर की स्थिति जानने के लिए |
  • पेट के अन्दुरुनी अंगों में चोट एवं घाव की जांच के लिए |
  • हर्निया का उपचार करने के लिए |
  • गर्भाशय, पित्ताशय, अंडाशय, अपेंडिक्स इत्यादि अंग निकालने के लिए |

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी का प्रयोग बांझपन के लिये कब किया जाता है ? :

फर्टिलिटी के लिये लैप्रोस्कोपी का प्रयोग तब किया जाता है, जब कोई स्त्री गर्भवती नहीं हो पाती है । इस प्रक्रिया के द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि क्या scar tissue, endometriosis, fibroid tumours आदि तो नहीं है अथवा गर्भाशय, डिम्बवाहिनियों में अथवा ओवरी में किसी प्रकार की असामान्यता तो नहीं है । यदि इस प्रकार की कोई कमी पायी जाती है, तो इसे ऑपरेटिव लैप्रोस्कोपी द्वारा ठीक किया जा सकता है । इसमें पेट के निचले हिस्से में लगभग 5mm का एक अन्य छेद किया जाता है, जिससे अन्य उपकरण को अंदर डाला जाता है । डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी का प्रयोग फर्टिलिटी ट्रीटमेन्ट के लिये पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है |

लैप्रोस्कोपी से पहले की तैयारी :

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी नामक यह एक छोटा सा ऑपरेशन होता है, जिसमें आपको एक दिन का समय लगता है । अतः एक दिन के लिये आपको, अपनी दिनचर्या के लिये किसी की सहायता की आवश्यकता पड़ती है व इसके पश्चात् विश्राम करना भी आवश्यक होता है । चूंकि आपको एनेस्थीसिया दिया जाता है, इसीलिये आपकी देखभाल के लिये भी किसी व्यक्ति का होना आवश्यक होता है । डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें । इस प्रक्रिया से पहले रात्रि में हल्का खाना खायें । मध्यरात्रि के बाद व प्रात:काल में इस प्रक्रिया से पूर्व कुछ न खायें । कॉफी, चाय आदि भी न पियें । ऑपरेशन से पहले अपना ब्लैडर खाली कर लें ।

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी के दौरान क्या होता है ? :

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी करने से पहले चिकित्सक द्वारा आपको जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है, जिससे आप बेहोश हो जाते हैं व लैप्रोस्कोपी के दौरान आपको दर्द का अनुभव नहीं होता है । आपके पेट की कैविटी में, जहां आपके पेट व पैल्विस के अधिकतर अंग स्थित होते हैं, उसे गैस अथवा फ्लूइड द्वारा पूरा फुला दिया जाता है, जिससे आपका पेट गुब्बारे जैसा दिखता है व डॉक्टर पेट के भीतर के अंगों को आसानी से देख सकते हैं। डॉक्टर आपकी नाभि के बिल्कुल नीचे एक छोटा सा कट लगाते हैं, जिससे लैप्रोस्कोप को पेट के अंदर डालते हैं । एक अन्य छोटा सा कट पेट के नीचे की ओर लगाते हैं, जिससे एक अन्य उपकरण अंदर डाला जाता है । लैप्रोस्कोप के द्वारा पेट के अंदर के अंगों व टिशूज को देखा जाता है । यदि अंदर कोई असामान्य संरचना पायी जाती है, तो उसे दूसरे उपकरण द्वारा या तो उसका सेम्पल ले लिया जाता है या फिर उसे वहां से निकाल दिया जाता है । और डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी पूर्ण होने के बाद इस सेम्पल को परीक्षण के लिये लैब में भेज दिया जाता है ।

लैप्रोस्कोपी के पश्चात् क्या होता है ? :

चूंकि आपको एनेस्थीसिया दिया जाता है, अत: इसके पश्चात् कुछ घण्टों तक आपको अस्पताल में रुकना पड़ता है । आपके कन्धों में दर्द रहता है, आपका पेट कुछ फूला हुआ सा लगता है व आंतों से संबंधित क्रियाओं में अंतर अनुभव होता है । चूंकि आप तुरंत पेशाब के लिये जाने में समर्थ नहीं होते हैं, अतः आपके पेशाब की नली डाल दी जाती है । इसके पश्चात् आपको वजन नहीं उठाना चाहिये । डॉक्टर से पूछ लें कि आप कितना वजन उठा सकते हैं । अपनी अन्य दिनचर्या के बारे में भी डॉक्टर की सलाह ले लें ।

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी के लाभ :

यह एक छोटा सा ऑपरेशन है, जिसके द्वारा डॉक्टर इनफर्टिलिटी या अन्य रोग के कारण को डाइग्नोस कर सकते हैं । आपके डॉक्टर लैप्रोस्कोपी के दौरान इनमें से कुछ कारणों का उपचार भी कर सकते हैं । इस प्रक्रिया के दौरान आपको अस्पताल में अन्य सर्जरी की अपेक्षा बहुत कम समय रुकना पड़ता है ।

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी से क्या खतरा हो सकता है?

  • कुछ खतरे जनरल एनेस्थीसिया से संबंधित होते हैं, इनके विषय में डॉक्टर से चर्चा करें ।
  • पेट में स्थित अंग, ग्रंथि, आंत व रक्तवाहिका आदि को क्षति पहुंच सकती है ।
  • पेट की परत में सूजन हो सकती है ।
  • आपको इन्फेक्शन व jDroko हो सकता है ।
  • इस प्रक्रिया के पश्चात् आपको दर्द हो सकता है।
  • आपको डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी प्रक्रिया के दौरान प्रयुक्त फ्लूइड से एलर्जी हो सकती है ।

 क्या लैप्रोस्कोपी के बाद सेक्स कर सकते हैं :

, यदि आपको डॉक्टर द्वारा कोई निर्देश इस संबंध में न दिया गया हो तो इस प्रक्रिया के लगभग तीन-चार दिन बाद आप सेक्स कर सकते हैं । यदि रोगी महिला है तो यदि उसे दर्द हो रहा है अथवा योनि से रक्तस्राव हो रहा है, तो ये लक्षण समाप्त होने के बाद ही सेक्स करना उचित होगा ।

लेप्रोस्कोपी के बाद डॉक्टर से कब संपर्क करें?

डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी  के बाद भी यदि रोगी में निम्न लक्षण उजागर होते हैं तो रोगी को तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए |

  • रोगी को 100 डिग्री फारेनहाइट से अधिक बुखार है ।
  • रोगी को बेहोशी आती है।
  • रोगी को मितली अथवा उल्टी आती है ।
  • रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है ।
  • रोगी को पेट का दर्द व सूजन बढ़ रही है ।

यह भी पढ़ें:

माइलोग्राम मेडिकल टेस्ट क्या है

लैरिंगोस्कोपी मेडिकल टेस्ट क्या है?

मैमोग्राम मेडिकल टेस्ट क्या है?

कोलनस्कोपी मेडिकल टेस्ट क्या है?

About Author:

HBG Health desk is a team of Experienced professionals holding various skills. They are expert to do research online and offline on health, beauty, wellness, and other components of health in Hindi.

One thought on “डाइग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी (Diagnostic laparoscopy (DL) or Telescopic test) in Hindi.

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *