Ectopic Pregnancy in Hindi, अस्थानिक गर्भावस्था कारण लक्षण ईलाज

भ्रूण जब गर्भाशय के अंदर विकसित न होकर किसी और स्थान में विकसित  होने लगता है तो इस स्थिति को Ectopic Pregnancy कहते हैं | या इसे दूसरे शब्दों में इस तरह से भी कहा जा सकता है ”जब निषेचित डिम्ब गर्भाशय के बाहर रह कर वृद्धि करता है, तो उसे अस्थानिक गर्भ या Ectopic Pregnancy कहते हैं  । अंडाशय से निकला हुआ अंडाणु फैलोपियन ट्यूब में घुस जाता है, जहाँ उसे पुरुष शुक्राणु द्वारा निषेचित होने का मौका मिलता है । यह निषेचित अंडाणु धीरे-धीरे विकसित होता जाता है और साथ-साथ फैलोपियन ट्यूब के भीतर स्थित सिलिया एवं फैलोपियन ट्यूब की मांसल गतिविधियों द्वारा लगातार गर्भाशय की ओर बढ़ता जाता है, जहाँ वह निषेचन के चौथे-पाँचवें दिन तक पहुँच जाता है । गर्भाशय में पहुँचने तक वह ब्लास्टोसिस्ट बन चुका होता है, जो गर्भाशय की अंदरूनी सतह (एंडोमेट्रियम) में निरोपित होकर आगे विकसित होता है । इस यात्रा में किसी तरह की बाधा होने पर यह भ्रूण एंडोमेट्रियम के पास न जाकर कहीं और आरोपित होकर अपना विकास करने लगता है ।

Ectopic Pregnancy

Ectopic Pregnancy के प्रकार:

Ectopic Pregnancy को शरीर के कौन से अंग में विकसित हो रही है के आधार पर निम्न प्रकारों में बांटा जा सकता है |

  • ट्यूबल (Tubal)
  • ओवैरियन (Ovarian)
  • इंटरस्टीशियल (Interstitial)
  • एब्डॉमिनल (Abdominal)
  • सर्वाइकल (Cervical

अक्सर देखा गया है की Ectopic Pregnancy में अधिकतर तौर पर भ्रूण का विकास Fallopian Tube में होते है | यानिकी ऐसी स्थिति में 95 प्रतिशत Ectopic Pregnancy   फैलोपियन ट्यूब  में होते हैं |

Ectopic Pregnancy के कारण:  

Ectopic Pregnancy के निम्नलिखित कारण हैं |

  • निषेचित डिम्ब की गति में रूकावट आने पर ।
  • डिम्ब वाहिनी में लम्बे समय से चल रहे संक्रमण से । यह संक्रमण गर्भपात, प्रसव, टी.बी., यौन रोग, डी. एंड सी. या गर्भाशय पर अन्य किसी ऑपरेशन के समय या अन्य कारणों से भी हो सकता है ।
  • डिम्ब वाहिनी की लम्बाई अधिक होने पर ।
  • डिम्ब वाहिनी में फाइब्रोइड या सिस्ट होने से ।
  • गर्भाशय में कॉपर-टी होने से ।
  • ऐसी महिलाएं जिनमे पहले Ectopic Pregnancy हो चुकी हो उनमें यह खतरा बढ़ जाता है |
  • बांझपन से ग्रसित महिलाओं में यदि गर्भधारण होता है तो वह Ectopic Pregnancy हो सकती है |
  • ऐसी 35-45 आयु वर्ग की महिलाएं जो धूम्रपान करती हों उनमे अस्थानिक गर्भवस्था की संभावना हो सकती है |
  • यदि किसी महिला ने पहले दवाइयां खाकर गर्भपात कराया हो तो दुबारा गर्भधारण करने पर Ectopic Pregnancy का खतरा बढ़ जाता है |

Ectopic Pregnancy के लक्षण:

  • यह अधिकतर 20-30 वर्ष की आयु में होता है ।
  • प्रायः पहले बच्चे के समय या काफी अंतर के बाद दूसरी बार गर्भवती होने पर, उनमें इनकी संभावना अधिक रहती है ।
  • अनार्तव काल बहुत छोटा 6-8 सप्ताह का होता है, जिसमें कभी-कभी महीने की तारीख पर खून का धब्बा भी दिखाई दे जाता है ।
  • पेट में तेज दर्द होता है । जो पहले निचले भाग में रहता है फिर धीरे-धीरे सारे पेट में फैल जाता है । योनि से रक्तस्राव प्रारम्भ हो जाता है । रक्तस्राव मात्रा में कम गहरे भूरे रंग का लगातार होता रहता है, जो मासिक स्राव की तरह जमता नहीं है ।
  • जी-घबराना, उल्टियां लगना, बेहोश होकर गिर जाना भी Ectopic Pregnancy का लक्षण है |
  • देखने में मरीज पीली और बीमार नजर आती है उसमें खून की कमी होने के लक्षण व चिन्ह दिखाई देते हैं ।
  • नाड़ी अल्प व उसकी गति तीव्र होती है ।
  • रक्तचाप कम हो जाता है ।
  • हाथ पैर ठंडे पड़ जाते हैं ।
  • पेट फूला हुआ व नीचे की ओर दबाने पर दर्द होता है ।
  • कभी-कभी नाभि के चारों ओर नीलापन दिखाई देता है ।
  • Ectopic Pregnancy में योनि से गहरे लाल रंग का चिपचिपा रक्तस्राव निकलता है ।
  • शरीर का तापमान सामान्य से ज्यादा मिलता है ।
  • परिस्पर्शन पर गर्भाशय थोड़ा बढ़ा हुआ व गर्भाशय ग्रीवा मुलायम होती है । किसी एक तरफ के फारनिक्स में बहुत अधिक बाद वेदना ।
  • मलाशय योनि कोष्ठ (Pauch of Douglos) में तरल भरा हुआ प्रतीत होता है । सुई से खिंचने पर इसमें रक्त निकलता है ।

