Fistula Symptoms Cause Treatment – भगंदर के लक्षण कारण उपचार |

सामान्य बोलचाल की भाषा में भगन्दर को Fistula कहते हैं, यह एक प्रकार का ऐसा रोग है या यूँ कहें की भगन्दर एक प्रकार का फोड़ा होता है जो आस पास के मांस को गलाकर एक सुरंग की तरह रास्ता बना लेता है | इस सुरंग (टनल) का एक किनारा मलद्वार के पास की चमड़ी पर खुलता है तथा दूसरा गुदा के अंदर होता है । इन दोनों किनारों के बीच का रास्ता कभी खुल जाता है तो कभी बंद हो जाता है, मेडिकल भाषा में इसे Fistula in Ano कहा जाता है ।fistula-in-ano-bhagandar

 

Symptoms of Fistula (भगन्दर के लक्षण):

Fistula या भगन्दर के कुछ मुख्य लक्षणों की लिस्ट इस प्रकार से है |

  • रोगी को मलद्वार के पास एक सुराख में से मवाद या खून या फिर पतले पानी निकलने का सा एहसास हो सकता है |
  • शुरूआती दौर में प्राय: इस मवाद (रेशा) या खून की मात्रा बेहद कम होती है इसलिए इससे अंदर के वस्त्रों पर केवल दाग सा ही लगता है ।
  • धीरे-धीरे इसमें से रिसाव बढ़ता जाता है । इसके अतिरिक्त खुजली, बेचैनी, मामूली दर्द तथा स्राव अधिक बढ़ने पर बुखार भी आ सकता है ।
  • Fistula या भगन्दर नामक इस रोग के ज्यादा बढ़ जाने पर इस सुराख में से मल का कुछ हिस्सा भी अपने आप (रोगी के नियंत्रण/इच्छा के बिना) निकल जाता है ।

 

Cause of fistula (भगन्दर के कारण):

भगन्दर या Fistula होने के मुख्य कारणों में निम्न कारण सम्मिलित हैं |

  • भगंदर आमतौर पर पेरीऐनल एरिया अर्थात गुदाक्षेत्र में संक्रमण की वजह से ही होता है ।
  • ऐसे व्यक्ति जो इस गुदाक्षेत्र की सफाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते उनमें इस रोग के होने की संभावना अधिक होती है ।
  • मधुमेह के रोगियों में भगंदर अर्थात Fistula में कई प्रकार की पेचीदा समस्याएं देखने को मिलती है ।
  • यह रोग अलसरेटिव कोलाईटिस तथा crohn’s disease के रोगियों में भी ज्यादा पाया जाता है।
  • कुछ स्थितियों में टीबी के जीवाणु भी भगंदर का फोड़ा बनाने में सहायक होते हैं।
  • फंगल संक्रमण से भी भगंदर अर्थात Fistula पेचीदा रूप ले लेता है ।
  • लम्बे समय तक इलाज न होने पर Complicated Fistula के कुछ स्थितियों में कैंसर होने की भी संभावना होती है।

Myth and Facts about Fistula in Hindi (भगन्दर के बारे में तथ्य एवं भ्रांतियां):

भगंदर अर्थात Fistula के बारे में सामान्य जन मानस में कुछ भ्रांतिया या मिथ्या धारणाएं हैं इन्ही सब बातों के मद्देनज़र आज हम इन भ्रांतियों एवं तथ्यों के बारे में वार्तालाप करेंगे |

Myth: Fistula अर्थात भगन्दर एक गुप्त रोग है इसलिए इसे जहां तक हो सके छुपाएं रखना चाहिए?

तथ्य: तथ्य कहता है की उपर्युक्त कही गई बात सत्य नहीं है, यह एक आम इन्फैक्शन है । इसका गुप्त रोग या यौन रोगों से कोई संबंध नहीं है ।

Myth: इस भ्रान्ति के अनुसार आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में इसका कोई पक्का (स्थायी) इलाज अभी तक नहीं है?

