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एण्डोमेट्रियोसिस

एण्डोमेट्रियोसिस के कारण लक्षण निदान एवं ईलाज

एण्डोमेट्रियोसिस  एक ऐसी बीमारी है, जो स्त्रियों की इनफर्टिलिटी का कारण बन जाती है । यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भाशय की परत अथवा एण्डोमेट्रियम के टिशू गर्भाशय के बाहर विकसित हो जाते हैं व पेट की कैविटी में अन्य अंगों से जुड़ जाते हैं । यह एक ऐसी बीमारी है, जो बढ़ती ही जाती है । व गंभीर रूप धारण कर सकती है । उपचार के बाद यह वापस फिर से भी हो सकती है । यह बीमारी होने से मासिक में बहुत दर्द होता है, असामान्य रक्तस्राव होता है तथा संभोग के समय व उसके बाद दर्द होता है । एण्डोमेट्रियोसिस बीमारी स्त्री के जीवन को कई तरह से प्रभावित करती है जैसे उसके कार्य करने की क्षमता, बच्चे को जन्म देने की क्षमता, जीवनसाथी के साथ संबंध इत्यादि को प्रभावित कर सकती है ।

एण्डोमेट्रियोसिस

एण्डोमेट्रियोसिस के लक्षण (Symptoms of Endometriosis in Hindi) :

जब ये टिशू बढ़ते हैं, तो ये ट्यूमर कहलाते हैं । लेकिन ये आम तौर पर कैंसर नहीं होते हैं । कभी-कभी ये कैंसर से संबंधित हो जाते हैं । इनके विकसित होने से सम्बंधित महिला में निम्न लक्षण प्रकट हो सकते हैं |

  • स्त्री गर्भवती नहीं हो पाती है ।
  • मासिक में बहुत दर्द होता है ।
  • मासिक बहुत अधिक होता है ।
  • संभोग के समय व बाद में दर्द होता है ।
  • आंतों में दर्द होता है ।
  • मासिक के समय पेशाब में दर्द होता है ।
  • दो मासिक चक्र के बीच में भी स्पॉटिंग व रक्तस्राव होता है ।
  • पैल्विस व पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है ।

एण्डोमेट्रियोसिस की जांच या निदान :

यदि आपको ऐसा लगता है कि आपको एण्डोमेट्रियोसिस नामक यह बीमारी है, तो अपने डॉक्टर को बतायें । इसके लिये कई टेस्ट हैं, जिनसे इस बीमारी के होने की जानकारी प्राप्त की जा सकती है ।

  • कई बार डॉक्टर imaging tests करते हैं, जिसके द्वारा शरीर के अंदरूनी भागों की पिक्चर ली जाती है । इससे वह भाग दिखाई दे जाता है, जहां एण्डोमेट्रियोसिस विकसित हुआ है । इन imaging tests में से अल्ट्रासाउण्डmagnetic resonance imaging (MRI) का प्रयोग सर्वाधिक किया जाता है, जिनमें मैगनेट रेडियो तरंगों ध्वनि तरंगों द्वारा इमेज बनायी जाती है ।
  • एण्डोमेट्रियोसिस की सबसे सही जानकारी लैप्रोस्कोपी द्वारा मिलती है । इस ऑपरेशन प्रक्रिया द्वारा डॉक्टर आपके अंगों को व एण्डोमेट्रियम के विकसित हुए टिशुओं को देख सकते हैं । वह यह भी देख सकते हैं कि यह किन अंगों में, कहां तक व किस आकार में विकसित हुए हैं ।
  • इस बीमारी की जानकारी Blood test CA-125 द्वारा भी की जा सकती है । यह टेस्ट रक्त में कुछ ऐसे प्रोटीन की जांच करता है, जो एण्डोमेट्रियोसिस युक्त स्त्रियों के रक्त में पाये जाते हैं, परन्तु यह टेस्ट बीमारी के बढ़ जाने पर ही उसका निदान कर सकता है । प्रारंभिक अवस्था में इस टेस्ट द्वारा जांच नहीं की जा सकती है ।

एण्डोमेट्रियोसिस का कारण (Cause of Endometriosis in Hindi) :

इसका कारण अभी तक ज्ञात नहीं हो सका है कि एण्डोमेट्रियोसिस क्यों होता है । इसका उपचार भी कठिन है, क्योंकि इस बीमारी होने का पता भी नहीं चल पाता है । इसके बारे में एक मत यह है कि मासिक के समय एण्डोमेट्रियम के कछ टिश्यू fallopian tubes से बाहर पेट की ओर निकल जाते हैं व वहां विकसित होने लगते हैं । शोधकर्ता immune system को भी इस बीमारी का कारण मानते हैं । अन्य शोधकर्ता इसका कारण endocrine system को मानते हैं । कुछ शोधकर्ता इसे जैनेटिक भी मानते हैं ।

एण्डोमेट्रियोसिस का ईलाज या उपचार (Treatment of Endometriosis in Hindi):

एण्डोमेट्रियोसिस बीमारी को रोकना संभव नहीं होता है, परंतु इसके कुछ उपचार अर्थात ईलाज अवश्य हैं, जिनके अपने फायदे व नुकसान हैं । डॉक्टर की सलाह से यह निर्णय लिया जा सकता है कि कौन सी विधि श्रेष्ठ है?