Ectopic Pregnancy की जांच:

Ectopic Pregnancy से समबन्धित महिला की खून की जांच में सामने आता है की उसमे  हीमोग्लोबिन व लाल रक्त कणिकाओं की कमी हो रही है | इसके अलावा E.S.R. भी बढ़ा हुआ पाया जाता है | लेकिन इसकी सही पहचान के लिए खून में BHCG की मात्रा एवं एवं टी.वी.एस. (Vaginal Sonography) मुख्य टेस्ट हैं | हालांकि BHCG किसी भी प्रकार की गर्भवस्था में बढ़ता है लेकिन एक सामान्य गर्भवस्था में यह ज्यादा बढ़ता है जबकि Ectopic Pregnancy में कम | निदान के लिए खून में BHCG की मात्रा की जाँच 48 घंटों के अंतर्गत दो बार की जाती है । अगर दोबारा जाँच में यह मात्रा 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ी पाई गई, तो शायद भ्रूण अपने सही स्थान यानी गर्भाशय में है । अगर यह मात्रा नहीं बढ़ी या 60 प्रतिशत से कम बढ़ी, तो हो सकता है, समबन्धित महिला Ectopic Pregnancy से ग्रसित हो | T.V.S. (Vaginal Sonography) में गर्भ की पहचान साढे चार से पाँचवें सप्ताह तक हो जाती है । पाँचवें से छठे सप्ताह के भीतर अंडपीत थैली (Yolk sac) दिखने लगता है और साढे पाँच से छह सप्ताह में भ्रूण के हृदय का स्पंदन दिखने लगता है ।

Ectopic Pregnancy का ईलाज :

यद्यपि यदि समबन्धित महिला का ट्यूब फट गया हो तो इस Ectopic Pregnancy का ईलाज केवल ऑपरेशन द्वारा ही संभव है | लेकिन यदि ट्यूब फटने से पहले यह निश्चित पता लगा लिया जाता है की भ्रूण ट्यूब में है तो दवा द्वारा भी इसे नष्ट किया जा सकता है | इस स्थिति में Ectopic Pregnancy के ईलाज के लिए मिथोट्रेक्सेट नाम की दवा इसके दी जाती है, जो भ्रूण को विकसित होने से रोकता है और धीरे-धीरे भ्रूण खत्म हो जाता है, जिसमें एक महीना से भी अधिक समय लग सकता है ।यह दवा महिला को तभी डी जाती है जब ट्यूब फटा न हो और रक्तस्राव न हो रहा हो, सम्बंधित महिला दवाई लेने के लिए तैयार हो, इत्यादि |

क्रोनिक एक्टोपिक प्रेगनेंसी  (Chronic Ectopic Pregnancy) :

कभी-कभी लक्षणों की कमी से Chronic Ectopic Pregnancy का पता लगाना कठिन हो जाता है । क्योंकि

  • 25 प्रतिशत मरीजों में प्रेग्नेंसी टेस्ट नेगेटिव होता है ।
  • 20 प्रतिशत मरीजों में योनि से रक्तस्राव नहीं होता ।
  • 5 प्रतिशत में पहले रक्तस्राव होकर फिर पेट दर्द होता है ।
  • 15 प्रतिशत में मरीज देखने से सामान्य लगता है ।
  • परिस्पर्शन पर दोनों तरफ गांठ सी महसूस होती है ।

Chronic Ectopic Pregnancy के लिए जांच :

  • हीमोग्लोबिन
  • ब्लड ग्रुप
  • ई.एस.आर.
  • 18 नं. की सुई को मलाशय योनि कोष्ठ में डालने से रक्त निकलता है ।
  • लेपरोस्कोपी
  • अल्ट्रासाउण्ड

सावधानियां एवं ईलाज :

यदि रोगी Chronic Ectopic Pregnancy से ग्रसित है तो निम्न सावधानियां अपनाई जा सकती हैं |

अति शीघ्र निदान करके रोगी को हस्पताल में भेज देना चाहिए अन्यथा  मरीज की मौत भी हो सकती है ।

  • स्तब्धता को दूर करें ।
  • रोगी को बिस्तर पर सीधा लिटाएं ।
  • चिकित्सक द्वारा रोगी को इंजे. मार्फिन 15 मिग्रा. मांसपेशी में दिया जा सकता है ।
  • 0 5 प्रतिशत डेक्सट्रोज ड्रिप शुरू किया जा सकता है ।
  • Chronic Ectopic Pregnancy का ईलाज के लिए ब्लड ट्रांसफ्युजन की व्यवस्था करनी पड़ती है ।
  • लेपरोटमी ऑपरेशन की व्यवस्था करें ।
  • ज्यादा रक्तस्राव होने पर प्लाज्मा तीव्रता से चढ़ाएं ।

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