तथ्य: यह बात भी तथ्यों से परे हैं, सच्चाई तो यह है कि मार्डन सर्जरी ही इसका एक मात्र स्थायी एवं अच्छी सफलता की दर वाला इलाज है ।

Myth: कुछ समय पश्चात यह बिना आपरेशन के ईलाजों द्वारा भी ठीक किया जा सकता है |

तथ्य: बिना ऑपरेशन वाले इलाज कुछ समय के लिए आराम तो दे सकते हैं, लेकिन पूर्ण आराम नहीं है । जैसा की हम सबको विदित है की लक्षणों का दब जाना रोग का इलाज नहीं है, यदि स्राव या मवाद कुछ दिन के लिए दवाईयों या अन्य विधि से बंद हो भी जाए तो ऐसा संभव नहीं है कि सुरंग जैसा रास्ता (Tract) अपने आप बंद हो जाएगा या क्षतिग्रस्त (Necrosed Tissues) की जगह नए उतक अपने आप बन जायेंगे ऐसा संभव नहीं है । जब तक क्षतिग्रस्त ऊतक (गला हुआ मांस) निकलेगा नहीं तब तक नया तथा स्वस्थ ऊतक उसकी जगह नहीं आ सकता है ।

Myth: यह रोग अर्थात Fistula आपरेशन करवाने के बाद दुबारा हो जाता है?

तथ्य: यह बात सभी रोगियों पर लागू नहीं होती, भगंदर का दोबारा होना या न होना इस तथ्य पर निर्भर करता है कि शुरू में रोग का कारण क्या था, क्या उस कारण का भी पूरा इलाज किया गया जैसे कि टीबी की वजह से निर्मित हुआ Fistula । दूसरा यदि रोगी को कोई अन्य बीमारी भी साथ में है जोकि संक्रमण को बढ़ावा देती है जैसे कि मधुमेह (डायबिटीज) । Fistula अर्थात भगन्दर के पूर्ण ईलाज के लिए मधुमेह का लगातार नियंत्रण अत्यंत जरूरी है । तीसरा, यदि भगंदर अपने उच्चतम स्तर पर पहुचंह चूका हो तो इस आपरेशन का परिणाम ज्यादा अच्छा नहीं होता, यह बात fistula से ग्रसित रोगी को संबंधित सर्जन से अच्छी प्रकार से समझ लेनी चाहिए । चौथा, रोगी को भगन्दर के आपरेशन के बाद भी सर्जन के निर्देशानुसार परहेज, पट्टी, सफाई व अन्य सभी रख-रखाव में बिलकुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए तभी आपरेशन की सफलता अधिक होगी ।

Myth: इस आपरेशन के बाद मलद्वार का नियंत्रण खत्म हो जाता है?

तथ्य: उपर्युक्त बात भी तथ्यों से कोसों दूर है कुछ अपवादों को छोड़कर, मलद्वार का नियंत्रण इस बात पर निर्भर करता है कि Fistula Tract (सुरंग का रास्ता), नियंत्रण करने वाले हिस्से को क्रास कर रहा है या नहीं । यदि Tract इस को पहले ही क्रास कर रहा है तो कट्रोल का कुछ हिस्सा बीमारी ने पहले ही खत्म कर दिया है, तो उसमें आपरेशन को क्यों दोष दिया जाए ।

फिस्टुला निदान एवं जांच :

जब किसी व्यक्ति में उपर्युक्त बताये गए लक्षण दिखाई दें तो उस व्यक्ति को सर्वप्रथम General Surgeon को दिखाकर इस बारे में उनकी सलाह लेनी चाहिए | वैसे रोगी को चाहिए की वह खासतौर से ऐसे सजींकल स्पेशलिस्ट से जो मलद्वार के रोगी के इलाज में विशेष रूचि रखता है से संपर्क करे | प्राय: सभी स्थितियों में Fistula नामक रोग  का निदान रोगी के मलद्वार क्षेत्र तथा गुदा के अंदर के निरीक्षण एवं proctoscopy से किया जा सकता है । इसके अलावा कुछ परिस्थतियों में भगंदर की गहराई का पता लगाने के लिए रंगीन एक्सरे fistulagram करने की जरूरत पड़ती है। इससे भगंदर के स्तर यानि की निम्न स्तर या उच्च स्तर का पता लगाया जा सकता है |