दर्द निवारक दवाओं से ईलाज :

कुछ स्त्रियों को, जिनमें एण्डोमेट्रियोसिस बीमारी प्रारंभिक अवस्था में होती है, केवल दर्द निवारक दवाएं दी जा सकती हैं । यदि वे मां बनना चाहती हैं, तो उनकी आयु व दर्द की मात्रा को देखते हुए डॉक्टर की यही सलाह रहती है कि वे छ: माह से एक वर्ष तक बिना गर्भनिरोधक का प्रयोग किये सेक्स करें, यदि तब भी वह गर्भधारण नहीं करती हैं, तभी उपचार की आवश्यकता होती है ।

एण्डोमेट्रियोसिस का हारमोन द्वारा उपचार :

जो स्त्री मां बनना नहीं चाहती है । और केवल एण्डोमेट्रियोसिस बीमारी का उपचार कराना चाहती है, उनको डॉक्टर हारमोन उपचार देते हैं । यदि ये बीमारी कम विकसित हुई होती है, तो यह उपचार काफी प्रभावी होता है । इसके लिये : estrogen व progestin (गर्भनिरोधक गोलियां) प्रोजेस्टिन, GnRH agonists (gonadotropin releasing hormone), Danocrine a Medroxyprogesterone आदि हारमोन का प्रयोग किया जाता है |

गर्भनिरोधक गोलियों से ईलाज:

गर्भनिरोधक गोलियां प्रतिमाह बनने वाले endometrial tissue के निर्माण को नियंत्रित करती हैं । यदि ये गोलियां लंबे समय तक ली जायें, तो इनसे एण्डोमेट्रियोसिस का दर्द भी ठीक हो सकता है । कई स्त्रियां जो ये दवाएं लेती हैं, उन्हें मासिक कम व थोड़े समय के लिये होता है ।

Gonadotropin-releasing hormone (Gn-RH) agonists and antagonists:

यह ड्रग ovarian-stimulating hormones का उत्पादन रोक देता है । यह मासिक को रोकता है व एस्ट्रोजिन के स्तर को कम करता है । यह कृत्रिम रजोनिवृत्ति की स्थिति पैदा करता है, जिससे कई बार हानि भी हो सकती है । इसके साइड इफैक्ट को कम करने के लिये इस ड्रग के साथ थोड़ी मात्रा में एस्ट्रोजिन ली जा सकती है ।

Danazol (Danocrine) :

यह ड्रग भी ovarian-stimulating hormones के उत्पादन को रोक देता है । यह मासिक को रोकता है । यह एण्डोमेट्रियम को भी विकसित होने से रोकता है । इसका प्रयोग करने से चेहरे पर मुहांसे व बाल उग आते हैं । अतः इसके प्रयोग से बचना चाहिये ।

 Medroxyprogesterone (Depo-provera) :

यह इन्जेक्शन के रूप में मिलता है । यह मासिक को रोक देता है व एण्डोमेट्रियोसिस के लक्षणों से आराम देता है । इसके साइड इफेक्ट- वजन बढ़ना व मूड का depress रहना है ।

सर्जरी से ईलाज :

उन स्त्रियों के लिये जिनमें एण्डोमेट्रियोसिस बहुत अधिक विकसित हो गया होता है व तेज दर्द होता है, उनके लिये सर्जरी लाभदायक होती है । डॉक्टर निम्नलिखित में से एक प्रक्रिया की सलाह दे सकते हैं |

लैप्रोस्कोपी :

इसका प्रयोग बीमारी के निदान के लिये किया जाता है, परन्तु साथ ही उपचार भी किया जा सकता है | यदि डॉक्टर इस दौरान सर्जरी द्वारा उपचार भी करते हैं, तो उन्हें पेट के निचले हिस्से में दो अतिरिक्त कट लगाने पड़ते हैं, जिनके द्वारा वे लेजर व छोटे सर्जिकल उपकरणों को पेट में डाल सकते हैं । फिर वे growths को हटाते हैं । उन्हें अधिक ताप द्वारा नष्ट कर देते हैं व रक्तवाहिनियों को बिना टांके लगाये सील कर देते हैं । इस प्रक्रिया का उददेश्य यही होता है कि स्वस्थ टिशू को हानि पहुंचाये बिना एण्डोमेट्रियोसिस का उपचार किया जा सके । बड़ी सर्जरी की अपेक्षा इसमें रिकवरी जल्दी होती है ।

लैप्रोटोमी :

यह एण्डोमेट्रियोसिस का अंतिम उपचार होता है, क्योंकि यह बड़ी सर्जरी होती है । इसमें डॉक्टर या तो एण्डोमैट्रियोसिस निकाल देते हैं अथवा गर्भाशय ही निकाल देते हैं । जिसे hysterectomy कहते हैं । Hysterectomy के दौरान डॉक्टर ओवरी व fallopian tubes को भी निकाल सकते हैं । इस सर्जरी के बाद भी यह निश्चित नहीं होता है कि यह बीमारी वापस नहीं आयेगी अथवा दर्द ठीक हो जायेगा ।

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