Treatment of Fistula in Hindi (भगन्दर का उपचार):

आधुनिक चिकित्सा पद्धति में भगन्दर अर्थात फिस्टुला का पूर्ण इलाज आपरेशन द्वारा ही संभव है । इस प्रक्रिया अर्थात आपरेशन में सुरंग जैसे रास्तों में से गले हुए मांस ऊतकों को काट कर अलग कर दिया जाता है । इस आपरेशन को Fistulectomy का नाम दिया गया है । इसके बाद बनने वाले घाव को भरने में आमतौर पर काफी समय लगता है। अकेली दवाएं इस रोग में कारगर नहीं होती हैं । बिना आपरेशन के अन्य विधियों से भी कुछ खास कामयाबी इस रोग को ठीक करने में नहीं मिलती है । इसलिए जब भी भगंदर के आपरेशन की सलाह सर्जन द्वारा दी जाए इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए तथा जितनी जल्दी हो सके आपरेशन द्वारा इलाज कराने का प्लान बना लेना चाहिए । देरी करने में पेचीदीगियां (Complications) बढ़ती हैं तथा ज्यादा देर करने में आपरेशन की सफलता की दर भी घटती जाती है ।

फिस्टुला का दवाईयों द्वारा इलाज:

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की भगन्दर यानिकी Fistula का पूर्ण रूप से ईलाज केवल ऑपरेशन द्वारा ही संभव है लेकिन नीचे दी गई दवाइयां रोगी को भगन्दर के लक्षणों से कुछ राहत दिलाने में अवश्य मदद कर सकती हैं | दवाईयां भगंदर में संक्रमण को कम कर सकती हैं इसके लिए चिकित्सक द्वारा विभिन्न  Antibiotics जैसे Sporidex Cap. (500) दिन में तीन से चार बार या Offin (200) दिन में दो बार इत्यादि लेने की सलाह दी जा सकती है । इन सबसे केवल रोगी को लक्षणों में कुछ राहत ही मिलेगी क्योंकि यह कोई पूर्ण इलाज नहीं है | इसके अलावा दर्द कम करने के लिए चिकित्सक द्वारा रोगी को कुछ दर्द निवारक दवाइयां जैसे Nimuslide Tab एक दिन में दो बार या फिर  Tab.  Aetrafeam लेने के लिए दी जा सकती है । अगर आपरेशन के बाद रोगी के ऊतकों को जांच पर (Biopsy Report) T.B. के संक्रमण का पता चलता है, तब रोगी को एंटी टीबी दवाईयां जैसे Rifampicin, isoniazid, Pyrizinamide इत्यादि चिकित्सक की देखरेख में, चिकित्सक द्वारा बताई गई मात्रा में लेनी होंगी इसमें कुछ महीनो से लेकर एक वर्ष तक का समय लग सकता है |

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कृपया ध्यान दें: भगंदर अर्थात Fistula शुरू की अवस्था में लगभग पूर्ण रूप से ठीक होने वाला रोग है, बशर्त की अच्छे सजींकल विशेषज्ञ की राय लेकर ऐसे सर्जन से आपरेशन करवाएं जो मलद्वार रोगों के इलाज में विशेष Knowledge रखता हो, यदि किसी एंटीबायोटिक दवाओं से यह रोग दब रहा हो तो उस दब जाने को इलाज होना नहीं समझना चाहिए। भगंदर अर्थात Fistula में लापरवाही करना जानलेवा भी साबित हो सकता है।

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